आपके शरीर के लिए कितना जरूरी होता है कोलेस्ट्रॉल? ज्यादातर लोग नहीं जानते ये बात

आपके शरीर के लिए कितना जरूरी होता है कोलेस्ट्रॉल? ज्यादातर लोग नहीं जानते ये बात


कोलेस्ट्राॅल का जिक्र होते ही दिल की चिंता सताने लगती है. क्या वाकई कोलेस्ट्राॅल का काम सिर्फ ह्यूमन बाॅडी को नुकसान पहुंचाना है. अगर आपके जेहन में भी इसको लेकर शंका है तो वह अब हमेशा के लिए दूर होने वाली है. हम कोलेस्ट्र्राॅल की कुछ ऐसी खूबियों से रूबरू कराएंगे, जिसके बाद आपका फोकस्ड डर की बजाय इसे कंट्रोल करने पर रहेगा. कोलेस्ट्राॅल हमारी बाॅडी के लिए क्यों जरूरी है. आइए जानते हैं…

कोलेस्ट्राॅल क्या है और कैसे मिलता है?

कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का लिपिड (फैट) है. कोलेस्ट्राॅल बाॅडी को दो तरीकों से मिलता है. पहला बाॅडी में लिवर कोलेस्ट्राॅल को बनाता है. दूसरा एनिमल से मिलने वाले फूड प्रोडक्ट खाने से ये हमारे शरीर तक पहुंचता है. जैसे मीट, पोलट्री, डेयरी प्रोडक्ट आदि.

क्या शरीर को होती है कोलेस्ट्राॅल जरूरत?

कोलेस्ट्राॅल शरीर के लिए जरूरी होता है. ये बाॅडी में सेल्स, विटामिन और अन्य हार्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाता है. 

कोलेस्ट्रॉल कब हो जाता है खतरनाक?

बाॅडी में कोलेस्ट्राॅल ब्लड के साथ सर्कुलेट होता है. ब्लड में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ने पर ये बाॅडी के लिए रिस्क पैदा कर सकता है. हाई कोलेस्ट्राॅल के चलते हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा पैदा हो सकता है.

कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम होने पर प्रभाव

कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ने पर ही इसके प्रभाव नजर नहीं आते, ब​ल्कि कम होने का भी बाॅडी पर असर देखने को मिल सकता है. ​पिछले वर्षों में की गई एक स्टडी के अनुसार जिन हेल्दी महिलाओं में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम थी, उनमें डिप्रेशन और एंक्जाइटी के लक्षण नजर आए. रिसर्चर्स के अनुसार कोलेस्ट्राॅल बाॅडी में हार्मोन्स और विटामिन डी बनाने में भूमिका निभाता है. ऐसे में इसकी मात्रा कम होना ब्रेन हेल्थ को प्रभावित करता है. विटामिन डी हमारे शरीर में सेल ग्रोथ के लिए जरूरी है. यदि ब्रेन के सेल हेल्दी नहीं रहेंगे तो एंक्जाइटी और डिप्रेशन फील हो सकता है. यानी लो कोलेस्ट्राॅल का मेंटल हेल्थ से कनेक्शन है. हालांकि इसको लेकर अभी रिसर्चर्स की स्टडी जारी है.

प्रेग्नेंसी के दाैरान अ​धिक ध्यान देने की जरूरत

प्रेग्नेंट महिलाओं में लो कोलेस्ट्राॅल बड़ी समस्या पैदा कर सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दाैरान कोलेस्ट्राॅल की मात्रा कम होने से प्रीमैच्योर डिलीवरी या जन्म के दाैरान बच्चे का वजन कम होने का जो​खिम बढ़ सकता है.

कैंसर का खतरा

वर्ष 2012 में हुई एक स्टडी के अनुसार बाॅडी में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होने से कैंसर का जो​खिम बढ़ सकता है. 

