20 की उम्र में ही सफेद हो गए बाल? मतलब रोजाना हो रही हैं ये गलतियां

20 की उम्र में ही सफेद हो गए बाल? मतलब रोजाना हो रही हैं ये गलतियां



<p style="text-align: justify;">बालों का रंग पहले जहां अनुभव और उम्र का पैमाना परखने का जरिया बनता था, वहीं आज ये एक प्राॅब्लम बन गया है. 20 से 30 साल के युवाओं के बाल बुजुर्गों जैसे नजर आते हैं. रंग हल्का या फिर बालों का सफेद हो जाना, ये दिक्कत सामान्य हो चुकी है. लेकिन बालों का रंग बदलता क्यों है? अगर इस कारण को पहचान लिया जाए, तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है. आइए इन कारणों के बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बाॅडी में विटामिन की कमी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हमारे शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इसकी कमी का कई तरह से बाॅडी पर असर देखने को मिलता है. बालों का सफेद होना भी इससे जुड़ा हुआ है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बाॅडी में आयरन, काॅपर, विटामिन बी 12 और थायराॅइड की प्राॅब्लम के चलते समय से पहले बालों के रंग में बदलाव या सफेद होने की समस्या देखने को मिल सकती है. ऐसे में इसके लिए जरूरी है कि ब्लड की जांच कराई जाए. जिससे बाॅडी में कमी का पता लगाकर उसे दूर किया जा सके. ऐसा करने से बालों का सफेद होना रुक सकता है और साथ ही बाल पुराने रंग में लाैट सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तनाव कम करें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बाॅडी में तनाव कई हेल्थ प्राॅब्लम का कारण बनता है. लेकिन ये आपके सिर पर सफेदी भी ला सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो तनाव के चलते समय से पहले सिर के बाल ग्रे या सफेद हो सकते हैं. ऐसे में तनाव को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए. ऐसा करने से बालों में पिगमेंटेशन वापस आ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्मोकिंग और टैनिंग से बचें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्मोकिंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है. इस बारे में सभी जानते हैं. फिर भी इसका सेवन किया जाता है. जो बालों को भी नुकसान पहुंचाता है. इसके साथ सन टैनिंग भी बालों के रंग पर असर डालती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे ऑ​क्सिडेटिव स्ट्रेस के चलते हेयर रूट के पिगमेंट सेल्स को नुकसान पहुंचता है. जो बालों के ग्रे होने का कारण बन सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एंटी-ग्रे टॉपिकल ट्रीटमेंट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बालों को सफेद होने से रोकने के लिए कुछ टाॅपिकल ट्रीटमेंट अपनाए जा सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानों तो ये बालों को सफेद होने से रोकने के साथ उनका रंग लाैटाने में भी मदद करते हैं.&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>बालों को सफेद होने से कैसे रोकें?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजें ज्यादा खाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">सब्जियों और फलों का सेवन जितना हो सके करें.</li>
<li style="text-align: justify;">स्मोकिंग से दूरी बनाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">पर्याप्त मात्रा में विटामिन का सेवन करें. बालों को हेल्दी रखने के लिए विटामिन बी 12 सबसे ज्यादा जरूरी है.</li>
<li style="text-align: justify;">खानपान में मिनरल्स को शामिल करें. बालों के ग्रोथ और कोशिकाओं को हेल्दी रखने के लिए मिनरल्स की काफी इंपॉर्टेंस होती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/air-india-plane-crash-how-dna-test-will-be-done-of-dead-bodies-of-gujarat-ahmedabad-2961764">कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

विटामिन की कमी होने पर शरीर में दिखते हैं लक्षण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

विटामिन की कमी होने पर शरीर में दिखते हैं लक्षण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज


हे​क्टिक लाइफस्टाइल में खानपान बिगड़ा हुआ है. शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. हमारी बाॅडी भी इस ओर इशारा करती है, लेकिन हम नजरअंदाज कर देते हैं. समस्या बढ़ती जाती है. ऐसे में वो काैन से लक्षण हैं, जिन्हें देखकर हमें सतर्क हो जाना चाहिए. आइए जानते हैं इस बारे में…

छाले और मुंह के किनारे पर क्रैक्स

दर्दनाक छाले या मुंह में किनारों पर क्रैक्स बनने लगें तो इन्हें नजरअंदाज न करें. ये ​बाॅडी में विटामिन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसा विटामिन बी 2 (राइबोफ्लेविन)  की कमी से हो सकता है. बाॅडी में अन्य बी विटामिन और आयरन की कमी के दाैरान भी इस तरह के लक्षण सामने आते हैं. ऐसे में इससे बचने के लिए जरूरी है कि डाइट में पर्याप्त मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट, मीट, फिश आदि को शामिल करें.

मंसूड़ों से खून आना

दांतों की सही से देखभाल नहीं करने से कई बार मंसूड़ों से खून आने की प्राॅब्लम देखी जाती है. लेकिन ये बाॅडी में विटामिन सी कमी की ओर भी इशारा करता है. विटामिन सी कोलेजन सिं​थेसिस के लिए जरूरी होती है. जो मंसूड़ों को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. इसके लिए जरूरी है कि विटामिन सी से भरपूर फूड जैसे ब्रोकली, स्ट्राॅबेरी, खट्टे फल आदि का सेवन किया जाए.

