केरल में तेजी से फैल रहा ब्रेन ईटिंग अमीबा, 2025 में अब तक 170 लोग संक्रमित, 42 की मौत

केरल में तेजी से फैल रहा ब्रेन ईटिंग अमीबा, 2025 में अब तक 170 लोग संक्रमित, 42 की मौत



PAM Disease: हाल के दिनों में केरल और अब पश्चिम बंगाल में एक बेहद खतरनाक बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है. यह बीमारी प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) के नाम से जानी जाती है, जिसे आम भाषा में ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ कहा जाता है. इसका कारण एक परजीवी है जिसका नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है. यह सीधे मानव दिमाग पर हमला करता है और इलाज शुरू करने के बाद भी बचने की संभावना बेहद कम रहती है.

कैसे फैली बीमारी?

डॉक्टरों के अनुसार यह परजीवी अक्सर गर्म पानी वाले तालाबों, नदियों और झीलों में पाया जाता है. जब कोई व्यक्ति नहाते या तैरते समय पानी नाक के जरिए अंदर खींच लेता है, तब यह अमीबा दिमाग तक पहुंचकर संक्रमण फैलाता है. यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती, बल्कि केवल पानी के जरिए फैलती है.

तेजी से बढ़ते मामले

संसद में शुक्रवार को दिए गए आंकड़ों के अनुसार स्थिति बेहद चिंताजनक है. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा को बताया कि 2025 में केवल केरल में 170 लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए. इनमें से 42 लोगों की मौत हो चुकी है.

यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि सितंबर तक दुनिया भर में कुल 500 मामले थे, लेकिन केवल डेढ़ साल में केरल में ही 100 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं. मंत्री के अनुसार 2023 में 2 केस, 2 मौतें, 2024 में 39 केस, 9 मौतें और 2025 में 170 केस, 42 मौतें साफ है कि इस साल यह बीमारी तेजी से फैली है.

सरकार की कार्रवाई

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कई कदम उठाए हैं.
  • कोझीकोड के NCDC ने इस बीमारी पर विस्तृत अध्ययन किया है.
  • ICMR और ICAR इसकी जांच और निगरानी कर रहे हैं.
  • देशभर में 18 VRDL लैब इस बीमारी की टेस्टिंग और निगरानी कर रही हैं.
  • राज्य सरकारों को चेतावनी जारी कर लोगों को जागरूक रहने के लिए कहा गया है.

नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार या सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह गलती भारी पड़ सकती है क्या आप इसे एक सामान्य बीमारी मानकर खारिज कर रहे हैं? सावधान रहें! क्या आपके शरीर में विनाशकारी ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ ने घर बना लिया है? इसलिए, इन लक्षणों को देखते ही सावधान रहें.

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नई रिसर्च का दावा: बारिश के मौसम में ‘अमृत’ बन जाती है गिलोय, मिलते हैं दोगुने फायदे

नई रिसर्च का दावा: बारिश के मौसम में ‘अमृत’ बन जाती है गिलोय, मिलते हैं दोगुने फायदे



Benefits of Giloy: हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने इस बात की पुष्टि की है कि गिलोय (Tinospora cordifolia) को तोड़ने (हार्वेस्ट करने) का सबसे सही समय मानसून यानी बरसात का मौसम होता है. ‘बीएमसी प्लांट बायोलॉजी’ में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार, बारिश के दिनों में गिलोय के तने में औषधीय तत्व अपनी चरम सीमा पर होते हैं. यह अध्ययन पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के आचार्य बालकृष्ण और उनकी टीम द्वारा किया गया है, जिसने आयुर्वेद के सदियों पुराने ज्ञान पर विज्ञान की मुहर लगा दी है.

क्या कहती है रिसर्च?

हरिद्वार स्थित पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने 2022 से 2024 तक लगातार 24 महीनों तक गिलोय के पौधों पर शोध किया. उन्होंने हर दूसरे महीने गिलोय के तने के नमूने इकट्ठे किए और आधुनिक तकनीकों (UHPLC-PDA और HPTLC) का उपयोग करके उनकी जांच की. जांच में सामने आया कि गिलोय के तीन प्रमुख बायोएक्टिव कंपाउंड्स – कोर्डिफोलियोसाइड ए, मैग्नोफ्लोरिन और बीटा-एकडायसोन (β-ecdysone) की मात्रा अगस्त महीने में सबसे अधिक पाई गई.