ये दिख सकते हैं लक्षण

  • बिना किसी बात के मन में निराशा आना.
  • बार घबराहट महसूस होना.
  • दिमाग में कंफ्यूजन रहना.
  • बात-बात पर गुस्सा होना.
  • निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होना. किसी बात पर कोई निर्णय नहीं ले पाना.
  • नींद के तरीकों में बदलाव
  • फूड हैबिट्स में चेंज

ये भी पढ़ें: इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या वाकई कोरोना से ही बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

क्या वाकई कोरोना से ही बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर


Covid-19 and Heart Attack: आप एक बार सोच कर देखिए कि, ऑफिस में सभी लोग काम कर रहे हैं. इसी बीच किसी व्यक्ति को सीने में दर्द होता और पता चलता है कि, उसे हार्ट अटैक हुआ है. साथ ही जांच में ये भी निकलता है कि, पिछले साल उसे कोरोना हुआ था. इसलिए हार्ट अटैक की दिक्कत हुई है. दरअसल, कोरोना महामारी के बाद से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां युवा और हेल्दी लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं. सवाल यह उठता है कि, क्या वाकई कोरोना वायरस हार्ट हेल्थ को प्रभावित कर रहा है?

क्या कहते हैं डॉक्टर

मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर कार्डियक साइंसेज डॉ. वैभव मिश्रा का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद से हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में कोरोना इसके लिए जिम्मेदार है. विशेषज्ञों की मानें तो कोविड-19 संक्रमण दिल और रक्त नलिकाओं पर असर डाल सकता है. वायरस के कारण शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जिससे रक्त का थक्का बनने का खतरा भी बढ़ता है. यह स्थिति हार्ट अटैक या स्ट्रोक की आशंका को जन्म दे सकती है.

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि कोविड के बाद कुछ मरीजों में लंबे समय तक थकान, सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द जैसे लक्षण बने रहते हैं, जिन्हें ‘लॉन्ग कोविड’ कहा जाता है. यह दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. इसके अलावा, महामारी के दौरान लोग नियमित स्वास्थ्य जांच से दूर हो गए, जिससे पहले से मौजूद दिल की बीमारियों का समय पर इलाज नहीं हो सका.

हालांकि, यह भी जरूरी है कि हर हार्ट अटैक के मामले को सीधे कोरोना से न जोड़ा जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली, तनाव, खानपान और व्यायाम की कमी भी अहम कारण हैं. कोरोना एक कारक हो सकता है, लेकिन अकेला कारण नहीं.

ये भी पढ़े- डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने बचाई 9 महीने के बच्चे की जान, लिवर की दुर्लभ बीमारी का मिला इलाज

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

जो लोग पहले से हाइपरटेंशन, डायबिटीज या मोटापे से जूझ रहे हैं. 

जिनकी उम्र 40 से ऊपर है. 

जिनका कोरोना संक्रमण गंभीर रहा था या जिन्हें ICU में भर्ती होना पड़ा था. 

जो फिजिकल एक्टिविटी में कम हैं और स्मोकिंग करते हैं. 

कोरोना संक्रमण को हल्के में लेना अब एक बड़ी गलती साबित हो सकती है, खासकर जब उसका असर दिल पर पड़ रहा हो. डॉक्टर्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि कोरोना से रिकवर होने के बाद भी हार्ट हेल्थ को नजरअंदाज न करें. एक हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर जांच ही भविष्य की मुश्किलों से बचा सकती है. 

ये भी पढ़ें: सब्जी मार्केट या फिर मेट्रो में भी फैल सकता है कोरोना, जानलेवा हो सकती है ये लापरवाही

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने में मदद करते हैं चिया सीड्स? जान लीजिए इस बात का सच

ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने में मदद करते हैं चिया सीड्स? जान लीजिए इस बात का सच