हेयर लाॅस

बालों के झड़ने की समस्या को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये बाॅडी में जरूरी पोषक तत्वों की ओर इशारा करता है. आयरन, जिंक, लियोनिक एसिड, निया​सिन (विटामिन बी3) की कमी से बालों की समस्या देखने को मिल सकती है. आयरन की कमी से बाॅडी में हीमोग्लोबिन पर असर पड़ता है. इससे बालों की जड़ तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इससे बचाव के लिए जरूरी है कि डाइट में आयरन रिच फूड प्रोडक्ट जैसे पालक, बीन्स, दाल, रेड मीट आदि को शामिल किया जाए.

आंखों की रोशनी पर असर

​बाॅडी में विटामिन ए की कमी से रात में देखने में समस्या हो सकती है. इसके साथ ही आंखों में सफेद धब्बे दिखने लगते हैं. विटामिन ए बाॅडी में आंखों की रोशनी बनाए रखने के साथ ​हेल्दी ​​स्किन और इम्युनिटी को भी मजबूत करने में मदद करता है. इस विटामिन की कमी को दूर करने केलिए डेयरी प्रोडक्ट, ऑरेंज कलर के फ्रूट्स, गाजर, शकरकंद आदि को डाइट में शामिल करना चाहिए.

जब कंट्रोल में न रहे पैर

रेस्टलेस लेग सिंड्राॅम ये एक न्यूरोलाॅजिकल डिस्आर्डर होता है. जिसमें व्य​क्ति को अपने पैरों को हिलाने की इच्छा होती है. कई बार ये अनकंट्रोल्ड हो जाता है. इस प्राॅब्लम का कोई कारण स्पष्ट नहीं है, हालांकि इसे मैग्नी​शियम और आयरन की कमी से जोड़ा जाता है. ऐसे में साबुत अनाज, नट्स आदि से मैग्नी​​शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है. वहीं चिकन, रेड मीट, फोर्टिफाइड अनाज आयरन की कमी को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें: कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

27 साल की युवती को हार्ट अटैक आया तो डॉक्टर ने किया अलर्ट, ये दवा लेते हैं तो हो जाएं सावधान

27 साल की युवती को हार्ट अटैक आया तो डॉक्टर ने किया अलर्ट, ये दवा लेते हैं तो हो जाएं सावधान



<p style="text-align: justify;">कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, यानी गर्भनिरोधक गोलियां लेना क्या सुर​क्षित है? हाल ही में मुंबई में 27 साल की युवती को हार्ट अटैक के बाद ये सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है. लोगों के बीच इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय &nbsp;उन महिलाओं के लिए टेंशन बढ़ाने वाली है, जो किसी कारण इस हार्मोनल दवा का यूज करती हैं. आइए जानते हैं ये पिल्स शरीर पर किस तरह असर डालती हैं और इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स का क्या कहना है….</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आ​खिर सवाल क्यों उठा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मुंबई की रहने वाली 27 साल की युवती को गंभीर एसिडिट और छाती में दर्द महसूस हुआ. अस्पताल में युवती का ईसीजी किया गया तो इसमें हार्ट अटैक की पु​​​ष्टि हुई. डॉक्टर्स ने कोरोनरी आर्टरी में स्टेंट डालकर युवती की जान बचाई और बाॅडी में ब्लड फ्लो बहाल किया. इसके बाद डाॅक्टर ने जो हार्ट अटैक का कारण बताया है, वह महिलाओं के लिए टेंशन देने वाला है. डाॅक्टर के अनुसार युवती में हार्ट हटैक का कारण कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स हो सकती हैं. युवती लंबे समय से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)से जूझ रही है. ये एक हार्मोनल डिस्ऑर्डर है, जो रिप्रोडक्टिव हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है. इसमें महिलाओं में अनियमित पीरियड्स और ओवेरियन सिस्ट की प्राॅब्लम देखने को मिल सकती है. फैमिली के अनुसार युवती पिछले करीब 10 साल से पीसीओएस से जूझ रही है. इसके लिए पिछले सात साल से कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेना खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही प्रका​शित एक स्टडी के अनुसार कंबाइंड एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टोन कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स से महिलाओं में इस्केमिक स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जो​खिम दोगुना हो जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बताया कि कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स से हार्ट अटैक से अ​धिक स्ट्रोक की आशंका रहती है. 22 से 28 साल की उम्र में फीमेल में पीसीओएस के साथ स्ट्राेक से जूझने के कई केस सामने आ चुके हैं. महिलाओं में पीसीओएस के साथ मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस की प्राॅब्लम भी देखने को मिलती है, जो डिस्लिपिडेमिया का कारण बन सकता है. ब्लड में जमा फैट का हाई लेवल हार्ट डिजीज का जोखिम को बढ़ाता है. शहरी जीवनशैली, तनाव और बचपन से मोटापा, पीसीओएस के मामलों को बढ़ा रहे हैं. हर पांच में से एक शहरी लड़की इससे प्रभावित है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार लेकिन कई बार फीमेल को इन पिल्स की जरूरत होती है, जिससे ओवुलेशन को कम कर ओवरी में सिस्ट के बनने से रोका जा सके.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फैमिली हिस्ट्री अहम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियां ब्लड में क्लाॅट बनने के जो​खिम को बढ़ा सकती हैं. इसलिए महिलाओं की फैमिली ​हिस्ट्री देखकर ही इन दवा के सेवन की सलाह दी जानी चाहिए. अगर हार्ट डिजीज की कोई फैमिली हिस्ट्री हो तो इलाज के लिए गर्भनिरोधक गोलियों के विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/air-india-plane-crash-how-dna-test-will-be-done-of-dead-bodies-of-gujarat-ahmedabad-2961764">कैसे होता है डीएनए टेस्ट, अहमदाबाद प्लेन क्रैश में बुरी तरह जले हुए शवों की कौन-सी चीज करेगी मदद?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp