ये 5 सिग्नल नजर आएं तो समझ लें ब्रेस्ट में कैंसर ने बना लिया घर, इन तरीकों से ही बच पाएगी जान

ये 5 सिग्नल नजर आएं तो समझ लें ब्रेस्ट में कैंसर ने बना लिया घर, इन तरीकों से ही बच पाएगी जान



<p style="text-align: justify;">दुनियाभर में सामने आ रहे कैंसर के केसेज में से ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख है. ये तेजी से महिलाओं को चपेट में ले रहा है. ब्रेस्ट में ट्यूमर बन जाता है, जो समय से डाग्नोज और ट्रीटमेंट नहीं होने के चलती शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है. ये ​​स्थिति जानलेवा हो सकती है. अगर शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का पता लगा लिया जाए तो पूरी तरह इसका इलाज संभव है. कुछ ऐसे कारण हैं, जो इस कैंसर के बाॅडी में डेवलप होने का रिस्क बढ़ाते हैं. आइए उनके बारे में जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीढ़ी दर पीढ़ी दाैड़ता है ये जीन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जेनेटिक म्यूटेशन बाॅडी में ब्रेस्ट कैंसर की एक प्रमुख वजह है. इसमें बाॅडी में पाए जाने वाले बीआरसीए 1 और बीआरसीए 2 जीन्स में बदलाव देखने को मिलता है. ये जीन्स सामान्य ताैर पर कैंसर से बचाव करते हैं. लेकिन जब ये म्यूटेट होते हैं तो रिस्क बढ़ा देते हैं. बीआरसीए-1 जहां 72 परसेंट तो वहीं बीआरसीए-2 69 परसेंट तक ब्रेस्ट कैंसर डेवलप होने का रिस्क बढ़ा सकता है. इस म्यूटेशन के चलते युवा अवस्था में कैंसर होने का खतरा रहता है. क्योंकि ये जीन्स फैमिली में रन करता है. फैमिली में किसी को ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर होने पर अ​धिक सतर्क रहने की जरूरत है. इस रिस्क को कम करने के लिए जेनेटिक टे​स्टिंग की सलाह दी जाती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लाइफस्टाइल की वजह से बढ़ता है खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लाइफस्टाइल कई हेल्थ इश्यूज की वजह बनता है. लेकिन ये ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी बढ़ाता है. अ​धिक वजन और मोटापा से बाॅडी में फैट​ टिश्यू अ​धिक एस्ट्रोजन हार्मोन बनाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बन सकता है. 40 से 49 की उम्र में महिलाओं में ये दिक्कत प्रमुख रूप से देखने को मिलती है. साथ ही स्मोकिंग एक और बढ़ा रिस्क है. ब्रेस्ट के सेल डैमेज होने लगते हैं, इससे कैंसर का जो​खिम बढ़ जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हार्मोनल एंड रिर्पोड​क्टिव फैक्टर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हार्मोन्स में बदलाव कई दिक्कतों का कारण बनता है. ये कैंसर के रिस्क को भी बढ़ाता है. मासिक धर्म जल्दी आना, देर से मेनोपाॅज या लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने से बाॅडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो ब्रेस्क कैंसर का जो​खिम बढ़ा सकते हैं. जल्दी बच्चे होना और ब्रेस्ट फीडिंग की प्रक्रिया इस रिस्क को कम करती है. वहीं हार्मोनल गर्भनिरोधक भी रिस्क को बढ़ा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटीज भी ​होती है ट्रिगर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के अनुसार ऐसी महिलाएं जो डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस की ​शिकार हैं, उनमें मेनोपाॅज के बाद ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है. बाॅडी में मोटापा और खराब मेटाबाॅलिज्म से बाॅडी में हार्मोन संतुलन बिगड़ता है, जो कैंसर का रिस्क बढ़ाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आसपास के माहौल का असर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हमारे आसपास का वातावरण भी ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को बढ़ाता है. आयोनाइजिंग रेडिशन, चेस्ट रेडियोथेरेपी से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है. साथ ही प्ला​स्टिक और काॅस्मेटिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल से शरीर में हार्मोन बैलेंस बिगड़ता है, जिससे ब्रेस्ट का खतरा पैदा हो सकता है.</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-do-eyes-start-twitching-is-this-a-disease-or-a-sign-of-good-or-bad-luck-2959001">क्यों फड़कने लगती हैं आपकी आंखें, ये कोई बीमारी है या शुभ-अशुभ के संकेत?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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फेफड़ों की सारी गंदगी झट से हो जाएगी बाहर, घर में रखें डिटॉक्स करने वाली ये पांच चीजें

