चिप-चिप वाली गर्मी में आपको भी होने लगी हैं घमौरियां? ये 10 देसी इलाज आएंगे काम

चिप-चिप वाली गर्मी में आपको भी होने लगी हैं घमौरियां? ये 10 देसी इलाज आएंगे काम



<p style="text-align: justify;">गर्मी के मौसम में उमस और पसीने की वजह से स्किन पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, जिन्हें घमौरियां या हीट रैश कहा जाता है. इन दानों की वजह से खुजली और जलन होती है. आइए आपको बताते हैं कि किन देसी इलाजों से इन घमौरियों को दूर भगाया जा सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घमौरियां क्या हैं और क्यों होती हैं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">घमौरियों को मेडिकल टर्म में मिलिएरिया (Miliaria) कहते हैं. दरअसल, स्किन में पसीने की नलिकाएं (स्वेद ग्रंथियां) बंद हो जाती हैं और पसीना स्किन की सतह के नीचे फंस जाता है. इससे स्किन पर छोटे-छोटे लाल या गुलाबी दाने निकल आते हैं, जिनमें काफी ज्यादा खुजली होती है. यह दिक्कत खासकर गर्मी और ह्यूमिड वाले मौसम में ज्यादा होती है. अहम बात यह है कि घमौरियां होने की वजह सिर्फ गर्मी और पसीना नहीं है, बल्कि स्किन पर बैक्टीरिया और डेड सेल्स के जमा होने से दिक्कत ज्यादा बढ़ जाती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घमौरियां होने की मुख्य वजह</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>गर्मी और उमस:</strong> ज्यादा तापमान और आर्द्रता से पसीने की नलियों में रुकावट आ जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>ज्यादा पसीना आना:</strong> ज्यादा पसीना आने से भी स्किन के छेद बंद हो सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>टाइट कपड़े:</strong> सिंथेटिक या टाइट कपड़े स्किन को सांस लेने से रोकते हैं, जिससे घमौरियों होने का खतरा बढ़ जाता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया:</strong> इनसे पसीने की नलियां ब्लॉक हो सकती हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे होते हैं घमौरियां होने के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">स्किन पर छोटे लाल या गुलाबी दाने</li>
<li style="text-align: justify;">खुजली और चुभन</li>
<li style="text-align: justify;">प्रभावित क्षेत्र में जलन</li>
<li style="text-align: justify;">दानों में हल्का दर्द या असहजता</li>
<li style="text-align: justify;">गंभीर मामलों में दानों से पानी या मवाद निकलना</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन देसी नुस्खों से मिल सकती है राहत</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>बर्फ की सिकाई:</strong> बर्फ से स्किन की जलन और खुजली तुरंत शांत होती है. इसके लिए एक साफ कपड़े में बर्फ के 2-3 टुकड़े लपेटकर प्रभावित क्षेत्र पर 5 से 10 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें. दिन में 4-5 बार ऐसा करने से घमौरियां कम हो सकती हैं. ICMR ने बर्फ की सिकाई को स्किन का तापमान कम करने का सबसे तेज तरीका बताया गया है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>एलोवेरा जेल:</strong> एलोवेरा में ठंडक और स्किन को नमी देने के गुण होते हैं. ताजा एलोवेरा जेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और 15-20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें. यह न केवल घमौरियों को कम करता है, बल्कि स्किन को मुलायम भी बनाता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>नीम की पत्तियां:</strong> नीम में एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो घमौरियों से होने वाले इंफेक्शन को रोकते हैं. 15-20 नीम की पत्तियों को आधे लीटर पानी में उबालें. इस पानी को ठंडा करके प्रभावित क्षेत्र को धोएं या पत्तियों का पेस्ट बनाकर लगाएं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>चंदन का पेस्ट:</strong> चंदन पाउडर को गुलाब जल के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे घमौरियों पर लगाएं. चंदन स्किन को ठंडक देता है और जलन कम करता है. 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें. यह तरीका गर्मी में स्किन का तापमान नियंत्रित करने में मदद करता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>मुलतानी मिट्टी:</strong> मुलतानी मिट्टी को गुलाब जल या ठंडे पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं. 20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें. यह स्किन की गर्मी को सोख लेती है और दानों को कम करती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कैलामाइन लोशन:</strong> कैलामाइन लोशन में जिंक ऑक्साइड होता है, जो त्वचा की जलन और खुजली को शांत करता है. इसे दिन में 2-3 बार प्रभावित क्षेत्र पर लगा सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>ओटमील बाथ:</strong> गुनगुने पानी में एक कप ओटमील 20 मिनट तक भिगोएं, फिर इस पानी से नहा लें. ओटमील से स्किन की जलन कम होती है और इंफेक्शन कम होता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>नारियल तेल और कपूर:</strong> एक चम्मच नारियल तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर हल्का गर्म करें. ठंडा होने के बाद इसे घमौरियों पर लगाएं. यह त्वचा को ठंडक देता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन को रोकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>तरबूज का गूदा:</strong> तरबूज के गूदे को 15-20 मिनट तक घमौरियों पर लगाएं और फिर ठंडे पानी से धो लें. यह शरीर की गर्मी को कम करता है और स्किन को राहत देता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>शहद:</strong> शहद में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं. इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें. यह जलन और खुजली को कम करता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-how-pregnancy-can-be-detect-after-having-intercourse-or-physical-relation-know-the-first-sign-2962629">शारीरिक संबंध बनाने के कितने दिन बाद चलता है प्रेग्नेंसी का पता, क्या होती है सबसे पहली पहचान?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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WiFi भी बन सकता है इन्फर्टिलिटी का कारण, जान लें कैसे?

