चिलचिलाती गर्मी में कितना कारगर होता है गमछा? जानें कैसे सुरक्षित रह सकते हैं आप

चिलचिलाती गर्मी में कितना कारगर होता है गमछा? जानें कैसे सुरक्षित रह सकते हैं आप



<p><strong>Heat Protection Tips:</strong> गर्मियों की दोपहर में जब सूरज आसमान से आग बरसाता है, हवा थमी सी लगती है और पसीना शरीर से धार की तरह बहने लगता है, तब ऐसी हालत में एसी, कूलर या महंगे सनस्क्रीन हर किसी के बस की बात नहीं होती. लेकिन एक चीज है, जो न तो महंगी है, न ही भारी, यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि हर आम इंसान की धूप से लड़ने की का अच्छा ऑप्शन है. &nbsp;चाहे खेत में काम करने वाला किसान हो या शहर की गलियों में ठेले पर सामान बेचने वाला दुकानदार, हर कोई गर्मी से बचने के लिए गमछे पर ही भरोसा करता है. सवाल यह है कि क्या यह गमछा वाकई गर्मी में इतना कारगर है?&nbsp;</p>
<p><strong>ये भी पढे़- <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/drinking-milk-or-tea-on-empty-stomach-cause-gas-2962212">खाली पेट दूध या चाय पीने से क्यों बनने लगती है गैस? ये है इसका कारण</a></strong></p>
<p><strong>पसीना सोखता है&nbsp;</strong></p>
<p>कॉटन का बना गमछा पसीने को तुरंत सोख लेता है, जिससे शरीर चिपचिपा नहीं लगता और ठंडक बनी रहती है. गीला गमछा पहनने से हवा लगने पर ठंडक का अनुभव होता है, जो शरीर को राहत देता है.&nbsp;</p>
<p><strong>धूल और प्रदूषण से बचाता है&nbsp;</strong></p>
<p>शहरों में धूप के साथ-साथ प्रदूषण भी समस्या है. गमछे को मुंह और नाक पर बांधने से धूल, धुएं और धूप से एक परत की तरह सुरक्षा मिलती है.&nbsp;</p>
<p><strong>लू से बचाने में सहायक</strong></p>
<p>गर्म हवाएं यानी लू शरीर में पानी की कमी कर देती हैं. गीला गमछा शरीर को ठंडा रखता है और लू के असर को कम करता है.&nbsp;</p>
<p><strong>मल्टीपर्पज है गमछा</strong></p>
<p>जरूरत पड़ने पर इसे तौलिया, सीट कवर, बैग कवर, या यहां तक कि बच्चे को धूप से बचाने के लिए छांव की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है.&nbsp;</p>
<p><strong>कैसे करें गमछे का सही इस्तेमाल?</strong></p>
<p>धूप में निकलने से पहले गमछे को पानी में भिगोकर निचोड़ लें और सिर व गर्दन पर लपेटें.&nbsp;</p>
<p>गमछा हल्के रंग का हो तो ज्यादा बेहतर है, क्योंकि यह गर्मी कम सोखता है.&nbsp;</p>
<p>धूप में गाड़ी चलाते समय गमछे से नाक-मुंह और कान ढक लें.&nbsp;</p>
<p>पसीना आने पर उसे पोंछने में इसका उपयोग करें और फिर से गीला करके पहनें.&nbsp;</p>
<p>गर्मी से लड़ने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास महंगे प्रोडक्ट्स हों. गमछा जैसे देसी और पारंपरिक विकल्प भी उतने ही असरदार हो सकते हैं. बस जरूरत है उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की.&nbsp;</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:&nbsp;<a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-scientists-made-cancer-vaccine-know-how-effective-on-third-stage-cancer-patients-2954924">वैज्ञानिकों ने बना ली कैंसर की दवा, जानिए थर्ड स्टेज के कैंसर में कितनी कारगर ये वैक्सीन?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

इन तरीकों से सोएंगे तो आसपास नहीं आएंगी ये दिक्कतें, प्रेग्नेंट महिलाओं को भी होगा फायदा

इन तरीकों से सोएंगे तो आसपास नहीं आएंगी ये दिक्कतें, प्रेग्नेंट महिलाओं को भी होगा फायदा


नींद एक ऐसी चीज है, जो कभी भी और कहीं भी आ सकती है. जैसे ही माैका मिलता है लोग आंख बंदकर लुढ़क जाते हैं या कई तो बैठे ही बैठ खर्राटे भरने लगते हैं. लेकिन क्या सोने का भी कोई प्राॅपर तरीका होता है. अगर इसकी अनदेखी की जाए तो क्या बाॅडी पर कोई नकारात्मक असर पड़ सकता है. आइए कुछ ऐसे ही सवालों के बारे में जानते हैं…

किन्हें ध्यान रखने की जरूरत?

