अहमदाबाद जैसे हादसे के बाद पैनिक अटैक कर रहा परेशान, जानें कैसे रखें दिमाग को शांत?

अहमदाबाद जैसे हादसे के बाद पैनिक अटैक कर रहा परेशान, जानें कैसे रखें दिमाग को शांत?


12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने न सिर्फ गुजरात, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया. अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघानी नगर के रिहायशी इलाके में क्रैश हो गई. इस हादसे में 242 यात्रियों में से 241 की मौत हो गई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे. इस तरह के हादसों से लोगों में डर, चिंता और पैनिक अटैक जैसी मेंटल प्रॉब्लम होने लगती हैं. आइए बताते हैं कि अगर आपको भी पैनिक अटैक परेशान कर रहा है तो अपने दिमाग को कैसे शांत रखें? 

अहमदाबाद हादसे का दिमाग पर असर

अहमदाबाद प्लेन क्रैश जैसी घटनाएं न सिर्फ स्थानीय लोगों, बल्कि उन लोगों को भी प्रभावित करती हैं, जो इस खबर को टीवी, सोशल मीडिया या समाचार पत्रों के माध्यम से देखते हैं.इस तरह की घटनाएं पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), चिंता और पैनिक अटैक जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकती हैं. इससे उन लोगों को ज्यादा दिक्कत हो सकती है, जो पहले से ही तनाव या मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं.

क्या होता है पैनिक अटैक?

पैनिक अटैक एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति को अचानक तेज डर या चिंता का अनुभव होता है. यह फिजिकल और मेंटल लक्षणों के साथ प्रकट होता है. यह स्थिति 15 सेकंड से एक घंटे तक रह सकती है. इस दौरान व्यक्ति को अपनी जान खतरे में महसूस होती है. 

पैनिक अटैक के लक्षण

  • फिजिकल लक्षण: तेज धड़कन, सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, पसीना, कंपकंपी, चक्कर आना, मिचली, गर्मी या ठंड की लहर (हॉट/कोल्ड फ्लैश) और सिर में हल्कापन.
  • मेंटल लक्षण: तेज डर, नियंत्रण खोने का खतरा, मौत का डर और वास्तविकता से अलगाव महसूस होना. 

पैनिक अटैक के कारण

  • तनाव और चिंता: अहमदाबाद जैसे हादसे की खबर सुनने के बाद लोग काफी ज्यादा टेंशन में आ सकते हैं. इनमें वे लोग ज्यादा परेशान हो सकते हैं, जो नियमित रूप से हवाई यात्रा करते हैं.
  • पुरानी यादें: यदि किसी व्यक्ति ने पहले किसी दर्दनाक घटना का अनुभव किया है तो ऐसी खबरें पुरानी यादों को फिर से ट्रिगर कर सकती हैं.
  • मीडिया का प्रभाव: सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर बार-बार दिखाए जाने वाले हादसे के दृश्य और वीडियो लोगों के डर को बढ़ा सकते हैं.
  • फिजिकल कारण: नींद की कमी, कैफीन का ज्यादा सेवन, या अनियमित डाइट भी पैनिक अटैक को बढ़ावा दे सकता है.

दिमाग को शांत रखने के तरीके

  • डीप ब्रीदिंग (गहरी सांस लेना): पैनिक अटैक के दौरान शरीर ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. इसकी वजह से सांसें तेज और अनियमित हो सकती हैं. डीप ब्रीदिंग इस स्थिति को नियंत्रित करने में मदद करती है.
  • मेडिटेशन और माइंडफुलनेस: मेडिटेशन तनाव को कम करने और मन को शांत करने का शक्तिशाली तरीका है. बॉडी-स्कैन मेडिटेशन से आप अपने शरीर के हर हिस्से पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. यह पैनिक अटैक के प्रभाव को कम करने में मदद करता है.
  • ग्राउंडिंग तकनीक: पैनिक अटैक के दौरान व्यक्ति अक्सर वास्तविकता से कट जाता है. ग्राउंडिंग तकनीक आपको अपने आसपास के वातावरण से जोड़ने में मदद करती है.
  • अच्छी डाइट: कुछ खाद्य पदार्थ पैनिक अटैक को कम करने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, बादाम में पोटेशियम और मैग्नीशियम होता है जो नर्वस सिस्टम को शांत करता है. संतरे का सेवन न्यूरॉन्स को आराम देता है और तनाव को कम करता है. ग्रीन टी में पॉलीफिनॉल होता है, जो तनाव को कम करने में असरदार होता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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नाखूनों का सफेद दिखना किस बीमारी का है संकेत, पता चलते ही जाएं डॉक्टर के पास