WiFi भी बन सकता है इन्फर्टिलिटी का कारण, जान लें कैसे?


मॉडर्न लाइफस्टाइल में वाई-फाई (WiFi) हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे घर में हो या ऑफिस में, हर जगह वाई-फाई होना बेहद जरूरी है. क्या आप जानते हैं कि वाई-फाई भी इन्फर्टिलिटी का कारण बन सकता है? अगर नहीं तो आइए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

वाई-फाई और इन्फर्टिलिटी का क्या कनेक्शन?

वाई-फाई डिवाइस जैसे राउटर और इससे कनेक्ट होने वाले लैपटॉप और स्मार्टफोन्स 2.45 गीगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर RF-EMR उत्सर्जित करते हैं. ये नॉन-आइअनाइज रेज होती हैं, जो इंसानों की सेहत के लिए सेफ मानी जाती हैं. हालांकि, कई स्टडी में सामने आया है कि लंबे समय तक इन रेज के संपर्क में रहने से प्रजनन सिस्टम पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. खासकर, पुरुषों में शुक्राणुओं की गतिशीलता (Motility), संख्या (Count), और डीएनए अखंडता (DNA Integrity) प्रभावित हो सकती है.

जापान में हुई थी इस पर रिसर्च

2018 के दौरान जापान में एक रिसर्च की गई थी. इसमें सामने आया कि वाई-फाई राउटर के पास रखे गए शुक्राणुओं के सैंपल में दो घंटे के बाद गतिशीलता कम पाई गई. इस स्टडी में 51 पुरुषों के सैंपल को तीन ग्रुप में बांटा गया. पहला सैंपल बिना वाई-फाई वाले एरिया में रखा गया. दूसरा सैंपल वाई-फाई वाले एरिया में तो रखा गया, लेकिन इसके बीच में एक शील्ड लगाई गई. वहीं, तीसरा सैंपल पूरी तरह से वाई-फाई के संपर्क में था. दो घंटे के बाद तीसरे सैंपल वाले शुक्राणुओं की गतिशीलता 26.4 पर्सेंट थी, जबकि नियंत्रण समूह में यह 53.3 पर्सेंट पाई गई. वहीं, 24 घंटे के बाद तीसरे सैंपल में मौजूद 23.3 पर्सेंट शुक्राणु मृत पाए गए, जबकि बाकी दोनों सैंपल में यह आंकड़ा 8.4 पर्सेंट था.

शुक्राणुओं की हेल्थ पर असर

शुक्राणुओं की हेल्थ के लिए मोटिलिटी, काउंट और डीएन इंटीग्रिटी बेहद अहम होती है. रिसर्च में पाया गया कि वाई-फाई से निकलने वाली RF-EMR रेज से शुक्राणुओं में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का उत्पादन बढ़ जाता है, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण बनता है. यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस शुक्राणु की झिल्लियों में लिपिड पेरोक्सीडेशन (Lipid Peroxidation) को बढ़ा देता है, जिससे उनकी मोटिलिटी और डीएनए डैमेज हो सकता है. 

2011 की स्टडी में सामने आई यह बात

2011 के दौरान Fertility and Sterility मैग्जीन में एक स्टडी पब्लिश हुई थी. इसमें बताया गया कि वाई-फाई से जुड़े लैपटॉप के पास चार घंटे तक रखे गए शुक्राणु के सैंपल में 25 पर्सेंट शुक्राणु गतिहीन हो गए. वहीं, 9 पर्सेंट में डीएनए डैमेज हो गया. यह इम्पैक्ट लैपटॉप की हीटिंग की जगह RF-EMR के कारण था, क्योंकि जो लैपटॉप वाई-फाई से कनेक्ट नहीं थे, उन सैंपल में डैमेज बेहद कम रहा.