गिलोय का उपयोग

सर्दि‍यों में घट जाते हैं गुण अध्ययन में यह भी देखा गया कि सर्दियों के मौसम, विशेषकर दिसंबर से फरवरी के बीच, गिलोय में इन लाभकारी तत्वों की मात्रा सबसे कम हो जाती है. वहीं, वसंत और गर्मियों में यह मात्रा मध्यम स्तर पर रहती है. यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गिलोय का उपयोग बुखार, इम्यूनिटी बढ़ाने और सूजन कम करने जैसी कई बीमारियों में किया जाता है. अगर इसे सही मौसम में तोड़ा जाए तो इससे बनने वाली दवाइयां ज्यादा असरदार साबित होंगी.

आयुर्वेद और विज्ञान का मेल

आयुर्वेद और विज्ञान का मेल आयुर्वेद में हमेशा से यह माना जाता रहा है कि जड़ी-बूटियों को तोड़ने का एक निश्चित समय होता है. प्राचीन ग्रंथों में तने वाली औषधियों को वर्षा ऋतु या वसंत में इकट्ठा करने की सलाह दी गई है. इस नई वैज्ञानिक रिसर्च ने पारंपरिक भारतीय ज्ञान को सही साबित किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के दौरान बारिश और तापमान पौधों के ‘डिफेंस मैकेनिज्म’ को सक्रिय कर देते हैं, जिससे उनमें औषधीय तत्वों का निर्माण बढ़ जाता है.

यह रिसर्च न केवल दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद है, जो गिलोय का इस्तेमाल घरेलू नुस्खों के तौर पर करते हैं.

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कैंसर रिस्क घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक करती है यह लाल सब्जी, जानें इसके चमत्कारी फायदे

कैंसर रिस्क घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक करती है यह लाल सब्जी, जानें इसके चमत्कारी फायदे



गाजर एक ऐसी सब्जी है जिसे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी पसंद से खाते हैं.इसका मीठा टेस्ट और रंग इसे खाने में मजेदार बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाजर सिर्फ टेस्ट तक ही सीमित नहीं है. ये एक पोषण से भरपूर जड़ वाली सब्जी है, जो हमारे शरीर को अंदर से मजबूत और बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करती है. गाजर में बीटा-कैरोटीन, फाइबर, विटामिन A, K1, पोटैशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की कई समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं. खास बात ये है कि यह सब्जी कैंसर जैसे गंभीर रोगों के खतरे को भी कम करने में मदद कर सकती है और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखती है. आइए जानते हैं कि गाजर कैसे हमारी हेल्थ को बेहतर बनाती है और किन-किन बीमारियों से बचाती है. 

कैंसर के खतरे को कम करने में कैसे मदद करती है गाजर?
गाजर में पाया जाने वाला बीटा-कैरोटीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर में जाकर विटामिन A में बदल जाता है. ये बीटा-कैरोटीन शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस तब होता है जब शरीर में हानिकारक फ्री-रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं. जो लोग नियमित रूप से गाजर खाते हैं, उनमें कोलोरेक्टल, फेफड़े का और प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना कम होती है. एक रिसर्च के अनुसार, हर हफ्ते 2 से 4 कच्ची गाजर खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम करीब 17 प्रतिशत तक कम हो सकता है.गाजर में कैरोटीनॉयड और ल्यूटिन, जैसे यौगिक भी होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं और कैंसर बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं. 

ब्लड शुगर कंट्रोल करने में कैसे फायदेमंद है गाजर?

बहुत से लोग सोचते हैं कि गाजर मीठी होती है, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए ठीक नहीं है. लेकिन गाजर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसका मतलब है कि ये खून में शुगर को धीरे-धीरे बढ़ता है, इससे ब्लड शुगर का बैलेंस बना रहता है.  इसमें मौजूद फाइबर पाचन को धीमा करता है, जिससे ग्लूकोज का अवशोषण धीरे होता है और शरीर में शुगर का लेवल बैलेंस रहता है. , गाजर जैसी फाइबर युक्त सब्जियां खाने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है. 

