कभी भी धोखा दे सकता है ये साइलेंट किलर… बाॅडी पर दिखते हैं ऐसे लक्षण, भूलकर भी न करें इग्नोर

कभी भी धोखा दे सकता है ये साइलेंट किलर… बाॅडी पर दिखते हैं ऐसे लक्षण, भूलकर भी न करें इग्नोर



<p style="text-align: justify;">हाई कोलेस्ट्राॅल एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है, क्योंकि अक्सर इसके सिम्पटम्स साफ ताैर पर नजर नहीं आते. लेकिन कुछ ऐसे संकेत जो शरीर पर दिखते हैं, लेकिन हम उन्हें इग्नोर कर देते हैं. ये लापरवाही भारी पड़ सकती है. हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक तक की वजह बन सकती है. आइए जानते हैं वह काैन से संकेत हैं, जिनके नजर आने पर हमें बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा को लेकर सचेत हो जाना चाहिए…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आंखों के आसपास पीले रंग के धब्बे</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आंखों के आसपास या किनारे पीले रंग के पैचेस नजर आ रहे हैं. अगर ऐसा है तो ये ​स्थिति जैंथेलाज्मा हो सकती है. ये पैचेस अक्सर बाॅडी में हाई लेवल कोलेस्ट्राॅल की ओर संकेत देते हैं. इन पैजेस में दर्द नहीं होता लेकिन वे ये दर्शाते हैं कि बाॅडी के ब्लड सर्कुलेशन में कुछ गड़बड़ है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>काॅर्निया में ये बदलाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आंखों के काॅ​र्निया के आसपास लाइट कलर की रिंग बनती नजर आए तो सतर्क हो जाना चाहिए. उम्र अगर 45 वर्ष से कम है, तो इसे कतई अनदेखा न करें. ये ​स्थिति आर्कन सेनिलिस के चलते हो सकती है, जिसमें आंखों में कोलेस्ट्राॅल जमा होने लगता है. हालांकि ये आंखों की नजर को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन ये बाॅडी में हाई कोलेस्ट्राॅल की ओर सचेत करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरीर के इन हिस्सों में गांठ</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कोहनी, घुटनों, हाथों या नितंबों पर अजीब पीले रंग के उभरते हुए पीले धब्बे नजर आते आएं तो ये बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल की बढ़ी मात्रा के चलते हो सकते हैं. इन्हें जैंथोमा कहा जाता है, जिसमें ​स्किन के नीचे कोलेस्ट्रॉल से भरी गांठें बनने लगती हैं. इनका साइज छोटा या बड़ा हो सकता है, जो शरीर में फैट की अ​धिक मात्रा की ओर इशारा करती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जोड़ों में दर्द</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाई कोलेस्ट्राॅल सीध जाॅइंट पेन का कारण नहीं बनता, लेकिन ये सूजन की वजह बन सकता है. अगर पैर के अंगूठे या जोड़ों में अचानक सूजन या दर्द होता है, तो यह गाउट हो सकता है. ये ​स्थिति बाॅडी में हाई कोलेस्ट्राॅल के चलते हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पलकों का रंग बदलना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आंखों की पलकों का रंग पीला या हल्का हो रहा है तो ये बाॅडी में लिपिड प्राॅब्लम का संकेत हो सकता है. भले ही ये ​स्थिति जैथेलाज्मा जैसी न हो. इस नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेट में दर्द</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा अ​धिक होने से गाॅल ब्लैडर में पथरी बन जाती है. जिसके चलते पेट में दर्द हो सकता है. थोसी भी चिकनाई युक्त खाना खाने पर ​स्थिति और बिगड़ सकती है. ये हाई कोलेस्ट्राॅल की ओर इशारा करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लगातार थकान महसूस होना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ने से आर्टरीज ब्लाॅक होने का रिस्क बढ़ जाता है. इससे बाॅडी में ऑक्सीजन के साथ ब्लड का सर्कुलेशन प्राॅपर नहीं हो पाता. जिसके चलते हार्ट संघर्ष करने लगता है. बाॅडी थकी और सुस्त फील करती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन बातों का रखें ध्यान</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">हाई कोलेस्ट्राॅल के चलते हार्ट अटैक, स्ट्रोक, &nbsp;एथेरोस्क्लेरोसिस, गाॅल ब्लैडर स्टोन आदि हेल्थ प्राॅब्लम का सामना करना पड़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;">अगर बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल की बढ़ी मात्रा से संबं​धित कोई लक्षण दिख रहे हैं तो लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं.</li>
<li style="text-align: justify;">अपनी डाइट में बदलाव करें. खानपान में अ​धिक फाइबर वाले फूड शामिल करें, तली हुई चीजों की मात्रा कम करें.</li>
<li style="text-align: justify;">रोजाना एक्सरसाइज जरूर करें.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/couples-are-now-planning-babymoon-instead-of-honeymoon-2956259">शादी के बाद हनीमून नहीं अब बेबीमून प्लान कर रहे हैं कपल, जानें क्या है ये ट्रेंड</a></strong></p>
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<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>
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रंगों में छुपा है खुशियों का गहरा राज, सही चुना तो ‘डोपामाइन’ का बढ़ेगा लेवल और खिल उठेंगे आप

रंगों में छुपा है खुशियों का गहरा राज, सही चुना तो ‘डोपामाइन’ का बढ़ेगा लेवल और खिल उठेंगे आप


Secret of Happiness in Colors: रंग न सिर्फ हमारी जिंदगी में रंग ही नहीं भरते, बल्कि हमारी सोच पर भी छाप छोड़ते हैं. हर रंग की अपनी एक कहानी होती है, जो हमारे मूड को बदलने के लिए काफी है. जानकार मानते हैं कि पीला या नारंगी जैसे चटकीले रंग आंतरिक संतुष्टि और खुशी को दोगुना बढ़ा देते हैं, जिसका कारण डोपामाइन हार्मोन का बढ़ा लेवल होता है. रंग के कारण डोपामाइन लेवल बढ़ता है और फिर जिंदगी खुशरंग हो जाती है! 

डोपामाइन होता क्या है?

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन है, जो मस्तिष्क में काम करता है. यह एक रासायनिक संदेशवाहक है और तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेशों को संचारित करता है. हालांकि, इसका कोई रंग नहीं होता, लेकिन डोपामाइन पर रंग का प्रभाव पड़ता है. वैज्ञानिक रिसर्च से पता चलता है कि अलग-अलग रंग आपके दिमाग के विभिन्न हिस्सों को सक्रिय करते हैं.

आयुष निदेशालय दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसएजी) और इहबास इकाई के प्रभारी डॉक्टर अशोक शर्मा के मुताबिक, हमारी जिंदगी रेनबो की तरह है, हमारे भाव अलग-अलग होते हैं, कभी हम खुश होते हैं, तो कभी दुखी होते हैं… कभी जीवन उमंग भरा होता है तो बहुत रंग दिखते हैं और कभी दुखी होते हैं तो जिंदगी बेरंग हो जाती है. इसे लेकर रिसर्च भी खूब हुई है.

अब सवाल उठता है कि ये आखिर होता कैसे है?

स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक, रंग मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस को संदेश भेजते हैं, ये आपके मूड को बदलते हैं और इसमें हार्मोन रिलीज करने की ताकत होती है. मनोवैज्ञानिकों की मानें तो खासतौर पर पीला और नारंगी रंग खुशी से जुड़ा होता है. पीला रंग हंसमुख और संतोष को दर्शाता है.

एक रिसर्च में पाया गया कि खुश लोग पीले रंग को अपनी भावनाओं के लिए चुनते हैं, जबकि उदास लोग ग्रे रंग को चुनते हैं. पीले रंग में बना ‘स्माइली’ इस खुशी की सबसे बड़ी मिसाल है, जिसे 1960 में एक डिजाइनर ने कर्मचारियों का मूड बेहतर करने के लिए बनाया था.

नीला रंग मूड को करता है शांत

स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक, नीला रंग भी मूड को शांत करता है और सोशल मीडिया पर ‘डोपामाइन ड्रेसिंग’ का ट्रेंड भी इस बात को दर्शाता है कि कुछ लोग चटकीले रंग वाले कपड़े पहनकर खुशी महसूस करते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक, अगर मूड को सही रखना है तो इसमें सबसे अच्छी भूमिका सही रंग के कपड़े निभाते हैं. पीले और नारंगी रंग को अपनी ज़िंदगी में शामिल करके खुशियों को दोगुना किया जा सकता है. 2012 के हर्टफोर्डशायर विश्वविद्यालय के एक रिसर्च ने पुष्टि की कि कपड़े पहनने का तरीका हमारे मूड को सीधे प्रभावित करता है. यह कपड़ों की मनोवैज्ञानिक ताकत को दर्शाता है, जो खुशी और संतोष का सबब बनते हैं.

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फैटी और मीठा खाने को लेकर रिसर्च में बड़ा खुलासा, कमजोर होता है दिमाग

फैटी और मीठा खाने को लेकर रिसर्च में बड़ा खुलासा, कमजोर होता है दिमाग


Sweet Side Effect: रिसर्च में पाया है कि ज्यादा फैटी और मीठा खाना दिमाग पर बुरा असर डालता है. सिडनी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में यह जानने की कोशिश की कि ज्यादा वसा (फैट) और चीनी वाले खाने (विशेषकर रिफाइंड शुगर और सैचुरेटेड फैट) का असर हमारे दिमाग की दिशा पहचानने की क्षमता पर क्या होता है. इसे स्पाशियल नेविगेशन कहते हैं जो एक जगह से दूसरी जगह का रास्ता याद रखने की क्षमता होती है. जो बताती है कि आपके दिमाग का हिप्पोकैम्पस नाम का हिस्सा कितना स्वस्थ है. यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी में छपी है.

मीठा खाने के क्या नुकसान है?

इस रिसर्च का नेतृत्व डॉ. डॉमिनिक ट्रान ने किया. उन्होंने बताया कि फैटी और मीठा खाना खाने की आदत से दिमाग की कुछ क्षमताएं कमजोर हो सकती हैं, खासकर वह हिस्सा जो दिशा और याददाश्त से जुड़ा होता है. अच्छी बात यह है कि यह असर स्थायी नहीं होता. डॉ. ट्रान के मुताबिक अगर हम अपना खानपान सुधार लें, तो हमारा दिमाग फिर से अच्छा काम करने लगता है. जैसे कि किसी नई जगह रास्ता पहचानना या नया रास्ता याद रखना.

इस रिसर्च में 18 से 38 साल की उम्र के 55 विश्वविद्यालय छात्रों को शामिल किया गया. उनसे पूछा गया कि वे कितना फैट और चीनी वाला खाना खाते हैं. फिर उनका वजन, याद रखने की क्षमता और दिमागी दिशा-ज्ञान की परीक्षा ली गई. इस परीक्षण में उन्हें वर्चुअल रियलिटी की एक भूलभुलैया में रखा गया, जहां उन्हें एक खजाने की पेटी का पता लगाना था. प्रयोग में लोगों को छह बार इस खजाने की पेटी ढूंढनी थी. भूलभुलैया के चारों ओर कुछ खास चीजें थीं, जिनकी मदद से लोग अपना रास्ता याद रख सकते थे. हर बार जब प्रयोग किया गया, तो शुरू करने की जगह और खजाने की पेटी की जगह एक ही थी.

खानपान में सुधार करना है जरूरी

अगर प्रतिभागी 4 मिनट के अंदर खजाना ढूंढ लेते, तो अगला राउंड शुरू हो जाता. अगर वे इतने समय में खजाना नहीं ढूंढ पाए, तो उन्हें तुरंत खज़ाने की जगह पर पहुंचा दिया गया और अगले राउंड से पहले उस जगह को अच्छी तरह से देखने के लिए 10 सेकंड दिए गए.