नींद जरूरी है. अच्छी नींद कई हेल्थ प्राॅब्लम से बचाती है, लेकिन सोना कैसे चाहिए? इसको लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर आप युवा हैं. किसी तरह के हेल्थ इश्यूज का सामना नहीं कर रहे हैं. ऐसे में आपको जैसे आराम मिले, सोना चाहिए. यानी सोते समय, जिसमें आपकी बाॅडी कंफर्ट महसूस करे, आप उस तरह से नींद ले सकते हैं. हालांकि, अगर आप किसी तरह की हेल्थ प्राॅब्लम से जूझ रहे हैं. कोई प्री मेडिकल कंडीशन है तो एहतियात बरतने की जरूरत होती है.

​स्लीप एपनिया

​स्लीप एपनिया में सोते समय सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है. इस ​कंडीशन में सोते समय व्य​क्ति कुछ समय के लिए सांस लेना बंद कर सकता है. ऐसा एयर वेज ब्लाॅक होने के चलते होता है. इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. इस ब्लाॅकेज के चलते खर्राटे भी आते हैं. इस दाैरान मुंह ऊपर करके सोने से कंडीशन और खराब हो सकती है. ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं. ​पीठ के बल सोने से बचना चाहिए.

पीठ और गर्दन में दर्द

पीठ के बल सोएं. इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव कम पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कमर में दर्द होता है तो सीधे लेटना चाहिए. कमरे के नीचे तकिया लगाना चाहिए. एक ही पोजीशन में लेटने से परेशान हो सकते हैं. ऐसे में बायें करवट लेकर कोहनी और घुटने मोड़कर लेटने से आराम मिलता है. 

प्रेग्नेंसी में ऐसे सोएं

प्रेग्नेंसी के दाैरान सोने की पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए. प्रेग्नेंसी के आ​खिरी तीन महीनों में महिलाओं को करवट लेकर सोना चाहिए. दाईं या बाईं, वह किसी भी ओर करवट ले सकती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर बाईं ओर करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं. इससे बाॅडी के इंटरनल ऑर्गन पर दबाव नहीं पड़ता. साथ ही, बाॅडी में ब्लड फ्लो बेहतर होता है.

नाक बंद

अगर नाक बंद है तो एक तरफ करवट लेकर सोना चाहिए.

चेहरे पर आता है निखार

कुछ रिसर्च में सामने आया है कि पीठ के बल सोना चेहरे के लिए अच्छा होता है.

इंफेक्शन भी होगा दूर

सर्दी, खांसी, फ्लू की प्राॅब्लम है तो सिर को अपने तकिये से थोड़ा ऊपर उठाकर सोएं.

एसिडिटी में ऐसे सोएं

एसिडिटी, हार्ट बर्न आदि की समस्या है, तो बाईं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए. इससे आराम मिलता है.