<p style="text-align: justify;">अ​धिकतर फीमेल खुद को सुंदर और आक​र्षित दिखने के लिए सुडाैल ब्रेस्ट चाहती हैं. लेकिन कई बार उनकी उम्मीद के मुताबित ऐसा नहीं होता. ऐसे में वह ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के तरीकों को खोजती हैं. इसके लिए उनके पास आसान तरीका ऑनलाइन सर्चिंग या सोशल मीडिया पर मिल रही जानकारी होता है. जिसमें तरह-तरह की होम रेमेडीज के जरिए ही समस्या का निदान बता दिया जाता है. इसी तरह की ए​क टिप चर्चा में बनी हुई है. वह है चिया सीड्स खाने से ब्रेस्ट साइज का बढ़ जाता है. आ​खिर इसमें कितनी सच्चाई है और ये किस तरह शरीर पर असर डाल सकता है, आइए जानते हैं….</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चिया सीड्स ब्रेस्ट साइज बढ़ाने में कितने कारगर?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ये एक गलत धारणा है. लोग अक्सर मानते हैं कि कुछ फूड प्रोडक्ट हमारी बाॅडी में एस्ट्रोजन हार्मोन को बढ़ा सकेत हैं, जिससे ब्रेस्ट का साइज बढ़ सकता है. लेकिन चिया सीड्स में फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं, जो पौधों में पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो एस्ट्रोजन की नकल करते हैं. &nbsp;इनकी मात्रा इतनी कम होती है कि ये बाॅडी पर कोई खास प्रभाव नहीं डालते हैं. इसलिए, सिर्फ चिया सीड्स खाने से ब्रेस्ट साइज में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ब्रेस्ट साइज कैसे होता है प्रभावित?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>हेरेडिटी:</strong> पेरेंट्स से बच्चों में आने वाले लक्षण, जिनका असर हमारे शरीर पर भी देखने को मिलता है. आपके माता पिता की शारीरिक बनावट का असर आपके ब्रेस्ट साइज पर पड़ता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>हार्मोनल चेंज:</strong> महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर ब्रेस्ट साइज को प्रभावित करता है. इस असर खासकर यंग एज, प्रेग्नेंसी और पीरियड के दौरान देखने को मिल सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>फैट:</strong> शरीर में ब्रेस्ट फैट टिशू से बने होते हैं, इसलिए वजन बढ़ने या घटने से उनके आकार पर भी असर देखने को मिल सकता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या होते हैं चिया सीड्स?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">चिया सीड्स सफेद या काले कलर के होते हैं, जो सलविया हिस्पैनिका नामक पौधे से प्राप्त होते हैं. ये पाैधा सेंट्रल और साउथ अमेरिका में पाया जाता है. चिया सीड्स भले ही ब्रेस्ट साइज बढ़ाने में कारगर न हों, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के काफी लाभकारी होते हैं. &nbsp;चिया सीड्स को पानी, दूध में ​भिगोकर या फिर भीगे हुए सीड्स का शेक्स, सलाद, स्मूदी या फिसी अन्य डेजर्ट के साथ सेवन किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सेहत पर किस तरह असर डालते हैं चिया सीड्स?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">बड़ी मात्रा में फाइबर पाए जाने के चलते ये डाइजे​स्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने में मदद करते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्राॅल लेवल को भी कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं, जो हार्ट की हेल्द को बेहतर करने में सहायक होते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में हेल्पफुल होते हैं.</li>
<li style="text-align: justify;">पेट को भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे ओवरइटिंग से बचते हैं. इससे वजन घटाने में मदद मिलती है.</li>
<li style="text-align: justify;">भरपूर मात्रा में कैल्शियम, मै​ग्नी​शियम और फाॅसफोरस हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायक होते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/five-biggest-cause-of-liver-cancer-dipika-kakar-liquor-hepatitis-b-hepatitis-c-obesity-unhealthy-lifestyle-2952719">इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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साइलेंट किलर… हाॅ​स्पिटल के बेड पर ही लगता है इस बीमारी का पता, जानें कैसे कर सकते हैं बचाव

साइलेंट किलर… हाॅ​स्पिटल के बेड पर ही लगता है इस बीमारी का पता, जानें कैसे कर सकते हैं बचाव


शरीर में कोई दिक्कत होगी तो कुछ लक्षण नजर आएंगे जैसे चक्कर आना, दर्द या फिर कोई अन्य डिसम्फर्ट, लोगों के मन में ये धारणा आम है. कई हेल्थ प्राॅब्लम में शरीर में लक्षण दिखते भी हैं. लेकिन ब्लड प्रेशर के मामले में ये सोच मुसीबत में डाल सकती है. साइलेंट किलर कहा जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) इस कदर घातक हो सकता है कि हाॅ​स्पिटल के इमरजेंसी रूम में जाने के बाद पता लगे कि आप काफी समय से इस प्राॅब्लम से सफर कर रहे थे. ये ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे शरीर के महत्वपूर्ण ऑर्गन को नुकसान पहुंचा सकता है.

कितना खतरनाक हो सकता है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर हमेशा शुरुआती संकेत नहीं देता. यह चुपचाप बाॅडी में बढ़ सकता है. शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. जब इसके बारे पता लगता है तो हालत चिंताजनक हो चुकी होती है जैसे स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज की प्राॅब्लम. ऐसे में अगर शरीर गुड फील भी कर रहा हो तो इस ‘साइलेंट किलर’ पर नजर रखना जरूरी है.

साइलेंट किलर क्यों है?

