Plant Based Meat Benefits: प्लांट बेस्ट मीट क्या है? जानें इसके सेवन करने फायदे

Plant Based Meat Benefits: प्लांट बेस्ट मीट क्या है? जानें इसके सेवन करने फायदे


Plant Based Meat: क्या आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं? लेकिन स्वास्थ्य की वजह से इसे खाना नहीं चाहते हैं तो प्लांट बेस्ट मीट को अपने आहार में शामिल कर लें. इस औषधि में मांस आधारित मांस को प्लांट-बेस्ट मीट, शाकाहारी मीट या वनस्पति आधारित मांस भी कहा जाता है. यह पौधों से प्राप्त एक ऐसा भोजन है जो दिखने, स्वाद और मजबूती में पशु-आधारित मांस के समान होता है. जो कि यूक्रेन की कंपनी द्वारा बनाए गए अप्रामाणिक सामग्री से बनाया गया है.

प्लांट बेस्ड मीट क्या है?

प्लांट में बेस्ट मीट वेजीटेबल पाए जाते हैं, इसे बनाने के लिए आर्टिफिशियल कलर्स और एडिड प्रिजरवेटिव लगाए जाते हैं, जिससे यह मांस जैसा दिखता है. ये प्लांट बेस्ट मीट सब्जियां और अनाज से बनाया जाता है. जो दिखने और स्वाद में बिल्कुल असली जैसा लगता है. 

प्लांट बेस्ड मीट कैसे बनता है?

यह पौधों से प्राप्त अवयव बनाया गया है. जो स्वाद और फर्म में मांस जैसा दिखता है. इसे बनाने के लिए फलियां, दाल, किनोवा, नारियल का तेल, सोयाबीन, मटर, चुकंदर का रस और अन्य पोषक तत्वों से प्राप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है. इन सभी को एक साथ, विशेष तकनीशियनों का उपयोग करके, मांस जैसा दिखने वाला, चखने वाला और महसूस होने वाला उत्पाद बनाया जाता है. इसमें आम तौर पर रंग स्वाद और मजबूती को बढ़ाने के लिए एडिटिव्स भी शामिल हो सकते हैं.

यह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो सकता है, क्योंकि आम तौर पर यह मांस की तुलना में कम कैलोरी, सैचुरेटेड फैट और ऑक्सालिक वाला होता है. यह स्वादिष्ट और प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत भी है, जो हृदय रोग, वजन प्रबंधन, मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर के खतरों को कम करने में मदद कर सकता है. 

प्लांट बेस्ट मीट तौर पर मांस की तुलना में अधिक स्वस्थ होता है, फिर भी कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व और कम वसा अधिक हो सकता है. उपचार के आधार पर मांस सूची में पशु मांस की तुलना में कम विटामिन बी 12, ओमेगा-3 फैटी एसिड और अधिक चीनी की मात्रा बढ़ सकती है. जबकि, कुछ लोगों को पौधा आधारित मांस में इस्तेमाल किए जाने वाले से एलर्जी हो सकती है.

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Yoga News: योगासन करते समय क्यों रहना चाहिए खाली पेट? इसके हैं फायदे ही फायदे

Yoga News: योगासन करते समय क्यों रहना चाहिए खाली पेट? इसके हैं फायदे ही फायदे


Yoga: सुबह योग करने की सलाह तो हम अक्सर सुनते हैं, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि योग के समय पेट खाली क्यों होना चाहिए? एक्सपर्ट का मानना है कि जब हम खाली पेट योग करते हैं तो इसका असर शरीर और मन दोनों पर गहराई से होता है. इससे न सिर्फ शरीर में ताजगी और फुर्ती आती है, बल्कि मन भी शांत और एकाग्र होता है. कुल मिलाकर योग का असली फायदा तभी मिलता है, जब पेट हल्का और शरीर तैयार हो.