जिन छात्रों ने कम फैट और कम शुगर वाला खाना खाया था, उन्होंने खजाने का स्थान ज्यादा सही ढंग से पहचाना. डॉ. ट्रान ने बताया यह देखा गया कि ज्यादा चीनी और फैट खाने वाले छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा. इससे यह बात और पक्की हो जाती है कि अगर हम अपने खानपान में सुधार करें, तो हम अपने दिमाग को तेज और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं.

कई बीमारियों की वजह है फैट और शुगर खाना

वैज्ञानिक पहले से ही जानते हैं कि ज़्यादा फैट और शुगर खाना मोटापा, हार्ट की बीमारी और कुछ कैंसर की वजह बन सकता है. अब यह भी साफ हो रहा है कि यह आदत दिमाग को भी नुकसान पहुंचाती है और वह भी कम उम्र में. डॉ. ट्रान ने कहा, “यह शोध बताता है कि अच्छा खानपान सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग की सेहत के लिए भी जरूरी है. खासकर युवावस्था में, जब हमारा दिमाग सबसे अच्छा काम करता है.”

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माता सीता के शोक को हरने वाला ‘अशोक’ खास, इसमें है महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान

माता सीता के शोक को हरने वाला ‘अशोक’ खास, इसमें है महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान


Benefits of Ashok Tree: “तरु अशोक मम करहूं अशोका…” माता सीता कहती हैं “अशोक के पेड़ ने मेरी विरह वेदना को दूर किया, इसलिए मैं इसका सम्मान करती हूं.” माता सीता की विरह वेदना को दूर करने वाले अशोक के पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का समाधान है. अशोक की पत्तियों, छाल से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है.

महिलाओं की हर समस्या के लिए लाभदायक

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि इस पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का हल है. धर्म शास्त्रों में भी अशोक पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि पवित्र पेड़ की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई थी. पेड़ की चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूजा की जाती है. मान्यता है कि अशोक अष्टमी के दिन पूजा करने से न केवल सुख-शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि रोग-शोक भी दूर होते हैं.

ये तो था पौराणिक महत्व, इसके औषधीय गुणों से आयुर्वेदाचार्य और पंजाब स्थित ‘बाबे के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल’ के डॉ. प्रमोद आनंद तिवारी ने रूबरू कराया. उन्होंने बताया, “अशोक के पेड़ का आयुर्वेदिक महत्व है. इसे महिलाओं का दोस्त कहें तो ज्यादा नहीं होगा. इसका इस्तेमाल स्त्री रोग और मासिक धर्म की समस्याओं जैसे- भारीपन, ऐंठन, अनियमितता और दर्द को कम करने में भी सहायक है.”

अशोक के पेड़ के अनगिनत फायदे

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि समस्याओं से राहत पाने के लिए इसे भोजन के बाद दिन में दो बार गर्म पानी या शहद के साथ चूर्ण के साथ ले सकते हैं. अशोक की छाल खून साफ करती है, जिससे महिलाओं की त्वचा में निखार आती है. अशोक की छाल को चेहरे पर लगाने से डेड स्किन से छुटकारा मिलता है.

रिसर्च बताती है कि अशोक की छाल पीरियड्स में होने वाले तेज दर्द और ऐंठन, सूजन को कम कर देती है. यह बढ़े हुए वात को नियंत्रित करती है. अशोक के सेवन से वात की समस्या खत्म होती है. इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है, जिससे कब्ज, वात, ऐंठन, दर्द में राहत मिलती है.

त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक

अशोक के पेड़ में कई प्रकार के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी विभिन्न रोगों से रक्षा करने में सहायक होते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन, फ्लेवोनोइड्स तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए टॉनिक के रूप में काम करते हैं. अशोक के पेड़ की जड़ें और छाल मुहासे और त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक हैं. आयुर्वेदाचार्य प्रेग्नेंसी के दौरान और उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने और बिना डॉक्टर के परामर्श के इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं.

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