जोड़ों से यूरिक एसिड को तोड़कर बाहर कर देगा नींबू, जानिए सेवन का क्या है तरीका

जोड़ों से यूरिक एसिड को तोड़कर बाहर कर देगा नींबू, जानिए सेवन का क्या है तरीका


Lemon for Uric Acid: क्या आपको सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न महसूस होती है? क्या घुटनों या पैरों में हल्का दर्द दिनभर परेशान करता है? हो सकता है इसके पीछे वजह हो बढ़ा हुआ यूरिक एसिड।. यह एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे शरीर में गठिया जैसी गंभीर स्थिति का कारण बन सकती है. लेकिन राहत की बात ये है कि किचन में मौजूद एक आम चीज नींबू आपके शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद कर सकता है. 

बता दें, कई लोग अलग-अलग तरीके की दवाइयां यूरिक एसिड को ठीक करने के लिए खाते हैं, लेकिन अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, दवाइयां अपनी जगह है, इसके अलावा अब आप नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं. 

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नींबू कैसे करता है काम?

नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड शरीर के अंदर जाकर एक प्रभाव डालता है, जो शरीर की pH बैलेंस को सुधारता है. इससे यूरिक एसिड घुलने लगता है और पेशाब के जरिए बाहर निकलने में आसानी होती है. 

नींबू के सेवन का सही तरीका क्या है 

सुबह खाली पेट नींबू पानी

एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस मिलाएं

इसके साथ आप शहद भी मिक्स कर सकते हैं

इसे रोज सुबह खाली पेट पिएं

खाने के बाद नींबू पानी पीना 

भारी या तैलीय भोजन के बाद नींबू पानी पीने से पाचन सुधरता है और यूरिक एसिड नहीं बढ़ता 

कच्चे नींबू का सेवन

सलाद या दाल में नींबू डालकर रोज सेवन करें

ध्यान रखें कि खाना गर्म न हो वरना विटामिन C नष्ट हो सकता है

ये सावधानियां रखनी होगी

बहुत अधिक नींबू का सेवन दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए स्ट्रॉ से पिएं या बाद में कुल्ला करें

अगर आपको पेट की दिक्कत है तो नींबू का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें

मधुमेह या किडनी के रोगियों को भी नींबू के सेवन से पहले सलाह लेनी चाहिए

नींबू छोटा जरूर दिखता है, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं. यदि आप यूरिक एसिड से राहत पाना चाहते हैं और दवाइयों से बचना चाहते हैं, तो नींबू को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. नियमित सेवन से जोड़ों का दर्द कम, सूजन में राहत और यूरिक एसिड का स्तर नियंत्रित किया जा सकता है. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर, जानिए क्या हैं इसके लक्षण

बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर, जानिए क्या हैं इसके लक्षण


Brain Tumour Symptoms in Children: जब बच्चों को बार-बार सिरदर्द होता है, वो चिड़चिड़े रहने लगते हैं, आंखें कमजोर पड़ने लगती हैं या अचानक दौरे आने लगते हैं तो अक्सर माता-पिता इसे सामान्य शारीरिक परेशानी मान लेते हैं. कभी थकान, कभी पढ़ाई का दबाव, तो कभी मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल, लेकिन ये लक्षण ब्रेन ट्यूमर जैसे गंभीर रोग की ओर इशारा कर सकते हैं? अक्सर माना जाता है कि ब्रेन ट्यूमर एक उम्रदराज़ लोगों की बीमारी है, लेकिन हकीकत ये है कि यह गंभीर बीमारी बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकती है. 

बता दें, ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना है. ट्यूमर मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में हो सकता है और उसके अनुसार लक्षण अलग-अलग होते हैं. 

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बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के आम लक्षण

लगातार सिरदर्द होना: खासकर सुबह उठते वक्त तेज सिरदर्द होना, जो कुछ घंटों बाद खुद ही ठीक हो जाए. 

मतली और उल्टी: बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार उल्टी आना. 

आंख संबंधी समस्याएं: धुंधला दिखना, दोहरी छवि दिखना या आंखों की गति में असामान्यता. 

मनोवैज्ञानिक बदलाव: चिड़चिड़ापन, व्यवहार में बदलाव, चीजों में रुचि कम हो जाना. 

संतुलन और चलने में परेशानी: बच्चा लड़खड़ाकर चलने लगे या बार-बार गिरने लगे. 

क्यों होती है पहचान में देर?

बच्चों में ट्यूमर के लक्षण कई बार आम बीमारियों जैसे लगते हैं. माता-पिता अक्सर सिरदर्द को सामान्य समझते हैं या बच्चा यदि बहुत छोटा हो, तो वो अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाता. इसलिए जरूरी है कि यदि कोई लक्षण बार-बार और बिना कारण के दिखाई दे रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें. 

लक्षण पता चलने के बाद क्या करें 

ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है, बशर्ते समय रहते उसकी पहचान हो जाए. MRI, CT स्कैन और न्यूरोलॉजिकल जांच से ट्यूमर की पुष्टि की जा सकती है. इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन शामिल हो सकते हैं, यह ट्यूमर के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है. 

बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज न करें. अगर कोई लक्षण बार-बार दिखाई दे रहा है या सामान्य इलाज से ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कैंसर होने के 3 साल पहले लगेगा इस खौफनाक बीमारी का पता, रिसर्चर्स ने निकाला तगड़ा फॉर्म्युला

कैंसर होने के 3 साल पहले लगेगा इस खौफनाक बीमारी का पता, रिसर्चर्स ने निकाला तगड़ा फॉर्म्युला


Early Cancer Detection Formula: अगर आपको तीन साल पहले ही यह पता चल जाए कि आपके शरीर में एक गंभीर बीमारी पनपने वाली है. तो क्या आप उसे समय रहते रोक नहीं पाएंगे? आज के समय में जब कैंसर एक जानलेवा बीमारी बन चुकी है और इसका जल्द पता लगना ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है, इसी बीच एक नई खोज ने उम्मीद की एक बड़ी किरण जगा दी है।

रिसर्चर्स की एक टीम ने एक ऐसा फॉर्म्युला खोजा है, जिससे कैंसर का संकेत उसकी शुरुआत से तीन साल पहले ही मिल सकता है. यानी जब बीमारी अभी शरीर में पूरी तरह से विकसित भी नहीं हुई होती, तब ही उसके आने के लक्षण पकड़ में आ सकते हैं. 

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क्या है यह रिसर्च?

क्रैंब्रिज के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे बायोमार्कर्स की पहचान की है जो कैंसर के विकसित होने से कई साल पहले ही शरीर में दिखाई देने लगते हैं. ये संकेत शरीर के अंदर चल रहे उस बदलाव को दर्शाते हैं, जो सामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदलने की प्रक्रिया से जुड़ा होता है. 

कैसे करता है यह फॉर्म्युला काम?

इस खोज में वैज्ञानिकों ने ब्लड सैंपल्स और जीनोमिक डेटा की मदद से पाया कि कुछ विशेष प्रोटीन और जेनेटिक बदलाव कैंसर के आने से तीन साल पहले तक शरीर में एक्टिव हो जाते हैं. इन बायोमार्कर्स को ट्रैक करने के लिए एक खास टेस्टिंग पद्धति विकसित की जा रही है, जो ब्लड टेस्ट के जरिए काम करेगी. यानी भविष्य में यह टेस्ट एक रूटीन हेल्थ चेकअप का हिस्सा बन सकता है. 

किन कैंसर के प्रकारों पर किया गया अध्ययन?

फेफड़ों का कैंसर

लिवर कैंसर

आंतों का कैंसर

ब्रेस्ट कैंसर

इस खोज के क्या हो सकते हैं फायदे?

जल्दी पता लगना: समय रहते कैंसर का इलाज संभव होगा

लागत में कमी: शुरुआती स्टेज पर इलाज कम महंगा और अधिक प्रभावी होता है

जिंदगी बचेगी: मृत्यु दर में भारी गिरावट संभव है

लाइफस्टाइल सुधारने का मौका: व्यक्ति पहले ही अपनी आदतें सुधार सकता है

कैंसर की पहचान अगर समय रहते हो जाए, तो यह बीमारी जानलेवा नहीं रह जाती. यह नई रिसर्च लोगों को “बीमारी से पहले बचाव” का मौका देती है. अगर यह टेस्ट आम लोगों तक पहुंचता है, तो हर साल लाखों जिंदगियों को बचाया जा सकता है.

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डायबिटीज चेक करने का सबसे सही वक्त कौन-सा, जिससे पता लगेगा सटीक ब्लड शुगर लेवल?

डायबिटीज चेक करने का सबसे सही वक्त कौन-सा, जिससे पता लगेगा सटीक ब्लड शुगर लेवल?


