15 सेकंड बदल देंगे आपकी जिंदगी! तनाव-चिंता और डिप्रेशन को दूर रखता है ‘वृक्षासन’

15 सेकंड बदल देंगे आपकी जिंदगी! तनाव-चिंता और डिप्रेशन को दूर रखता है ‘वृक्षासन’


Vrikshasana will Relieve Stress: अगर आप अपने जीवन से तनाव और चिंता को दूर और आत्मविश्वास में वृद्धि करना चाहते हैं तो आपको ‘वृक्षासन’ अपनाने की जरूरत है. इस योगासन को करने से सिर्फ आप तनाव और चिंता मुक्त नहीं होंगे, बल्कि आपकी दिनचर्या में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा.

तनाव, चिंता के लक्षणों को कम करने में प्रभावी है वृक्षासन

‘वृक्षासन’ से आप आत्मविश्वास के साथ किसी भी निर्णय को बिना किसी तनाव के ले सकेंगे. 2018 के एक रिसर्च में पाया गया कि योग तनाव, चिंता और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में प्रभावी है, क्योंकि यह पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है. चलिए इस ‘वृक्षासन’ के लाभों के बारे में विस्तार से समझते हैं.

वृक्ष शब्द का अर्थ है पेड़. इस आसन के अभ्यास की अंतिम अवस्था में शारीरिक स्थिति एक पेड़ के आकार की बनती है. इसलिए इस आसन को वृक्षासन का नाम दिया गया है. इसके अलावा, यह आसन पैरों को मजबूती प्रदान करता है और संतुलन बनाने में सहायक होता है.

इस योगासन के नियमित अभ्यास से टखनों, जांघों, पिंडलियों और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है. इसके साथ ही साथ कूल्हों और कमर के क्षेत्र में लचीलापन बढ़ता है. इस योग को करने से व्यक्ति में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में काफी सुधार होता है. यह योग रक्त परिसंचरण को बेहतर करता है और पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है.

वृक्षासन करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी

इस आसन को करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. वृक्षासन करते समय संतुलन बनाए रखने के लिए किसी दीवार का सहारा लें. कई बार शुरुआती दौर में आपको संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है. इसके अलावा इस आसन को शुरू करने से पहले डॉक्टर का परामर्श जरूर लें, अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं.

वृक्षासन शुरुआती तौर पर आप रोजाना 15-30 सेकंड तक कर सकते हैं. इसके लिए आप तय करें कि आप कम से कम इस आसन के दो से तीन सेट का अभ्यास करें. इस दौरान कुछ सेकंड का ठहराव भी ले सकते हैं. अगर आप संतुलन बनाने में सफल हो रहे हैं तो आसन करने के समय में वृद्धि करें. 30 सेकंड से इसे बढ़ाकर 1 मिनट तक कर लें. इस दौरान गहरी और स्थिर सांस लें. यह एकाग्रता और स्थिरता में मदद करता है.

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पथरी समेत कई बीमारियों में फायदेमंद है बालम खीरा, औषधीय गुणों से है भरपूर

पथरी समेत कई बीमारियों में फायदेमंद है बालम खीरा, औषधीय गुणों से है भरपूर


Balam Cucumber Beneficial in Diseases: अक्सर आपने सड़कों के किनारे टेंट लगाकर रहने वाले नट समुदाय के लोगों को देखा होगा, जो कुछ जड़ी-बूटियां बेचते हैं. इन्हीं वस्तुओं में से एक है बालम खीरा, जो देखने में तो आम खीरे जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह दुर्लभ और औषधीय गुणों से भरपूर फल है. बालम खीरे का पौधा धीरे-धीरे बड़ा होकर एक पेड़ का रूप ले लेता है. यह पेड़ पूरी तरह विकसित होने पर लगभग 15 से 20 मीटर तक ऊंचा हो सकता है. इसके पेड़ में खीरे जैसे फल लगते हैं.

