गर्मियों में इन 3 कारणों से आता है हार्ट अटैक, कहीं आप तो नहीं हैं इन में से एक

गर्मियों में इन 3 कारणों से आता है हार्ट अटैक, कहीं आप तो नहीं हैं इन में से एक


Heart Attack Risk in Summer: तपती दोपहर हो या उमस भरी रातें, यह मौसम सिर्फ पसीना ही नहीं बहाता, बल्कि शरीर पर गहरा असर भी छोड़ जाता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक तो सर्दियों में ज्यादा होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मियों में भी दिल पर खतरा उतना ही गंभीर हो सकता है? कई बार हम अपनी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान नहीं दे पाते, जो गर्मी के मौसम में हार्ट अटैक का बड़ा कारण बन सकती है. 

शरीर में डिहाइड्रेशन

गर्मियों में पसीना बहुत ज्यादा आता है, जिससे शरीर से नमक और पानी की मात्रा तेजी से कम होने लगती है. जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो ब्लड गाढ़ा हो जाता है और दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 

दिनभर खूब पानी पिएं, खासकर जब आप बाहर जा रहे हों

नारियल पानी, नींबू पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर पेय लें

अत्यधिक गर्मी की दिक्कत

जब शरीर लगातार तेज धूप और गर्मी के संपर्क में रहता है, तो दिक्कत बढ़ जाती है. इससे शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली गड़बड़ा सकती है और रक्तचाप अचानक गिर या बढ़ सकता है. यह स्थिति दिल के लिए खतरनाक बन जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही हाई बीपी या हृदय रोग से पीड़ित हैं. 

सुबह या शाम को ही बाहर निकलें, दोपहर के समय बाहर जाने से बचें

हल्के और ढीले कपड़े पहनें

घर या ऑफिस में अगर एसी न हो, तो ठंडी जगह पर रहें और पंखे का इस्तेमाल करें 

अत्यधिक फिजिकल एक्टिविटी और वर्कआउट 

गर्मियों में कई लोग वजन घटाने के चक्कर में सुबह-सुबह या दोपहर में धूप में एक्सरसाइज करने लगते हैं. इस समय शरीर पहले से ही गर्म होता है और जब हम उस पर ज्यादा दबाव डालते हैं, तो यह दिल पर असर डाल सकता है. 

वर्कआउट का समय सुबह जल्दी या शाम को रखें, जब तापमान कम हो

व्यायाम करते समय बीच-बीच में ब्रेक लें और पानी पीते रहें

शरीर की थकान को नजरअंदाज न करें, यह संकेत हो सकता है कि दिल पर अधिक दबाव है

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पुरुषों को कब समझ जाना चाहिए कि वो नहीं बन सकते हैं पिता, ऐसे पता लगती है इनफर्टिलिटी

पुरुषों को कब समझ जाना चाहिए कि वो नहीं बन सकते हैं पिता, ऐसे पता लगती है इनफर्टिलिटी