ये भी पढ़ें: कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

खाली पेट दूध या चाय पीने से क्यों बनने लगती है गैस? ये है इसका कारण

खाली पेट दूध या चाय पीने से क्यों बनने लगती है गैस? ये है इसका कारण



<p style="text-align: justify;"><strong>Gastric Problem after Tea:</strong> सुबह-सुबह की शुरुआत जैसे ही होती है, बहुत से लोग सबसे पहले एक कप चाय या गिलास भर दूध पीना पसंद करते हैं. नींद से बोझिल आंखों को खोलने के लिए ये गरमागरम चाय मानो कोई जादुई पेय बन जाती है. वहीं कुछ लोग हेल्दी शुरुआत के नाम पर दूध को सबसे बेहतर विकल्प मानते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि, ये आदत आपके पेट में गैस और भारीपन जैसी समस्याएं क्यों पैदा कर देती है? ऐसा क्यों होता है कि खाली पेट चाय या दूध पीने के बाद पेट फूलने लगता है, गैस बनने लगती है और दिनभर बेचैनी बनी रहती है?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खाली पेट चाय पीने से क्यों होती है गैस?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">खाली पेट चाय पीने से पेट में एसिडिटी बढ़ जाती है. चाय में मौजूद कैफीन और टैनिक एसिड पेट की परत को उत्तेजित करते हैं, जिससे एसिड का स्राव बढ़ जाता है. ऐसे में ये एसिड सीधे पेट की परत पर असर डालता है और गैस, जलन या एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़े- <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/which-women-should-not-eat-citrus-fruits-harmful-for-health-2961705">किन महिलाओं को नहीं खाने चाहिए खट्टे फल, सेहत को पहुंचा सकते हैं नुकसान</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दूध पीने पर गैस क्यों बनती है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बहुत से लोगों को लगता है कि दूध सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद होता है, लेकिन हर किसी का पाचन तंत्र एक जैसा नहीं होता. जिन लोगों को लैक्टोज इन्टॉलरेंस होता है, उनके शरीर में लैक्टोज नामक दूध में मौजूद शर्करा को पचाने वाला एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता. ऐसे में खाली पेट दूध पीने से गैस, अपच, पेट फूलना जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेट की प्राकृतिक लय से छेड़छाड़</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह का समय हमारे पाचन तंत्र के लिए रीसेट मोड की तरह होता है. पेट पूरी रात आराम करता है और सुबह उसे धीरे-धीरे एक्टिवेट करने की जरूरत होती है. ऐसे में सीधे भारी या उत्तेजक पेय जैसे दूध या चाय लेना पेट को झटका दे देता है, जिससे गैस बनने लगती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस समस्या से बचने के लिए क्या करें?&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी या नींबू-शहद पानी लें।</p>
<p style="text-align: justify;">चाय या दूध पीने से पहले कुछ हल्का खा लें जैसे बिस्किट, खजूर या फल।</p>
<p style="text-align: justify;">यदि लैक्टोज इन्टॉलरेंस है, तो प्लांट-बेस्ड दूध जैसे सोया या बादाम दूध का सेवन करें।</p>
<p style="text-align: justify;">चाय की जगह हर्बल या ग्रीन टी लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">हर दिन की एक बेहतर शुरुआत न केवल हमें मानसिक रूप से ऊर्जा देती है, बल्कि पेट की सेहत को भी संतुलित बनाए रखती है। अगर आप भी गैस, पेट फूलने या जलन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो सुबह खाली पेट दूध या चाय पीने की आदत पर एक बार फिर से सोचिए. सही दिनचर्या और थोड़े से बदलाव आपके पाचन तंत्र को बेहतर बना सकते हैं.&nbsp;</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:&nbsp;<a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-scientists-made-cancer-vaccine-know-how-effective-on-third-stage-cancer-patients-2954924">वैज्ञानिकों ने बना ली कैंसर की दवा, जानिए थर्ड स्टेज के कैंसर में कितनी कारगर ये वैक्सीन?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