नाखूनों का सफेद दिखना किस बीमारी का है संकेत, पता चलते ही जाएं डॉक्टर के पास


White Nails Sign: कभी गौर किया है आपने अपने नाखूनों को? ये छोटे-छोटे हिस्से सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं होते, बल्कि ये हमारे शरीर के अंदर चल रहे बदलावों का भी आईना होते हैं. अक्सर लोग नाखूनों में सफेदपन देखकर इसे कैल्शियम की कमी या किसी मामूली वजह मानकर टाल देते हैं. लेकिन नाखूनों का अचानक सफेद दिखना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?

लीवर की बीमारी का संकेत 

अगर आपके नाखून पूरी तरह सफेद हो गए हैं और सिरों पर हलका गुलाबी रंग है, तो यह लिवर सिरोसिस या हेपेटाइटिस का संकेत हो सकता है. इसमें शरीर का ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और नाखूनों में ऑक्सीजन की कमी आने लगती है. 

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खून की कमी 

अक्सर आयरन की कमी या एनीमिया की स्थिति में भी नाखूनों का रंग फीका या सफेद नजर आने लगता है. अगर आपको थकान, चक्कर और सांस फूलने जैसी शिकायत भी हो रही है, तो तुरंत खून की जांच कराएं. 

किडनी की खराबी

किडनी जब सही से काम नहीं करती, तो शरीर से टॉक्सिन्स नहीं निकल पाते. इससे नाखूनों का रंग सफेद पड़ सकता है. खासतौर पर क्रोनिक किडनी डिजीज में यह लक्षण नजर आता है. 

डायबिटीज और लो प्रोटीन लेवल

कुछ मामलों में लो प्रोटीन डाइट या डायबिटीज के चलते भी नाखूनों में बदलाव आने लगते हैं. शरीर में पोषण की कमी सीधे नाखूनों पर असर डालती है. 

फंगल इंफेक्शन या चोट

अगर नाखून का कुछ हिस्सा ही सफेद हो रहा है, तो हो सकता है कि वहां फंगल इंफेक्शन हो या पहले कभी चोट लगी हो. ऐसी स्थिति में नाखून की बनावट भी बदल सकती है. 

लक्षण दिखने पर क्या करें? 

नजरअंदाज न करें– अगर यह सफेदपन लंबे समय तक बना रहता है या बढ़ता जा रहा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. 

ब्लड टेस्ट कराएं- एनीमिया, लिवर फंक्शन और किडनी फंक्शन की जांच ज़रूरी है. 

पोषण युक्त आहार लें– आयरन, प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर डाइट लें. 

हाइजीन का ध्यान रखें– फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए नाखूनों को साफ रखें और गीले हाथों में देर तक न रहें. 

नाखूनों के रंग में बदलाव एक अलार्म की तरह है जिसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है. ये शरीर की अंदरूनी सेहत को बाहर दिखाने का तरीका है. इसलिए अगली बार जब आपके नाखूनों में सफेदी नजर आए, तो सजावट के बजाय सेहत की तरफ ध्यान दें. 

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लू लगने से कैसे बचाता है कच्चा प्याज, जानें कब और कितनी बार खाना है सही?

लू लगने से कैसे बचाता है कच्चा प्याज, जानें कब और कितनी बार खाना है सही?