<p style="text-align: justify;">बिगड़ते खानपान, लाइफस्टाइल और हेल्थ इश्यूज के चलते एक समस्या तेजी से पुरुषों में बढ़ रही है, वह है इनफर्टिलिटी. कई बार पुरुष इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं तो कई बार इस संबंध में बात करने से झिझकते हैं. लेकिन ये अन्य हेल्थ प्राॅब्लम की तरह ही है, जिसकी जांच और इलाज दोनों अवेलेबल है. आ​खिर पुरुष किस तरह इफ​र्टिलिटी को पहचान सकते हैं और कब उन्हें डाॅक्टर से कंसल्ट करना चाहिए, आइए जानते हैं…&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पहले ये समझिए इनफर्टिलिटी क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंफर्टिलिटी का पता लगाने का सबसे आसान तरीका है कि अगर कोई कपल एक साल या उससे अ​धिक समय से फिजिकल रिलेशन बना रहा है, लेकिन बच्चे का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है तो यानी कोई दिक्कत है. इनफर्टिलिटी की प्राॅब्लम सिर्फ पुरुष में ही नहीं, ब​ल्कि महिला में भी देखने को मिल सकती है. इसके लिए डाॅक्टर से कंसल्ट करना चाहिए. जिसके बाद कुछ मेडिकल टेस्ट के जरिए इसके कारण का पता लगाया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पुरुषों में इनफर्टिलिटी की ये हो सकती हैं वजह</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>हार्मोन संतुलन बिगड़ना:</strong> बाॅडी में हार्मोन का बैलेंस बिगड़ने से कई तरह की समस्या सामने आती हैं. मेल में इसका असर स्पर्म के प्रोडक्शन पर देखने को मिल सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>वैरिकोसेले:</strong> ये एक ऐसी ​स्थिति है जब टेस्टिकल्स में ब्लड का सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता. इससे टेस्टिकल्स का टेम्प्रेचर बढ़ता है, जो स्पर्म के प्रोडक्शन को प्रभावित करता है, जो इनफर्टिलिटी की वजह बन सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्पर्म के रीलिज होने में दिक्कत:</strong> कई बार बाॅडी के सेक्सुअल पार्ट में ब्लाॅकेज या अन्य दिक्कतों के चलते स्पर्म बाॅडी से रीलिज नहीं हो पाता, जिससे इनफर्टिलिटी हो सकती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्पर्म काउंट:</strong> पुरुषों में अगर स्पर्म काउंट यानी स्पर्म की संख्या कम होती है तो इससे प्रेग्नेंसी ठहरने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्पर्म की क्वालिटी:</strong> इनफर्टिलिटी के लिए स्पर्म की क्वालिटी भी वजह हो सकती है. अगर स्पर्म की गति (मोटिलिटी ) या आकार (मोफोर्लाॅजी) सही नहीं होता, तो भी प्रेग्नेंसी में प्राॅब्लम आ सकती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे डायग्नोज की जाती है प्राॅब्लम</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सीमन एनालाइज:</strong> यह टेस्ट पुरुष के स्पर्म की क्वालिटी, स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और आकार की जांच करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे दो बार, एक महीने के अंतराल पर करवाने की सलाह देते हैं, जिससे इसका सही रिजल्ट मिल सके.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हार्मोनल टेस्ट:</strong> पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन और अन्य फर्टिलिटी हार्मोन के लेवल का टेस्ट किया जाता है. इसके साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट्स जरूरत पड़ने पर पेशेंट का शारीरिक परीक्षण भी कर सकते हैं, जिससे संरचनात्मक समस्या का पता लगाया जा सके.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये हो सकता है इलाज</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जिस तरह से मेडिकल साइंस में बदलाव हुए है, उससे इनफर्टिलिटी के कई केसेज में अब ट्रीटमेंट अवेलेबल है. हार्मोनल इंबैलेंस या अन्य कारणों को ठीक करने के लिए दवा अवेलेबल हैं. वैरिकोसेले यानी ब्लाॅकेज की ​स्थिति को दूर कर ब्लड फ्लो बनाने में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है. दिक्कत अ​धिक होने पर डॉक्टर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और इंटरसाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) जैसी प्रक्रियाओं का सुझाव दे सकते हैं, जिनमें स्पर्म और अंडाणु को लैब में मिलाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-five-biggest-signs-you-may-need-to-undergo-angioplasty-2953291">ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं दिल की एंजियोप्लास्टी कराना हो गया बेहद जरूरी, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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रात को सोने से पहले पीएं लौंग का पानी…नींद आएगी भरपूर, सेहत भी रहेगी दुरुस्त

