जिन लोगों ने नहीं लगवाई थी बूस्टर डोज, क्या उनको हो सकता है कोरोना? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

जिन लोगों ने नहीं लगवाई थी बूस्टर डोज, क्या उनको हो सकता है कोरोना? क्या कहते हैं एक्सपर्ट



<p style="text-align: justify;">भारत में कोविड-19 की नई लहर ने सभी के दिलों-दिमाग में खतरे की घंटी फिर से एक बार बजा दी है. पूरे देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोग ये जानना चाहते हैं कि कौन इस वायरस से सुरक्षित है और कौन नहीं. जब बचाने की बात आती है तो इस बात को गलत नहीं ठहराया जा सकता कि कोरोना से बचाने में वैक्सीन बहुत मददगार रही है, लेकिन अब बूस्टर डोज की भी जरूरत बढ़ गई है. नए कोरोना वेरिएंट आने और केस बढ़ने की वजह से कई लोग पूछ रहे हैं कि जिन लोगों ने बूस्टर डोज नहीं ली है क्या वे कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं? एक्सपर्ट्स इस बारे में बता रहे हैं कि कोरोना से लड़ने के लिए आपकी इम्यूनिटी कैसी होनी चाहिए? आपको कैसे सुरक्षित रहना चाहिए? और बूस्टर डोज कब जरूरी होती है? लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिन लोगों ने बूस्टर डोज नहीं लगवाई थी उन लोगों को कोविड-19 अपनी जकड़ में ले सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या बिना बूस्टर डोज वाले लोगों को होगा कोरोना?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हां, जिन लोगों ने कोविड-19 का बूस्टर डोज नहीं लिया है, वे भारत में नई लहर में कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैक्सीन बहुत जरूरी है और यह सुरक्षा देती है, लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं देती. नए वेरिएंट जैसे NB.1.8.1 और JN.1 आने से लोगों को चिंता हो रही है क्योंकि ये वायरस ज्यादा आसानी से फैलते हैं और पुरानी वैक्सीन या पहले के संक्रमण से बनी इम्यूनिटी को भी मात दे सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किन लोगों को लेनी चाहिए बूस्टर डोज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत में लगभग 73% लोगों को कम से कम एक बार बूस्टर शॉट लग चुका है. लेकिन सिर्फ 18% लोगों ने ही नया अपडेटेड बूस्टर लिया है, जो खासतौर पर ओमिक्रॉन वेरिएंट के लिए बनाया गया है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बुजुर्ग और जो लोग किसी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें वायरस से बेहतर सुरक्षा के लिए ये अपडेटेड बूस्टर जरूर लेना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि अभी सबसे जरूरी यह है कि जिन लोगों को अब तक पहली या दूसरी वैक्सीन नहीं लगी है, उन्हें जल्दी से जल्दी टीका लगाया जाए. उनका कहना है कि फिलहाल आम लोगों को बूस्टर (तीसरी) डोज देने के लिए अभी जरूरी जानकारी नहीं मिली है. लेकिन जो लोग ज्यादा खतरे में हैं, जैसे बुजुर्ग और जिनको पहले से कोई बीमारी है, उनके लिए बूस्टर डोज फायदेमंद हो सकती है. वैक्सीनेशन पर सरकार की सलाह देने वाले ग्रुप के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा कहते हैं कि 60 साल से ऊपर के और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बूस्टर डोज़ जरूर लेनी चाहिए, अगर उन्होंने अभी तक नहीं ली है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितने हो गए भारत में कोविड-19 के मामले?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">31 मई 2025 तक भारत में 3,395 लोग कोरोना से एक्टिव रूप से संक्रमित हैं. सिर्फ 24 घंटे में 685 नए केस आए हैं. सबसे ज्यादा मामले दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखे गए हैं. इस बार संक्रमण के पीछे ओमिक्रॉन के वैरिएंट JN.1, NB.1.8.1 और LF.7 को जिम्मेदार माना जा रहा है, जो बहुत तेजी से फैलते हैं. अच्छी बात यह है कि ज्यादा लोगों में लक्षण हल्के ही दिख रहे हैं और वे घर पर ही ठीक हो गए हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालात कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/bollywood-actress-shilpa-shetty-disease-autoimmune-disease-antiphospholipid-antibodies-can-cause-recurrent-miscarriages-in-women-2954407">कहीं आपको भी तो नहीं शिल्पा शेट्टी वाली बीमारी, बार-बार होता है मिसकैरेज और…</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>



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क्या कोरोना की नई लहर से बचने के लिए आपकी बॉडी में है पर्याप्त इम्यूनिटी?