महिला फर्टिलिटी हेल्थ पर असर

कई रिसर्च में महिलाओं की फर्टिलिटी हेल्थ पर भी काम किया गया. 2022 के दौरान International Journal of Public Health Research में पब्लिश एक रिसर्च में पाया गया कि RF-EMR ओवरी में अंडाणु (Oocytes), अंडाशयी पुटिकाओं (Ovarian Follicles), और भ्रूण विकास को नुकसान पहुंचा सकता है. यह हार्मोनल डिसबैलेंस, ओव्यूलेशन में कमी और गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है.

ये भी पढ़ें: शारीरिक संबंध बनाने के कितने दिन बाद चलता है प्रेग्नेंसी का पता, क्या होती है सबसे पहली पहचान?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह उठकर पानी पीने के लिए क्यों कहते हैं डॉक्टर्स? फायदे जान लेंगे तो आप भी डाल लेंगे आदत

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सिर्फ तंबाकू नहीं, इन वजहों से भी मुंह में घर बना लेता है कैंसर

सिर्फ तंबाकू नहीं, इन वजहों से भी मुंह में घर बना लेता है कैंसर



<p style="text-align: justify;">देश में ओरल कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ​पिछले एक दशक में इनमें बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इसके पीछे प्रमुख वजह तंबाकू है, लेकिन ये अकेला कारण नहीं है. इस खतरनाक बीमारी के शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. जिससे ​हालत बिगड़ जाती है. ऐसे में इस बीमारी से किस तरह बचाव किया जा सकता है. किस तरह के बाॅडी में लक्षण दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए, आइए जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ओरल कैंसर के कारण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>शराब और तंबाकू:</strong> तंबाकू जैसे सिगरेट, बीड़ी, सिगार और तंबाकू खाना आदि का सेवन बाॅडी में ओरल कैंसर के जो​खिम को बढ़ा सकता है. लेकिन शराब के सा​थ मिलकर ये गंदी आदत (तंबाकू) ओरल कैंसर के लिए बड़ा रिस्क बन जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइट:</strong> डाइट में फ्रूट्स और वेजिटेबिल्स से दूरी बनाना खतरनाक हो सकता है. इसका असर ओरल प्राॅब्लम के रूप में सामने आ सकता है. ओरल कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>धूप:</strong> अ​धिक समय तक धूप में रहने से कैंसर का खतरा बन सकता है. इससे लिप कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>एचपीवी:</strong> ह्यूमन पेपिलोमावायरस ओरल कैंसर की वजह बन सकता है. इसमें एचपीवी-16 टंग और टाॅ​न्सिल के कैंसर के ​रिस्क को बढ़ा सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>जेनेटिक:</strong> &nbsp;फैमिली हिस्ट्री भी इस तरह के कैंसर का जो​खिम पैदा कर सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>इम्यूनिटी:</strong> कमजोर इम्यूनिटी शरीर में कई तरह के हेल्थ इश्यू खड़े कर सकती है. लेकिन ये ओरल कैंसर के खतरे को भी बढ़ावा दे सकती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ओरल कैंसर के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">मुंह में घाव या अल्सर, जो दो से तीन सप्ताह के भीतर ठीक नहीं होता है.</li>
<li style="text-align: justify;">मसूड़ों, जीभ या मुंह की परत पर सफेद या लाल धब्बे बन जाना.</li>
<li style="text-align: justify;">गाल का मोटा होना या लंप्स बन जाना.</li>
<li style="text-align: justify;">गले में लगातार दर्द या निगलने में कठिनाई होना.</li>
<li style="text-align: justify;">गले में कुछ फंसने जैसा अहसास होना.</li>
<li style="text-align: justify;">आवाज में बदलाव आ जाना.</li>
<li style="text-align: justify;">बिना किसी कारण के वजन कम होना.</li>
<li style="text-align: justify;">गर्दन में गांठ या सूजन होना.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>चिक बाइटिंग से हो सकता है कैंसर का खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कई बार मुंह में अंदर की ओर से गाल कट (चिक बाइटिंग) जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये सामान्य आदत है. ऐसा अक्सर तनाव या चिंता के कारण हो सकता है. इससे मुंह में छाले आदि की समस्या हो सकती है. लेकिन ऐसा कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं है कि सिर्फ ​चिक बाइटिंग कैंसर का कारण बनता हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पिछले एक दशक में ओरल कैंसर के केस घटे या बढ़े हैं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर गाैर करें तो भारत में ओरल कैंसर के मामलों की संख्या बढ़ रही है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह टोबैको प्रोडक्ट हैं. इनके सेवन से लोग इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-how-pregnancy-can-be-detect-after-having-intercourse-or-physical-relation-know-the-first-sign-2962629">शारीरिक संबंध बनाने के कितने दिन बाद चलता है प्रेग्नेंसी का पता, क्या होती है सबसे पहली पहचान?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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रात में बिस्तर पर जाते ही दिखें ये लक्षण तो समझ जाएं हो गया लिवर सिरोसिस, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल

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सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच ज्यादा क्यों आता है हार्ट अटैक? जानें खतरा भांपने वाले लक्षण

सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच ज्यादा क्यों आता है हार्ट अटैक? जानें खतरा भांपने वाले लक्षण



<p style="text-align: justify;">दुनियाभर में हार्ट अटैक के मामलों में काफी तेजी से इजाफा हुआ है. गौर करने वाली बात यह है कि सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच दिल का दौरा पड़ने के मामले ज्यादा सामने आते हैं. क्या आपने सोचा है कि इसके पीछे क्या वजह है? आइए इसके बारे में जानते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सुबह के समय ज्यादा क्यों होता है हार्ट अटैक का खतरा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के डायरेक्टर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बिमल छाजेड़ ने बताया कि सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच हार्ट अटैक की घटनाएं ज्यादा होने के पीछे शरीर का सर्कैडियन रिदम (24 घंटे का जैविक चक्र) और हार्मोनल बदलाव मुख्य कारण हैं. दरअसल, सुबह के समय शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिससे हार्ट पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ब्लड प्रेशर में इजाफा:</strong> सुबह के समय ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, जिसे मॉर्निंग सर्ज कहते हैं. यह सर्ज दिल की धमनियों पर दबाव बढ़ाता है. अगर धमनियों में पहले से ही प्लाक जमा हो तो यह ब्लॉकेज का कारण बन सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खून का गाढ़ापन:</strong> रात भर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे सुबह के समय खून गाढ़ा हो जाता है. इससे खून का थक्का बनाने में मदद करने वाली सेल्स यानी प्लेटलेट्स ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं. इससे खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है. अगर यह थक्का कोरोनरी धमनी में रुकावट पैदा करता है तो हार्ट अटैक आ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर:</strong> सुबह के समय कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल बढ़ता है. ये हार्मोन्स हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, जिससे हार्ट पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नींद से जागने का असर:</strong> रात में बॉडी रिलैक्स मोड में होती है, लेकिन सुबह जागने पर यह एक्टिव मोड में आ जाती है. इस बदलाव के दौरान हार्ट को ज्यादा ऑक्सीजन और ब्लड की जरूरत होती है. यदि धमनियां संकुचित या अवरुद्ध हैं तो यह डिमांड पूरी नहीं हो पाती और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खराब लाइफस्टाइल:</strong> मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक सेठ कहते हैं कि अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे देर रात तक जागना, अधूरी नींद और सुबह भारी नाश्ता करने से दिल पर प्रेशर बढ़ता है. वहीं, सुबह के वक्त ज्यादा भागदौड़ से भी खतरा बढ़ता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये सिग्नल दिखें तो तुरंत हो जाएं अलर्ट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हार्ट अटैक अचानक हो सकता है, लेकिन शरीर पहले से ही कुछ संकेत देता है. कार्डियोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, सुबह के वक्त सीने के बीच या बाईं तरफ दर्द, जकड़न, भारीपन या दबाव महसूस होना हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है. यह दर्द कुछ मिनट तक रह सकता है और फिर कम हो सकता है. कई बार सीने का दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है. ऐसा दर्द सुबह के समय ज्यादा तेज होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">नॉर्मल एक्टिविटीज करने या आराम करते वक्त भी अगर सांस फूल रही है तो यह खतरे का सिग्नल है. कई लोगों को हार्ट अटैक से पहले अचानक पसीना आता है और सीने में बेचैनी होने लगती है. यह भी हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है. अगर महिलाओं को सुबह के समय अचानक चक्कर आ रहे हैं. बेहोशी का अहसास हो रहा है या उल्टी आ रही है तो उन्हें खासकर अलर्ट होने की जरूरत है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-how-pregnancy-can-be-detect-after-having-intercourse-or-physical-relation-know-the-first-sign-2962629">शारीरिक संबंध बनाने के कितने दिन बाद चलता है प्रेग्नेंसी का पता, क्या होती है सबसे पहली पहचान?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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