आंख के सामने अचानक छा जाता है अंधेरा, कहीं इन बीमारियों की शुरुआत तो नहीं?

आंख के सामने अचानक छा जाता है अंधेरा, कहीं इन बीमारियों की शुरुआत तो नहीं?


ऐसा होना कई वजहों से संभव है, जैसे अचानक ब्लड प्रेशर गिर जाना, माइग्रेन की ऑरा, रेटिना से जुड़ी दिक्कतें, ग्लूकोमा या फिर शरीर का अचानक शॉक में जाना. वजह चाहे छोटी हो या बड़ी, यह समझना जरूरी है कि आखिर आंखों के सामने अंधेरा क्यों आता है.

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन एक आम कारण है. अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिर जाता है और ब्रेन तक ब्लड फ्लो कम होने से आंखों के आगे अंधेरा छा सकता है. इससे चक्कर, हल्कापन और कभी-कभी बेहोशी भी महसूस हो सकती है.

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन एक आम कारण है. अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिर जाता है और ब्रेन तक ब्लड फ्लो कम होने से आंखों के आगे अंधेरा छा सकता है. इससे चक्कर, हल्कापन और कभी-कभी बेहोशी भी महसूस हो सकती है.

माइग्रेन की ऑरा भी ऐसी समस्या पैदा कर सकती है. माइग्रेन शुरू होने से पहले कई लोगों को लाइट के फ्लैश, टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें या कुछ पल के लिए दिखना बंद होने जैसा महसूस होता है. यह माइग्रेन का शुरुआती संकेत होता है.

माइग्रेन की ऑरा भी ऐसी समस्या पैदा कर सकती है. माइग्रेन शुरू होने से पहले कई लोगों को लाइट के फ्लैश, टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें या कुछ पल के लिए दिखना बंद होने जैसा महसूस होता है. यह माइग्रेन का शुरुआती संकेत होता है.

ट्रांजिएंट इस्कीमिक अटैक यानी मिनी-स्ट्रोक भी अचानक ब्लैकआउट का कारण बन सकता है. इसमें दिमाग को कुछ समय के लिए ब्लड मिलना रुक जाता है. इसके साथ कमजोरी, सुन्नपन या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर की जरूरत होती है.

ट्रांजिएंट इस्कीमिक अटैक यानी मिनी-स्ट्रोक भी अचानक ब्लैकआउट का कारण बन सकता है. इसमें दिमाग को कुछ समय के लिए ब्लड मिलना रुक जाता है. इसके साथ कमजोरी, सुन्नपन या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर की जरूरत होती है.

रेटिनल डिटैचमेंट एक गंभीर स्थिति है. इसमें रेटिना अपनी जगह से हटने लगती है, जिससे अचानक फ्लोटर्स दिखना, चमक दिखाई देना या एक साइड पर परदा गिरने जैसा महसूस हो सकता है. समय पर इलाज न मिले तो स्थायी नुकसान भी हो सकता है.

रेटिनल डिटैचमेंट एक गंभीर स्थिति है. इसमें रेटिना अपनी जगह से हटने लगती है, जिससे अचानक फ्लोटर्स दिखना, चमक दिखाई देना या एक साइड पर परदा गिरने जैसा महसूस हो सकता है. समय पर इलाज न मिले तो स्थायी नुकसान भी हो सकता है.

अगर अंधेरा अचानक और बार-बार छाने लगे, दर्द के साथ हो, या इसके साथ कमजोरी और बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो देर नहीं करनी चाहिए. कई स्थिति में तुरंत मेडिकल जांच होनी चाहिए, इसलिए समय रहते आंखों का इमरजेंसी चेक-अप कराना जरूरी है.

अगर अंधेरा अचानक और बार-बार छाने लगे, दर्द के साथ हो, या इसके साथ कमजोरी और बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो देर नहीं करनी चाहिए. कई स्थिति में तुरंत मेडिकल जांच होनी चाहिए, इसलिए समय रहते आंखों का इमरजेंसी चेक-अप कराना जरूरी है.

Published at : 07 Dec 2025 02:27 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

मूंगफली या मखाना… वजन घटाने के लिए कौन-सा स्नैक्स बेस्ट? देख लें पूरी रिपोर्ट

मूंगफली या मखाना… वजन घटाने के लिए कौन-सा स्नैक्स बेस्ट? देख लें पूरी रिपोर्ट



Healthy Snacks For Weight Loss: आजकल लोग वजन कम करने के लिए तरह-तरह के कदम उठा रहे हैं, हालांकि आपको बता दें कि वजन कम करने की कोशिश में सही स्नैक चुनना बहुत मायने रखता है. ज्यादातर लोग ऐसा कुछ चाहते हैं जो पेट भरे, स्वाद भी अच्छा हो और काम के बीच या शाम की भूख में आसानी से खाया जा सके. मूंगफली (पीनट्स) और मखाना (फॉक्स नट्स) दो ऐसे विकल्प हैं जिन्हें अक्सर हेल्दी माना जाता है. पीनट्स प्रोटीन और अच्छे फैट से भरपूर होते हैं, जबकि मखाना कम कैलोरी वाला और जल्दी पचने वाला हल्का स्नैक माना जाता है.

लेकिन वजन घटाने के मामले में दोनों शरीर पर अलग तरीके से असर डालते हैं. चलिए आपको इनके  फायदे, कैलोरी और न्यूट्रिशन को अच्छे से बताते हैं, ताकि आप अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से इनका चूज कर सकें. 

 पोषण में क्या फर्क है?

मूंगफली  एनर्जी से भरपूर होते हैं. इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर अच्छी मात्रा में मिलता है, इसलिए थोड़ी-सी मात्रा भी लंबे समय तक ऊर्जा देती है. इसके मुकाबले, मखाना बेहद हल्का और कम कैलोरी वाला होता है, इसलिए इसे बड़ी मात्रा में भी बिना गिल्ट के खाया जा सकता है. 

कैलोरी किसमें कम है?

अगर आप कैलोरी पर नजर रखते हैं, तो मखाना सही चुनाव है. एक कटोरी भुना मखाना, थोड़े से भुने मूंगफली  से भी कम कैलोरी देता है.

कौन ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है?

मूंगफली ज्यादा देर तक भरा रखते हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन और फैट अधिक है. मखाना जल्दी पेट भरता है, लेकिन इसका असर ज्यादा देर नहीं रहता क्योंकि इसमें फैट कम और प्रोटीन मध्यम मात्रा में होता है.  दोनों स्नैक्स वजन घटाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन सही सर्विंग बहुत जरूरी है. मूंगफली हेल्दी हैं लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने पर कैलोरी बढ़ जाती है. मखाना अधिक सर्विंग में भी हल्का रहता है.

अपनी लाइफस्टाइल के अनुसार किसे चुनें?

अगर आपको ऐसा स्नैक चाहिए जो कई घंटे तक भूख रोककर रखे, तो मूंगफली बेहतर हैं. अगर आप लो-कैलोरी और हल्का स्नैक चाहते हैं जो क्रेविंग शांत कर दे, तो मखाना सही रहेगा. अगर आपको इसको सरल शब्दों में बताएं, तो अगर आपको कम कैलोरी चाहिए तो मखाना चुनें, अगर आप अपना पेट लंबे समय तक भरना चाहते हैं, तो आपके पास मूंगफली  बेहतर लेकिन यहां एक चीज ध्यान रखना चाहिए कि इसकी कम मात्रा हो.  वजन घटाने के लिए दोनों को भी शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा  रात की हल्की भूख के लिए मखाना और सुबह या शाम के प्रोटीन स्नैक के लिए मूंगफली आपके लिए अच्छा विकल्प है. 