<p style="text-align: justify;">गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा लू लगने का होता है. इस दौरान शरीर का तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर, डिहाईड्रेशन और कई मामलों में तो मौत तक का खतरा मंडराने लगता है. भारत में हर साल हजारों लोग लू की चपेट में आते हैं. ऐसे में कच्चे प्याज को लू से बचाने का पारंपरिक और रामबाण इलाज माना जाता है. आइए जानते हैं कि कच्चा प्याज लू से कैसे बचाता है? इसे कब और कितनी बार खाना सही होता है?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों खतरनाक होती है लू?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लू को मेडिकल टर्म में हीट स्ट्रोक भी कहते हैं. लू लगने पर शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है और शरीर इसे नियंत्रित नहीं कर पाता. 2025 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, लू के कारण दिमाग, दिल, गुर्दे, और मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है. बुखार, थकान, चक्कर, पसीना बंद होना और बेहोश होना लू के लक्षण हैं. गर्मियों में कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को इसका खतरा काफी ज्यादा होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लू से कैसे बचाता है कच्चा प्याज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरीर को देता है ठंडक:</strong> कच्चे प्याज में कई ऐसे पोषक तत्व और यौगिक होते हैं, जो लू से बचाव में मदद करते हैं. दरअसल, कच्चे प्याज की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के इंटरनल तापमान को कंट्रोल करने में मदद करती है. प्याज में मौजूद सल्फर यौगिक और क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में गर्मी को कम करते हैं. यह लू के कारण होने वाली थकान और बेचैनी को कम करने में असरदार होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाइड्रेशन बनाए रखता है:</strong> प्याज में करीब 89 परसेंट पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. गर्मियों में डिहाईड्रेशन लू का प्रमुख कारण है. कच्चा प्याज खाने से न केवल पानी की पूर्ति होती है, बल्कि इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में फ्लूड का बैलेंस बनाए रखते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इम्यूनिटी बढ़ाता है:</strong> कच्चे प्याज में विटामिन सी, बी6, और फोलेट काफी ज्यादा होता है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. ICMR की 2025 की रिसर्च के अनुसार, विटामिन सी व्हाइट ब्लड सेल्स के प्रॉडक्शन को बढ़ाता है, जो शरीर को लू से होने वाले इंफेक्शन से बचने में मदद मिलती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पाचन तंत्र को बनाता है बेहतर:</strong> गर्मियों में पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, गैस और बदहजमी आम हो जाती हैं, जो लू के खतरे को बढ़ा सकती हैं. कच्चे प्याज में मौजूद फाइबर और प्रीबायोटिक्स आंतों को हेल्दी रखते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं. यह शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कब और कितनी बार खाना चाहिए कच्चा प्याज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह के समय कच्चा प्याज खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. यह पाचन तंत्र को एक्टिव करता है और शरीर को दिनभर लू से बचाने के लिए तैयार करता है. हालांकि, मुंह की बदबू से बचने के लिए इसके बाद पुदीने की पत्तियां चबाएं. सलाद के रूप में कच्चा प्याज दोपहर के खाने में शामिल करें. नींबू का रस, नमक और काली मिर्च डालकर खाने से इसके पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है. यह समय लू के खतरे को कम करने के लिए बेस्ट है. रात में कच्चा प्याज खाने से बचें, क्योंकि इससे कुछ लोगों को गैस, ब्लोटिंग या नींद में परेशानी हो सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/urinating-after-intercourse-does-not-affect-pregnancy-2961477">शारीरिक संबंध बनाने के बाद तुरंत टॉयलेट जाने से क्या नहीं होती है प्रेग्नेंसी? जानें क्या है सच</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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शारीरिक संबंध बनाने के बाद तुरंत टॉयलेट जाने से क्या नहीं होती है प्रेग्नेंसी? जानें क्या है सच

शारीरिक संबंध बनाने के बाद तुरंत टॉयलेट जाने से क्या नहीं होती है प्रेग्नेंसी? जानें क्या है सच



<p style="text-align: justify;">शारीरिक संबंध बनाने के बाद पेशाब जाने से प्रेग्नेंसी के चांसेंस कम हो जाते हैं. ये एक ऐसी धारणा है, जो अ​धिकतर महिलाओं के मन में रहती है. यूरिन आने की ​स्थिति में भी शारीरिक संबंध बनाने के बाद महिलाएं बेड से नहीं उठतीं. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है. या सिर्फ एक मिथक है, जो महिलाओं के मन में घर किए हुए है. आइए जानते हैं इसका सच…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्रेग्नेंसी पर पड़ता है असर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो शारीरिक संबंध बनाने के बाद पेशाब जाने से प्रेग्नेंसी पर कोई असर नहीं पड़ता. ऐसा करने से प्रेग्नेंसी होने या इसको रोकने में कोई मदद नहीं मिलती है. सामान्य ताैर पर मेल में से एक इजैकुलेशन में 4 से 5 एमएल सीमेन निकलता है. इनमें से कुछ सीमेन शारीरिक संबंध के बाद अपने आप ही वजाइना से बाहर आ जाता है और कुछ अंदर रह जाता है. प्रेग्नेंसी के लिए सीमेन में पाया जाने वाला स्पर्म अहम होता है. ऐसे में शारीरिक संबंध बनाने के बाद वजाइना में सीमेन बाहर निकलता है. स्पर्म वजाइना की दीवार पर चिपक जाते हैं. इसलिए पेशाब करते समय सीमेन का कुछ हिस्सा तो बाहर आ सकता है, लेकिन सभी स्पर्म बाहर आ जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है. इसलिए सेक्स के बाद पेशाब करना गर्भनिरोध का तरीका नहीं हो सकता है और न ही इससे प्रेग्नेंसी की संभावनाओं पर असर पड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये हो सकता है फायदा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सच ये है कि पुरुषों से इसको कोई फायदा नहीं होता. हालांकि महिलाओं के लिए ऐसा करना कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है. बहुत सारे बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट और यूरेथ्रा के जरिए ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं, जो यूटीआई का कारण बनते हैं. पेशाब करने से यूरिनरी ट्रैक्ट की सफाई हो जाती है, जिससे कुछ हद तक यूटीआई का खतरा कम हो सकता है. ऐसे में महिलाओं के लिए पेशाब करना और वजाइना एरिया की सफाई करना अच्छी आदत हो सकती है. लेकिन न करने के कुछ नुकसान नहीं हैं. हां, जिन महिलाओं को यूटीआई बहुत जल्दी होता है, उनके लिए ये आदत अच्छी साबित हो सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या बीमारियों से बचाता है ये तरीका?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पेशाब जाना क्या शारीरिक संबंध से होने वाली एसटीडी (सेक्सुअल ट्रांसमिशन डिजीज) से बचाने में मदद कर सकता है. इसको लेकर लोगों के मन में कई तरह के ​मिथक रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये तरीका शारीरिक संबंध बनाने से ट्रांसफर होने वाली बीमारियों को नहीं रोक सकता. एसटीडी मुख्य रूप से वायरस से फैलती है और पेशाब करने से ट्रांसफर हुए वायरस नहीं बाहर निकल सकते. ऐसे में इसको लेकर अवेयर रहने की जरूरत है. मन में से ये धारणा हटाने देनी चाहिए कि असुरक्षित यौन संबंध के बाद पेशाब कर लेने से बीमारियों का खतरा कम हो जाएगा. इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए कंडोम सबसे बेहतर उपाय है, इसलिए इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/taste-of-mango-make-you-sick-dangerous-chemical-can-cause-death-2960769">आम का स्वाद भी कर सकता है आपको बीमार, इस खतरनाक केमिकल से जा सकती है जान</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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किचन में रखा ये मसाला होता है सबसे ज्यादा गरम… गर्मियों में सोच-समझकर करें इस्तेमाल

किचन में रखा ये मसाला होता है सबसे ज्यादा गरम… गर्मियों में सोच-समझकर करें इस्तेमाल


भारतीय किचन मसालों का खजाना होती है. तरह-तरह के ये मसाले न सिर्फ अपने औषधीय गुणों के लिए पहचाने चाते हैं, ब​ल्कि व्यंजनों को भी स्वाद देते हैं. डिशेज में इन मसालों की सुगंध का हर कोई दीवाना होता है. ऐसा ही एक मसाला होता है गरम मसाला. कई साबुत मसालों को पीसकर तैयार किए जाने वाले इस मसाले के बिना किचन अधूरी सी लगती है तो व्यंजनों का स्वाद फीका महसूस होता है. लेकिन गर्मी में ये मसाला मुसीबत बन सकता है. आइए जानते हैं गर्मी में इस मसाले से किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है…

गरम मसाले का इस्तेमाल

घर हो या होटल, वेज हो या नाॅनवेज…अ​धिकतर डिश में गरम मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इस मसाले का यूज व्यंजनों के स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. इस मसाले की सुगंध इस कदर होती है कि दूर खड़े व्य​क्ति के मुंह भी पानी आ जाता है. वह व्यंजन टेस्ट करे बिना खुद को नहीं रोक पाता है.

कैसे तैयार होता है गरम मसाला?

गरम मसाले में कई अलग-अलग प्रकार के मसाले शामिल होते हैं. इनमें काली मिर्च, जीरा, धनिया, लौंग, इलायची, दालचीनी, जायफल, जावित्री, तेजपत्ता आदि प्रमुख होते हैं. इस मसाले में कई बार सौंफ के बीज, लाल मिर्च या काली इलायची भी डाली जाती है. गरम मसाला तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अ​धिकांश मसालों की तासीर गरम होती है. ऐसे में गर्मी में इस मसाले के अ​धिक सेवन से शरीर पर असर पड़ सकता है. तबीयत बिगड़ सकती है.

