दिमाग की नसों में सूजन होने पर शरीर देता है 6 संकेत, लक्षण दिखते ही तुरंत भागें डॉक्टर के पास
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दिमाग की नसों में सूजन होने पर शरीर देता है 6 संकेत, लक्षण दिखते ही तुरंत भागें डॉक्टर के पास
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Benefits of Bran Rotis: गेहूं के आटे में चोकर की पर्याप्त मात्रा वाली रोटियां स्वाद और सेहत से भरपूर होती हैं. स्वास्थ्य एक्सपर्ट बताते हैं कि चोकर युक्त रोटियां खाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. फाइबर से भरपूर चोकर खाने से न केवल पाचन तंत्र फिट रहता है बल्कि कार्बोहाइड्रेट्स का बेहतर सोर्स होने से ऊर्जा भी मिलती है.
कई बीमरियों के लिए फायदेमंद है चोकर
स्वास्थ्य एक्सपर्ट चोकर वाले आटे के सेवन की सलाह देते हैं. अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन वेबसाइट पर छपे एक लेख के मुताबिक, चोकर का इस्तेमाल पेट और आंत से जुड़ी समस्याओं, खासकर कब्ज के इलाज के लिए किया जाता है. गेहूं का चोकर सबसे प्रभावी माना जाता है. इसके सेवन से पेट साफ होता है.
रिसर्च इस बात को साबित कर चुके हैं कि चोकर कब्ज से राहत दिलाने में प्रभावी है. इस बारे में आयुर्वेदाचार्य प्रमोद तिवारी बताते हैं, “गेहूं के आटे से बनी चोकर वाली रोटी फाइबर से भरपूर होती है, जो पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है. यह कार्बोहाइड्रेट्स का एक अच्छा स्रोत है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है. साथ ही यह वजन को भी कंट्रोल करने में मदद करता है.”
जिन लोगों को अपच, कब्ज या पाचन संबंधित समस्या रहती है, उन्हें चोकर वाली रोटियां जरूर खानी चाहिए. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याओं से भी छुटकारा दिलाने में मददगार है. यह आंतों में चिपकी गंदगी को भी दूर करने में सहायक होता है.
ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद
ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर छपी एक लेख के मुताबिक, चोकर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) 15 के बराबर होता है, जो इसे कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ के रूप में वर्गीकृत करता है. उन्होंने चोकर के लाभ को गिनाते हुए आगे बताया, “चोकर में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, जिससे हृदय स्वास्थ बना रहता है. यही नहीं इससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है. चोकर वाली रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 15 होता है, जिससे ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. यह मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है.”
चोकर वाले आटे के सेवन से बवासीर, पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. पेट दर्द, वात, एसिडिटी, खट्टी डकारें, मरोड़, सीने में जलन जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है.
चोकर वाली रोटी पर कई रिसर्च हुए हैं, जो इसके स्वास्थ्य लाभों को उजागर करते हैं. चोकर वाली रोटी में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं.
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Tadasana is Beneficial for Strengthening Muscles: ‘योग’ को अगर भारतीय संस्कृति का एक अनमोल तोहफा कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि योग करने से न केवल शारीरिक रूप से फायदा पहुंचता है बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को भी संतुलित बनाता है. आज हम बात करेंगे ‘ताड़ासन’ की जिसे ‘पाम ट्री पोज’ या ‘माउंटेन पोज’ भी कहा जाता है. यह ‘योग’ का एक मूलभूत आसन है, जो न केवल शरीर को स्थिरता और संतुलन प्रदान करता है, बल्कि मन को शांत और केंद्रित करने में भी मदद करता है.
किसी भी योग की शुरुआत है ताड़ासन
‘ताड़ासन’ को योग की शुरुआत माना जाता है, क्योंकि यह और कई आसनों का आधार है. इसकी सरलता इसे सभी उम्र और स्तर के लोगों के लिए उपयुक्त बनाती है. दरअसल, ‘ताड़ासन’ एक खड़े होकर किया जाने वाला योग आसन है, जिसमें शरीर को सीधा रखते हुए दोनों पैरों को जोड़ा जाता है और हाथों को ऊपर की ओर उठाकर या सिर के ऊपर जोड़ा जाता है. इस आसन का नाम ‘ताड़’ (खजूर का पेड़) से आया है, क्योंकि इसकी मुद्रा लंबे, सीधे और मजबूत पेड़ जैसी होती है. यह आसन शरीर की मुद्रा (पोश्चर) को सुधारने, मांसपेशियों को मजबूत करने और शारीरिक संतुलन को बढ़ाने में मदद करता है.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कई लाभ
‘ताड़ासन’ के नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं. यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करने और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाने में मदद करता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं. इसके अलावा, यह आसन पैरों, जांघों, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है. साथ ही शरीर का संतुलन बढ़ाता है और पैरों को स्थिरता प्रदान करता है, जिससे गिरने का खतरा कम होता है.
इसके साथ ही यह पाचन में भी सुधार करने का काम करता है. इस आसन से पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. इसके अलावा, गहरी सांस के साथ ताड़ासन करने से मन शांत होता है और तनाव, चिंता जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने भी बताया लाभकारी
‘ताड़ासन’ करने के फायदों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपना एआई-जनरेटेड वीडियो शेयर किया था. उन्होंने कहा था, “ताड़ासन शरीर के लिए बहुत अच्छा है. इससे बॉडी को ज्यादा ताकत मिलती है.”
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<p style="text-align: justify;">किडनी न सिर्फ ब्लड को प्यूरीफाई करती है, बिल्क इसके साथ ही जरूरी पोषक तत्वों का बैलेंस भी बनाए रखती है. लेकिन कई बार शरीर का ये महत्वपूर्ण आर्गन संघर्ष कर रहा होता है, लेकिन इसके डैमेज होने का संकेत हम नहीं समझ पाते. ये लापरवाही खतरनाक हो सकती है. वो ऐसे काैन से संकेत हैं, जिन्हें देखकर हमें अपनी किडनी की हेल्थ को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए, आइए जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चेहरे पर सूजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह उठने के बाद आंखों के आसपास और चेहरे पर सूजन दिखती है तो ये किडनी डैमेज की चेतावनी हो सकती है. किडनी बाॅडी में सोडियम और फ्लूड का बैलेंस रेग्यूलेट करती है. जब ये प्राॅपर वर्क नहीं कर पाती है तो फ्लूड टिश्यू में जमा होने लगता है, जो स्वेलिंग का कारण बनता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यूरिन में झाग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर सुबह जागने के बाद यूरिन झागदार आता है तो ये किडनी डैमेज का साइन हो सकता है. किडनी बाॅडी में आवश्यक प्रोटीन को बनाए रखते हुए वेस्ट को बाहर निकालती है. लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है तो प्रोटीन लीक होना शुरू हो जाता है. इसके चलते ये दिक्कत सामने आती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सुबह थकान महसूस होना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह नींद से उठने के बाद शरीर थका हुआ या थकान महसूस होती है तो ये किडनी डैमेज का अलार्म हो सकता है. किडनी शरीर में टाॅक्सिन को बाहर निकालती है. लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं करती है तो ये टाॅक्सिन ब्लड में जमा होने लगते हैं. जिससे थकान, कंसन्ट्रेट करने में कठिनाई आदि महसूस होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्किन ड्राई और इचिंग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी डैमेज होने के चलते शरीर में स्किन