रात को सोने से पहले पीएं लौंग का पानी…नींद आएगी भरपूर, सेहत भी रहेगी दुरुस्त



<p style="text-align: justify;">भारतीय किचन यानी औषधीय गुणों का खजाना. हर इंग्रीडिएंट अपनी खूबियों से भरपूर होता है. ये न सिर्फ फूड को टेस्टी बनाने में मददगार होते हैं, ब​ल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं. ऐसे ही एक छिपे हुए स्पासेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी सुगंध और टेस्ट से तो आप रूबरू होंगे, लेकिन ये सेहत के लिए भी उतना भी लाभकारी होता है. ये है लौंग. सिर्फ साबुत लौंग ही नहीं, बल्कि इसका पानी भी हेल्थ पर काफी अच्छा असर डालता है. अगर सोने से पहले इसका सेवन किया जाए तो कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता सकता है. आइए जानते हैं इसके लाभ…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे करें लौंग के पानी का सेवन?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लौंग का सेवन कई तरह से शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन रात में लौंग का पानी पीने से शरीर पर कई असर देखने को मिलते हैं. इसके लिए दो लौंग को पानी में उबाल लें. फिर इस पानी को ठंडा होने या गुनगुने पर इसका सेवन करें.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या होता है फायदा?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>लिवर की सफाई करता है:</strong> लौंग का पानी पीने से लिवर को डिटॉ​​क्सिफाई करने में भी मदद मिल सकती है. एक स्टडी के अनुसार इसमें पाए जाने वाला यूजेनॉल सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>डाइजेशन सिस्टम मजबूत होता है:</strong> लोगों को रात में खाना खाने के बाद अक्सर गैस, अपच जैसी डाइजेशन प्राॅब्लम होती हैं. ऐसे में लौंग का पानी राहत दे सकता है. इसका सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में गेम चेंजर की तरह काम कर सकता है. एक स्टडी के अनुसार लौंग दस्त और गैस्ट्रिक चिड़चिड़ापन के लक्षणों से राहत दिलाने में कारगर है. वे पाचन एंजाइम को भी बूस्ट करता है, जिससे डाइजेशन सिस्टम इंप्रूव करने में मदद मिलती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>नहीं पड़ेंगे बार-बार बीमार: </strong>लौंग&nbsp;का गर्म पानी पीने से शरीर की इम्यूनिटी बूस्ट होती है. लौंग एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, इसलिए इसका पानी हानिकारक संक्रमणों से लड़ने की बाॅडी की क्षमता में सुधार कर सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>मुंह का रखता है ध्यान:</strong> लौंग में यूजेनॉल पाया जाता है, जो कई तरह की ओरल समस्याओं के लिए फायदेमंद हो सकता है. यूजेनॉल में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जो मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद करते हैं. जब सोने से पहले इसका सेवन किया जाता है, तो यह सुनिश्चित करेगा कि आपका मुंह बैक्टीरिया-फ्री रहे.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>स्टे्स से रखता है दूर:</strong> लौंग में यूजेनॉल होने के चलते ये स्ट्रेस और चिंता को कम करने में मददगार साबित हो सकता है. सोने से पहले लौंग का पानी पीने से स्ट्रेस फ्री फील हो सकता है. जो अच्छी नींद में मदद करता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-five-biggest-signs-you-may-need-to-undergo-angioplasty-2953291">ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं दिल की एंजियोप्लास्टी कराना हो गया बेहद जरूरी, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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रात में नजर आते हैं लिवर डैमेज के ये लक्षण, 99 पर्सेंट लोग इन्हें कर देते हैं इग्नोर

रात में नजर आते हैं लिवर डैमेज के ये लक्षण, 99 पर्सेंट लोग इन्हें कर देते हैं इग्नोर