फेफड़ों की सारी गंदगी झट से हो जाएगी बाहर, घर में रखें डिटॉक्स करने वाली ये पांच चीजें


Lungs Detox Home Remedies: आपकी सांसें सिर्फ हवा नहीं खींच रहीं, वे जिंदगी का हर पल आप तक ला रही हैं. लेकिन क्या हो अगर यही सांसें धूल, धुएं और जहरीली गैसों से भरी हों? आजकल का प्रदूषण, स्मोकिंग की आदत, या यहां तक कि रसोई का धुआं, सब हमारे फेफड़ों को धीरे-धीरे जकड़ रहे हैं. फेफड़े हमारे शरीर के फिल्टर की तरह होते हैं. लेकिन जब ये फिल्टर गंदगी से भर जाएं, तो ना सिर्फ सांसें भारी लगती हैं, बल्कि शरीर थकान, खांसी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याओं से भी जूझने लगता है।अब सवाल ये उठता है कि, क्या इसे साफ किया जा सकता है या फिर इसका कुछ नहीं हो सकता…

ये भी पढ़े- चोट लगने पर आप भी झट से करने लगते हैं सिकाई? जानिए कहां होती है गर्म और ठंडी सिकाई

अदरक 

अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व फेफड़ों की सूजन कम करते हैं. यह बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है और सांस लेने में आसानी होती है. 

अदरक की चाय पिएं

रोज़ाना थोड़ी मात्रा में कच्चा अदरक खाएं

शहद के साथ लेने से असर बढ़ता है

नींबू

नींबू विटामिन C से भरपूर होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है. 

गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर रोज़ सुबह खाली पेट पिएं

चाहें तो इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं

तुलसी 

तुलसी को आयुर्वेद में फेफड़ों के लिए अमृत कहा गया है.  इसमें मौजूद यूजेनॉल नामक तत्व संक्रमण से लड़ता है और श्वसन नली को साफ रखता है. 

तुलसी की पत्तियां चबाएं

तुलसी की चाय बनाएं

तुलसी के अर्क को शहद के साथ लें

हल्दी 

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन फेफड़ों की गहराई से सफाई करता है और संक्रमण से बचाता है. इसका एंटीऑक्सिडेंट गुण टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालता है. 

हल्दी वाला दूध रात को सोने से पहले पिएं

गुनगुने पानी में हल्दी और नींबू मिलाकर डिटॉक्स ड्रिंक बनाएं

लहसुन 

लहसुन बलगम तोड़ता है, फेफड़ों की सफाई करता है और बैक्टीरिया से लड़ता है. इसमें मौजूद एलिसिन एक नेचुरल एंटीबायोटिक की तरह काम करता है. 

खाली पेट कच्ची लहसुन की एक या दो कलियां खाएं

शहद के साथ मिलाकर खाएं तो और भी फायदेमंद

आपके फेफड़े हर सांस के साथ ज़िंदगी भरते हैं तो क्या उन्हें थोड़ी केयर नहीं चाहिए? इन पांच घरेलू चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें और फेफड़ों को दें एक नई ताजगी. दवाइयों के भरोसे मत बैठिए, डिटॉक्स की शुरुआत अपने किचन से कीजिए. 

ये भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने बना ली कैंसर की दवा, जानिए थर्ड स्टेज के कैंसर में कितनी कारगर ये वैक्सीन?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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चोट लगने पर आप भी झट से करने लगते हैं सिकाई? जानिए कहां होती है गर्म और ठंडी सिकाई

चोट लगने पर आप भी झट से करने लगते हैं सिकाई? जानिए कहां होती है गर्म और ठंडी सिकाई


Fomentation for Body Pian: आप खेल रहे हैं, चल रहे हैं या बस घर का कोई सामान उठा रहे हैं। अचानक पैर मुड़ गया या हाथ में झटका लग गया. दर्द उठा और आप झट से तौलिया गर्म पानी में डुबोकर सिकाई करने लगते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हर चोट पर गर्म सिकाई करनी चाहिए या कहीं ठंडी सिकाई का असर होता है. अक्सर देखा गया है कि चोट लगते ही लोग बिना सोचे-समझे गर्म या ठंडी पट्टी लगाना शुरू कर देते हैं। ये आदत नुकसान भी पहुंचा सकती है अगर सही तरीके से न की जाए तो कोई फर्क भी नहीं पड़ता है. 