बालम खीरे का फल, छाल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

बालम खीरे का फल, छाल और तना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं. इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, क्रोमियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में यह काफी मददगार साबित होते हैं. इसका फल सुखाकर चूर्ण तैयार किया जा सकता है, जिसका नियमित सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों में राहत मिलती है.

विशेष रूप से यह पथरी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद होता है. इसका चूर्ण शरीर में मौजूद पथरी को धीरे-धीरे काटकर बाहर निकालने में मदद करता है. किडनी स्टोन के मरीज के लिए बालम खीरे का काढ़ा रामबाण माना जाता है.

औषधीय गुणों से भरपूर होता है बालम खीरा

बालम खीरे के बीज की अगर हम बात करें, तो यह भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. यह कब्ज की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं. खीरे में प्रचुर मात्रा में पानी होता है, जो पेट को ठंडा और पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाए रखता है. गर्मियों में इसका सेवन शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. यह विटामिन, मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत है. बालम खीरे के इस्तेमाल की अगर हम बात करें, तो इसे सुखाकर चूर्ण या फिर ड्रिंक के रूप में उपयोग करना अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली होता है.

अगर शरीर में सूजन हो या मलेरिया जैसी कोई समस्या हो, तो बालम खीरे का रस उपयोगी हो सकता है. विशेष रूप से इसके रस को सुबह खाली पेट पीने से पीलिया जैसी बीमारियों में राहत मिलती है, क्योंकि इसमें क्लोरोक्वीन जैसा तत्व होता है जो पीलिया के उपचार में उपयोगी साबित होता है.

बालम खीरे के कुछ नुकसान

हालांकि, दूसरी तरफ इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिनसे सावधान रहना आवश्यक है. बालम खीरे का कच्चा फल जहरीला होता है और इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. इसमें कूक्रिबिटिन नामक विषैला तत्व होता है, जो अधिक मात्रा में शरीर में जाने पर लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए सर्दी, कफ या सांस संबंधी समस्या से जूझ रहे लोगों को रात के समय इसका सेवन करने से बचना चाहिए.

इसके अलावा, ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने से पेट में ऐंठन, गैस और ब्लड में पोटैशियम का स्तर बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो गंभीर स्थिति में किडनी फेलियर तक का कारण बन सकती हैं. गर्भवती महिलाओं को भी बालम खीरे का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें पानी की मात्रा अत्यधिक होती है, जिससे बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है.

इस प्रकार, सड़क किनारे बिकने वाला यह साधारण दिखने वाला बालम खीरा असल में एक अद्भुत औषधीय फल है, जिसका सही और सीमित उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. लेकिन, इसके उपयोग में अत्यधिक सावधानी भी आवश्यक है.

 

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गर्मियों में अमृत समान हैं फालसा समेत इनसे बने शरबत, एक-दो नहीं मिलते हैं कई फायदे

गर्मियों में अमृत समान हैं फालसा समेत इनसे बने शरबत, एक-दो नहीं मिलते हैं कई फायदे