Best Time to Check Blood Sugar: सुबह की चाय के साथ पराठा खाया, दोपहर में मिठाई का एक टुकड़ा भी चख लिया और शाम को ऑफिस से आते ही फल खा लिए. उसके बाद अचानक ख्याल आया कि चलो शुगर चेक कर लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस वक्त आप ब्लड शुगर जांचते हैं, वही उसकी रिपोर्ट को सही या गलत साबित कर सकता है? डायबिटीज कोई आम बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो समय, खानपान और जीवनशैली के साथ बेहद गहराई से जुड़ी होती है. इसलिए ब्लड शुगर जांचने का समय भी उतना ही अहम होता है जितना कि उसकी दवा या परहेज का…

फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट 

यह सबसे आम और विश्वसनीय टेस्ट है. इसमें व्यक्ति को रातभर यानी कम-से-कम 8 घंटे तक कुछ भी खाए-पिए बिना ब्लड टेस्ट करवाना होता है. ये ज्यादातर सुबह के वक्त करवाना चाहिए. 

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पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर 

यह टेस्ट खाने के ठीक 2 घंटे बाद किया जाता है. इसका उद्देश्य यह जानना होता है कि भोजन करने के बाद शरीर कितना शुगर प्रोसेस कर पा रहा है. ये नाश्ते के बाद या दोपहर के खाने के बाद करवा सकते हैं. 

रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट 

यह टेस्ट दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, चाहे आपने खाना खाया हो या नहीं. इसे आपात स्थिति में या डायबिटीज का तुरंत मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है. 

HbA1c टेस्ट 

यह टेस्ट बताता है कि पिछले तीन महीनों में आपकी औसत ब्लड शुगर लेवल क्या रही है. इसे कराने के लिए फास्टिंग की जरूरत नहीं होती है. ये 3 महीने में एक बार करवा सकते हैं. 

डायबिटीज के मैनेजमेंट में समय की सटीकता बहुत मायने रखती है. यदि ब्लड शुगर गलत समय पर चेक किया जाए, तो उसका असर न केवल रिपोर्ट पर बल्कि इलाज और दवा के चुनाव पर भी पड़ सकता है. इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह से टेस्ट करवाएं और निर्धारित समय का पालन करें. सही समय पर की गई जांच ही सही शुगर लेवल बताती है.  

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कमर दर्द को मामूली समझ इग्नोर कर रही थी यह महिला, जांच की तो निकला ब्लड कैंसर

कमर दर्द को मामूली समझ इग्नोर कर रही थी यह महिला, जांच की तो निकला ब्लड कैंसर


Back Pain Warning Signs: एक ऐसी महिला जो हमेशा अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखती थीं. उनका नाम है शार्न हेगन, वे नियमित रूप से जिम जाती थीं, वजन उठाती थीं और घर का काम भी खुद ही करती थीं. उन्हें कभी ये अंदाज़ा भी नहीं था कि एक मामूली लगने वाला पीठ दर्द उनकी ज़िंदगी को इस कदर बदल देगा. शार्न की कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए एक सीख है जो अपनी तकलीफ को छोटी मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. 

बता दें, शुरुआत उस दिन से हुई जब शार्न ने जिम में वजन उठाने के बाद अपनी पीठ में हल्का दर्द महसूस किया. उन्होंने सोचा कि ये कोई साधारण खिंचाव है और कुछ स्ट्रेचिंग से ठीक हो जाएगा. लेकिन एक हफ्ते के अंदर यह दर्द लगातार बढ़ता चला गया. जिसके बाद जिम ट्रेनर ने उन्हें फिजियोथेरेपिस्ट से मिलने की सलाह दी. 

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फिजियोथेरेपिस्ट ने क्या कहा

फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया कि ,उनकी रीढ़ की हड्डी में डिस्क से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है. उन्होंने कुछ एक्सरसाइज बताई, ताकि रीढ़ की हड्डियों के बीच के टिशू थोड़े खिंच सकें और दर्द में राहत मिले. शुरुआत में शार्न को थोड़ा आराम जरूर मिला, लेकिन कुछ ही दिनों बाद एक सुबह उनकी हालत बेहद खराब हो गई. 

शार्न ने इस बारे में क्या बताया 

जानकारी के मुताबिक, शार्न का इस दर्द के बारे में कहना था कि ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने पीठ में चाकू घोंपा हो,”, उसी दिन बाद में उन्हें अचानक तेज दर्द महसूस हुआ और वो गिर पड़ीं. उन्हें लगा कि शायद यह कमजोरी या लो ब्लड प्रेशर की वजह से हो रहा है. लेकिन जब दर्द बढ़ता गया और कोई भी एक्सरसाइज करना मुश्किल हो गया, तो उन्होंने दोबारा फिजियो से संपर्क किया. 