गाजर के दूसरे फायदे जो इसे बनाते हैं सुपरफूड

1.  गाजर में भरपूर मात्रा में विटामिन A होता है, जो आंखों की रोशनी को तेज करता है. यह उम्र के साथ होने वाली आंखों की बीमारियों जैसे मैक्युलर डिजनरेशन से भी बचाता है. 

2. गाजर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन A शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं, जिससे संक्रमण से लड़ने की ताकत मिलती है. 

3. गाजर में पाए जाने वाले पोटैशियम और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा घटता है. 

4. गाजर में भरपूर मात्रा में डायटरी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को साफ रखता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है. ये आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में भी मदद करता है. 

5. इसमें मौजूद विटामिन K1 और पोटेशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने से बचाते हैं. 

6. गाजर का नियमित सेवन स्किन को नेचुरल चमक देता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और स्किन को हेल्दी बनाए रखते हैं. 

7. गाजर के एंटीऑक्सीडेंट्स लीवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करते हैं और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं. 

8. गाजर में पाए जाने वाले विटामिन B6 और कैरोटिनॉयड्स दिमाग को तेज बनाते हैं, याददाश्त सुधारते हैं और बुढ़ापे में मानसिक कमजोरी से बचाते हैं. 

यह भी पढ़ें: सर्दियों में ऐसे बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, बीमारियों से रहेंगे दूर

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सर्दियों में ऐसे बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, बीमारियों से रहेंगे दूर

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सर्दियों का मौसम बच्चों के लिए काफी तकलीफ लेकर आता है, जिससे बच्चे तो परेशान होते ही है साथ ही उनके माता-पिता भी परेशान रहते है. ठंडी हवाएं, तापमान में गिरावट और बदलता मौसम मिलकर बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी को कमजोर कर देते है. इसकी वजह से वे जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और वायरल इंफेक्शन का शिकार हो जाते है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.

अगर आपके घर में छोटे बच्चे है तो सर्दियों में उनका विशेष ध्यान रखना जरूरी है. खाने से लेकर कपड़े पहनाने तक हर चीज का ख्याल रखना पड़ता है ताकि वे मौसमी बीमारियों से बच सकें.

सर्दियों में बच्चों को होने वाली आम समस्याएं

  • जुकाम
  • खांसी और गले से संबंधित दिक्कत
  • त्वचा का बेजान और सूखापन
  • वायरल बीमारियां जैसे बुखार
  • सिर दर्द
  • पेट से जुड़ी समस्याएँ
  • फ्लू वायरस (इन्फ्लुएंज़ा) का खतरा
  • फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ

विटामिन C और D क्यों जरूरी है?

  • सर्दियों का मौसम आते ही माता-पिता को बच्चों की डायट में विटामिन C की मात्रा बढ़ानी चाहिए. जिन खाद्य पदार्थों में विटामिन C ज्यादा होता है, उनका सेवन बच्चों को जरूर कराना चाहिए. विटामिन C बच्चों की इम्यून कोशिकाओं को एक्टिव रखता है.
  • विटामिन C सबसे ज्यादा इन फलों और सब्जियों में होता है: संतरा, मौसम्बी, आंवला, कीवी, नींबू, टमाटर, शिमला मिर्च.
  • इसी तरह विटामिन D भी बच्चों के लिए जरूरी है. उन्हें रोज थोड़ी देर धूप में खेलने दें ताकि हड्डियाँ मजबूत रहे.

बच्चों को गर्म और पौष्टिक खाना दें

सर्दियों में बच्चों के शरीर को अतिरिक्त एनर्जी और गर्माहट की जरूरत होती है. इसलिए इन चीजों का सेवन करवाएं:

  • आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर दे
  • सूखे मेवे: बादाम, अखरोट, किशमिश
  • घी और गुड़ (इम्युनिटी बढ़ाते है लेकिन ज्यादा मात्रा में न दें)
  • बाजरा, ज्वार, रागी जैसे गर्म अनाज
  • आयुर्वेदिक मसाले: हल्दी, अदरक
  • सूप, दलिया, मूंग दाल, सब्जियाँ

बच्चों को हाइड्रेटेड रखें

सर्दियों में प्यास कम लगती है जिसकी वजह से गले में सूखापन और चेहरा खुरदुरा हो सकता है. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहें.