योगा ट्रेनर कविता अरोड़ा बताती हैं कि जब हम भोजन करने के बाद योग करते हैं तो शरीर पर अनचाहा दबाव पड़ता है. खासकर पेट पर ज्यादा खिंचाव आता है, जिससे खाना वापस ऊपर की ओर आ सकता है और अपच, गैस, एसिडिटी या खट्टी डकार जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

भोजन करने के बाद शरीर की अधिकतर ऊर्जा पाचन क्रिया में लगती है. ऐसे में अगर हम योग करना शुरू कर दें तो न तो खाना ठीक से पच पाता है और न ही योग का फायदा मिलता है. उल्टा शरीर थका हुआ और भारी महसूस करने लगता है. इससे योग की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.

लचीलापन और एकाग्रता में आती है कमी

जब हम खाना खाते हैं, तो शरीर की ऊर्जा पाचन में लग जाती है, जिससे योग करते समय लचीलापन और एकाग्रता में कमी आ सकती है. लेकिन खाली पेट योग करने से पूरी ऊर्जा आसनों और प्राणायाम में लगती है, जिससे रक्त संचार अच्छा होता है और शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है.

वैज्ञानिक भी मानते हैं खाली पेट योग के फायदे

विज्ञान भी इस बात को मानता है कि खाली पेट योग करना ज्यादा फायदेमंद है. खाना खाने के बाद शरीर का रक्त प्रवाह पाचन अंगों की ओर बढ़ जाता है, लेकिन योग करते समय शरीर के अलग-अलग हिस्सों को ऑक्सीजन और ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में योग का प्रभाव कम हो जाता है.

कब करें योग? जानिए सही समय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाना खाने के तुरंत बाद योग नहीं करना चाहिए, लेकिन वज्रासन को छोड़कर. भोजन के बाद 5 से 10 मिनट वज्रासन करना पाचन के लिए फायदेमंद होता है. बाकी योगासनों के लिए कम से कम 3 से साढ़े 3 घंटे का अंतर जरूरी होता है. उदाहरण के लिए, अगर आपने दोपहर 2 बजे खाना खाया है, तो शाम 5 या 5:30 बजे योग करना सही रहेगा. इससे न पाचन प्रभावित होगा और न ही योग के फायदों में कमी आएगी.

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Health News: सावधान! महिलाओं में सबसे ज्यादा होती हैं ये बीमारियां, जानकर हो जाएंगे हैरान

Health News: सावधान! महिलाओं में सबसे ज्यादा होती हैं ये बीमारियां, जानकर हो जाएंगे हैरान


Women Health News: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर महिलाएं अपने ऊपर ध्यान ही नहीं दे पाती हैं. जिसकी वजह से उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. फिर ये छोटी छोटी बीमारी धीरे धीरे बड़ी बीमारी का रूप ले लेती हैं. ऐसे में महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत है. जिससे वो बड़ी बीमारियों का शिकार होने से बच जायें. ऐसे में चलिए जानते हैं कि महिलाओं में किस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा रहता है?

महिलाओं में होने वाली बीमारियां…

  • ब्रेस्ट कैंसर – यह महिलाओं में होने वाली सबसे आम बीमारी बन चुकी है. WHO के अनुसार, पिछले सालों में लगभग 6 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत हो चुकी है. यह कैंसर स्तन के टिशू में होता है. ब्रेस्ट में बढ़ने वाली सेल्स जो ट्यूमर का रूप ले लेती हैं. समय पर इलाज करवाने पर यह ठीक भी हो सकता है.
  • सर्वाइकल कैंसर- यह भी महिलाओं में होने वाला आम कैंसर है. यह ऐसा कैंसर है जो सर्विक्स की परत में बढ़ता है. यह महिलाओं में एचपीवी की वजह से होता है. इससे लगभग 2022 में 3 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. 
  • गठिया- महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ गठिया की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है. इस बीमारी के 100 से ज्यादा प्रकार हैं. यह बीमारी जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न की वजह से होता है. 
  • एनीमिया- WHO के अनुसार,  एनीमिया महिलाओं में होने वाली सबसे ज्यादा है. यह तब होगा है जब शरीर के अंगों को ऑक्सीजन ले जाने में सही मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं होता है. अगर समय पर इसका इलाज न कराया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है.

