दही के बिना अधूरी रहती है आपके खाने की थाली तो जान लें ये बातें, शरीर को नहीं पहुंचेगा नुकसान

दही के बिना अधूरी रहती है आपके खाने की थाली तो जान लें ये बातें, शरीर को नहीं पहुंचेगा नुकसान


भारतीय घरों में खाने की थाली बिना दही के अधूरी सी लगती है. रायता, लस्सी या फिर किसी अन्य रूप में दही का डाइट में शामिल होना बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये कई खूबियों से भरपूर है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो शरीर के लिए कई तरह से फादयेमंद होते हैं. लेकिन कई बार इसका सेवन शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है. ऐसे में दही खाने के दाैरान वो काैन से बातें हैं, जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं…

रात में खाने से करें परहेज

दही की तासीर ठंडी होती है. इसलिए ये शरीर को ठंडक प्रदान करता है. ऐसे में रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए. रात में दही खाने से सर्दी-जुकाम, भारीपन या कफ हो सकता है. रात में दही खाना भी है तो उसका तरीका है. दही में हल्दी या काली मिर्च मिलाकर रात में इसका सेवन किया जा सकता है.

फ्रेश दही खाना चाहिए

ज्यादा समय तक रखा हुआ या अ​धिक खट्टे दही का सेवन करने से बचना चाहिए. ऐसा दही खाने से शरीर में गैस, एसिडिटी या पेट खराब की प्राॅब्लम हो सकती है. फ्रेश दही का सेवन करें. टेस्ट के अनुसार इसमें नमक-जीरा या शुगर मिला सकते हैं. 

नाॅनवेज के साथ दही खाने से दिक्कत

कैसा भी फूड हो, इसके साथ दही का सेवन आम बात है. नाॅर्थ इंडियन से लेकर साउथ इंडियन थाली तक ये प्रमुख रूप से शामिल रहता है. लेकिन नाॅनवेज के साथ इसका सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो मछली और दही का एक साथ सेवन करने से स्किन एलर्जी या पेट की दिक्कतें हो सकती हैं.

क्या दही खाली पेट खाया जा सकता है?

दही खाली पेट खाने से बचना ​चाहिए. इसके चलते कुछ लोगों को जलन या एसिडिटी की प्राॅब्लम हो सकती है. डाइट में दही का इस्तेमाल खाने के साथ या बाद में ही करना चाहिए चाहिए.

माैसम के अनुसार कैसे खाएं दही?

गर्मियों और बारिश में दही खाना फायदेमंद है, लेकिन सर्दियों में इसे कम मात्रा में खाना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है. अगर खाना ही है तो गर्म चीजों के साथ खाएं. हमेशा ताजा दही ही खाएं.

दही को ऐसे करें डाइट में शामिल

दही को कई तरीके से डाइट में शामिल किया जा सकता है. इसके कई रूप हैं, जैसे प्लेन दही, रायता, लस्सी, छाछ या कढ़ी, जिनका खाना खाने के साथ या बाद में सेवन किया जा सकता है. 

दही के साथ क्या खाएं?

दही के साथ खीरा, प्याज या सलाद का सेवन करना अच्छा होता है. ये शरीर के डाइजेशन सिस्टम में मदद करते हैं.

दही खाने के फायदे

  • शरीर को ठंडक देता है
  • पेट को साफ रखता है और पाचन में मदद
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत करना
  • बाॅडी को हाइड्रेट रखने में हेल्प
  • वजन घटाने में मदद करता है
  • हड्डियों को मजबूत बनाता है

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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ब्लैक कॉफी पीने के महिलाओं को मिलेंगे कई फायदे, जानिए किस वक्त पीना चाहिए

ब्लैक कॉफी पीने के महिलाओं को मिलेंगे कई फायदे, जानिए किस वक्त पीना चाहिए


Black Coffee Benefits for Women: अक्सर थकान भरे दिन की शुरुआत या काम के बीच एक ब्रेक चाहिए होता है और ऐसे में हाथ में एक गर्म कप कॉफी हो, तो दिन बन जाता है. खासकर महिलाओं के लिए, जो घर, ऑफिस और खुद के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी रहती हैं, उनके लिए ब्लैक कॉफी सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एनर्जी का डोज बन जाती है.आज हम बात करेंगे कि ब्लैक कॉफी पीने से महिलाओं को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं और इसे पीने का सही समय क्या है। 

एनर्जी बूस्टर और फोकस बढ़ाने वाला ड्रिंक

ब्लैक कॉफी में कैफीन होता है, जो दिमाग को सतर्क और चुस्त बनाने में मदद करता है. महिलाएं जो पढ़ाई, ऑफिस या घर के कामों में थक जाती हैं, उनके लिए यह एक प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर का काम करता है. इससे एकाग्रता भी बढ़ती है और आलस कम होता है. 

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वजन घटाने में मददगार

ब्लैक कॉफी मेटाबॉलिज्म को तेज करती है. अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रही हैं, तो वर्कआउट से पहले एक कप ब्लैक कॉफी पीना शरीर की फैट बर्निंग क्षमता को बढ़ा सकता है. साथ ही यह भूख को थोड़ी देर के लिए दबा देती है, जिससे ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. 

स्किन और बालों फायदेमंद 

ब्लैक कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे त्वचा में चमक आती है और उम्र के लक्षण देर से नजर आते हैं. साथ ही बालों को भी मजबूत बनाती है.  

मूड अच्छा करता है और स्ट्रेस घटाता है

महिलाएं अक्सर कई जिम्मेदारियों के बीच मानसिक तनाव झेलती हैं. ब्लैक कॉफी मूड लिफ्टर का काम करती है. यह ब्रेन में “डोपामिन” नामक हार्मोन को रिलीज करने में मदद करती है, जिससे तनाव कम होता है और मन हल्का लगता है. 

डायबिटीज और हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद

कुछ रिसर्च में पाया गया है कि नियमित रूप से सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी पीने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है. साथ ही, यह दिल की सेहत को भी बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है, बशर्ते इसे बिना चीनी और क्रीम के पिया जाए. 

ब्लैक कॉफी पीने का सही वक्त

सुबह उठने के 1 घंटे बाद पी सकते हैं. 

वर्कआउट से 30 मिनट पहले पी सकती हैं. 

दोपहर के समय अगर नींद आ रही है तो पी सकती हैं. 

दिन में दो बार से ज्यादा न पीएं. 

ब्लैक कॉफी न सिर्फ एक स्वादिष्ट पेय है, बल्कि महिलाओं के लिए यह सेहत का साथी भी बन सकता है. चाहे बात हो एनर्जी की, वजन घटाने की या मानसिक स्वास्थ्य की, एक कप ब्लैक कॉफी में छिपा है सेहत का राज. बस सही समय और मात्रा का ध्यान रखें. 

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यूरिक एसिड: क्या प्रोटीन है असली विलेन? जानिए सच्चाई और सही डाइट प्लान!

यूरिक एसिड: क्या प्रोटीन है असली विलेन? जानिए सच्चाई और सही डाइट प्लान!


जाॅइंट में पेन, यानी शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने का लक्षण. आ​खिर यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ती क्यों है? इसको लेकर लोगों के मन में एक आम धारणा बन गई है कि प्रोटीन​ रिच फूड के सेवन से ऐसा होता है. लेकिन क्या ये वाकई सच है? अब आपके मन ये सवाल कभी नहीं उठेगा, आइए जानते हैं…

क्या प्रोटीन से बढ़ता है यूरिक एसिड?

इसका सीधा एक शब्द में जवाब है नहीं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार बाॅडी में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने के पीछे कारण प्रोटीन नहीं, ब​ल्कि प्यूरीन होता है. सुनने में दोनों एक जैसे लगते हों, लेकिन ये दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं. 

कहां पाया जाता है प्यूरीन?

प्यूरीन सभी जीवित चीजों की कोशिकाओं में पाए जाते हैं, जिनमें मनुष्य, जानवर और पौधे शामिल हैं. इसलिए उन्हें आहार से पूरी तरह खत्म करने का कोई तरीका नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ फूड प्रोडक्ट में प्यूरीन की मात्रा अन्य की तुलना में अधिक होती है, जैसे कि ऑर्गन मीट, सीफूड आदि. हालांकि सभी प्रोटीन समस्या की वजह नहीं बनते हैं.

क्या होती है समस्या?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार प्राॅब्लम तब शुरू होती है जब ये बाॅडी में टूटकर यूरिक एसिड में बदल जाता है. जो बाॅडी में गाउट, किडनी स्टोन, आर्थराइटिस की वजह बन सकता है, जिससे जाॅइंट्स में पेन और सूजन आदि भी समस्या हो सकती है.