प्राॅब्लम भी देखने को मिल सकती है. स्किन ड्राई या फिर खुजली हो सकती है. सुबह ये दिक्कत अधिक महसूस हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि किडनी बाॅडी में मिनरल्स का बैलेंस बनाए रखने के साथ गंदगी को बाहर निकालती है. लेकिन किडनी फंक्शन प्रभावित होने से बाॅडी में इन दोनों तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बैड ब्रीथ</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह जागने पर मुंह की सांसों की स्मेल भी किडनी प्राॅब्लम की ओर इशारा करती है. खराब किडनी फंक्शन की वजह से ब्लड में टाॅक्सिन जमा होने लगते हैं, जिससे बैड ब्रीथ की समस्या देखने को मिल सकती है. इसी स्थिति को यूरेमिक फेटर कहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यूरिन में ब्लड</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यूरिन में खून देख अक्सर लोग डर जाते हैं. लेकिन ये यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या किडनी स्टोन के चलते हो सकता है. हालांकि बिना दर्द के यूरिन में खून आना घातक बीमारी रीनल सेल कार्सिनाेमा या कार्सिनोमा यूरिनरी ब्लैडर का संकेत हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भूख में कमी और थकान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भूख न लगना और थकान सामान्य से दिखने वाले लक्षण हैं. लेकिन जब पेशेंट किडनी डिजीज की एडवांस स्टेज में होता है ये लक्षण दिख सकते हैं. ऐसा एनीमिया की स्थिति के चलते होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-scientists-made-cancer-vaccine-know-how-effective-on-third-stage-cancer-patients-2954924">वैज्ञानिकों ने बना ली कैंसर की दवा, जानिए थर्ड स्टेज के कैंसर में कितनी कारगर ये वैक्सीन?</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. </strong></p>
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Children Health in Changing Weather: पांच मिनट पहले ही तो तेज धूप थी और अब बारिश! मौसम के इस खेल ने लोगों को चिंतित कर दिया है. क्योंकि बदलते मौसम के साथ बच्चों की सेहत सबसे पहले प्रभावित होती है और एक मां के लिए इससे बड़ी टेंशन और क्या हो सकती है कि बच्चा बीमार पड़ जाए?इसलिए जरूरी है कि इस ‘कभी धूप-कभी बारिश’ वाले मौसम में बच्चों की खास देखभाल की जाए. आइए जानते हैं कुछ आसान और असरदार टिप्स, जिनसे आप अपने बच्चों को इस मौसम की मार से बचा सकते हैं.
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बच्चों के कपड़े मौसम के हिसाब से बदलें
बदलते मौसम में बच्चे न ज्यादा गर्म कपड़ों में रहें और न ही पूरी तरह हल्के में. कॉटन के कपड़े पहनाएं, साथ में एक हल्का जैकेट या शॉल जरूर रखें, जो तापमान कम होते ही काम आ सके.
बारिश में भीगने से बचाएं
बारिश के अचानक आ जाने पर बच्चों का भीगना आम बात है. इसलिए स्कूल या बाहर जाते समय उन्हें रेनकोट और छाता जरूर दें. भीगने पर तुरंत कपड़े बदलें और उन्हें गर्म सूप या हल्का गर्म पानी दें.
इम्युनिटी बढ़ाने वाला खानपान
इस मौसम में बच्चों की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, इसलिए उनके खाने में हल्दी वाला दूध, तुलसी-अदरक की चाय और विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा, आंवला शामिल करें.
हाथ-पैर की साफ-सफाई रखना
बारिश और नमी की वजह से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं. बच्चों को बाहर से आने के बाद हाथ-पैर धोने की आदत डालें और नाखून भी समय-समय पर काटें.
पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी
अच्छी नींद और पर्याप्त आराम बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. कोशिश करें कि बच्चे समय से सोएं और उनका स्क्रीन टाइम सीमित रहे.
घर को साफ और सूखा रखें
नमी और गंदगी से मच्छर और कीटाणु पनपते हैं. बच्चों के खेलने की जगह, बिस्तर और खिलौनों को रोज साफ करें. फर्श को फिनायल या डिटॉल वाले पानी से पोंछें.