क्या कोरोना की नई लहर से बचने के लिए आपकी बॉडी में है पर्याप्त इम्यूनिटी?


कोरोना वायरस ने जो तबाही अपनी पिछली दो लहरों में मचाई उसके खौफ और दर्द से अभी लोगों ने उभरना शुरू ही किया था कि कोविड-19 की नई लहर ने भारत में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. कोरोना की नई लहर ने लोगों को फिर एक बार तेजी से संक्रमित करना शुरू कर दिया है, जिससे सभी खौफजदा हैं. लगातार बढ़ रहे कोविड-19 के संक्रमितों की संख्या को देखते हुए हर किसी के मन में यही सवाल है कि ‘क्या उनका शरीर इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार है?’ यूं तो लोगों ने सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीन, मास्क और सैनिटाइजर एक बार फिर इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं, लेकिन शरीर की अंदरूनी ताकत प्रतिरक्षा शक्ति (इम्यूनिटी) का मजबूत होना बहुत जरूरी है. यह आपको गंभीर रूप से बीमार होने से बचाने में सबसे ज्यादा काम आती है.

लेकिन यह बात समझना बहुत जरूरी है कि इम्यूनिटी कोई जादू नहीं है जो एक दिन में बनाई जा सके. यह आपकी रोज की आदतों और खानपान पर निर्भर करती है. इससे पहले कि कोरोना का कहर और तेजी से बढ़े जरूरी है कि आप अपने शरीर को पहले से तैयार कर लें. आइए जानें कि आप कैसे जान सकते हैं कि आपकी इम्यूनिटी मजबूत है या नहीं? और कैसे आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत कर सकते हैं और इस नई लहर से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

कैसे पता करें कि आपकी इम्यूनिटी मजबूत है या नहीं?

ऐसा कोई एक टेस्ट नहीं है जिससे यह सीधा पता लगाया जा सके कि आपकी इम्यूनिटी मजबूत है या नहीं. इम्यूनिटी एक कॉम्प्लेक्स सिस्टम होता है, जिसमें शरीर के कई हिस्से मिलकर काम करते हैं जैसे वाइट ब्लड सेल्स, डाइजेस्टिव हेल्थ, स्किन. इसलिए इसे सिर्फ एक रिपोर्ट से नहीं जाना जा सकता. लेकिन अच्छी बात यह है कि आपका शरीर खुद आपको कुछ संकेत देता है, जिनसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपकी इम्यूनिटी मजबूत है या नहीं.   

  • बार-बार सर्दी, खांसी या बुखार होना
  • चोट या बीमारी से ठीक होने में अधिक समय लगना
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स

अगर इनमें से कोई समस्या आपको अक्सर होती है, तो आपको अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.

कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी?

अब सवाल यह है कि आखिर कोरोना की इस नई लहर से लड़ने के लिए कैसे आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत कर सकते हैं. अगर आपकी भी इम्यूनिटी कमजोर है तो आप ये स्टेप्स फॉलो करके अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं.

1. बैलेंस डाइट लें

मजबूत इम्यूनिटी के लिए पौष्टिक खाना बहुत जरूरी है. इसके लिए आप अपनी रोजाना की डाइट में कुछ खास चीजें शामिल कर सकते हैं. जैसे – विटामिन सी के लिए आंवला, संतरा, नींबू, पपीता और शिमला मिर्च खाएं. विटामिन डी के लिए सुबह की धूप लें और दूध व मशरूम का सेवन करें. जिंक के लिए काजू, बादाम, कद्दू के बीज और राजमा खाएं. साथ ही, दाल, अंडा, दूध, दही और सोया जैसे प्रोटीन वाले फूड्स भी जरूर लें, क्योंकि ये आपकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

2. भरपूर नींद लें

इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए हर दिन 7–8 घंटे की अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है. इससे आपके शरीर को पूरा आराम मिलता है और बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है.

3. रोज एक्सरसाइज और योग करें

हर दिन कम से कम 30 मिनट तेज वॉक करें, योग करें या प्राणायाम जैसे सांस वाली एक्सरसाइज करें. इससे आपकी इम्यूनिटी मजबूत और एक्टिव बनी रहती है.