तो क्या प्रोटीन रिच डाइट से कर लें ताैबा?

यदि बाॅडी में यूरिक एसिड की मात्रा अ​धिक बढ़ी हुई है तो भी प्रोटीन फूड छोड़ने की जरूरत नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार पूरी तरह से प्रोटीन फूड को अवाॅइड करने की बजाय हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो फूड हम खा रहे हैं उससे बाॅडी को कितना प्रोटीन या प्यूरीन मिल रहा है. एनिमल प्रोडक्ट जैसे रेड मीट, ऑर्गन मीट, कुछ सीफूड्स में बड़ी मात्रा में प्यूरीन पाया जाता है, जिससे शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है. प्लांट बेस्ड प्रोटीन के सोर्स जैसे बीन्स, दाल और डेयरी प्रोडक्ट आदि में कम मात्रा में प्यूरीन पाया जाता है, जो शरीर में कम मात्रा में यूरिक एसिड बनाते हैं. ऐसे में लो प्यूरीन-प्रोटीन बेस्ड बैलेंस्ट डाइट को फाॅलो करना बाॅडी के लिए उचित माना जाता है.

इनमें अ​धिक मात्रा में होता है प्यूरीन

  • प्रोसेस्ड फूड
  • अल्कोहल
  • रेड मीट जैसे बीफ, लैंब, पोर्क
  • ऑर्गन मीट जैसे लिवर, किडनी अन्य ऑर्गन मीट
  • सीफूड्स जैसे एन्कोवीज, सार्डिन, मसल्स, स्कैल्पस
  • शुगर ड्रिंक्स जैसे सोडा और मीठे ड्रिंक, जिनमें फ्रक्टोज की मात्रा अ​धिक होती है. ये यूरिक ए​सिड बढ़ने के खतरे को बढ़ा सकते हैं.

यूरिक एसिड से प्राॅब्लम

  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • जोड़ों में अकड़न
  • अधिक प्यास लगना
  • अत्यधिक थकान फील होना

ये भी पढ़ें: पैंक्रियाज शरीर के लिए कितना जरूरी… बिना इस ऑर्गन के कैसे कटती है लाइफ, जान लें सबकुछ

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क्या होती है एंडोमेट्रियोसिस बीमारी? इस चीज पर करती है सबसे ज्यादा असर