एक बार में कितने यूनिट ब्लड डोनेट कर सकता है कोई इंसान? जानें इसकी लिमिट

एक बार में कितने यूनिट ब्लड डोनेट कर सकता है कोई इंसान? जानें इसकी लिमिट



<p style="text-align: justify;">रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि इससे अनगिनत लोगों की जान बचती है. यही वजह है कि पूरी दुनिया में हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि एक बार में कोई शख्स कितने यूनिट ब्लड डोनेट कर सकता है? क्या इसकी कोई लिमिट है तो वह क्यों तय की गई है?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक बार में कितना ब्लड कर सकते हैं डोनेट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न रक्त बैंकों के मुताबिक, एक हेल्दी शख्स एक बार में 450 मिलीलीटर (लगभग आधा लीटर या एक पिंट) ब्लड डोनेट कर सकता है. इसे आमतौर पर एक यूनिट कहा जाता है. यह मात्रा ग्लोबल लेवल पर मानक मानी जाती है. हालांकि, कुछ देशों में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस देश में कितना ब्लड डोनेट करने का नियम?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कनाडा में 450 मिलीलीटर का मतलब करीब 2 कप होता है तो अमेरिका में एक यूनिट का मतलब 460-500 मिलीलीटर होता है. वहीं, भारत में 350-450 मिलीलीटर ब्लड डोनेट करने का मानक है, जो डोनर के वजन और हेल्थ पर निर्भर होता है. जापान और सिंगापुर में 200 से 450 मिलीलीटर ब्लड डोनेट किया जा सकता है, जो डोनर के वजन के आधार पर तय होता है. इसके अलावा ब्लड डोनेट के दौरान 5-10 मिलीलीटर एक्स्ट्रा ब्लड टेस्टिंग के लिए लिया जा सकता है. यह मात्रा एक हेल्दी वयस्क के शरीर में मौजूद कुल रक्त (लगभग 5-6 लीटर) का केवल 8-10 पर्सेंट है, जो सेफ माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ एक यूनिट ही ब्लड क्यों कर सकते हैं डोनेट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स की मानें तो एक बार में एक यूनिट (450-500 मिलीलीटर) ब्लड डोनेट करना सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि डोनर की हेल्थ पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ता है. दरअसल, एक नॉर्मल एडल्ट के शरीर में 4.5 से 6 लीटर ब्लड होता है, जो उम्र, जेंडर और वजन के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. एक यूनिट ब्लड डोनेट करने से शरीर में खून की मात्रा अस्थायी रूप से कम होती है, लेकिन यह कमी 24-48 घंटों में प्लाज्मा और फ्लूड से पूरी हो जाती है. वहीं, रेड ब्लड सेल्स (RBC) पूरी तरह से पुनर्जनन में 4-6 सप्ताह का वक्त लेती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ज्यादा ब्लड डोनेट करने से क्या खतरा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कई रिसर्च में सामने आया है कि एक बार में 15 पर्सेंट से ज्यादा ब्लड निकालना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे क्लास 2 ब्लीडिंग (Class 2 Hemorrhage) जैसे लक्षण बन सकते हैं. इसकी वजह से चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी की दिक्कत हो सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/5-tips-to-avoid-heat-stroke-symptoms-treatment-from-rml-doctor-ajay-chauhan-ann-2962143">ये 5 उपाय कर लिए तो छू भी नहीं पाएगी लू, एक्सपर्ट ने बताए हीट स्ट्रोक से बचने के रामबाण तरीके</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

ये 5 उपाय कर लिए तो छू भी नहीं पाएगी लू, एक्सपर्ट ने बताए हीट स्ट्रोक से बचने के रामबाण तरीके

ये 5 उपाय कर लिए तो छू भी नहीं पाएगी लू, एक्सपर्ट ने बताए हीट स्ट्रोक से बचने के रामबाण तरीके



<p style="text-align: justify;">दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह न केवल बीमारियों का कारण बन रही है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है. गर्मी बढ़ने के साथ हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते मौसम विभाग और स्वास्थ्य विभाग लगातार चेतावनियां जारी कर रहे हैं. ऐसे में हम आपको एक्सपर्ट के हवाले से ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें आजमाने पर लू आपको छू भी नहीं पाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लगातार बढ़ रहा तापमान, सावधानी जरूरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है. दिल्ली-एनसीआर में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुच चुका है. वहीं, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों में यह 45 डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है. उमस और तेज धूप के कारण लोग गर्मी से बेहाल हैं. ऐसे में घर से बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितनी गर्मी सहन कर सकता है शरीर?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हीट स्ट्रोक के खतरों और बचाव के बारे में जानकारी देने के लिए हमने आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के निदेशक और प्रोफेसर डॉ. अजय चौहान से बात की. उन्होंने बताया कि जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है और शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा नहीं कर पाता तो यह स्थिति हीट स्ट्रोक कहलाती है. यह एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है. डॉ. चौहान के अनुसार, पर्याप्त पानी न पीना और डिहाइड्रेशन हीट स्ट्रोक का प्रमुख कारण है, क्योंकि कई लोगों को प्यास का अहसास नहीं होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हीट स्ट्रोक के लक्षण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. चौहान ने बताया कि अगर शरीर का तापमान बढ़ रहा है और पसीना नहीं आ रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप हीट स्ट्रोक की चपेट में आ चुके हैं. इसमें सिरदर्द, चक्कर आना, भ्रम, या बेहोशी जैसी दिक्कतें भी होती हैं. इसके अलावा धड़कन काफी तेज हो जाती है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है. वहीं, मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी, मतली या उल्टी, त्वचा का लाल और सूखा होना जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. हीट स्ट्रोक के शिकार हुए लोगों को तेज बुखार भी आ जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये तरीके आजमाएं तो छू नहीं पाएगी लू</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें.</li>
<li style="text-align: justify;">धूप में जा रहे हैं तो हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े, टोपी, और धूप का चश्मा पहनें.</li>
<li style="text-align: justify;">हर 20-30 मिनट में पानी पिएं, भले ही प्यास न लगे.</li>
<li style="text-align: justify;">नमक और इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय जैसे ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करें.</li>
<li style="text-align: justify;">पेशाब के रंग पर नजर रखें. गहरा रंग डिहाइड्रेशन का सिग्नल हो सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">पीड़ित व्यक्ति को तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं, क्योंकि यह समय बेहद अहम होता है.</li>
<li style="text-align: justify;">पीड़ित के शरीर को गीले कपड़े से पोंछें या ठंडे पानी से स्पंज करें.</li>
<li style="text-align: justify;">गर्दन, बगल, और जांघों के बीच आइस पैक रखें.</li>
<li style="text-align: justify;">यदि व्यक्ति होश में है तो थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी पिलाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं, क्योंकि गंभीर मामलों में आईसीयू की जरूरत हो सकती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-hair-turns-white-in-young-age-2962090">20 की उम्र में ही सफेद हो गए बाल? मतलब रोजाना हो रही हैं ये गलतियां</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