4. स्ट्रेस को कम करें

ज्यादा स्ट्रेस लेने से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. ध्यान लगाना, गहरी सांस लेना या अपना पसंदीदा संगीत सुनना स्ट्रेस कम करने में मदद करता है.

5. पानी खूब पिएं

दिनभर में कम से कम 2–3 लीटर पानी जरूर पिएं. शरीर को हाइड्रेटेड रखने से सभी अंग अच्छे से काम करते हैं और इम्यूनिटी भी बेहतर होती है.

6. ये घरेलू उपाय भी आएंगे काम

रोजाना कुछ आसान नेचुरल उपाय अपनाने से आपकी इम्यूनिटी बढ़ सकती है. जैसे हल्दी वाला दूध पीना, तुलसी-अदरक-काली मिर्च वाली चाय पीना और गिलोय का रस पीना. साथ ही शहद और कच्चा लहसुन मिलाकर खाने से भी बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है. ये आसान घरेलू उपाय आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं और शरीर की सुरक्षा बढ़ाते हैं.

ये भी पढ़ें: कहीं आपको भी तो नहीं शिल्पा शेट्टी वाली बीमारी, बार-बार होता है मिसकैरेज और…

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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कैसे हैं कोरोना के नए लक्षण और ये कितने खतरनाक? डॉक्टर से जानें कितना डरने की जरूरत

कैसे हैं कोरोना के नए लक्षण और ये कितने खतरनाक? डॉक्टर से जानें कितना डरने की जरूरत



<p style="text-align: justify;">भारत में कोविड-19 के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 31 मई 2025 तक देश में कोविड के सक्रिय मामले 2710 तक पहुंच गए हैं. वहीं, कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं. इनमें ज्यादातर वे लोग शामिल हैं, जो पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. हालांकि, कोविड का नाम सुनते ही लोगों के मन में 2020 और 2021 की भयावह तस्वीरें उभरने लगती हैं. ऐसे में डॉक्टर से जानते हैं कि कोरोना के नए वैरिएंट से कितना डरने की जरूरत?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राज्यों में कितने हैं कोविड-19 के केसेज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 2710 सक्रिय कोविड मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से केरल में सबसे अधिक 1147 मामले हैं, जिसके बाद महाराष्ट्र में 424, दिल्ली में 294, गुजरात में 223, तमिलनाडु और कर्नाटक में 148-148 मामले हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल (116), राजस्थान (51), उत्तर प्रदेश (42), पुडुचेरी (35), हरियाणा (20), आंध्र प्रदेश (16), मध्य प्रदेश (10), गोवा (7), ओडिशा (5), पंजाब और जम्मू-कश्मीर (4-4), छत्तीसगढ़ और तेलंगाना (3-3), अरुणाचल प्रदेश (3), असम और मिजोरम (2-2), चंडीगढ़ और उत्तराखंड (1-2) केस अब तक मिल चुके हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या कहते हैं डॉक्टर?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कोविड के बढ़ते मामलों के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अभी चिंताजनक नहीं है. दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. उज्ज्वल प्रखर के मुताबिक, कोविड अब एक सामान्य वायरल इंफेक्शन की तरह व्यवहार कर रहा है. पहले कोविड के लक्षण गंभीर थे जैसे स्वाद और गंध की हानि, लेकिन अब इसके लक्षण सामान्य वायरल इंफेक्शन जैसे खांसी, जुकाम और बुखार तक सीमित हो गए हैं. डॉ. उज्ज्वल ने बताया कि बुजुर्गों और बच्चों में कमजोर प्रतिरक्षा के कारण कोविड या किसी अन्य संक्रमण से खतरा अधिक हो सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से अन्य बीमारियों से ग्रस्त हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने भी कहा कि वर्तमान में फैल रहे ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स (LF.7, XFG, JN.1, और NB.1.8.1) गंभीर नहीं हैं. ये वैरिएंट भारत में हाल के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन इनसे गंभीर बीमारी का खतरा कम है. विशेषज्ञों का कहना है कि 140 करोड़ की आबादी में 2710 मामले नगण्य हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सावधानियां और बचाव के उपाय</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पिछली कोविड वेव के दौरान सरकार ने सख्त प्रोटोकॉल लागू किए थे. इनमें सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना और लॉकडाउन आदि चीजें शामिल थीं. हालांकि, वर्तमान स्थिति में ऐसे सख्त उपायों की जरूरत नहीं है. डॉ. उज्ज्वल ने सुझाव दिया कि जो लोग बीमार हैं, उन्हें खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए और दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए. सामान्य सावधानियां जैसे नियमित हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और स्वच्छता बनाए रखना अब भी महत्वपूर्ण हैं. विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/bollywood-actress-shilpa-shetty-disease-autoimmune-disease-antiphospholipid-antibodies-can-cause-recurrent-miscarriages-in-women-2954407">कहीं आपको भी तो नहीं शिल्पा शेट्टी वाली बीमारी, बार-बार होता है मिसकैरेज और…</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>