कभी खेलते वक्त, कभी गिरते वक्त या अचानक किसी चीज से टकरा जाने पर, चोट लग जाती है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि, हर बार ठंडी या गर्म सिकाई ठीक रहेगी. क्योंकि हर चीज के लिए अलग-अलग सिकाई लग सकती है. 

ये भी पढ़े- ब्रेकफास्ट में इस सफेद चीज को खाने से लिवर हो सकता है खराब, कहीं आप तो नहीं कर रहे खाने की गलती

ठंडी सिकाई 

जब चोट नई हो और उसमें सूजन या लालिमा दिखाई दे रही हो, तब ठंडी सिकाई सबसे असरदार होती है. 

कब करें ठंडी सिकाई

मोच या खिंचाव आने पर 

सूजन वाली चोट होने पर 

सिर पर चोट लग जाए 

मांसपेशियों में अचानक झटका

किसी जगह में जलन या झुनझुनाहट

बर्फ को कपड़े में लपेटकर 15 मिनट तक चोट वाली जगह पर रखें. सीधे त्वचा पर बर्फ न लगाएं. 

गर्म सिकाई 

जब चोट पुरानी हो गई हो या मांसपेशियों में अकड़न महसूस हो रही हो, तब गर्म सिकाई राहत देती है. 

कब करें गर्म सिकाई:

पुरानी चोट या मोच होने पर कर सकते हैं

मांसपेशियों में जकड़न

पीठ या गर्दन का दर्द

जोड़ों का दर्द 

गर्म पानी में कपड़ा डुबाकर निचोड़ें और प्रभावित हिस्से पर 15 मिनट तक रखें. ज्यादा गर्म न हो वरना जलन हो सकती है. 

गलत सिकाई से बढ़ सकता है दर्द

अगर नई चोट पर गर्म सिकाई कर दी जाए, तो सूजन और दर्द दोनों बढ़ सकते हैं. इसी तरह, पुरानी अकड़न पर ठंडी सिकाई करने से राहत नहीं मिलेगी बल्कि जकड़न बढ़ सकती है. 

हर चोट की अपनी प्रकृति होती है और हर सिकाई का अपना सही समय. ठंडी सिकाई जल्दी लगी चोटों और सूजन में फायदेमंद होती है, जबकि गर्म सिकाई पुरानी चोटों और मांसपेशियों की जकड़न में काम आती है. अगली बार जब चोट लगे तो सिकाई करने से पहले एक बार सोचिए, गर्म चाहिए या ठंडी? सही चुनाव ही सही इलाज है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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चाहकर भी नहीं छूट रही अश्लील वीडियो देखने की लत, जानें कितनी खतरनाक स्टेज पर हैं आप?

चाहकर भी नहीं छूट रही अश्लील वीडियो देखने की लत, जानें कितनी खतरनाक स्टेज पर हैं आप?