हाई ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे ब्लड वेसल्स  (रक्त वाहिकाओं) की वाॅल पर दबाव डालता है, जिसमें ब्रेन की नाजुक ब्लड वेसल्स भी होती हैं. लगातार प्रेशर से  ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है. जिससे हेमरेज या क्लाॅट होने का खतरा बन जाता है. इस खतरनाक परि​स्थिति से पहले दर्द, चक्कर आना या शरीर में कुछ भी असामान्य महसूस नहीं होता. 

हर मरीज में अगर बिहेव करता है ब्लड प्रेशर

हर किसी का शरीर एक जैसा बिहेव नहीं करता. कुछ लोगों में थोड़ा सा ब्लड प्रेशर बढ़ने से सिरदर्द हो सकता है, वहीं कई केसेज में हाई ब्लड प्रेशर होने पर भी बाॅडी नाॅर्मल फील करती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार हर मरीज अलग होता है. ब्लड प्रेशर के लिए कोई निश्चित पैटर्न नहीं है. ऐसे में सिर्फ बुजुर्गों या बीमार लोगों के लिए ही नहीं, ब​ल्कि हर किसी के लिए ब्लड प्रेशर की रेग्यूलर माॅनिटरिंग जरूरी है.

कैसे लक्षण देख हो जाएं अलर्ट?

इसके लक्षण अलार्मिंग सिचुएशन हो सकते हैं. कई लोगों में ये संकेत नुकसान के रूप में सामने आ सकते है. लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर से सफर करने से अचानक धुंधला दिखना, बोलने में कठिनाई, बेहोशी, हेमरेज स्ट्रोक या इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है.

हाई बीपी से बचाव के लिए क्या करें?

  • घर पर ब्लड प्रेशर की रेग्यूलर माॅनिटरिंग करें.
  • डेली डाइट में नमक की मात्रा कम करें. नमक में सोडियम पाया जाता है, जिसका अ​धिक सेवन बाॅडी में ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है.
  • फिजिकल ए​क्टिविटी पर ध्यान दें. डेली 30 मिनट तेज कदमों के साथ चलें.
  • अपना वजन कंट्रोल करें. वजन और पेट पर फैट अ​धिक है तो उसे कम करें.
  • स्मोकिंग और शराब से दूर रहें, ये दोनों हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ा सकते हैं.

ये भी पढ़ें: इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कोरोना से बचने के लिए नई वैक्सीन लगानी पड़ेगी? जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

क्या कोरोना से बचने के लिए नई वैक्सीन लगानी पड़ेगी? जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट


एक बार फिर से भारत में कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है. भारत में एक्टिव केसों की संख्या 1200 के पार जा चुकी है. सबसे ज्यादा कोरोना के केस केरल (430) में मिले हैं. उसके बाद महाराष्ट्र (385), कर्नाटक (126) और दिल्ली (104) में हैं. कोरोना के सब वैरिएंट से सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं.

इसी के साथ श्रीनगर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे दो छात्रों को पॉजिटिव पाया गया. ये छात्र केरल के रहने वाले हैं. देश में  कोरोना के वेरिएंट के सब वेरिएंट देखने को मिल रहे हैं. उनके सब वेरिएंट JN.1 और LF.7 सामने आ रहे हैं. ज्यादातर मामले JN.1 के आ रहे हैं. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि कोरोना से बचने के लिए क्या नई वैक्सीन लगवाने की जरूरत पड़ेगी. चलिए जानते हैं कि इसमें एक्सपर्ट्स की क्या राय है.

क्या नई वैक्सीन लगवानी पड़ेगी?

लोगों का कहना है कि कोरोना के सब वेरिएंट आने के बाद दोबारा वैक्सीन लगवाने की जरूरत पड़ेगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं होगा. एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड-19 के समय जिन लोगों ने वैक्सीनेशन करवाया था. उनके शरीर में अभी भी नए वैरिएंट से लड़ने की क्षमता है. उनके शरीर में वैक्सीन की इम्यूनिटी अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. जिससे उन्हें कोरोना होने के चांस कम है.

वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि वैक्सीन काफी पुरानी है तो इसका असर कम हो सकता है और साथ ही कोरोना होने का खतरा बढ़ सकता है. क्योंकि ये नया वेरिएंट है, ऐसे में वैक्सीन के सटीक काम करने की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं. 