मौसम का मिजाज चाहे जितना भी बदलता रहे, अगर थोड़ी सावधानी और देखभाल बरती जाए तो बच्चों को बीमारियों से दूर रखा जा सकता है. बच्चों की सेहत की चाबी उनके खानपान, साफ-सफाई और आपकी सतर्कता में छुपी होती है.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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<p>सिरदर्द (हेडेक) आजकल सामान्य है. काम का प्रेशर हो या फिर घर की कोई टेंशन, सिर में दर्द फील होने लगता है. लेकिन कई बार ये गंभीर बीमारियों का संकेत भी होता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में कब इस दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए और लापरवाही बरतने से किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, आइए जानते हैं.</p>
<p><strong>नाॅर्मल नहीं है ब्लड प्रेशर</strong></p>
<p>अगर लगातार सिर में दर्द बना हुआ है तो ये ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है. यानी बाॅडी में आपका ब्लड प्रेशर सामान्य नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि इसकी नियमित रूप से माॅनिटरिंग की जाए.</p>
<p><strong>स्ट्रेस बनता है वजह</strong></p>
<p>आजकल की लाइफस्टाइल में तनाव एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. कोई वर्कप्लेस पर कमिटमेंट्स, पैसों की जरूरत तो किसी को पर्सनल लाइफ की दिक्कतों के चलते तनाव से जूझना पड़ता है. ऐसे में तनाव, थकान और नींद पूरी नहीं होने के चलते सिर में दर्द हो सकता है.</p>
<p><strong>डाइजेशन में समस्या</strong></p>
<p>अगर पेट साफ नहीं है तो इसका असर सिरदर्द के रूप में सामने आ सकता है. कहा भी जाता है ‘आंत भारी तो माथ भारी’. यानी डाइजेशन सिस्टम में दिक्कत से हेडेक से जूझना पड़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार बाॅडी में खराब डाइजेशन हेडेक का कारण बन सकता है. अगर ये दिक्कत बनी रहती है तो गैस्टि्रक इश्ूय के चलते क्राॅनिक हेडेक समस्या हो सकती है.</p>
<p><strong>आंखों में दिक्कत</strong></p>
<p>अगर देखने में दिक्कत है, यानी आंखों की नजर कमजोर हो रही है. ऐसे में ये सिरदर्द भी दे सकती है. नजर कमजोर होने से सिर की नसों पर दबाव बढ़ता है. मायोफिया या मेट्रोपिया की समस्या देखने को मिल सकती है. इस स्थिति में प्राॅपर आई चेकअप कराने की जरूरत होती है.</p>
<p><strong>माइग्रेन</strong></p>
<p>जब ब्रेन में केमिकल डिस्टर्बेंस होता है तो इससे सिर में तेज दर्द होता है. इसके साथ जी मचलना, फोटोफोबिया, शोर बर्दाश्त न होना आदि प्राॅब्लम भी देखने को मिलती है. सूरज की रोशनी में ये समस्या और बढ़ सकती है, जो माइग्रेन की ओर इशारा करती है.</p>
<p><strong>ब्रेन ट्यूमर</strong></p>
<p>अगर सिर में लगातार दर्द बना हुआ है तो इसे इग्नोर न करें. ये गंभीर समस्या का एक संकेत हो सकता है. बाॅडी में सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का एक आम लक्षण है.</p>
<p><strong>स्ट्रोक का भी खतरा</strong></p>
<p>सिरदर्द अन्य गंभीर समस्याओं का भी संकेत देता है. जैसे स्ट्रोक, सिर में फ्लूड जमा होना, नसों में क्लाॅट आदि की प्राॅब्लम हो सकती है.</p>
<p><strong>सिरदर्द होने पर अपनाएं ये टिप्स</strong></p>
<p>सामान्य सिरदर्द होने पर कुछ घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं. जैसे कि खूब पानी पीना, थोड़ा आराम करना, माथे पर ठंडा कंप्रेस लगाना आदि. लेकिन अगर सिरदर्द ज्यादा गंभीर हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. </strong></p>
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