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कैंसर का कारण भी बन सकता है विटामिन डी, जानें कब हो जाता है खतरनाक?

कैंसर का कारण भी बन सकता है विटामिन डी, जानें कब हो जाता है खतरनाक?


विटामिन डी शरीर के लिए एक जरूरी न्यूट्रिएंट्स है. यह शरीर में हार्मोन, कैल्शियम, मसल्स, इम्युन फंक्शन के साथ ब्रेन की ए​क्टिविटी में भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन जरूरत से अ​धिक शरीर में इस विटामिन की मात्रा नुकसानदायक भी हो सकती है. ऐसे में ये जान लेना जरूरी है कि हमें हेल्दी बाॅडी के लिए कितना विटामिन डी लेना चाहिए? विटामिन डी की मात्रा अ​धिक होने पर बाॅडी किस तरह रिएक्ट करती है, इसके पांच साइन हम जानेंगे, जब हमें सतर्क होने की जरूरत होती है.

कब हो जाता है खतरनाक?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ महीनों तक रोज 60 हजार आईयू (इंटरनेशनल) विटामिन डी लेने पर शरीर में ये टाॅ​क्सिटी (विषैले पदार्थ) का कारण बन सकता है. इसे विटामिन डी टाॅ​क्सिटी या हाइपरविटामिनोसिस कहते हैं. 

विटामिन डी की किसे कितनी जरूरत?

एक साल या उससे अ​धिक बड़े बच्चे, एडल्ट,  प्रेगनेंट या ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में विटामिन डी की कमी हो सकती है. जिसे पूरा करने के लिए उन्हें रोज 10 माइक्रोग्राम विटामिन डी की जरूरत होती है. एक्सपर्ट्स की ओर से एक साल से छोटे बच्चों के लिए 8.5 से 10 माइक्रोग्राम डेली विटामिन डी की सलाह दी जाती है.

विटामिन डी अ​धिक होने पर ऐसे रिएक्ट करती है बाॅडी

भूख कम लगना: शरीर में विटामिन डी की ओवरडोज होने पर भूख कम लगने लगती है. कुछ खाने का मन नहीं करता है. विटामिन डी की अ​धिक मात्रा  से खून में कै​िल्शयम जमा होना शुरू हो सकता है, जिसे हाइपरकैल्शीमिया कहते हैं. इससे जी मचलना, उल्टी, कमजोरी आदि के लक्षण सामने आते हैं.

पेट में कब्ज: विटामिन डी टाॅ​क्सिटी का असर डाइजेशन सिस्टम पर भी देखने को मिल सकता है. शरीर में कै​िल्शयम कार्बोनेट बढ़ जाने से पेट में बाउल मूवमेंट बिगड़ जाता है.  इससे कब्ज की समस्या होने लगती है.

सुस्ती महसूस होना: थकान और सुस्ती होना शरीर में हाइपरकैल्सीमिया का सामान्य लक्षण है,  जो अ​धिक मात्रा में विटामिन डी के सेवन से हो सकता है. इसका सीधा असर डेली ए​क्टिविटीज पर पड़ता है.

कैंसर का जो​खिम: एक्सपर्ट्स के अनुसार विटामिन डी की अ​धिक मात्रा कैंसर के जो​खिम को बढ़ा सकती है. इसके साथ ही हार्ट डिजीज और बोन फ्रैक्चर का भी रिस्क भी बढ़ सकता है.

बार-बार यूरिन जाना: बार-बार पेशाब जाना भी विटामिन डी ओवरडोज के चलते हो सकता है. हालांकि इस तरह के लक्षण डायबिटीज और किडनी डिजीज में भी देखने को मिल सकते हैं.

