सांस रोककर कैसे पता लगती है फेफड़ों की हेल्थ? जानें क्या है ये ट्रिक

सांस रोककर कैसे पता लगती है फेफड़ों की हेल्थ? जानें क्या है ये ट्रिक


Breath Holding Test: जब भी हमारी तबीयत थोड़ी भी खराब होती है, सबसे पहले डॉक्टर यही पूछते हैं, “सांस लेने में कोई तकलीफ तो नहीं?” ऐसा इसलिए, क्योंकि सांस से जुड़ा हर संकेत सीधे फेफड़ों की सेहत से जुड़ा होता है. लेकिन सोचिए, अगर आपको घर बैठे ही अपनी फेफड़ों की ताकत जांचनी हो, तो क्या करेंगे?जी हां, बिना किसी मशीन या टेस्ट के, आप सिर्फ सांस रोककर ये पता लगा सकते हैं कि आपके फेफड़े कितने स्वस्थ हैं. आइए जानते हैं इस ट्रिक के पीछे का साइंस और इसे करने का सही तरीका.

क्या है ये सांस रोकने वाली ट्रिक?

सांस रोकने की इस तकनीक को Breath-Holding Test कहा जाता है. इसमें आपको गहरी सांस लेकर उसे कुछ समय तक रोकना होता है और इससे यह आकलन किया जाता है कि आपके फेफड़े कितनी देर तक ऑक्सीजन रोककर रख सकते हैं. 

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कैसे करें यह टेस्ट?

आराम से बैठ जाएं और सामान्य सांस लें

फिर एक गहरी सांस लें और उसे रोक लें

अब मोबाइल में टाइमर चालू करें और देखें कि आप कितनी देर तक सांस रोके रख सकते हैं

यदि आप 30 सेकंड से ज्यादा सांस रोक पा रहे हैं, तो आपके फेफड़े औसतन ठीक माने जाते हैं

40-60 सेकंड तक सांस रोक पाने वाले लोगों के फेफड़े मजबूत माने जाते हैं

कब हो सकती है चिंता की बात?

अगर आप 15-20 सेकंड से पहले ही सांस छोड़ देते हैं

सांस रोकने में घबराहट, चक्कर या बेचैनी महसूस होती है

यह संकेत हो सकता है कि आपके फेफड़े कमजोर हैं और आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए 

फेफड़ों हेल्दी रखने के टिप्स

गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम करें जैसे अनुलोम-विलोम कर सकते हैं 

धूम्रपान बिलकुल नहीं करना चाहिए 

रोजाना कुछ समय खुली हवा में चला करें या व्यायाम करें

तुलसी, अदरक, हल्दी, आंवला का सेवन करें

सांस रोकने वाली यह ट्रिक भले ही प्रोफेशनल मेडिकल टेस्ट न हो, लेकिन यह आपको अपनी फेफड़ों की स्थिति का एक अंदाजा जरूर देती है. अगर आप इसे नियमित रूप से करते हैं और सुधार देखते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए अच्छा संकेत है. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर पाते तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कोरोना के इस वेरिएंट ने मचाई थी भारत में सबसे ज्यादा तबाही, जान लीजिए नाम

कोरोना के इस वेरिएंट ने मचाई थी भारत में सबसे ज्यादा तबाही, जान लीजिए नाम


Coronavirus in India: साल 2020 के बाद जब भारत थोड़ी राहत की सांस ले ही रहा था, तभी एक ऐसी लहर आई जिसने लाखों दिलों को तोड़ दिया था. अस्पतालों के बाहर लंबी कतारें, ऑक्सीजन के लिए तड़पते मरीज और रोजाना बढ़ती मौतों की संख्या, ये किसी हॉरर फिल्म की कहानी नहीं थी, बल्कि भारत में हकीकत बन चुकी थी. इस तबाही के पीछे है कोरोना वायरस का एक वेरिएंट था, जिसने पूरे देश की नींव हिला दिया था. लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं तो डर जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं उस विनाशक वेरिएंट का नाम क्या था? आइए जानते हैं कौन था वो घातक वायरस जिसने भारत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। 

कौनसा था खतरनाक वेरिएंट?

भारत में कोरोना की दूसरी लहर सबसे भयंकर साबित हुई थी और इसके लिए जिम्मेदार था डेल्टा वैरिएंट यह वेरिएंट, पहली बार भारत में अक्टूबर 2020 में देखा गया था और 2021 की शुरुआत में यह तेजी से फैलने लगा था. डेल्टा वेरिएंट इतना खतरनाक था कि, इसने न केवल सामान्य लोगों को संक्रमित किया, बल्कि पहले से वैक्सीन ले चुके या एक बार संक्रमित हो चुके लोगों को भी नहीं बख्शा था. इस वेरिएंट की सबसे खतरनाक बात ये थी कि यह बहुत तेजी से फेफड़ों पर असर डालता था, जिससे कई मरीजों की हालत अचानक बिगड़ जाती थी।

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डेल्टा वेरिएंट के लक्षण कैसे थे? 