  • गर्म पानी
  • हर्बल पानी (अदरक, तुलसी, दालचीनी) पर्याप्त पानी इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय रखता है और संक्रमण से बचाता है.

सर्दियों में बच्चों की शारीरिक गतिविधि क्यों जरूरी है?

ठंड के कारण माता-पिता अक्सर बच्चों को बाहर खेलने नहीं देते, जो कि गलत है. इससे उनका ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है, एनर्जी कम होती है और इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. इसलिए बच्चों को हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करवाना जरूरी है, जैसे:

  • दौड़ना
  • स्किपिंग
  • योग
  • इनडोर एक्सरसाइज
  • कोई भी मजेदार गेम जिसमें बॉडी मूवमेंट हो

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वर्कआउट से पहले या बाद में, केले खाने के लिए क्या है बेस्ट टाइम?

वर्कआउट से पहले या बाद में, केले खाने के लिए क्या है बेस्ट टाइम?



कोई भी व्यक्ति अगर वर्कआउट या व्यायाम करता है और अपनी फिटनेस को बनाए रखने के लिए जिम, रनिंग या किसी भी फिजिकल एक्सरसाइज करता है तो उसे अपनी एनर्जी को बनाए रखने के लिए कई प्रकार के फूड या नेचुरल सप्लिमेंट्स का सहारा लेना पड़ता है. इनमें सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है केला. क्योंकि यह तुरंत एनर्जी देता है, भारी नहीं लगता और शरीर को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है.

केले के अंदर एनर्जी बढ़ाने वाले सभी तत्व शामिल होते हैं, जिनमें कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है. यह वर्कआउट से पहले और बाद दोनों समय एक बेहतरीन फूड माना जाता है. इसे खाने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. कुछ लोगों के लिए केला वर्कआउट से पहले फ्यूल का काम करता है जबकि कई लोगों के लिए वर्कआउट के बाद रिकवरी फूड की तरह काम आता है.

वर्कआउट से पहले केले का सेवन क्यों फायदेमंद है

जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से वर्कआउट या एक्सरसाइज करता है तो उसे अपनी ताकत बढ़ाने और शरीर में एनर्जी की प्रचुरता बनाए रखने के लिए केले का सेवन करना चाहिए. वर्कआउट शुरू होने से 30–50 मिनट पहले केला खाना सबसे बेहतर माना जाता है. इससे आपकी एक्सरसाइज की तीव्रता और कैपेसिटी बढ़ती है और व्यक्ति पूरी स्फूर्ति के साथ व्यायाम कर पाता है. केले में मौजूद ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व शरीर की तंदुरुस्ती के लिए जरूरी है. यह मांसपेशियों में होने वाले क्रैम्प्स से छुटकारा दिलाता है और स्टैमिना बढ़ाता है.

वर्कआउट के बाद केला क्यों जरूरी है

अगर आपने हेवी ट्रेनिंग या वर्कआउट किया है तो केला आपकी मांसपेशियों की रिकवरी के लिए सबसे असरदार पोस्ट वर्कआउट फूड है. केले में भरपूर फाइबर होता है जो वर्कआउट के बाद तुरंत ऊर्जा देता है. यह शरीर को जरूरी कार्ब्स देकर मसल रिकवरी में मदद करता है. अगर वर्कआउट के बाद हड्डियों में दर्द महसूस होता है तो केले में मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम की वजह से वह दर्द कम होता है. और अगर वर्कआउट के दौरान शरीर में सूजन आ जाती है तो यह उसे भी जल्दी कम करता है.

वर्कआउट के बाद केला और प्रोटीन का कॉम्बिनेशन

केला कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है. अगर आप वर्कआउट के बाद केला और पिने का सेवन करते है तो यह शरीर को प्रोटीन बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है. प्रोटीन तेजी से मसल रिकवरी करता है और शरीर को मजबूत बनाता है.

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