<p style="text-align: justify;"><strong>Drinks for Summer:</strong> देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. चिलचिलाती धूप, तपन, उमस, डिहाइड्रेशन से जनजीवन बेहाल है. ऐसे में प्रकृति के खजाने में ऐसे कई बहुमूल्य चीजें हैं, जो न केवल गर्मी के प्रकोप को कम कर सकती हैं, बल्कि कई समस्याओं को भी दूर करने में सक्षम हैं. जी हां! हम बात कर रहे हैं खट्ठे-मीठे और ठंडे-ठंडे शरबत की.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गर्मियों में ताजगी के साथ सेहत का खजाना है ये शरबत</strong>&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस लिस्ट में बेल, गुलाब, सत्तू, फालसा, आम पन्ना के साथ ही नींबू का शरबत भी शामिल है. गर्मियों की समस्याओं को दूर करने के साथ ही आम लोगों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए भी ये शरबत बेस्ट हैं और गर्मियों में ताजगी के साथ सेहत का खजाना हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">खट्टा-मीठा फल फालसा का शरबत एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को डिटॉक्स करता है. यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और गर्मी से होने वाली थकान को दूर करता है. इसका खट्टा-मीठा स्वाद गर्मियों में ताजगी का अहसास देता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डाइटरी फाइबर और कैल्शियम सेहत के लिए फायदेमंद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फालसा में मौजूद प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर और कैल्शियम सेहत के लिए फायदेमंद हैं. पोटैशियम, सोडियम, विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी3 और विटामिन सी भी पाया जाता है. यह इंफेक्शन और एलर्जी से निजात पाने में मदद करता है. पोषक तत्वों से भरपूर फालसा की तासीर ठंडी होती है. यह शरबत आम जनों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है.</p>
<p style="text-align: justify;">बेल का शरबत पेट की गर्मी को शांत करता है और कब्ज, अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है. प्रेग्नेंसी के दौरान बेल के शरबत के सेवन से शरीर और मन दोनों ठंडा रहते हैं. बेल के शरबत में फाइबर के गुण होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. इसमें विटामिन सी और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कच्चे आम से बना शरबत लू से करता है बचाव </strong></p>
<p style="text-align: justify;">कच्चे आम से बना यह शरबत लू से बचाव करता है. इसमें विटामिन सी और आयरन होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखता है और ऊर्जा प्रदान करता है. आम पन्ना पीने से गर्भवती महिलाओं की शारीरिक थकान दूर होती है. इसमें मौजूद पोटैशियम और कैल्शियम महिलाओं के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व हैं. काला नमक, भुना जीरा और पुदीना युक्त शरबत पीने से न केवल शरीर में एनर्जी आती है, बल्कि भूख भी लगती है.</p>
<p style="text-align: justify;">गुलाब का शरबत त्वचा के साथ ही मन को भी शांति देता है. यह तनाव कम करने और शरीर को ठंडक देने में कारगर है. गुलाब की भीनी खुशबू गर्भवती महिलाओं के साथ ही गर्मी के दिनों में आम जनों को भी सकारात्मक रखने में मदद करती है.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रोटीन और फाइबर के बेहतरीन स्रोत की बात करें तो सत्तू का नाम आता है. इससे बना शरबत पेट को ठंडा रखता है.</p>
<p style="text-align: justify;">विटामिन ‘सी’ से भरपूर नींबू शरबत इम्यूनिटी बढ़ाता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है. नींबू के शरबत में चीनी की जगह शहद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ये शरबत न केवल गर्मी से राहत देते हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से शरीर को पोषण भी प्रदान करते हैं. इन्हें घर पर आसानी से बनाया जा सकता है.</p>



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जोड़ों से यूरिक एसिड को तोड़कर बाहर कर देगा नींबू, जानिए सेवन का क्या है तरीका

जोड़ों से यूरिक एसिड को तोड़कर बाहर कर देगा नींबू, जानिए सेवन का क्या है तरीका


Lemon for Uric Acid: क्या आपको सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न महसूस होती है? क्या घुटनों या पैरों में हल्का दर्द दिनभर परेशान करता है? हो सकता है इसके पीछे वजह हो बढ़ा हुआ यूरिक एसिड।. यह एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे शरीर में गठिया जैसी गंभीर स्थिति का कारण बन सकती है. लेकिन राहत की बात ये है कि किचन में मौजूद एक आम चीज नींबू आपके शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद कर सकता है. 

बता दें, कई लोग अलग-अलग तरीके की दवाइयां यूरिक एसिड को ठीक करने के लिए खाते हैं, लेकिन अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, दवाइयां अपनी जगह है, इसके अलावा अब आप नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं. 

ये भी पढ़े- बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर, जानिए क्या हैं इसके लक्षण

नींबू कैसे करता है काम?

नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड शरीर के अंदर जाकर एक प्रभाव डालता है, जो शरीर की pH बैलेंस को सुधारता है. इससे यूरिक एसिड घुलने लगता है और पेशाब के जरिए बाहर निकलने में आसानी होती है. 