तेज बुखार आ जाना

सूखी खांसी होना 

तेज सिरदर्द हो जाना 

सांस लेने में दिक्कत होना

गंध और स्वाद का अचानक चले जाना 

थकान और कमजोरी होना

कैसे बढ़ी थी तबाही

अस्पतालों में बेड की भारी कमी हो गई थी

ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में बिकने लगे थे

दवाओं की कालाबाजारी शुरू हो गई थी

गांवों और छोटे शहरों तक संक्रमण ने पैर पसार लिए थे

लोग अपने परिजनों को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते थे 

डेल्टा वेरिएंट भारत के लिए एक कड़वा सबक था, लेकिन इसी से हमने लड़ने का हौसला भी सीखा है. आज नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं, लेकिन पिछली तबाही को याद रखते हुए हम अब पहले से ज्यादा सजग और तैयार हैं. 

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क्या पतली गर्दन और शार्प जॉलाइन ऐसे मिलेगी? जानिए वायरल तौलिया वर्कआउट की सच्चाई

क्या पतली गर्दन और शार्प जॉलाइन ऐसे मिलेगी? जानिए वायरल तौलिया वर्कआउट की सच्चाई


Towel Workout for Jawline: सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है  “तौलिया वाला वर्कआउट”, दावा ये है कि अगर आप सिर्फ 15 दिन तक रोजाना तौलिया की मदद से कुछ आसान एक्सरसाइज़ करें, तो आपकी गर्दन पतली हो जाएगी और जॉलाइन बिल्कुल शार्प नजर आने लगेगी. ये भी बताया जाता है कि, कैसे सिर्फ एक तौलिया को रोल करके कुछ एक्सरसाइज करने से चेहरा स्लिम हो जाएगा. अब सवाल ये उठता है कि, क्या वाकई में यह तरीका कारगर है? या फिर यह सिर्फ एक सोशल मीडिया मिथ है, जो लोगों की उम्मीदों से खेल रहा है? 

क्या होता है तौलिया वर्कआउट?

तौलिया वर्कआउट एक जापानी फिटनेस तकनीक पर आधारित है, जिसमें तौलिया को कमर, पीठ या गर्दन के नीचे रखकर कुछ स्ट्रेचिंग मूवमेंट्स किए जाते हैं. इसका दावा है कि यह शरीर के पोस्चर को सुधारता है और गर्दन की चर्बी को कम करता है. इसे चेहरे और जॉलाइन को टोन करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं डॉक्टर्स का मानना है कि, तौलिया के सहारे गर्दन पतली या जॉलाइन शार्प होना आसान नहीं है। हां, यह कुछ हद तक ब्लड सर्कुलेशन और मसल्स की एक्टिविटी बढ़ा सकता है. लेकिन किसी भी रिज़ल्ट के लिए केवल एक तकनीक से चमत्कार की उम्मीद करना गलत होगा. 

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क्या लोग इस ट्रेंड को ट्राई करते हैं? 

यह आसान है और घर बैठे किया जा सकता है. 

बिना किसी इक्विपमेंट के होने से लोग जल्दी आकर्षित हो जाते हैं. 

सोशल मीडिया पर पहले और बाद की तस्वीरें देखकर लोगों को लगता है कि ये तरीका तुरंत असर करता है. 

हकीकत में क्या असर होता है?

तौलिया वर्कआउट करने से शरीर की मुद्रा में थोड़ा सुधार आ सकता है और गर्दन की मसल्स थोड़ी एक्टिव हो सकती हैं, जिससे टोनिंग का एहसास होता है. लेकिन अगर आपको चेहरे की चर्बी कम करनी है या जॉलाइन शार्प बनानी है, तो आपको संतुलित डाइट, कार्डियो वर्कआउट और चेहरे की एक्सरसाइज करनी होगी, न की तौलिया वर्कआउट. 

तौलिया वर्कआउट एक दिलचस्प और आसान तरीका जरूर है, लेकिन यह कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है. अगर आप वाकई में पतली गर्दन और शार्प जॉलाइन चाहते हैं, तो आपको संपूर्ण फिटनेस रूटीन अपनाना होगा. सोशल मीडिया पर दिखने वाले ट्रेंड्स से प्रेरणा लेना ठीक है, लेकिन उनकी सच्चाई जानना और शरीर की जरूरत के अनुसार फैसले लेना जरूरी है. इसलिए अगली बार जब कोई ऐसा वायरल वीडियो देखें, तो आंख बंद करके न अपनाएं, सोच-समझकर कदम उठाएं. 