<p style="text-align: justify;">इंटरनेट और स्मार्टफोन्स ने पोर्नोग्राफी को हर उम्र और वर्ग के लोगों तक पहुंचा दिया है, लेकिन यह एक ऐसी आदत है, जो लत में बदल जाती है. साथ ही, इसका असर सिर्फ मानसिक और शारीरिक ही नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक जीवन पर गहरा असर डाल सकती है. आइए जानते हैं कि अगर चाहकर भी आप पोर्न देखने की लत से छुटकारा नहीं पा रहे हैं तो आप कितनी गंभीर हालत में पहुंच चुके हैं?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पोर्न देखने की लत क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पोर्न देखने की लत एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति बार-बार और अनियंत्रित रूप से पोर्नोग्राफी देखने के लिए मजबूर हो जाता है. साइकोलॉजी टुडे में पब्लिश 2021 की एक रिसर्च के मुताबिक, यह लत उन लोगों में बेहद आम है, जो तनाव, अकेलापन या नेगेटिव इमोशंस से बचने के लिए पोर्न का सहारा लेते हैं. इससे न सिर्फ मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है, बल्कि रिश्तों, कामकाजी जिंदगी और फिजिकल हेल्थ भी बुरी तरह प्रभावित होती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पोर्न देखने की लत की खतरनाक स्टेज</strong></p>
<p style="text-align: justify;">क्योरियस जर्नल (2023) की रिसर्च के मुताबिक, पोर्न देखने की लत को चार प्रमुख स्टेज में बांटा जा सकता है, जिससे इसकी गंभीरता का पता चलता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुरुआती स्टेज:</strong> इस दौरान व्यक्ति जिज्ञासा, ऊबन या यौन इच्छाओं को समझने के लिए पोर्न देखना शुरू करता है. शुरुआत में इसका कोई नुकसान नजर नहीं आता, क्योंकि उस वक्त इसे मनोरंजन या टेंशन कम करने का साधन माना जाता है. इस स्टेज में व्यक्ति कभी-कभार पोर्न देखता है और इसे कंट्रोल कर सकता है. हालांकि, बार-बार पोर्न देखने की आदत इसे अगली स्टेज में ले जा सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नियमित इस्तेमाल:</strong> यह पोर्न देखने की दूसरी स्टेज है, जिसमें यह डेली रुटीन का हिस्सा बन जाता है. अगर कोई शख्स तय समय जैसे रात में या अकेले होने पर पोर्न देखने की आदत डाल लेता है तो यह आदत टेंशन, चिंता या अकेलेपन से निपटने का तरीका बन जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लत लगना:</strong> पोर्न देखने की यह स्टेज सबसे खतरनाक होती है. &nbsp;इस स्टेज में व्यक्ति बिना अश्लील वीडियो देखे रह नहीं पाता है. इस स्टेज में दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम इतना प्रभावित हो जाता है कि व्यक्ति को अश्लील वीडियो देखने की हर हाल में जरूरत होती है. यह लत रिश्तों, नौकरी और सेल्फ कॉन्फिडेंस को नुकसान पहुंचाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गंभीर लत लगना:</strong> इस स्टेज में व्यक्ति पूरी तरह से पोर्न पर निर्भर हो जाता है और इसे छोड़ने में असमर्थ होता है. इस लत से अवसाद और चिंता जैसे मानसिक रोग बढ़ सकते हैं. वहीं, कई मामलों में यौन अपराध जैसे केस भी देखने को मिलते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पोर्न की लत से छुटकारा पाने के तरीके</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने कई रिसर्च के आधार पर पोर्न की लत से छुटकारा पाने के लिए तरीके बताए हैं. आइए आपको बारे में बताते हैं.&nbsp;</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>ट्रिगर्स की पहचान करें:</strong> पोर्न देखने की इच्छा के पीछे की वजह को समझना जरूरी है. अगर आप तनाव, अकेलेपन या ऊबन की वजह पोर्न देख रहे हैं तो इन पर काम करके इस लत से छुटकारा पा सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन टाइम कम करें:</strong> मोबाइल और कंप्यूटर से पोर्न सामग्री को हटाकर आप पीड़ित शख्स को अश्लील वीडियो से दूर कर सकते हैं. हालांकि, &nbsp;इस कवायद में रोजाना इंटरनेट हिस्ट्री चेक करनी जरूरी होती है.&nbsp;</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हेल्दी एक्टिविटीज में रहें व्यस्त:</strong> अगर आपके पास खाली समय काफी ज्यादा है तो खेलकूद, योग या कोई क्रिएटिव कार्य जैसे पेंटिंग या राइटिंग आदि करें. इससे दिमाग व्यस्त रहता है और अश्लील सामग्री देखने की तलब कम लगती है.&nbsp;</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डॉक्टर से लें सलाह:</strong> अगर अश्लील वीडियो देखने की लत नहीं छूट रही है तो मनोचिकित्सक या थेरेपिस्ट से संपर्क करें। दरअसल, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और माइंडफुलनेस-बेस्ड थेरेपी से अश्लील वीडियो देखने की लत से छुटकारा मिल सकता है.</li>
</ul>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-do-eyes-start-twitching-is-this-a-disease-or-a-sign-of-good-or-bad-luck-2959001">क्यों फड़कने लगती हैं आपकी आंखें, ये कोई बीमारी है या शुभ-अशुभ के संकेत?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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क्यों फड़कने लगती हैं आपकी आंखें, ये कोई बीमारी है या शुभ-अशुभ के संकेत?

क्यों फड़कने लगती हैं आपकी आंखें, ये कोई बीमारी है या शुभ-अशुभ के संकेत?