क्या होती है एंडोमेट्रियोसिस बीमारी? इस चीज पर करती है सबसे ज्यादा असर



<p style="text-align: justify;">एंडोमेट्रियोसिस यूटरस (गर्भाशय) से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. इस प्राॅब्लम में यूटरस की परत (एंडोमेट्रियम) के समान टिश्यू यूटरस के बाहर डेवलप होना शुरू हो जाते हैं. इन टिश्यू की परत यूटरस के साथ अन्य रिप्रोड​क्टिव ऑर्गन ओवरी, फैलोपियन ट्यूब जैसे पे​ल्विक ऑर्गन को प्रभावित करती है. ये ​स्थिति काफी पेनफुल होने के साथ महिलाओं के लिए गंभीर हो सकती है. इसमें मुख्य रूप से महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं कि किस तरह दिखते हैं इसके लक्षण और कैसे इस प्राॅब्लम से बचा जा सकता है…</p>
<p><strong>एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>पेनफुल पीरियड्स:</strong> पीरियड्स के पहले और आ​खिरी दिनों में दर्द होना. इस दाैरान पेट के निचले हिस्से में भी दर्द महसूस होना.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>शारीरिक संबंध के दाैरान दर्द:</strong> शारीरिक संबंध बनाने के दाैरान दर्द महसूस होना एंडोमेट्रियोसिस का सामान्य कारण है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइ​जेशन प्राॅब्लम:</strong> एंडोमेट्रियोसिस के दाैरान डाइजेशन प्राॅब्लम भी देखने को मिलती है. इस दाैरान पेट में बाउल मूवमेंट डिस्टर्ब हो जाता है. पेशाब में भी दिक्कत महसूस होती है. पीरियड के दाैरान ये लक्षण एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>अ​धिक ब्लीडिंग होना:</strong> पीरियड्स के दौरान या बीच में अ​धिक ब्लीडिंग होना. ये गंभीर प्राॅब्लम की ओर इशारा करता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>प्रेग्नेंसी में दिक्कत:</strong> एंडोमेट्रियोसिस से इनफर्टिलिटी की दिक्कत हो सकती है. कई केसेज में इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए किए गए टेस्ट के दाैरान इस समस्या का पता लगता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>गैस्ट्रिक प्राॅब्लम: &nbsp;</strong>एंडोमेट्रियोसिस के दाैरान गै​स्टि्रक प्राॅब्लम जैसे कब्ज, डायरिया, जी मचलना आदि देखने को मिल सकता है. ये लक्षण सामान्य रूप से मेंस्ट्रुअल साइकिल से पहले या दाैरान महसूस हो सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>थकान:</strong> इस बीमारी में बाॅडी अ​धिक थकान महसूस करती है, जो सामान्य नहीं होती.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस तरह कर सकते हैं बचाव</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">वजन को कंट्रोल रखें.</li>
<li style="text-align: justify;">फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर डाइट का सेवन करें.</li>
<li style="text-align: justify;">शराब और कैफीन दोनों ही हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं. इससे बचें या इन्हें सीमित करें.</li>
<li style="text-align: justify;">यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) को एंडोमेट्रियोसिस के लिए हाई रिस्क माना गया है. सेफ इंटरकोर्स करने से एसटीआई के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है.</li>
</ul>
<p><strong>एंडोमेट्रियोसिस के शुरुआती इलाज</strong></p>
<p>एंडोमेट्रियोसिस की प्राॅब्लम जितनी जल्द डायग्नोज हो जाए, उतना इलाज आसाना हो सकता है. महिलाओं में इनफर्टिलिटी और पुराने दर्द जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है. एंडोमेट्रियोसिस सिस्ट का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसे स्कैन करते हैं. लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी है जो आमतौर पर डॉक्टरों द्वारा एंडोमेट्रियोसिस सिस्ट का पता लगाने और उसके इलाज के लिए की जाती है. मरीजों में बीमारी की गंभीरता के अनुसार डाॅक्टर उपचार के तरीकों में बदलाव भी कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-is-life-like-after-pancreas-removal-surgery-2956874">पैंक्रियाज शरीर के लिए कितना जरूरी… बिना इस ऑर्गन के कैसे कटती है लाइफ, जान लें सबकुछ</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>



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World Environment Day 2025: पृथ्वी के रक्षक और इंसानों के खास दोस्त हैं पीपल समेत ये 5 पेड़

World Environment Day 2025: पृथ्वी के रक्षक और इंसानों के खास दोस्त हैं पीपल समेत ये 5 पेड़


World Environment Day 2025: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर दुनिया भर में पृथ्वी को हरा-भरा बनाने की आवाज उठ रही है. आम लोगों के साथ ही फिल्म और राजनीतिक जगत के सितारे भी इस खास दिन पर पृथ्वी की हरियाली को लेकर बात करते नजर आए. ऐसे में बता दें कि पीपल, नीम समेत कुछ वृक्ष ऐसे हैं, जो पृथ्वी के रक्षक होने के साथ इंसान के खास दोस्त भी हैं. इनकी पत्तियों के साथ ही जड़, तना, फूल और छाल सभी मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं.

पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं ये पेड़

पीपल, नीम, बरगद, पारिजात और अशोक वृक्ष पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं, पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं, छाया प्रदान करते हैं और कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. पीपल ऑक्सीजन का बड़ा स्रोत है, यह हवा को शुद्ध करता है. नीम औषधीय गुणों से भरपूर होता है और कई समस्याओं का इलाज करता है.

बरगद चिलचिलाती धूप में छाया देने के साथ ही मिट्टी को मजबूत करता है. पारिजात के बारे में बता दें कि यह सुंदर और सुगंधित फूल देने के साथ ही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भी देता है. यह पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है. अशोक हरा-भरा, शांति और सुंदरता का प्रतीक है. आमतौर पर यह घरों के बाहर लगे दिखाई देते हैं, जो सुंदरता को बढ़ाते और औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं.

इस वृक्ष के पास महिलाओं की हर समस्या का हल

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि इस वृक्ष के पास महिलाओं की हर समस्या का हल है. अशोक की पत्तियों और छाल से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है. धर्म शास्त्रों में भी अशोक वृक्ष को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि पवित्र वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई थी. वृक्ष की चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूजा की जाती है. पौराणिक महत्व के अलावा अशोक औषधीय गुणों से भी भरपूर है.