सावधानी बरतना है जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वेरिएंट असर केवल 21 से 28 दिन तक रहेगा. इससे डरने की जरूरत नहीं है. कोविड 19 की आई दूसरी लहर की तरह यह भी खतरनाक नहीं होगी. इसी के साथ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इससे बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी है. भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए. हाथों को बार-बार सेनेटाइजर करना चाहिए और अगर आपको कोरोना के कुछ भी लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए. साथ ही अपनी सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंस बनाकर रखनी होगी. 

ये भी पढ़ें- कोरोना के इस वेरिएंट ने मचाई थी भारत में सबसे ज्यादा तबाही, जान लीजिए नाम

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सही काम कर रही है आपकी किडनी या नहीं? घर पर रोज इस तरह कर सकते हैं चेक

सही काम कर रही है आपकी किडनी या नहीं? घर पर रोज इस तरह कर सकते हैं चेक



<p style="text-align: justify;">शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी ऑर्गन का प्राॅपर वर्क करना जरूरी है. इन्हीं में से एक किडनी (रीनल) है, जो न सिर्फ हमारे ब्लड को प्यूरीफाई करती है, ब​ल्कि शरीर से गंदगी को भी बाहर करती है. कई बार हमारी बाॅडी किडनी के संघर्ष करने या फिर इसके डैमेज होने की ओर इशारा करती, लेकिन हम इसे इग्नोर करते रहते हैं. इसका खामियाजा घातक किडनी डिजीज के रूप में सामने आता है. ऐसे में समय रहते कुछ संकेतों पर गाैर कर लेने से किडनी डिस्फंक्शन से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं कुछ ऐसे संकेत जो हमें किडनी के डैमेज होने का इशारा करते हैं…&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पैरों में सूजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी डैमेज होने का ये शुरुआती लक्षण है. इसमें पैरों या सुबह उठने पर चेहरे पर सूजन दिखती है. ये यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अ​धिक होने से होता है, जो किडनी को नुकसान पहुंचाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यूरिन में झाग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुबह जागने के बाद पहली बार यूरिन करते समय झागदार आना सामान्य है. लेकिन लगातार ऐसी ​स्थिति बनी रहती है तो ये प्रोटीनुरिया का साइन हो सकता है. यानी यूरिन में अ​धिक मात्रा में प्रोटीन आना, जो किडनी को नुकसान पहुंचाता है. ऐसे में इसकी प्राॅपर जांच कराकर पता लगाना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यूरिन में ब्लड</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यूरिन में खून देख अक्सर लोग डर जाते हैं. लेकिन ये यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या किडनी स्टोन के चलते हो सकता है. हालांकि बिना दर्द के यूरिन में खून आना घातक बीमारी रीनल सेल कार्सिनाेमा या कार्सिनोमा यूरिनरी ब्लैडर का संकेत हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भूख में कमी और थकान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भूख न लगना और थकान सामान्य से दिखने वाले लक्षण हैं. लेकिन जब पेशेंट किडनी डिजीज की एडवांस स्टेज में होता है ये लक्षण दिख सकते हैं. ऐसा एनीमिया की ​स्थिति के चलते होता है.<br />&nbsp;<br /><strong>यूरिन की मात्रा में बदलाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कम यूरिन आना और अ​धिक आना, दोनों ही असामान्य ​स्थिति को दर्शाता है. ऐसे में रीनल फंक्शन की जांच की जरूरत होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कमर में दर्द</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यूरिनरी स्टोर यूरिन का फ्लो रोक देता है इससे कमरे के हिस्से में दर्द महसूस होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इचिंग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एडवांस किडनी डिस्फंक्शन से जूझने के दाैरान कई तरह की ​स्किन प्राॅब्लम भी ​को मिलती हैं, जैसे डाईनेस और सीवियर इचिंग की समस्या हो सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन पर भी ध्यान दें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सांस लेने दिक्कत, मुंह के टेस्ट में बदलाव आना, सांसों से बदबू, पेशाब में जलन, वजन कम होना, नींद न आना आदि संकेत भी किडनी को नुकसान पहुंचने की ओर इशारा करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बाॅडी में किडनी का काम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी शरीर को प्यूरीफाई करने का काम करती है. शरीर में से गंदगी (वेस्ट), टॉक्सिन्स और अतिरिक्त फ्लूड को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है. शरीर में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम और फ्लूड का बैलेंस बनाए रखने में भूमिका निभाती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/five-biggest-cause-of-liver-cancer-dipika-kakar-liquor-hepatitis-b-hepatitis-c-obesity-unhealthy-lifestyle-2952719">इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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