महिलाएं इन बीमारियों को अनदेखा कर देख हैं. जिससे ये बीमारियां ज्यादा खतरनाक हो जाती हैं. हम सब को इन बीमारियों के प्रति जागरूक करना चाहिए. जिससे हमारे समाज में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं को बचाया जा सकें.

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दिमाग-फेफड़ों और दिल में हो सकता है माइक्रोप्लास्टिक, जानें कैसे करते हैं स्वास्थ्य को प्रभावित

दिमाग-फेफड़ों और दिल में हो सकता है माइक्रोप्लास्टिक, जानें कैसे करते हैं स्वास्थ्य को प्रभावित


छोटे बच्चे के दिमाग, फेफड़ों और दिल में माइक्रोप्लास्टिक का मौजूद होना धीरे-धीरे चिंता का विषय बनती जा रही है. एक अध्ययन के अनुसार पाया गया कि माइक्रोप्लास्टिक बच्चे के जन्म से पहले ही उसमें आ जाते हैं. एक पत्रिका में देखा गया कि प्रेग्नेंट चूहे माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आकर सांस के जरिए ये कण उनके अंदर गए. बाद में ये कण उनके बच्चों में भी पाए गए. इस शोध से पता चलता है कि माइक्रोप्लास्टिक बच्चे में जन्म से पहले भी आ जाते हैं. 

माइक्रोप्लास्टिक कैसे करते हैं स्वास्थ्य को प्रभावित

शोध से पता चलता है कि प्रेग्नेंट महिलाओं में माइक्रोप्लास्टिक प्लेसेंटा से होकर भ्रूण को प्रभावित कर सकता है. जिससे यह सीधे बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के खतरे में डाल सकता है. ये बच्चे के दिमाग, फेफड़ों और दिल में जमा हो जाते हैं, जो कई सारी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है. इनका आकार 5 मिलीमीटर से भी छोटा होता है. इस विषय पर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रेग्नेंट महिलाओं में मेडिकल डिवाइसेस के इस्तेमाल से भी हो सकता है. यह शरीर में खाना, पानी, हवा के जरिए जाता है. माइक्रोप्लास्टिक दिमाग और ब्लड के बीच में रुकावट पैदा करता है. जिससे ब्लड सर्कुलेशन काफी प्रभावित होता है.  इसके कण लंबे समय तक शरीर में होने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं-

कैंसर होने का खतरा- माइक्रोप्लास्टिक के कण छोटे-छोटे होते हैं. लंबे समय तक शरीर में रहने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे शरीर की सेल्स को नुकसान पहुंचता है. छोटे बच्चों में माइक्रोप्लास्टिक के कण धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करते हैं. 

सूजन की समस्या- शोध में पाया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक से शरीर में सूजन और अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. साथ ही यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी नुकसान पहुंचता है. माइक्रोप्लास्टिक शरीर में ROS को रिलीज करता है, जिससे सूजन और सेल्स प्रभावित होती हैं. 

हार्मोन्स का संतुलित न होना-  माइक्रोप्लास्टिक ऐसे कैमिकल्स पाये जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म, बच्चों की वृद्धि में रुकावट लाते हैं. इन कैमिकल्स को एंडोक्राइन डिसरप्टर के नाम से भी जाना जाता है. 

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ज्यादा कॉफी पीने से क्या वाकई फर्टिलिटी पर पड़ता है असर? जान लीजिए क्या है इसका सच

ज्यादा कॉफी पीने से क्या वाकई फर्टिलिटी पर पड़ता है असर? जान लीजिए क्या है इसका सच


आजकल लोगों के दिन की शुरुआत कॉफी और चाय से ही होती है. यह लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन ज्यादा मात्रा में कॉफी पीने से इसका स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. कुछ लोगों का कहना है कि इसका सीधा असर फर्टिलिटी पर पड़ता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि क्या वाकई में ज्यादा कॉफी पीने से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है, जानते हैं इसके पीछे का क्या है सच?