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि समस्याओं से राहत पाने के लिए अशोक की छाल को भोजन करने के बाद दिन में दो बार गर्म पानी या शहद के साथ चूर्ण के साथ ले सकते हैं. अशोक की छाल खून साफ करती है, जिससे महिलाओं की त्वचा में निखार आता है. अशोक की छाल को चेहरे पर लगाने से मृत त्वचा से छुटकारा मिलता है. रिसर्च बताती है कि अशोक की छाल पीरियड्स में होने वाले तेज दर्द और ऐंठन, सूजन को कम कर देती है. यह बढ़े हुए वात को नियंत्रित करती है और इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है.

पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी-देवता करते हैं निवास 

पीपल की बात करें तो धार्मिक मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं. वहीं, सदाबहार पेड़ पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के लिहाज से भी बेहद आवश्यक है. पीपल का पेड़ कई तरह के पक्षियों और जीवों के लिए भी घर है. यह पेड़ छाया तो देता ही है, साथ ही दिन के साथ ही रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है, जो प्रदूषण को कम करने और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

पारिजात का वृक्ष देखने में जितना खूबसूरत होता है, उतना ही फायदेमंद भी है. यह वृक्ष पर्यावरण और मानव दोनों के लिए बेहद जरूरी और लाभदायक होता है. पारिजात के वृक्ष को‘ स्वर्ग का वृक्ष’ कहा जाता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर है. सफेद-नारंगी रंग के फूलों से लदे वृक्ष की छाल, फूलों, पत्तियां कई राहत दिलाने की ताकत के साथ ही ऐसी कई खूबियां हैं,जो आपके लिए बेहद फायदेमंद हैं. आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि 42 दिनों तक इसके सेवन से माइग्रेन के दर्द में राहत मिलती है. पारिजात के फूलों में पॉलीफेनोल्स, बायोएक्टिव एंजाइम्स पाए जाते हैं, जिनमें सूजन को कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं. माइग्रेन के साथ ही पारिजात गठिया, मधुमेह और हृदय से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद होता है.

आयुर्वेद में स्वास्थ्य का खजाना माना जाता है हरसिंगार

औषधीय गुणों से भरपूर पारिजात, हरसिंगार या शेफालिका को आयुर्वेद में स्वास्थ्य का खजाना माना जाता है. पारिजात से बने काढ़े को पीकर कई समस्याओं से राहत मिलती है. पारिजात में न केवल माइग्रेन, हड्डियों के दर्द से निजात दिलाने का गुण होता है, बल्कि सर्दी-जुकाम, बुखार के लिए भी यह रामबाण माना जाता है. चिकित्सकों के मुताबिक, आयुर्वेद में पारिजात का महत्वपूर्ण स्थान है. इसके पत्ते, फूल, छाल औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं.

कड़वा, लेकिन अनगिनत फायदों वाला वृक्ष है नीम. ये न केवल हीटवेव से बचाने में सक्षम हैं, बल्कि गर्मी के दिनों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. टेलर एंड फ्रांसिस में प्रकाशित एक शोध पत्र (जून 2024) में नीम के फूलों की खासियत बताई गई है. अध्ययन नीम के फूलों के औषधीय गुणों की खोज करता है, अन्य पौधों के भागों की तुलना में उनके कम हानिकारक और अधिक लाभदायक होने की क्षमता पर प्रकाश डालता है.

इसमें मधुमेह विरोधी और कैंसर विरोधी गुण भी पाए गए हैं. नीम की पत्तियों और टहनी की तरह फूल को भी आयुर्वेद में बेहद कारगर औषधि का दर्जा प्राप्त है. नीम के छोटे-छोटे फूलों में बड़ी-बड़ी समस्याओं को दूर करने की ताकत है. गर्मी के दिनों में नीम का फूल इंसानों के लिए प्रकृति का तोहफा है. रोजाना इसके सेवन करने से खून साफ होता है, चेहरे पर चमक आती है और दाग-धब्बे, मुहांसों के साथ इंफेक्शन से भी मुक्ति मिलती है. इसमें मौजूद एंटी फंगल गुण, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण और एंटी बैक्टीरियल गुण शरीर के लिए बहुत उपयोगी हैं.

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