<p style="text-align: justify;">जब भी आंख फड़कती है तो इसे शुभ या अशुभ के संकेत से जोड़कर देखा जाता है. भारत में यह बात बेहद आम है, लेकिन क्या आपको पता है कि आंखों के फड़कने की वजह एक बीमारी है? अगर नहीं तो आइए आपको इसके बारे में बताते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन वजहों से फड़कती है आंख</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आंखों के फड़कने को मेडिकल टर्म में मायोकिमिया कहते हैं. पलक की मांसपेशियों में संकुचन के कारण आंख फड़कने लगती है. यह आमतौर पर ऊपरी पलक में होता है, लेकिन निचली पलक भी प्रभावित हो सकती है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS) के अनुसार, यह स्थिति ज्यादातर हल्की होती है और कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहती है. जब काफी देर तक आंख फड़कती रहे तो इसका ताल्लुक किसी बीमारी से हो सकता है. आइए जानते हैं कि किन-किन वजहों से आंख फड़क सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तनाव और चिंता:</strong> मॉडर्न लाइफस्टाइल में टेंशन बेहद आम समस्या है. 2023 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, टेंशन से दिमाग का न्यूरोट्रांसमीटर बैलेंस प्रभावित होता है, जिससे पलक की मांसपेशियों में अनैच्छिक संकुचन हो सकता है. वर्कप्लेस पर प्रेशर, पारिवारिक तनाव या फाइनेंशनल टेंशन के कारण आंख फड़कने की दिक्कत बढ़ सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नींद की कमी:</strong> पर्याप्त नींद न मिलने से भी आंखों में फड़कने की दिक्कत होने लगती है. स्लीप रिसर्च सोसायटी की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 7-9 घंटे से कम नींद लेने वाले लोगों में मायोकिमिया की दिक्कत 40 फीसदी ज्यादा होती है. दरअसल, नींद की कमी से नर्वस सिस्टम पर प्रेशर बढ़ता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन और फड़कन शुरू हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैफीन और अल्कोहल का ज्यादा सेवन:</strong> कॉफी, चाय या एनर्जी ड्रिंक्स में पाया जाने वाला कैफीन और अल्कोहल नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करते हैं, जिससे आंखों की मांसपेशियां संवेदनशील हो सकती हैं. 2023 में फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, कैफीन के ज्यादा सेवन से मायोकिमिया का खतरा 30 फीसदी तक बढ़ सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आंखों पर प्रेशर:</strong> काफी देर तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन देखने से भी आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे फड़कन शुरू हो सकती है. 2024 में ऑप्थैल्मोलॉजी रिसर्च में पब्लिश एक स्टडी में देखा गया कि डिजिटल स्क्रीन पर 6 घंटे से ज्यादा वक्त बिताने वालों में आंखों के फड़कने की शिकायत 25 फीसदी ज्यादा मिली.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पोषक तत्वों की कमी:</strong> विटामिन बी12, मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी से भी नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे आंखों का फड़कना शुरू हो सकता है. दरअसल, विटामिन बी12 की कमी मायोकिमिया का प्रमुख कारण हो सकता है. शाकाहारी भोजन करने वालों में यह कमी बेहद आम है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ड्राई आईज और एलर्जी:</strong> 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ड्राई आईज की समस्या रहती है, जो आंखों के फड़कने का कारण बन सकती है. बता दें कि एलर्जी, खुजली और आंखों को बार-बार रगड़ने से हिस्टामिन रिलीज होता है, जो फड़कन को ट्रिगर कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं:</strong> कुछ मामलों में आंखों का फड़कना गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे ब्लेफेरोस्पाज्म या हेमिफेशियल स्पाज्म का सिग्नल हो सकता है. ब्लेफेरोस्पाज्म में दोनों आंखों की पलकें अनैच्छिक रूप से बंद हो सकती हैं, जबकि हेमिफेशियल स्पाज्म में चेहरे का एक हिस्सा प्रभावित होता है. मल्टीपल स्केलेरोसिस या पार्किंसंस रोग जैसी बीमारियां भी आंखों के फड़कने का कारण हो सकती हैं. ऐसे मामलों में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/can-you-get-hiv-even-after-using-condom-know-the-facts-and-myths-2958346">कंडोम इस्तेमाल करने के बाद भी हो सकता है HIV? जवाब सुनकर हैरान रह जाएंगे आप</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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