टेस्ट के बाद क्या निकला? 

शार्न को तब भी अंदाजा नहीं था कि उनके शरीर में एक गंभीर बीमारी घर कर चुकी है. आखिरकार कई टेस्ट के बाद पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है. यह खबर सुनते ही शार्न के होश उड़ गए. एक फिट और हेल्दी लाइफस्टाइल जीने वाली महिला के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था. 

शार्न की यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी भी अपने शरीर की तकलीफ को हल्के में न लें. कभी-कभी हमारी बॉडी हमें ऐसे संकेत देती है जो किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर रहे होते हैं. सेहतमंद दिखना और वास्तव में अंदर से सेहतमंद होना, इन दोनों में बड़ा फर्क होता है. 

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दही के बिना अधूरी रहती है आपके खाने की थाली तो जान लें ये बातें, शरीर को नहीं पहुंचेगा नुकसान

दही के बिना अधूरी रहती है आपके खाने की थाली तो जान लें ये बातें, शरीर को नहीं पहुंचेगा नुकसान


भारतीय घरों में खाने की थाली बिना दही के अधूरी सी लगती है. रायता, लस्सी या फिर किसी अन्य रूप में दही का डाइट में शामिल होना बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये कई खूबियों से भरपूर है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो शरीर के लिए कई तरह से फादयेमंद होते हैं. लेकिन कई बार इसका सेवन शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है. ऐसे में दही खाने के दाैरान वो काैन से बातें हैं, जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं…

रात में खाने से करें परहेज

दही की तासीर ठंडी होती है. इसलिए ये शरीर को ठंडक प्रदान करता है. ऐसे में रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए. रात में दही खाने से सर्दी-जुकाम, भारीपन या कफ हो सकता है. रात में दही खाना भी है तो उसका तरीका है. दही में हल्दी या काली मिर्च मिलाकर रात में इसका सेवन किया जा सकता है.

फ्रेश दही खाना चाहिए

ज्यादा समय तक रखा हुआ या अ​धिक खट्टे दही का सेवन करने से बचना चाहिए. ऐसा दही खाने से शरीर में गैस, एसिडिटी या पेट खराब की प्राॅब्लम हो सकती है. फ्रेश दही का सेवन करें. टेस्ट के अनुसार इसमें नमक-जीरा या शुगर मिला सकते हैं. 

नाॅनवेज के साथ दही खाने से दिक्कत

कैसा भी फूड हो, इसके साथ दही का सेवन आम बात है. नाॅर्थ इंडियन से लेकर साउथ इंडियन थाली तक ये प्रमुख रूप से शामिल रहता है. लेकिन नाॅनवेज के साथ इसका सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो मछली और दही का एक साथ सेवन करने से स्किन एलर्जी या पेट की दिक्कतें हो सकती हैं.

क्या दही खाली पेट खाया जा सकता है?

दही खाली पेट खाने से बचना ​चाहिए. इसके चलते कुछ लोगों को जलन या एसिडिटी की प्राॅब्लम हो सकती है. डाइट में दही का इस्तेमाल खाने के साथ या बाद में ही करना चाहिए चाहिए.

माैसम के अनुसार कैसे खाएं दही?

गर्मियों और बारिश में दही खाना फायदेमंद है, लेकिन सर्दियों में इसे कम मात्रा में खाना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है. अगर खाना ही है तो गर्म चीजों के साथ खाएं. हमेशा ताजा दही ही खाएं.

दही को ऐसे करें डाइट में शामिल

दही को कई तरीके से डाइट में शामिल किया जा सकता है. इसके कई रूप हैं, जैसे प्लेन दही, रायता, लस्सी, छाछ या कढ़ी, जिनका खाना खाने के साथ या बाद में सेवन किया जा सकता है. 

दही के साथ क्या खाएं?

दही के साथ खीरा, प्याज या सलाद का सेवन करना अच्छा होता है. ये शरीर के डाइजेशन सिस्टम में मदद करते हैं.

दही खाने के फायदे

  • शरीर को ठंडक देता है
  • पेट को साफ रखता है और पाचन में मदद
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत करना
  • बाॅडी को हाइड्रेट रखने में हेल्प
  • वजन घटाने में मदद करता है
  • हड्डियों को मजबूत बनाता है

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