दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों में क्या हैं लक्षण? परिजन और डॉक्टर ने बताया

दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों में क्या हैं लक्षण? परिजन और डॉक्टर ने बताया


Covid Patient Symptoms: देश में एक बार फिर से कोरोना वायरस के मामले बढ़ने लगे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में सक्रिय मामलों की संख्या 1200 से ज्यादा हो गई है. केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसी को देखते हुए सभी राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में कोविड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है. बीते दिनों यहां 4 मरीज भर्ती थे, लेकिन दो मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अब दो ही मरीज भर्ती हैं. दोनों मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है. उन्हें चार दिन पहले तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था.

मरीज के परिजन ने क्या कहा?

आरएमएल अस्पताल में भर्ती एक मरीज के बेटे अनुज द्विवेदी ने बताया कि उनकी मां को पहले किडनी में संक्रमण था. इसके बाद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई और तबीयत बिगड़ गई.

अनुज ने बताया, “पहले हम उन्हें एक निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें आरएमएल अस्पताल रेफर किया गया. यहां कोविड वार्ड में पहले 4 मरीज थे, अब सिर्फ दो हैं. मेरी मां की रिपोर्ट पिछले तीन दिन से लगातार पॉजिटिव आ रही है, इसलिए वह अभी भी भर्ती हैं. हालांकि अब उनकी तबीयत ठीक है और कोई ज्यादा दिक्कत नहीं है.”

उन्होंने बताया कि उनकी मां ने कोविड की दोनों वैक्सीन ली थी और पिछली दोनों लहरों में वह संक्रमित नहीं हुई थी.

नोडल ऑफिसर डॉ. पवन कुमार ने क्या कहा?

आरएमएल अस्पताल में कोविड वार्ड के नोडल ऑफिसर डॉ. पवन कुमार ने बताया कि दोनों मरीज स्थिर हैं और घबराने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, “फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है लेकिन सावधानी जरूरी है. लोगों को भीड़-भाड़ से बचना चाहिए और मास्क ज़रूर लगाना चाहिए.”

डॉ. पवन के अनुसार, कोविड का नया वेरिएंट पहले के मुकाबले ज्यादा खतरनाक नहीं है. इसके लक्षण आमतौर पर खांसी और बुखार हैं. यह कितना तेजी से फैल रहा है, इस पर अभी कुछ साफ नहीं कहा जा सकता.

ICU की जरूरत नहीं पड़ रही

उन्होंने कहा कि पहली और दूसरी लहर के मुकाबले इस बार मरीजों को ऑक्सीजन, वेंटिलेटर या ICU की जरूरत नहीं पड़ रही है.

अस्पताल की तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट पहले से मौजूद है, स्टाफ और बेड की संख्या पर्याप्त है. जरूरत पड़ने पर बेड की संख्या एक दिन में 100 से बढ़ाकर 400 तक की जा सकती है.

कोविड के लिए अलग आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है. फिलहाल अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए 9 बेड रखे गए हैं. सभी जरूरी उपकरण और मैनपावर भी मौजूद हैं. डॉक्टरों की ड्यूटी अब कोविड वार्ड के साथ-साथ दूसरे वार्डों में भी लगाई जा रही है.

हालांकि कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है. सरकार और अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे सावधानी बरतें, मास्क पहनें और भीड़-भाड़ से बचें.

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इंसान के मांस को खाने वाला फंगस बनेगा बड़ा खतरा? नई महामारी का अलर्ट

इंसान के मांस को खाने वाला फंगस बनेगा बड़ा खतरा? नई महामारी का अलर्ट



<p style="text-align: justify;">दुनिया अभी कोविड 19 के खतरे से पूरी तरह उबर भी नहीं सकी है कि एक और जो​खिम ह्यूमन कम्युनिटी के लिए तेजी से पांव पसार रहा है. ये खतरा पहले से अ​धिक बड़ा और खतरनाक हो सकता है. हाल ही में स्टडी में सामने आईं चाैंकाने वाली जानकारी के बाद हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसको लेकर आगाह किया है. बताया जा रहा है कि क्लाइमेट चेंज के कारण एस्परगिलस नाम का एक फंगस तेजी से बढ़ रहा है. जो दुनियाभर में लाखों माैताें का कारण बन सकता है. आ​खिर ये फंगस क्या है और किस कदर खतरनाक हो सकता है, आइए जानते हैं…</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या है एस्परगिलस?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एस्परगिलस दुनियाभर में पाया जाने वाला एक सामान्य फंगस है. ये ह्यूमन बाॅडी में गंभीर एस्परगिलोसिस फंगल इंफेक्शन का कारण बनता है, जो प्रमुख रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है. ये ​स्थिति खतरनाक हो सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्टडी में सामने आई जानकारी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में सामने आई स्टडी से इस फंगस को लेकर चिंता बढ़ गई है. स्टडी में बताया गया कि क्लाइमेट के चलते धरती का टेम्प्रेचर बढ़ रहा है. टेम्प्रेचर बढ़ने से एस्परगिलस के प्रसार को बढ़ावा मिल सकता है. ये फंगस नए इलाकों जैसे उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन और रूस में भी फैल सकता है. सामान्य ताैर पर ये फंगस ट्रॉपिकल क्षेत्रों में बढ़ता है. लेकिन आने वाले वर्षों में ये फंगस 16 परसेंट तक बढ़ सकता है. जो दुनियाभर में लाखों लोगों की माैत की वजह बन सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरीर को अंदर से खाना शुरू कर देता है यह फंगस</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एस्परगिलस इंसानों के साथ जानवरों और पेड़-पौधों में भी इन्फेक्शन फैला सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में हर साल लगभग 25 लाख लोगों की मौत फंगल इन्फेक्शन के कारण होती है. ऐसे में एस्परगिलस का प्रसार अ​धिक होता है तो ये आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है. एस्परगिलस फंगस मिट्टी में छोटे-छोटे फिलामेंट्स में उगता है, जो हवा में बहुत छोटे-छोटे स्पोर्स को रिलीज करते हैं. ये सांस के जरिए ह्यूमन बाॅडी में प्रवेश कर लेते हैं. लेकिन हर किसी पर ये असर नहीं करता. जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, ये उनके लिए खतरनाक साबित होता है. जैसे अस्थमा, सिस्टिक फाइब्रोसिस और सीओपीडी के साथ पहले से गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है. इम्युनिटी कमजोर होने के चलते बाॅडी स्पोर्स को नहीं हटा पाती. इससे ये बाॅडी में तेजी से बढ़ने लगता है. ये ​स्थि​ति फंगस के शरीर को खाने जैसे हो जाती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लक्षण और बनाते हैं खतरनाक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एस्परगिलस फंगस की मोर्टिलिटी रेट 20-40 परसेंट तक है. इस फंगस को डायग्नोज करना आसान नहीं होता. इसके पीछे सबसे प्रमुख वजह इसके लक्षण हैं. इसके लक्षण आम फ्लू या कोल्ड जैसे होते हैं. ऐसे में इस प्राॅब्लम की ओर शुरुआत में ध्यान नहीं जा पाता.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सामने आ सकते हैं ये लक्षण</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;">बलगम</li>
<li style="text-align: justify;">सांस लेने में दिक्कत</li>
<li style="text-align: justify;">फीवर</li>
<li style="text-align: justify;">सीने में दर्द आदि</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/five-biggest-cause-of-liver-cancer-dipika-kakar-liquor-hepatitis-b-hepatitis-c-obesity-unhealthy-lifestyle-2952719">इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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