इसे भी पढ़ें- एंटी निकोटिन का काम करती है किचेन में रखी ये चीज, रोज जमकर सिगरेट पीने वाले जान लें ये बात

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

गेहूं-बाजरा या रागी… किस रोटी को खाने से क्या होता है? एक क्लिक में जानें सबकुछ

गेहूं-बाजरा या रागी… किस रोटी को खाने से क्या होता है? एक क्लिक में जानें सबकुछ


रोटी में प्रोटीन, डाइटरी फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और बी-विटामिन जैसे न्यूट्रिशन भरपूर होते हैं. ये सब मिलकर ब्लड शुगर को बैलेंस रखने, पेट भरा रखने, वजन कंट्रोल करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि लोग अलग-अलग तरह के आटे आजमाने लगे हैं.

अगर बात रागी और ज्वार की करें, तो रागी में ज्वार से थोड़ा ज्यादा फाइबर पाया जाता है. एक रागी की रोटी में लगभग 3.1 ग्राम फाइबर होता है, जबकि एक ज्वार की रोटी में करीब 1.4 ग्राम. फाइबर पाचन सुधारता है और आंतों की सूजन कम करता है, यही इन दोनों  को खास बनाता है.

अगर बात रागी और ज्वार की करें, तो रागी में ज्वार से थोड़ा ज्यादा फाइबर पाया जाता है. एक रागी की रोटी में लगभग 3.1 ग्राम फाइबर होता है, जबकि एक ज्वार की रोटी में करीब 1.4 ग्राम. फाइबर पाचन सुधारता है और आंतों की सूजन कम करता है, यही इन दोनों को खास बनाता है.

रागी की तुलना अगर गेहूं से करें, तो रागी कई मामलों में आगे है. यह ग्लूटेन-फ्री है, हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है और भारी फाइबर कंटेंट की वजह से वजन घटाने में भी मददगार है. इसके न्यूट्रिशन डाइजेशन सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं.

रागी की तुलना अगर गेहूं से करें, तो रागी कई मामलों में आगे है. यह ग्लूटेन-फ्री है, हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है और भारी फाइबर कंटेंट की वजह से वजन घटाने में भी मददगार है. इसके न्यूट्रिशन डाइजेशन सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं.

ज्वार और गेहूं दोनों ही फाइबर के अच्छे स्रोत हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं. ज्वार की रोटी में मौजूद फाइबर ओवरईटिंग से बचाता है और बॉवेल मूवमेंट को भी बेहतर बनाता है. कई लोग इसे वजन घटाने के लिए गेहूं की रोटी से बेहतर विकल्प मानते हैं.

ज्वार और गेहूं दोनों ही फाइबर के अच्छे स्रोत हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं. ज्वार की रोटी में मौजूद फाइबर ओवरईटिंग से बचाता है और बॉवेल मूवमेंट को भी बेहतर बनाता है. कई लोग इसे वजन घटाने के लिए गेहूं की रोटी से बेहतर विकल्प मानते हैं.

गेहूं की रोटी रोजमर्रा का स्वाद देती है, लेकिन जो लोग वजन या ब्लड शुगर कंट्रोल में रखते हैं, वे ज्वार, बाजरा या रागी जैसे मिलेट्स का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकते हैं. मिलेट्स शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जिससे शुगर स्पाइक्स कम होते हैं.

गेहूं की रोटी रोजमर्रा का स्वाद देती है, लेकिन जो लोग वजन या ब्लड शुगर कंट्रोल में रखते हैं, वे ज्वार, बाजरा या रागी जैसे मिलेट्स का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकते हैं. मिलेट्स शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जिससे शुगर स्पाइक्स कम होते हैं.

कुछ लोगों को रागी की रोटी का गहरा रंग पसंद नहीं आता, लेकिन पोषण के मामले में यह बेहद मजबूत है. इसके बावजूद, अगर स्वाद या रंग समस्या हो, तो इसे अन्य आटे के साथ मिलाकर हल्का और खाने में आसान बनाया जा सकता है.

कुछ लोगों को रागी की रोटी का गहरा रंग पसंद नहीं आता, लेकिन पोषण के मामले में यह बेहद मजबूत है. इसके बावजूद, अगर स्वाद या रंग समस्या हो, तो इसे अन्य आटे के साथ मिलाकर हल्का और खाने में आसान बनाया जा सकता है.

इसी वजह से मिक्स्ड मिलेट फुल्का एक शानदार विकल्प बन गया है. इसमें रागी, ज्वार, बाजरा और गेहूं सभी को मिलकर एक ऐसा फुल्का बनाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों से लेकर वजन घटाने वालों तक सभी के लिए फायदेमंद है. एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर से भरपूर यह रोटी रोज की थाली में आसानी से फिट हो जाती है.

इसी वजह से मिक्स्ड मिलेट फुल्का एक शानदार विकल्प बन गया है. इसमें रागी, ज्वार, बाजरा और गेहूं सभी को मिलकर एक ऐसा फुल्का बनाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों से लेकर वजन घटाने वालों तक सभी के लिए फायदेमंद है. एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर से भरपूर यह रोटी रोज की थाली में आसानी से फिट हो जाती है.

Published at : 07 Dec 2025 11:26 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

क्या है पोर्टफोलियो डाइट, जानें यह कैसे घटाती है दिल की बीमारी का खतरा?

क्या है पोर्टफोलियो डाइट, जानें यह कैसे घटाती है दिल की बीमारी का खतरा?



आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर ऐसा खाना खा लेते हैं जो हमारे शरीर को जरूरी पोषण देने के जगह नुकसान पहुंचा देता है, खासतौर पर दिल को, हाई कोलेस्ट्रॉल, अनबैलेंसड डाइट, तनाव और कम फिजिकल एक्टिविटी मिलकर दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बनते हैं. ऐसे में कई लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, जबकि बहुत से लोग  नेचुरल तरीकों से कोलेस्ट्रॉल कम करना चाहते हैं.

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एक खास तरह की डाइट पैटर्न विकसित किया. जो कि पोर्टफोलियो डाइट है. यह कोई सामान्य डाइट नहीं, बल्कि ऐसे कोंबिनेशन ऑफ फूड्स है जो मिलकर आपके एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नेचुरल तरीके से कम करते हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि यह पोर्टफोलियो डाइट क्या है और यह कैसे काम करती है और क्यों डॉक्टर इसे दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानते हैं. 
 
पोर्टफोलियो डाइट क्या है?

पोर्टफोलियो डाइट एक पौधों पर आधारित यानी plant-based खाने की योजना है, जिसे टोरंटो विश्वविद्यालय के डॉ. डेविड जेनकिंस ने बनाया है. इसका उद्देश्य बिना दवाओं के सिर्फ रोजमर्रा के खाने से शरीर का खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम करना है. इस डाइट में चार ऐसे मुख्य फूड ग्रूप शामिल किए जाते हैं, जो अकेले-अकेले भी कोलेस्ट्रॉल घटाते हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ खाया जाए तो यह स्टैटिन जैसी दवाओं जितना असर दिखाते हैं. 

इस डाइट में कौन-कौन से 4 जरूरी फूड ग्रुप शामिल हैं?

1. प्लांट स्टेरोल्स – ये ऐसे पौधों के तत्व हैं जो आंतों में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित होने से रोकते हैं. ये स्टेरोल से भरपूर मार्जरीन, स्प्रेड, स्टेरोल युक्त दही पेय और संतरे का जूस 

2.  जेल टाइप फाइबर – यह फाइबर आंत में जेल जैसा बन जाता है और कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है. ओट्स, जौ, सेब, नाशपाती, बेरी, सेम, दालें, भिंडी और इसबगोल 

3. सोया प्रोटीन –यह लिवर को LDL हटाने वाले रिसेप्टर्स को ज्यादा एक्टिव करने में मदद करता है. टोफू, सोया दूध, एडामे, सोया वाले वेजी बर्गर

4.  मेवे – मेवों में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट HDL बढ़ाते हैं और LDL घटाते हैं. बादाम, अखरोट और पिस्ता. 

यह डाइट शरीर में कैसे काम करती है?