गर्मी में गरम मसाले का दिख सकता है ये प्रभाव

  • छाती में जलन: अगर गर्मी में अ​धिक गरम मसाले का सेवन करते हैं तो इससे एसिडिटी की प्राॅब्लम हो सकती है. जिससे छाती में जलन के साथ हार्ट बर्न की समस्या से जूझना पड़ सकता है.
  • बिगड़ सकता है डाइजेशन: गरम मसाला गर्मी में पेट का डाइजेशन सिस्टम बिगाड़ सकता है. ऐसे में इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना उचित रहता है.
  • पाइल्स: गर्मी में अ​धिक गरम मसाला शरीर में पाइल्स की प्राॅब्लम की वजह बन सकता है. अगर पहले से ऐसे कोई लक्षण हैं तो इसके सेवन से बचना चाहिए. नहीं तो दिक्कत अ​धिक बढ़ सकती है.
  • ओरल हेल्थ: गरम मसालों का अधिक सेवन ओरल हेल्थ को खराब कर सकता है. इसकी वजह से मसूड़ों की समस्याएं भी हो सकती हैं. जैसे कि मसूड़ों में सूजन, दर्द, और संक्रमण आदि. हालांकि सीमित मात्रा में गरम मसाले का सेवन दांतों से कैविटी दूर करने में मदद कर सकता है.
  • उल्टी की समस्या: गरम मसालों जैसे कि मिर्च, लौंग, धनिया, बड़ी इलाइची और छोटी इलायची, जब अधिक मात्रा में उपयोग किए जाते हैं, तो वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये मसाले जी मिचलाना, उल्टी, और दर्द का कारण बन सकते हैं.

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Sea Buckthorn: ‘सी बकथॉर्न’ छोटा फल लेकिन बड़े फायदे, जानिए इसके स्वास्थ्य लाभ

Sea Buckthorn: ‘सी बकथॉर्न’ छोटा फल लेकिन बड़े फायदे, जानिए इसके स्वास्थ्य लाभ


सी बकथॉर्न के फायदे: आज के भाग भरी रेस में हम अपनी-अपनी जगह को अंतिम रूप दे सकते हैं. समय की कमी और असंतुलित भोजन की वजह से हमारे शरीर में विटामिन, पोषक तत्वों और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे हमारी सेहत धीरे-धीरे बढ़ती है.

सी बकथॉर्न क्या है?

बक सीथॉर्न एक औषधीय पौधा है. बकथॉर्न का नाम पता ही है अगर आप सोच रहे हैं कि इस समुद्र में कोई पौधा है, तो आप गलत हैं. असल, समुद्र में नहीं बल्कि भारत के पहाड़ी इलाकों जैसे हिमाचल, उत्तराखंड, लेह और नींद में पाया जाता है. इसके छोटे-छोटे पोषक तत्व पोषक तत्वों की अधिकता होती है. इसका उपयोग फल आयुर्वेद, ग्रीक और आधुनिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जा रहा है. दिखने में छोटा होने के बावजूद यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है और शरीर को जरूरी पोषण देता है.

बक सीथॉर्न: दिल, पारा और शुगर के लिए पागल

अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, सी बकथॉर्न में बायोऑक्साइक कंपनी के यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए काफी चमत्कारी होते हैं. यह फल दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है. साथ ही, यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी सहायक है और कैंसर से बचाव की क्षमता रखता है. इसके अलावा, लॉन्च की रक्षा करना भी बहुत जरूरी माना गया है.

त्वचा और सेहत के लिए वरदान है सी बकथॉर्न
सी बकथॉर्न में विटामिन C, E, बीटा-कैरोटीन, ओमेगा फैटी एसिड और कई एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. यह फल खासकर त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है — यह झुर्रियों को कम करता है, त्वचा को निखारता है और ड्राई स्किन या एक्जिमा जैसी समस्याओं में राहत देता है. साथ ही, यह सूरज की हानिकारक किरणों से भी रक्षा पकरता है.

इम्यूनिटी और पाचन तंत्र को मजबूत करता है

सी बकथॉर्न पाचन की परेशानी जैसे गैस, कब्ज और अपच में भी राहत देता है. यह आंतों की सूजन को कम करता है और खाना पचाने में मदद करता है. इसमें मौजूद ओमेगा-7 आंखों की सूखापन की समस्या में भी बहुत उपयोगी है.

महिलाओं के लिए खास फायदेमंद

सी बकथॉर्न महिलाओं के हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है. खासतौर पर मेनोपॉज के समय होने वाले मूड स्विंग, गर्मी लगना और थकान जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर को ताकत और ऊर्जा देने का भी काम करता है.

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