20 की उम्र में ही सफेद हो गए बाल? मतलब रोजाना हो रही हैं ये गलतियां

20 की उम्र में ही सफेद हो गए बाल? मतलब रोजाना हो रही हैं ये गलतियां



<p style="text-align: justify;">बालों का रंग पहले जहां अनुभव और उम्र का पैमाना परखने का जरिया बनता था, वहीं आज ये एक प्राॅब्लम बन गया है. 20 से 30 साल के युवाओं के बाल बुजुर्गों जैसे नजर आते हैं. रंग हल्का या फिर बालों का सफेद हो जाना, ये दिक्कत सामान्य हो चुकी है. लेकिन बालों का रंग बदलता क्यों है? अगर इस कारण को पहचान लिया जाए, तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है. आइए इन कारणों के बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बाॅडी में विटामिन की कमी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हमारे शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इसकी कमी का कई तरह से बाॅडी पर असर देखने को मिलता है. बालों का सफेद होना भी इससे जुड़ा हुआ है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बाॅडी में आयरन, काॅपर, विटामिन बी 12 और थायराॅइड की प्राॅब्लम के चलते समय से पहले बालों के रंग में बदलाव या सफेद होने की समस्या देखने को मिल सकती है. ऐसे में इसके लिए जरूरी है कि ब्लड की जांच कराई जाए. जिससे बाॅडी में कमी का पता लगाकर उसे दूर किया जा सके. ऐसा करने से बालों का सफेद होना रुक सकता है और साथ ही बाल पुराने रंग में लाैट सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तनाव कम करें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बाॅडी में तनाव कई हेल्थ प्राॅब्लम का कारण बनता है. लेकिन ये आपके सिर पर सफेदी भी ला सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो तनाव के चलते समय से पहले सिर के बाल ग्रे या सफेद हो सकते हैं. ऐसे में तनाव को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए. ऐसा करने से बालों में पिगमेंटेशन वापस आ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्मोकिंग और टैनिंग से बचें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्मोकिंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है. इस बारे में सभी जानते हैं. फिर भी इसका सेवन किया जाता है. जो बालों को भी नुकसान पहुंचाता है. इसके साथ सन टैनिंग भी बालों के रंग पर असर डालती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे ऑ​क्सिडेटिव स्ट्रेस के चलते हेयर रूट के पिगमेंट सेल्स को नुकसान पहुंचता है. जो बालों के ग्रे होने का कारण बन सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एंटी-ग्रे टॉपिकल ट्रीटमेंट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बालों को सफेद होने से रोकने के लिए कुछ टाॅपिकल ट्रीटमेंट अपनाए जा सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानों तो ये बालों को सफेद होने से रोकने के साथ उनका रंग लाैटाने में भी मदद करते हैं.&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>बालों को सफेद होने से कैसे रोकें?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजें ज्यादा खाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">सब्जियों और फलों का सेवन जितना हो सके करें.</li>
<li style="text-align: justify;">स्मोकिंग से दूरी बनाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">पर्याप्त मात्रा में विटामिन का सेवन करें. बालों को हेल्दी रखने के लिए विटामिन बी 12 सबसे ज्यादा जरूरी है.</li>
<li style="text-align: justify;">खानपान में मिनरल्स को शामिल करें. बालों के ग्रोथ और कोशिकाओं को हेल्दी रखने के लिए मिनरल्स की काफी इंपॉर्टेंस होती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/air-india-plane-crash-how-dna-test-will-be-done-of-dead-bodies-of-gujarat-ahmedabad-2961764">कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp