हाइमन वापस लाने के लिए भी हो रही है सर्जरी, जानें ये महिलाओं के लिए कितना सेफ

हाइमन वापस लाने के लिए भी हो रही है सर्जरी, जानें ये महिलाओं के लिए कितना सेफ


Hymen Surgery: “क्या पहली बार सेक्स से हाइमन टूटना जरूरी है?” “अगर हाइमन नहीं टूटा तो क्या मैं पवित्र नहीं मानी जाऊंगी?” ये सवाल आज भी कई लड़कियों के मन में डर और शर्म के साथ गूंजते हैं. भले ही हम 21वीं सदी में पहुंच चुके हों, लेकिन समाज का एक बड़ा तबका अब भी महिलाओं की “शुद्धता” को उनके शरीर के एक बेहद छोटे हिस्से, हाइमन से जोड़कर देखता है. यही सोच अब एक नया ट्रेंड बन चुकी है, हाइमन सर्जरी. 

क्या है हाइमन रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी?

हाइमन रीकंस्ट्रक्शन जिसे मेडिकल भाषा में हाइमेनोप्लास्टी कहा जाता है, एक छोटी सी सर्जरी होती है, जिसमें टूटे हुए हाइमन को दोबारा जोड़ा या नया बनाया जाता है. इस सर्जरी का उद्देश्य होता है कि अगली बार जब महिला यौन संबंध बनाए, तो ब्लीडिंग हो, जिससे “पहली बार” का भ्रम बना रहे. 

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क्यों करवा रही हैं महिलाएं ये सर्जरी?

सामाजिक दबाव: शादी से पहले सेक्स करने पर कई जगहों पर महिलाओं को अपमान या शक की नजरों से देखा जाता है. 

सम्मान की गलत परिभाषा: कुछ समुदायों में अब भी “पहली रात” को महिला की पवित्रता का टेस्ट माना जाता है. 

मानसिक संतुलन के लिए: कुछ महिलाएं इसे अपनी खोई पहचान वापस पाने के लिए किया जाता है. 

कितनी सुरक्षित है ये सर्जरी?

हाइमेनोप्लास्टी एक कम रिस्क सर्जरी मानी जाती है, अगर इसे किसी प्रशिक्षित और अनुभवी सर्जन द्वारा किया जाए. 

इसमें 30 से 45 मिनट का समय लगता है और लगभग 4 से 6 हफ्ते में पूरी तरह रिकवरी हो जाती है. 

दर्द, सूजन, या हल्का ब्लीडिंग जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, लेकिन यह अस्थायी होते हैं. 

क्या यह सही कदम है?

यह पूरी तरह महिला की पर्सनल चॉइस होनी चाहिए, किसी सामाजिक दबाव या डर की वजह से नहीं. हाइमन किसी की शुद्धता का पैमाना नहीं हो सकता. यह एक जैविक झिल्ली है, जो खेल, व्यायाम या अन्य गतिविधियों के कारण भी टूट सकती है. 

हाइमन रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी आजकल एक चलन बन चुकी है, लेकिन इसका निर्णय जानकारी, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के साथ लिया जाना चाहिए, न कि किसी डर या शर्म के कारण. सही डॉक्टर और सही सोच से यह प्रक्रिया सुरक्षित भी हो सकती है और मानसिक राहत भी दे सकती है. लेकिन समाज की सोच बदलना उससे भी ज्यादा जरूरी है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कंडोम इस्तेमाल करने के बाद भी हो सकता है HIV? जवाब सुनकर हैरान रह जाएंगे आप

कंडोम इस्तेमाल करने के बाद भी हो सकता है HIV? जवाब सुनकर हैरान रह जाएंगे आप


Condoms Prevent HIV: “मैंने तो कंडोम यूज़ किया था, फिर भी डर लग रहा है” ये बात कई लोगों के मन में कहीं न कहीं रहती है, खासकर जब बात एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी की हो. सेक्स के दौरान सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार माने जाने वाले कंडोम पर भरोसा तो सब करते हैं, लेकिन क्या ये पूरी गारंटी दे सकता है यानी क्या यह सुरक्षित है। 

बता दें, कंडोम का इ्स्तेमाल कई तरह से इंफेक्शन से बचने के लिए किया जाता है. साथ ही प्रेगनेंसी रोकने के लिए भी किया जाता है. लेकिन क्या एचआईवी की समस्या को रोकने के लिए ये कारगार साबित हो सकता है. 

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क्या कंडोम लगाने के बाद भी HIV हो सकता है?

कंडोम जब सही तरीके से और हर बार इस्तेमाल किया जाए, तो यह HIV से बचाव का एक बेहद प्रभावशाली तरीका है. लेकिन फिर भी कुछ स्थितियों में रिस्क बनी रहती  है. 

कब होता है रिस्क?