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जरूरत से ज्यादा ना करें नींबू पानी का सेवन, वरना सेहत को हो सकता है भारी नुकसान

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Excessive Lemon Water Side Effects: वजन घटाने के लिए अक्सर लोग नींबू पानी का सेवन करते हैं. सुबह उठते ही इसे खाली पेट लेते हैं. कुछ लोग तो एक्स्ट्रा डिटॉक्स के चक्कर में दिन में दो-तीन बार इसका सेवन कर लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि “हर चीज की अति बुरी होती है” ये कहावत नींबू पानी पर भी लागू हो सकती है? अगर नहीं, तो अब सोचिए! क्योंकि जरूरत से ज्यादा नींबू पानी पीना आपकी सेहत को फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है.

दांतों की सेहत पर असर

नींबू में सिट्रिक एसिड पाया जाता है जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर दांतों के इनेमल को कमजोर कर सकता है. लगातार नींबू पानी पीने से दांतों में सेंसिटिविटी बढ़ सकती है और दांत जल्दी खराब हो सकते हैं. 

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पेट की समस्याएं बढ़ सकती हैं

नींबू पानी को खाली पेट पीना कई बार एसिडिटी, गैस और पेट में जलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है. खासकर जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें इसका अधिक सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

हड्डियों पर प्रभाव

ज्यादा नींबू पानी पीने से शरीर में पोटैशियम का असंतुलन हो सकता है, जिससे हड्डियों की मजबूती पर असर पड़ता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद एसिड कुछ लोगों को जॉइंट पेन या गठिया जैसी परेशानियों की ओर भी ले जा सकता है.

त्वचा पर भी पड़ सकता है असर

नींबू में फोटोसेंसिटिव गुण होते हैं. अगर नींबू पानी पीने के तुरंत बाद आप तेज धूप में जाते हैं, तो त्वचा पर रैशेज़, जलन या लालपन आ सकता है.

अगर आप नींबू पानी के फैन हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है. लेकिन संतुलन जरूरी है. दिन में एक बार, खासकर सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू और थोड़ा शहद मिलाकर लेना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन दिन में कई बार इसका सेवन करना उल्टा असर डाल सकता है.

नींबू पानी सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन तभी जब इसे सीमित मात्रा में और सही समय पर लिया जाए. अगर आप इसके फायदे चाहते हैं तो संयम रखें. कहीं ऐसा ना हो कि शरीर की देखभाल के चक्कर में आप अनजाने में नुकसान का रास्ता अपना लें. 

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लिफ्ट में फंसा बेटा तो शॉक लगने से पिता की मौत, जानें कितना खतरनाक होता है पैनिक अटैक

लिफ्ट में फंसा बेटा तो शॉक लगने से पिता की मौत, जानें कितना खतरनाक होता है पैनिक अटैक



<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिल दहलाने वाली एक घटना ने सभी को झकझोर दिया. दरअसल, मिसरोद जाट खेड़ी स्थित पॉस कॉलोनी निरुपम रॉयल पॉम विला में ऋषिराज भटनागर नाम के एक शख्स अपने आठ साल के बेटे को लिफ्ट में फंसा देखकर इतने घबरा गए कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया, जिसके चलते उनकी मौत हो गई. यह घटना न केवल तकनीकी खामियों और सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि पैनिक अटैक कितना खतरनाक हो सकता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भोपाल में कैसे हुआ हादसा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम (27 मई) आठ साल का मासूम देवांश अपने फ्लैट में जाने के लिए लिफ्ट में चढ़ा. अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट रुक गई, जिससे वह फंस गया. अपने बेटे को लिफ्ट में फंसा देखकर पिता ऋषिराज घबरा गए. उन्होंने तुरंत गार्ड रूम की ओर दौड़ लगाई और जेनरेटर चालू करवाने की कोशिश की. उस दौरान वह इतने तनाव में आ गए कि उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और वह जमीन पर गिर पड़े. कुछ ही मिनटों में बिजली आ गई और लिफ्ट का दरवाजा खुल गया, जिससे देवांश सुरक्षित बाहर आ गया. हालांकि, तब तक ऋषिराज की हालत बिगड़ चुकी थी. उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि ऋषिराज की मौत हार्ट अटैक से हुई, जिसका मुख्य कारण संभवतः अचानक लगा सदमा और पैनिक अटैक था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना खतरनाक हो सकता है पैनिक अटैक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पैनिक अटैक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अचानक गंभीर डर या चिंता की स्थिति में पहुंच जाता है. यह स्थिति शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डालती है. 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पैनिक अटैक के मामले पिछले पांच साल में 30 फीसदी तक बढ़े हैं. खासकर शहरी इलाकों में टेंशन और लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया कि पैनिक अटैक न सिर्फ मेंटल हेल्थ पर असर डालता है, बल्कि यह फिजिकल हेल्थ पर भी गहरा असर डाल सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पैनिक अटैक में कैसे होते हैं लक्षण?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पैनिक अटैक के दौरान शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. इनमें तेजी से धड़कन बढ़ना, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, चक्कर आना और सीने में दर्द शामिल हैं. कई बार ये लक्षण इतने गंभीर हो जाते हैं कि व्यक्ति को हार्ट अटैक जैसा महसूस होता है. भोपाल वाले मामले में भी यही हुआ. ऋषिराज को अपने बेटे की सुरक्षा की चिंता में इतना गहरा सदमा लगा कि उनका शरीर इस तनाव को सहन नहीं कर पाया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/five-biggest-cause-of-liver-cancer-dipika-kakar-liquor-hepatitis-b-hepatitis-c-obesity-unhealthy-lifestyle-2952719">इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>



