Beetroot Halwa: आयरन-एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है ‘चुकंदर का हलवा’, मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

Beetroot Halwa: आयरन-एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है ‘चुकंदर का हलवा’, मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ


Health Benefits of Beetroot Halwa: ‘चुकंदर का हलवा’ एक अनोखी और स्वादिष्ट भारतीय मिठाई है, जो स्वास्थ्य और स्वाद का शानदार गठजोड़ है. चटक लाल रंग और हल्की मिठास के साथ यह हलवा न केवल स्वाद को बढ़ाएगा, बल्कि शरीर को भी पोषण प्रदान करेगा. चुकंदर की प्राकृतिक मिठास इसे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए पसंदीदा बनाती है. आइए, इस स्वादिष्ट व्यंजन के फायदे और बनाने की विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं.

पोषक तत्वों से भरपूर होता है चुकंदर 

भारत की हर एक रसोई में चुकंदर को उसकी मिठास और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी गुणों की वजह से इस्तेमाल किया जाता है. यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें आयरन, फोलेट, मैंगनीज, और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को पोषण प्रदान करते हैं.

ज्यादातर मौकों पर सलाद के लिए इस्तेमाल होने वाली चुकंदर का हलवा बनाने के लिए दूध, चीनी, घी, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसका स्वाद बढ़ाते हैं.

खून की कमी के लिए लाभकारी माना जाता है चुकंदर 

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के मुताबिक, ‘चुकंदर का हलवा’ खून की कमी (एनीमिया) में लाभकारी माना जाता है. चुकंदर में मौजूद आयरन और फोलिक एसिड खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं. यह हलवा उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है, जो एनीमिया से पीड़ित होते हैं. इसके अलावा, इसे दिल के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसमें नाइट्रेट्स होते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

साथ ही, पाचन में सुधार के लिए भी ‘चुकंदर का हलवा’ लाभदायक माना जाता है. चुकंदर में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा, चुकंदर का सेवन शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. इतना ही नहीं, चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं, जबकि आयरन और अन्य पोषक तत्व बालों के झड़ने को कम करने में मदद करते हैं.

 

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ये चीज पीने के बाद कर लिया ब्रश तो गिर जाएंगे आपके दांत! जरूर जान लीजिए ये बात

ये चीज पीने के बाद कर लिया ब्रश तो गिर जाएंगे आपके दांत! जरूर जान लीजिए ये बात


Teeth Care Tips: आप सुबह उठते हैं, फ्रेश होने के बाद एक गिलास संतरे का जूस या नींबू पानी पीते हैं और फिर सीधे ब्रश करने लगते हैं. क्योंकि यही तो हेल्दी लाइफस्टाइल है, है ना? लेकिन जरा ठहरिए! क्या आप जानते हैं कि ये आदत धीरे-धीरे आपके दांतों की सबसे बड़ी दुश्मन बन सकती है? हम अक्सर हेल्थ के चक्कर में कई अच्छी लगने वाली आदतें अपनाते हैं, लेकिन तरीका अगर सही न हो, तो वही आदत नुकसान पहुंचा सकती है. आज हम आपको एक ऐसी सामान्य गलती के बारे में बताएंगे, जो आप रोज कर रहे हैं और शायद आपको इसका अंदाजा भी नहीं है. 

एसिडिक ड्रिंक और ब्रशिंग

संतरे का जूस, नींबू पानी, सेब का सिरका या कोई भी खट्टा पेय आपके शरीर के लिए जरूर फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इनमें एसिड की मात्रा बहुत अधिक होती है. जब आप ऐसे पेय का सेवन करते हैं, तो यह आपके दांतों की ऊपरी परत  को थोड़ी देर के लिए मुलायम बना देता है. अब अगर आप इसी समय ब्रश करते हैं, तो आप अपने दांतों के मुलायम हुए हिस्से को घिस देते हैं. जिसकी वजह से आपके दांत कमजोर होने लगते हैं. 

ये भी पढ़े- प्रेग्नेंसी के दौरान इन गलतियों से पैदा हो सकता है प्लास्टिक बेबी, जानें ये कितना खतरनाक

कब करें ब्रश?

डेंटिस्ट की मानें तो अगर आपने कोई एसिडिक चीज पी है, तो कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे तक ब्रश करने से बचें. इस दौरान आपका लार प्राकृतिक रूप से आपके मुंह का pH बैलेंस ठीक करता है और दांतों को फिर से मज़बूत बनाता है. अगर आप तुरंत मुंह को साफ करना चाहते हैं, तो सादे पानी से कुल्ला करें या शुगर-फ्री च्युइंग गम चबा सकते हैं, जिससे लार बनती है और मुंह की सफाई प्राकृतिक रूप से होती है. 

क्या करें और क्या न करें

अगर नींबू पानी या जूस पीते हैं, तो स्ट्रॉ का इस्तेमाल करें

ब्रश से पहले कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें

खट्टे पेय के तुरंत बाद ब्रश न करें

हार्ड ब्रिस्टल वाले ब्रश का इस्तेमाल न करें

हेल्दी रहना अच्छी बात है, लेकिन हेल्थी आदतें भी तब ही कारगर होती हैं जब उन्हें सही तरीके से अपनाया जाए. नींबू पानी या संतरे के जूस से दिन की शुरुआत जरूर करें, लेकिन ब्रश करने से पहले थोड़ा ठहर जाएं. यही छोटी सी समझदारी आपके दांतों को सालों तक मजबूत बनाए रखेगी.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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प्रेग्नेंसी के दौरान इन गलतियों से पैदा हो सकता है प्लास्टिक बेबी, जानें ये कितना खतरनाक

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Plastic Baby: मां बनने की खुशी एक महिला ही जान सकती है. वो पहली बार अल्ट्रासाउंड करवाना और बच्चे की धड़कन सुनना, लेकिन इस खुशी के साथ-साथ वह हर उस चीज का ध्यान भी रख रही थी, जो उसकी और उसके बच्चे की सेहत को प्रभावित कर सकती थी. तभी एक दिन डॉक्टर बताते हैं कि, प्लास्टिक इस्तेमाल करने से बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए इस समय आपको प्लास्टिक से बनी चीजों से दूर रहना होगा, वरना आपको प्लास्टिक बेबी हो सकता है. 

क्या होता है ‘प्लास्टिक बेबी’?

‘प्लास्टिक बेबी’ कोई रोबोट नहीं है, बल्कि एक ऐसा नवजात है, जिसका विकास गर्भ में उन रसायनों के संपर्क में आने से प्रभावित हुआ है, जो प्लास्टिक उत्पादों से निकलते हैं. 

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आम गलतियां बन सकती हैं खतरनाक 

प्लास्टिक की बोतल या कंटेनर में पानी और खाना स्टोर करना

गर्म खाना या पानी प्लास्टिक में रखने से उसमें मौजूद हानिकारक केमिकल्स भोजन में घुल सकते हैं, जो गर्भस्थ शिशु के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. 

माइक्रोवेव में प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमाल

गर्भवती महिलाएं अक्सर बिना सोचे माइक्रोवेव में खाना गर्म करती हैं. ये प्लास्टिक गर्म होने पर जहरीले रसायन छोड़ सकता है. 

पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन

ऐसे फूड्स जो प्लास्टिक पैकिंग में आते हैं. ये शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकते हैं. 

कॉस्मेटिक्स और स्किन प्रोडक्ट्स में प्लास्टिक 

प्रेग्नेंसी में इस्तेमाल होने वाले कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी माइक्रोप्लास्टिक और हॉर्मोन डिसरप्टिंग एजेंट्स पाए जाते हैं. 

रोजमर्रा के प्लास्टिक उत्पादों का प्रयोग

जैसे प्लास्टिक कटोरी, थाली, दूध की बोतल आदि, जो रोजाना उपयोग में लाए जाते हैं, इनसे बचना जरूरी है. 

प्लास्टिक के प्रभाव से क्या हो सकता है नुकसान?

बच्चे का न्यूरोलॉजिकल विकास प्रभावित हो सकता है

हार्मोन असंतुलन और थायरॉइड की समस्या

भविष्य में मोटापा और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा

लड़कियों में समय से पहले पीरियड्स या लड़कों में टेस्टोस्टेरोन कम होना

बचाव कैसे करें?

स्टील, कांच या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें

पैक्ड फूड से दूरी बनाएं

ऑर्गेनिक स्किनकेयर और हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें

घर पर खाना पकाएं और ताजा भोजन करें. 

मां बनना एक खूबसूरत अनुभव है, लेकिन यह ज़िम्मेदारी भी है. गर्भावस्था के दौरान की गई छोटी-छोटी सावधानियां बच्चे की पूरी जिंदगी तय कर सकती हैं. ‘प्लास्टिक बेबी’ जैसे डरावने शब्द को हकीकत बनने से रोकना आपके हाथ में है. 

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कोरोनाकाल के दौरान इस एक चीज ने बूस्ट की थी लोगों की इम्यूनिटी, भूल गए हैं तो जान लीजिए नाम

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Immunity Booster: वो दिन याद हैं जब हर सुबह की शुरुआत हल्दी, अदरक या गिलोय की चाय से होती थी? जब सोशल मीडिया पर हर कोई इम्यूनिटी बूस्टर काढ़े की रेसिपी शेयर कर रहा था और घरों में दादी-नानी के नुस्खे फिर से ज़िंदा हो गए थे? कोरोना का वो दौर भले ही बीत गया हो, लेकिन उसने हमें एक बहुत अहम चीज सिखाई थी, स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है. 

उस समय एक चीज ऐसी भी थी, जो हर घर में अचानक से जरूरी बन गई थी. लोग जिसे पहले मामूली समझते थे, वही चीज आयुर्वेद का नायक बनकर सामने आई। अब जब सब कुछ सामान्य लगने लगा है, तो कई लोग उसे फिर से भूलने लगे हैं. अब जब फिर से कोरोना दस्तक दे चुका है तो इसे भूलने की जगह याद करना चाहिए. हम बात कर रहे हैं च्यवनप्रास की…

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कोविड के समय कैसे बना लोगों का साथी?

जब वायरस से लड़ने के लिए कोई दवा मौजूद नहीं थी, तब लोग प्राकृतिक उपायों की ओर लौटे. डॉक्टरों ने भी च्यवनप्राश को रोज सुबह सेवन करने की सलाह दी थी. इसका नियमित सेवन न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि फेफड़ों को भी मजबूत करता है. 

क्यों फिर से याद करने की जरूरत है?

जब लोग नॉर्मल लाइफ में लौट चुके हैं, तो हेल्थ को फिर से नजरअंदाज करना शुरू कर चुके हैं. लेकिन अब भी कोरोना वायरस खत्म नहीं हुआ है. इसलिए मौसमी बीमारियों, कमजोर इम्यूनिटी और तनाव भरी जीवनशैली में च्यवनप्राश एक प्राकृतिक कवच बन सकता है. 

कैसे और कब करें सेवन?

रोज सुबह खाली पेट या दूध के साथ एक चम्मच च्यवनप्राश लें

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई इसे ले सकता है 

ठंड के मौसम में इसका प्रभाव और भी अधिक होता है, लेकिन मॉनसून में भी इसे लिया जा सकता है

हमने कोरोना के दौर से बहुत कुछ सीखा, साफ-सफाई, खानपान और सबसे जरूरी, इम्यूनिटी का महत्व. च्यवनप्राश वो नेचुरल रक्षक है जिसे हमें फिर से अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए. अगर आप भी भूल चुके हैं, तो आज से ही इसे दोबारा अपनाएं और खुद को और अपने परिवार को बनाएं मजबूत. 

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फिर डरा रहा है Covid-19, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूर करें ये 4 काम

फिर डरा रहा है Covid-19, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूर करें ये 4 काम


Covid Safety Tips for Children: जैसे ही सब कुछ सामान्य होता नजर आने लगा था, स्कूलों की घंटियां फिर से बजने लगी थीं और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटने लगी थी, वैसे ही एक बार फिर Covid-19 ने दस्तक दे दी है. ये वायरस मानो बार-बार हमें याद दिलाता है कि लापरवाही अब भी भारी पड़ सकती है. बच्चों की मासूमियत, उनकी नाजुक सेहत और खुलकर खेलने-कूदने की दुनिया को इस वायरस से बचाना अब हर माता-पिता की पहली जिम्मेदारी बन गई है।

बच्चे न तो मास्क पहनने में उतने सतर्क रहते हैं, न ही बार-बार हाथ धोने की आदत उन्हें होती है. ऐसे में उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना सिर्फ सावधानी नहीं, बल्कि एक जरूरी कदम है. इसलिए ये 4 ज़रूरी काम, जो हर माता-पिता को करने चाहिए ताकि उनका बच्चा Covid-19 की चपेट में आने से बच सके. 

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बच्चों को स्वच्छता की आदत डालें

बच्चों को हाथ धोने, चेहरे को न छूने और खांसते-छींकते समय मुंह ढकने की आदत डालना जरूरी है. लेकिन सीधे-सीधे नियम बताने की जगह अगर ये बातें खेल या कहानियों के जरिए सिखाई जाएं, तो बच्चे न सिर्फ इन्हें अपनाते हैं, बल्कि समझते भी हैं. रंग-बिरंगे साबुन, गाने के साथ हाथ धोने या उनके पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर के ज़रिए उन्हें प्रेरित किया जा सकता है. 

मास्क पहनने की आदत को सहज बनाएं

छोटे बच्चों को लंबे समय तक मास्क पहनना अच्छा नहीं लगता. ऐसे में हल्के कपड़े वाले, बच्चों की पसंद के कार्टून प्रिंट वाले मास्क उन्हें पसंद आ सकते हैं.  साथ ही, माता-पिता खुद भी अगर मास्क पहनने की आदत डाल लें तो बच्चे उसे अपनाने में पीछे नहीं हटेंगे. 

खान-पान से इम्युनिटी बढ़ाएं

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करना बेहद जरूरी है. उन्हें विटामिन C से भरपूर फल (जैसे संतरा, अमरूद), ड्राई फ्रूट्स और हल्दी वाला दूध देना चाहिए. जंक फूड से दूरी बनाकर घर का पौष्टिक खाना उनकी सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करता है. 

भीड़-भाड़ से बच्चों को दूर रखें

जहां तक हो सके, बच्चों को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ले जाने से बचें. शादी, पार्टी या सार्वजनिक समारोहों में बच्चों की मौजूदगी उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है. अगर जाना जरूरी हो तो दूरी बनाए रखना और मास्क पहनना अनिवार्य करें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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