बोन पेन: हड्डियों में दर्द विटामिन डी की कमी का एक लक्षण है. लेकिन शरीर में विटामिन डी टाॅ​क्सिटी होने पर भी हड्डियों से जुड़ी समस्या सामने आती हैं. 

ऐसे करें खुद का बचाव

एक्सपर्ट्स के अनुसार  फैटी फिश, सैल्मन, ट्यूना, सार्डिन्स, एग याॅक, काॅड लिवर ऑयल और सुबह की सनलाइट शरीर के लिए विटामिन डी आइडल डोज में कारगर हो सकते हैं.

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डायबिटीज होने से पहले बॉडी देती है ऐसे सिग्नल, गलती से भी न करें नजअंदाज

डायबिटीज होने से पहले बॉडी देती है ऐसे सिग्नल, गलती से भी न करें नजअंदाज


डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो तेजी से पांव पसार रही है. कई बार शुरुआत में इसका पता लग जाता है, तो कई ​स्थिति में कोई गंभीर समस्या होने पर इस बीमारी की जानकारी होती है. ऐसे में डायबिटिज की शुरुआत से पहले की​ ​स्थिति जिसे प्री डायबिटिक कहा जाता है, उसी दाैरान बाॅडी संकेत देना शुरू कर देती है. लेकिन हम नजरअंदाज कर देते हैं. अगर इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए ताे ​न सिर्फ आने वाली गंभीर हेल्थ प्राॅब्लम से बचा जा सकता है, ब​ल्कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ लक्षण जो प्री डायबिटिक ​स्थिति के दाैरान देखने को मिल सकते हैं…

क्या है प्री डायबिटिक?

प्री-डायबिटीज का मतलब है कि बाॅडी में ब्लड शुगर का लेवल सामान्य से ज्यादा है, लेकिन इतना ज्यादा नहीं कि इसे टाइप 2 डायबिटीज माना जाए. यानी इसे डायबिटीज से पहले की ​स्थिति माना जा सकता है. ऐसी ​स्थिति में बाॅडी में कुछ आसान लक्षणों से आप इस बारे में पता लगा सकते हैं.

अ​धिक प्यास और बार-बार यूरिन आना

ये ऐसा लक्षण है, जो दिखता तो सामान्य है लेकिन ये बाॅडी में ब्लड शुगर बढ़ने का संकेत भी हो सकता है. बाॅडी में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने पर किडनी एक्सट्रा शुगर को यूरिन के रास्ते निकालने का प्रयास करती है. इससे बार-बार पेशाब जाना पड़ता है. जिससे बाॅडी को हाइड्रेट बनाए रखने के लिए प्यास में इजाफा हो सकता है.

​स्किन पर पैचेस

​स्किन पर पैचेस भी​ प्री डायबिटीज का संकेत हो सकते हैं. इस ​स्थिति को एकेंथोसिस निग्रिकेंस का जाता है, जिसमें ब्लड में इंसुलिन का लेवल हाई होने पर ​स्किन सेल्स तेजी से रीप्रोड्यूस होते हैं. इससे बाॅडी में बगल, गर्दन, कमर, कोहनी और घुटनों में डार्क पैचेस बनना शुरू हो जाते हैं.

धुंधला दिखना

बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आंखों के लेंस की शेप में बदलाव और सूजन की वजह बन सकता है. इसके चलते धुंधला दिख सकता है. अगर ऐसे लक्षण दिखें तो समझ लेना चाहिए कि बाॅडी ब्लड शुगर को रेग्यूलेट करने में संघर्ष कर रही है.

हाथ पैरों में सुन्नपन

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर लेवल बाॅडी को नुकसान पहुंचाता है. शरीर में ये डायबिटिक न्यूरोपैथी की वजह बन सकता है, जिसके चलते हाथ पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट महसूस हो सकती है.

घाव का धीरे सही होना

बाॅडी में ग्लूकोज की मात्रा अ​धिक होने से शरीर के विभिन्न हिस्सों मंे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों पहुंचाने वाली वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे घाव, छोटी चोटों को भी ठीक होने में सामान्य से अ​धिक समय लगता है.

थकान महसूस होना

बाॅडी में इंसुलिन की मात्रा बढ़ने से शरीर में एनर्जी के लिए ग्लूकोज को प्रोसेस्ड करने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है. जिससे प्राॅपर आराम करने के बाद भी थकान महसूस हो सकती है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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