नींबू के सेवन का सही तरीका क्या है 

सुबह खाली पेट नींबू पानी

एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस मिलाएं

इसके साथ आप शहद भी मिक्स कर सकते हैं

इसे रोज सुबह खाली पेट पिएं

खाने के बाद नींबू पानी पीना 

भारी या तैलीय भोजन के बाद नींबू पानी पीने से पाचन सुधरता है और यूरिक एसिड नहीं बढ़ता 

कच्चे नींबू का सेवन

सलाद या दाल में नींबू डालकर रोज सेवन करें

ध्यान रखें कि खाना गर्म न हो वरना विटामिन C नष्ट हो सकता है

ये सावधानियां रखनी होगी

बहुत अधिक नींबू का सेवन दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए स्ट्रॉ से पिएं या बाद में कुल्ला करें

अगर आपको पेट की दिक्कत है तो नींबू का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें

मधुमेह या किडनी के रोगियों को भी नींबू के सेवन से पहले सलाह लेनी चाहिए

नींबू छोटा जरूर दिखता है, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं. यदि आप यूरिक एसिड से राहत पाना चाहते हैं और दवाइयों से बचना चाहते हैं, तो नींबू को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. नियमित सेवन से जोड़ों का दर्द कम, सूजन में राहत और यूरिक एसिड का स्तर नियंत्रित किया जा सकता है. 

ये भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने बना ली कैंसर की दवा, जानिए थर्ड स्टेज के कैंसर में कितनी कारगर ये वैक्सीन?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर, जानिए क्या हैं इसके लक्षण

बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर, जानिए क्या हैं इसके लक्षण


Brain Tumour Symptoms in Children: जब बच्चों को बार-बार सिरदर्द होता है, वो चिड़चिड़े रहने लगते हैं, आंखें कमजोर पड़ने लगती हैं या अचानक दौरे आने लगते हैं तो अक्सर माता-पिता इसे सामान्य शारीरिक परेशानी मान लेते हैं. कभी थकान, कभी पढ़ाई का दबाव, तो कभी मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल, लेकिन ये लक्षण ब्रेन ट्यूमर जैसे गंभीर रोग की ओर इशारा कर सकते हैं? अक्सर माना जाता है कि ब्रेन ट्यूमर एक उम्रदराज़ लोगों की बीमारी है, लेकिन हकीकत ये है कि यह गंभीर बीमारी बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकती है. 

बता दें, ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना है. ट्यूमर मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में हो सकता है और उसके अनुसार लक्षण अलग-अलग होते हैं. 

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बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के आम लक्षण

लगातार सिरदर्द होना: खासकर सुबह उठते वक्त तेज सिरदर्द होना, जो कुछ घंटों बाद खुद ही ठीक हो जाए. 

मतली और उल्टी: बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार उल्टी आना. 

आंख संबंधी समस्याएं: धुंधला दिखना, दोहरी छवि दिखना या आंखों की गति में असामान्यता. 

मनोवैज्ञानिक बदलाव: चिड़चिड़ापन, व्यवहार में बदलाव, चीजों में रुचि कम हो जाना. 

संतुलन और चलने में परेशानी: बच्चा लड़खड़ाकर चलने लगे या बार-बार गिरने लगे. 

क्यों होती है पहचान में देर?

बच्चों में ट्यूमर के लक्षण कई बार आम बीमारियों जैसे लगते हैं. माता-पिता अक्सर सिरदर्द को सामान्य समझते हैं या बच्चा यदि बहुत छोटा हो, तो वो अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाता. इसलिए जरूरी है कि यदि कोई लक्षण बार-बार और बिना कारण के दिखाई दे रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें. 

लक्षण पता चलने के बाद क्या करें 

ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है, बशर्ते समय रहते उसकी पहचान हो जाए. MRI, CT स्कैन और न्यूरोलॉजिकल जांच से ट्यूमर की पुष्टि की जा सकती है. इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन शामिल हो सकते हैं, यह ट्यूमर के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है. 

बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज न करें. अगर कोई लक्षण बार-बार दिखाई दे रहा है या सामान्य इलाज से ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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