<p style="text-align: justify;">लिवर हमारे शरीर का अहम अंग है, जो डिटॉक्सिफिकेशन, पाचन और मेटाबॉलिज्म जैसे कई जरूरी काम करता है. हालांकि, मॉडर्न लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट और ज्यादा शराब पीने से लिवर को काफी नुकसान पहुंचता है. कई रिसर्च में सामने आया है कि लिवर डैमेज के कई लक्षण रात के समय ज्यादा स्पष्ट रूप से नजर आते हैं, लेकिन 99% लोग इन्हें सामान्य थकान या छोटी दिक्कत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यदि इन लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए तो लिवर डैमेज को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में ज्यादा पसीना आना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉक्टरों के मुताबिक, जब लिवर काफी ज्यादा डैमेज हो जाता है तो रात के वक्त काफी पसीना आने लगता है. ऐसी हालत तब होती है, जब लिवर ठीक तरह से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर नहीं कर पाता, जिसकी वजह से शरीर का तापमान नियंत्रण बिगड़ जाता है. कई बार तो इतना ज्यादा पसीना आ सकता है कि बिस्तर और कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लक्षण सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ी और मेलाटोनिन मेटाबॉलिज्म में कमी के कारण होता है, जिसका कनेक्शन लिवर डिसफंक्शन से होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में बार-बार पेशाब आना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रात में बार-बार पेशाब के लिए उठने को मेडिकल टर्म में नोक्टुरिया कहा जाता है. यह लिवर डैमेज का शुरुआती सिग्नल हो सकता है. दरअसल, डैमेज लिवर पर्याप्त मात्रा में एल्ब्यूमिन प्रोटीन नहीं बना पाता, जो खून की धमनियों में फ्लूड को बनाए रखने में मदद करता है. बार-बार पेशाब आने से फ्लूड टिशूज में रिस सकता है, जिससे ब्लैडर पर प्रेशरपड़ता है और रात में बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में स्किन पर खुजली आना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर डैमेज के कारण बाइल सॉल्ट्स शरीर में जमा हो सकते हैं, जिसकी वजह से स्किन में तेज खुजली होती है. यह दिक्कत रात में ज्यादा परेशान करती है. यह खुजली अक्सर हथेलियों, पैरों के तलवों या पूरे शरीर में हो सकती है. यह लक्षण न केवल नींद खराब करता है, बल्कि लिवर की गंभीर स्थिति जैसे सिरोसिस या हेपेटाइटिस का संकेत भी हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में बार-बार नींद टूटना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">क्रॉनिक लिवर डिजीज (CLD) से पीड़ित 60-80% मरीजों को नींद की समस्या जैसे अनिद्रा, देर से नींद आना या बार-बार जागना का सामना करना पड़ता है. यह लक्षण लिवर की मेलाटोनिन मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी के कारण होता है. लिवर डैमेज होने पर मेलाटोनिन का लेवल दिन में बढ़ जाता है और रात में घट जाता है. इसकी वजह से सर्कैडियन रिदम बिगड़ जाता है. ऐसे में रात में नींद न आना या बेचैनी रहने की शिकायत रहती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में पैरों में ऐंठन या रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर डैमेज के कारण विषाक्त पदार्थों का निर्माण और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैरों में ऐंठन या रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का कारण बन सकता है. यह लक्षण रात में ज्यादा परेशान करता है, जिससे नींद में बाधा पड़ती है. यह स्थिति लिवर फेल्योर के एडवांस्ड स्टेज में कॉमन है. इसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द या बेचैनी हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में पेट में दर्द या सूजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर डैमेज के कारण पेट में फ्लूड का जमाव हो सकता है, जिसे मेडिकल टर्म में एसाइट्स कहा जाता है. दरअसल, बिस्तर पर लेटते वक्त पेट में सूजन या ज्यादा प्रेशर महसूस हो सकती है, जिससे नींद में परेशानी होती है. यह लक्षण सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में थकान या कमजोरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर डैमेज के कारण शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं, जिससे रात में भी अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस होती है. यह थकान सामान्य थकान से अलग होती है, क्योंकि यह नींद के बाद भी बनी रहती है. यह दिक्कत लिवर की एनर्जी स्टोरेज और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के प्रोसेस में कमी के कारण होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में भ्रम या दिशाभ्रम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लिवर डैमेज जब एडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाता है तो रात के वक्त भ्रम, दिशाभ्रम या मानसिक अस्पष्टता के लक्षण दिख सकते हैं. दरअसल, लिवर की खराबी के कारण खून में अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है, जो दिमाग के काम को प्रभावित करता है. यह लक्षण रात में अधिक स्पष्ट हो सकता है, क्योंकि नींद में गड़बड़ी इसे और बढ़ा देती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/health-five-biggest-signs-you-may-need-to-undergo-angioplasty-2953291">ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं दिल की एंजियोप्लास्टी कराना हो गया बेहद जरूरी, तुरंत जाएं डॉक्टर के पास</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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सिर्फ प्रेग्नेंसी नहीं, माहवारी में देरी के लिए ये आठ वजह भी जिम्मेदार… देख लीजिए पूरी लिस्ट

सिर्फ प्रेग्नेंसी नहीं, माहवारी में देरी के लिए ये आठ वजह भी जिम्मेदार… देख लीजिए पूरी लिस्ट


महिलाओं के लिए मासिक धर्म यानी माहवारी नैचुरल और बेहद अहम फिजिकल प्रोसेस है, जिससे उनकी रीप्रोडक्टिव हेल्थ का पता चलता है. सामान्य तौर पर मासिक धर्म चक्र 21 से 35 दिन का होता है, लेकिन कई बार यह चक्र अनियमित हो जाता है. आम धारणा है कि माहवारी में देरी का मतलब प्रेग्नेंसी है, लेकिन कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं. आइए जानते हैं उन अठ कारणों के बारे में, जो माहवारी में देरी के लिए जिम्मेदार होते हैं.

माहवारी में देरी का मतलब क्या?

मासिक धर्म चक्र की शुरुआत पहले दिन से अगले चक्र के पहले दिन तक मानी जाती है. सामान्य रूप से यह पीरियड 28 दिन का होता है, लेकिन 21 से 38 दिन तक का चक्र भी सामान्य माना जाता है. यदि माहवारी सामान्य चक्र से 7 दिन या उससे अधिक देर से आती है या 6 सप्ताह से अधिक समय तक नहीं आती तो इसे देरी या मिस्ड पीरियड माना जाता है. यह स्थिति बार-बार होने या लंबे समय तक बनी रहे तो यह एमेनोरिया (मासिक धर्म का बंद होना) का संकेत हो सकती है. इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है.