कंडोम का फटना या फिसलना

अगर सेक्स के दौरान कंडोम फट जाए या बीच में फिसल जाए, तो HIV वायरस का ट्रांसफर संभव हो सकता है. 

गलत तरीका अपनाना

कई लोग कंडोम को सेक्स के दौरान देर से पहनते हैं या निकालने में गलती कर बैठते हैं, जिससे रिस्क बढ़ जाता है. 

तेल या लोशन का इस्तेमाल

अगर आप तेल आधारित लुब्रिकेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ये लेटेक्स कंडोम को कमजोर कर सकता है और फटने की संभावना बढ़ा देता है. 

कंडोम की क्वालिटी या एक्सपायरी

सस्ते, नकली या एक्सपायर्ड कंडोम की वजह से भी सुरक्षा कमजोर हो सकती है. 

HIV से बचने के लिए सही तरीका क्या है?

हमेशा ब्रांडेड और सही तारीख वाला कंडोम खरीदें

सेक्स से पहले ही कंडोम पहनें, और सेक्स खत्म होने के बाद धीरे-धीरे निकालें

वाटर-बेस्ड लुब्रिकेंट्स का इस्तेमाल करें

कंडोम HIV से सुरक्षा देता है, लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं है. इसलिए सिर्फ कंडोम पर निर्भर रहना ही काफी नहीं है, बल्कि सही जानकारी, सतर्क व्यवहार और समय पर जांच भी जरूरी हैं. अगर आपको कभी भी शक हो कि आप रिस्क में हैं, तो डॉक्टर से मिलकर HIV टेस्ट या PEP ट्रीटमेंट की जानकारी जरूर लें. 

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जिम में कैसे खतरनाक हो सकता है डेडलिफ्ट? रीढ़ की हड्डी को पहुंच सकता है नुकसान

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Deadlift Injury Risk: “डेडलिफ्ट कर लो, बॉडी बन जाएगी!” जिम में अक्सर ये बात सुनने को मिलती है. भारी वजन उठाते समय खुद को ताकतवर महसूस करना और मसल्स का उभरना हर फिटनेस लवर का सपना होता है. लेकिन यह दमदार दिखने वाली एक्सरसाइज आपकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकती है? कई लोग बिना सही टेक्निक और ट्रेनिंग के जब डेडलिफ्ट करते हैं, तो वे अनजाने में अपनी पीठ की सेहत को दांव पर लगा देते हैं. 

क्या है डेडलिफ्ट?

डेडलिफ्ट एक कंपाउंड वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज है, जिसमें वजन को जमीन से उठाकर सीधा खड़ा होकर पकड़ा जाता है. यह बैक, फोरआर्म्स और कोर मसल्स को टारगेट करती है. सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत प्रभावी है, लेकिन जरा सी गलती भी भारी पड़ सकती है.

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गलत पोजिशनिंग

डेडलिफ्ट करते समय अगर आपकी कमर झुकी रहती है या पीठ सीधी नहीं होती, तो रीढ़ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे रीढ़ की हड्डी का खतरा बढ़ जाता है. 

जरूरत से ज्यादा वजन उठाना

खुद को साबित करने के चक्कर में जब लोग अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाते हैं, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और डिस्क पर चोट लग सकती है. 

वार्मअप ना करना

बिना वार्मअप करे मसल्स के साथ डेडलिफ्ट करने से मांसपेशियों में खिंचाव और पीठ दर्द की संभावना बहुत बढ़ जाती है. 

लगातार गलत फॉर्म में अभ्यास

अगर कोई व्यक्ति बार-बार गलत तकनीक से डेडलिफ्ट करता है, तो यह उसकी रीढ़ की हड्डी के लिए खतरा बन सकता है. 

डेडलिफ्ट ने रीढ़ को नुकसान पहुंचाया है?

पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द

खड़े होने या बैठने में परेशानी

टांगों में सुन्नपन या झनझनाहट

चलने-फिरने में रुकावट महसूस होना

कैसे करें डेडलिफ्ट को सुरक्षित तरीके से?

सर्टिफाइड ट्रेनर की निगरानी में ही डेडलिफ्ट करें

वजन धीरे-धीरे बढ़ाएं, कभी भी झटके में न उठाएं

हर बार पीठ सीधी, छाती बाहर और कोर टाइट रखें

प्रॉपर वॉर्मअप करें और बैक सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल करें

एक्सरसाइज के बीच में ब्रेक लेना जरूरी है

डेडलिफ्ट एक शानदार एक्सरसाइज़ है, लेकिन तभी जब इसे सही ढंग से किया जाए. अगर आपने टेक्निक को नजरअंदाज किया, तो यह आपके शरीर की रीढ़ की मजबूत नींव को ही हिला सकता है. इसलिए, फिटनेस की दौड़ में जल्दबाजी नहीं, समझदारी ज़रूरी है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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