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इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां

इन पांच वजहों से लिवर में पनपने लगता है कैंसर, भूलकर भी न करना ये गलतियां


टीवी जगत की जानी-मानी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ स्टेज-2 लिवर कैंसर से जूझ रही हैं. दरअसल, लिवर कैंसर को मेडिकल टर्म में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) भी कहते हैं, जो गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, लिवर कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है. भारत में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आइए आपको उन पांच वजहों से रूबरू कराते हैं, जिनके कारण लिवर में कैंसर पनपने लगता है.

यह है लिवर कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण

लिवर फाउंडेशन की 2025 में हुई एक स्टडी के मुताबिक, लिवर कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से एक है क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी का इंफेक्शन. ये वायरस लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और लंबे समय तक इनका इलाज नहीं होता है तो ये सिरोसिस का कारण बन जाते हैं. यही स्थिति धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेती है. गौर करने वाली बात यह है कि सिरोसिस के बिना भी हेपेटाइटिस बी लिवर कैंसर का कारण बन सकता है, जो इसे और ज्यादा खतरनाक बनाता है. भारत में हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है, जिसका मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध, इंफेक्टेड इंजेक्शन का इस्तेमाल, टैटू बनवाने या पियर्सिंग के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखना है.

शराब की वजह से भी होता है लिवर कैंसर

अगर कोई लंबे समय तक लगातार शराब का सेवन करता है तो यह लिवर कैंसर होने की प्रमुख वजह हो सकती है. गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल के एक्सपर्ट डॉ. एएस सोइन ने हाल ही में बताया कि लिवर में फैट जमा होने का कारण शराब भी है, जिसे अल्कोहलिक फैटी लिवर कहते हैं. यह स्थिति धीरे-धीरे सिरोसिस में बदल जाती है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

मोटापा और अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी बेहद खतरनाक

मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज भी लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं. मैक्स हॉस्पिटल की हालिया रिपोर्ट में बताया गया कि मोटापा नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का कारण बनता है, जो समय के साथ सिरोसिस और फिर कैंसर में बदल सकता है. 2025 में हुई एक रिसर्च के अनुसार, भारत में मोटापे की दर में 15% की वृद्धि हुई है और इसके साथ ही लिवर कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं. 

एफ्लैटॉक्सिन और रसायनों का संपर्क

एफ्लैटॉक्सिन एक तरह का जहर है, जो कुछ मोल्ड्स (फफूंद) से उत्पन्न होता है और अनाज, मूंगफली और मक्का जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जा सकता है. 2025 में लिवर फाउंडेशन की एक स्टडी में पाया गया कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां अनाज को सही तरीके से स्टोर नहीं किया जाता, वहां एफ्लैटॉक्सिन के संपर्क में आने की वजह से लिवर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में रसायनों के संपर्क में आने से भी लिवर को नुकसान पहुंचता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है.

आनुवंशिक और वंशानुगत कारण

कुछ लोगों में लिवर कैंसर का खतरा आनुवंशिक कारणों से भी बढ़ जाता है। लिवर फाउंडेशन की 2025 की रिसर्च के अनुसार, अगर परिवार में लिवर कैंसर या लिवर की अन्य बीमारियों की हिस्ट्री है तो इसका जोखिम बढ़ जाता है. इसके अलावा हेमोक्रोमैटोसिस और विल्सन रोग जैसी जेनेटिक लिवर बीमारियां भी कैंसर का कारण बन सकती हैं.

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