स्ट्रेस की वजह से लेट होते हैं पीरियड्स

स्ट्रेस का सीधा असर हमारे हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है. 2024 में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, ज्यादा तनाव गोनैडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (GnRH) के प्रॉडक्शन में रुकावट डालता है, जो ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है. तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है, जो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों के प्रॉडक्शन को प्रभावित करता है. यह स्थिति माहवारी में देरी या अनियमितता का कारण बन सकती है.

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से भी होती है दिक्कत

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) नॉर्मल हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो भारत में 10-20% महिलाओं को प्रभावित करता है. यह स्थिति पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) के ज्यादा प्रॉडक्शन के कारण होती है, जिससे अंडाशय में सिस्ट बन सकते हैं. ये सिस्ट ओव्यूलेशन में बाधा डालते हैं, जिसकी वजह से माहवारी अनियमित हो जाती है या देर से आती है. 2024 में इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, PCOS से ग्रस्त महिलाओं में माहवारी में देरी और मेटाबॉलिक प्रॉब्लम जैसे मोटापा और डायबिटीज भी कॉमन हैं.

थायरॉइड डिसबैलेंस भी करता है परेशान

थायरॉइड ग्लैंड शरीर की मेटाबॉलिक एक्टिविटीज को कंट्रोल करती है और इसके असंतुलन (हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म) से माहवारी प्रभावित हो सकती है. हाइपोथायरॉइडिज्म (कम एक्टिव थायरॉइड) के कारण माहवारी में देरी और भारी ब्लीडिंग हो सकती है, जबकि हाइपरथायरॉइडिज्म (ज्यादा एक्टिव थायरॉइड) के कारण माहवारी जल्दी या अनियमित हो सकती है. 2024 में मैक्स हेल्थकेयर के एक सर्वे में पाया गया कि 15% महिलाओं में थायरॉइड असंतुलन माहवारी में देरी का प्रमुख कारण था.

वजन में अचानक बदलाव

वजन में तेजी से बदलाव होना भी माहवारी चक्र को प्रभावित कर सकता है. दरअसल, 6 महीने के भीतर पांच फीसदी से ज्यादा वजन कम होना माहवारी में देरी का कारण बन सकता है. मोटापा भी एस्ट्रोजन के लेवल को बढ़ाता है, जो ओव्यूलेशन को बाधित कर सकता है. इसके अलावा कुपोषण या एथलीट्स की तरह ज्यादा एक्सरसाइज के कारण भी शरीर में एस्ट्रोजन का उत्पादन कम हो सकता है, जिससे माहवारी अनियमित हो जाती है.

हार्मोनल गर्भनिरोधक भी देती हैं दिक्कत

हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां, पैच या इंजेक्शन माहवारी चक्र को प्रभावित कर सकते हैं. इनमें मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन ओव्यूलेशन को रोकते हैं, जिससे माहवारी में देरी या अनियमितता हो सकती है. जब कोई महिला गर्भनिरोधक गोलियां शुरू या बंद करती है तो शरीर को हार्मोनल लेवल के अनुकूल होने में समय लगता है, जिसके कारण माहवारी में देरी हो सकती है.

प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर

पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला प्रोलैक्टिन हार्मोन स्तनपान और दूध उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता है. प्रोलैक्टिन का सामान्य से अधिक स्तर माहवारी में देरी का कारण बन सकता है. यह स्थिति आमतौर पर स्तनपान कराने वाली माताओं या पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर (प्रोलैक्टिनोमा) के कारण देखी जाती है. यह हार्मोन ओव्यूलेशन को दबा सकता है, जिससे माहवारी में देरी होती है.

मेनोपॉज या पेरीमेनोपॉज

मेनोपॉज आमतौर पर 45-55 वर्ष की उम्र में होता है. यह माहवारी के स्थायी रूप से बंद होने की स्थिति होती है. इससे पहले का चरण पेरीमेनोपॉज होता है, जो हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण माहवारी में अनियमितता और देरी का कारण बन सकता है. भारत में 10% महिलाओं में मेनोपॉज 40 वर्ष से पहले (प्रारंभिक मेनोपॉज) शुरू हो सकता है, जिसके कारण माहवारी में देरी या अनियमितता आम है.

पुरानी बीमारियां और दवाएं

डायबिटीज, सेलियक रोग, और अन्य पुरानी बीमारियां हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकती हैं, जिससे माहवारी में देरी हो सकती है. इसके अलावा, कुछ दवाएं जैसे एंटीडिप्रेसेंट, स्टेरॉयड, और कीमोथेरेपी दवाएं भी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती हैं. 2023 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित 20% महिलाओं में माहवारी अनियमितता देखी गई.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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