ज्यादा कॉफी पीने से फर्टिलिटी पर पड़ता है असर ?

आजकल लोगों को कैफिन लेने की एक तरह से लत जैसी लग चुकी है. इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्होंने दिन भर में कितनी कॉफी पी ली है. जो हमारे सेहत के लिए नुकसानदायक होती है. अगर आप दिन भर में 200 मिलीग्राम से कम कैफिन या फिर कहें तो 2 कप कॉफी रोजाना पीते हैं तो इसका असर फर्टिलिटी पर भी पड़ता है. लेकिन अगर हम 300 मिलीग्राम से ज्यादा कैफिन या 2 कप से ज्यादा कॉफी पीते हैं तो इसका सीधा असर प्रेग्नेंसी या फर्टिलिटी पर पड़ता है.

रिपोर्ट्स के अनुसार ज्यादा कॉफी पीने का असर महिलाओं और पुरुषों में अलग अलग होता है. ज्यादा कॉफी पीने से महिलाओं में ओव्यूलेशन पर सीधा असर पड़ता है जिसके बाद वो बेबी कैंसिव नहीं कर पाती हैं. पुरुषों में इसका असर स्पर्म काउंट पर पड़ता है.

प्रेग्नेंट महिलाओं पर ज्यादा कॉफी पीने का असर

प्रेग्नेंट महिला अगर ज्यादा कैफिन या ज्यादा कॉफी पीती है, तो उसे मिसकैरेज होने का खतरा बढ़ जाता है या भी  बच्चे का वजन भी कम हो सकता है. इसलिए डॉक्टर्स प्रेग्नेंट महिलाओं को कैफिन कम से कम लेने को बोलते हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर्स कैफिन और सॉफ्ट ड्रिंक्स लेने को मना करते हैं. प्रेग्नेंट महिलाएं या प्रेग्नेसी का प्लान कर रही महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर ही कैफिन लेनी चाहिए. 

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Diabetes Tips: गर्मियों के सीजन में मिलने वाला ये फल डायबिटीज है रामबाण इलाज

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Benefits of Jamun: गर्मियों के मौसम को फलों का मौसम भी कहा जाता है. इस मौसम में ऐसे फल आते हैं जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. आज के इस दौर में ज्यादातर लोग डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं. गर्मियों के मौसम में डायबिटीज के मरीजों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. गर्मियों में गर्मी और पसीने की वजह से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. जिससे शुगर हाई और लो होने का खतरा बना रहता है. लेकिन गर्मियों में कुछ ऐसे फल है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण का काम करते हैं. 

जामुन- डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बेहद अच्छा विकल्प है. इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन्स भी पाए जाते हैं. जामुन में जंबोलिन पाया जाता है, जिससे डायबिटीज कंट्रोल में रहती है. यह शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है. यह डायबिटीज मरीजों के लिए रामबाण इलाज की तरह काम करता है. जामुन के बीज भी शुगर कंट्रोल करने में फायदेमंद होते हैं. इसके बीजों का पावडर बनाकर खाने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं.

जामुन के फायदे

  • शुगर कंट्रोल- जामुन में पाया जाने वाला जेम्बोसिन तत्व शरीर में शुगर कंट्रोल करने के लिए फायदेमंद होता है. 
  • इंसुलिन उत्पादन में सुधार – इससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन सही तरीके से होता है. इससे शुगर का स्तर सही रहता है.
  • पाचन तंत्र में फायदेमंद- जामुन में फाइबर पाया जाता है. जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. इससे एसिडिटी, कब्ज की समस्या दूर होती है.
  • ठंडक- जामुन शरीर को ठंडक देता है. यह गर्मियों में रामबाण इलाज के लिए उपयोग किया जाता है. जामुन को लोग सलाद या रायते में भी बनाकर खा सकते है.

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