पोर्टफोलियो डाइट कई तरीकों से कोलेस्ट्रॉल कम करती है.  प्लांट स्टेरोल्स , कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को लगभग 50 प्रतिशत तक घटा सकते हैं. चिपचिपा फाइबर, कोलेस्ट्रॉल बांधकर शरीर से बाहर कर देता है.  सोया प्रोटीन, लिवर में LDL हटाने वाले रिसेप्टर्स को एक्टिव करता है. मेवे, HDL बढ़ाते हैं, LDL घटाते हैं. इन चारों का मिक्सचर शरीर पर नैचुरल दवा जैसा प्रभाव डालता है. 

क्यों डॉक्टर इसे दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानते हैं

अध्ययनों में पाया गया है कि इस डाइट से एलडीएल 13 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है. छह महीने तक डाइट का पालन करने वालों में 13.8 प्रतिशत LDL कमी दर्ज हुई, जो स्टैटिन दवाओं जैसी है. जिन लोगों ने इसे लंबे समय तक अपनाया, इसमें ट्राइग्लिसराइड कम हुए, सूजन घटी और ब्लड प्रेशर बेहतर हुआ. 30 साल तक 2 लाख लोगों पर किए गए अध्ययन में, जिनका पोर्टफोलियो डाइट स्कोर सबसे अच्छा था, उनमें दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा 14 प्रतिशत कम था. मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में यह डाइट हार्ट अटैक का खतरा 17 प्रतिशत कम करती पाई गई. 2025 के अध्ययन में 439 मरीजों पर पाया गया कि यह डाइट 10 साल तक कोलेस्ट्रॉल और हार्ट जोखिम को प्रभावी रूप से घटाती रही.

यह भी पढ़ें: संतरे से भी ज्यादा फायदेमंद हैं छिलके, जरूर जानें इसके सुपरहेल्दी फायदे

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

दिल की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं ये 7 फूड्स, WHO की यह चेतावनी दे रही अलर्ट

दिल की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं ये 7 फूड्स, WHO की यह चेतावनी दे रही अलर्ट


डीप फ्राइड फूड भी दिल की सेहत के लिए बहुत खतरनाक माने जाते हैं. डीप फ्राइड फूड जैसे पकोड़ा, समोसा और फ्राइड चिकन में ट्रांस फैट और बार-बार गर्म किया हुआ तेल होता है. यह एलडीएल बढ़ाते हैं, इन्फ्लेमेशन बढ़ाते हैं और सीधे प्लाक बनने में मदद करते हैं. इनको लगातार खाने पर धामनिया जल्दी ब्लॉक होने लगती है.

प्रोसेस्ड मीट को भी दिल की सेहत के लिए खतरनाक माना गया है. इसमें सॉसेज, बैकन और सलामी में सैचुरेटेड फैट, सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं. इन्हें रोजाना थोड़ी मात्रा में लेना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, धमनियों को सख्त करता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है.

प्रोसेस्ड मीट को भी दिल की सेहत के लिए खतरनाक माना गया है. इसमें सॉसेज, बैकन और सलामी में सैचुरेटेड फैट, सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं. इन्हें रोजाना थोड़ी मात्रा में लेना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, धमनियों को सख्त करता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है.

वहीं व्हाइट ब्रेड, पेस्ट्री, मिठाइयां और सुगरी ड्रिंक ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं और धमनियों के आसपास फैट जमा होने लगता है. लंबे समय में डायबिटीज का खतरा भी इससे बढ़ता है.

वहीं व्हाइट ब्रेड, पेस्ट्री, मिठाइयां और सुगरी ड्रिंक ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं और धमनियों के आसपास फैट जमा होने लगता है. लंबे समय में डायबिटीज का खतरा भी इससे बढ़ता है.

चिप्स, नमकीन, बिस्कुट और बेक्ड जंक फूड में हाइड्रोजेनेटेड ऑयल होता है. वहीं यह सभी चीजें भी एलडीएल बढ़ाती है और एचडीएल कम करती है, जिससे ब्लड वेसल्स जल्दी संकरी होने लगती है.

चिप्स, नमकीन, बिस्कुट और बेक्ड जंक फूड में हाइड्रोजेनेटेड ऑयल होता है. वहीं यह सभी चीजें भी एलडीएल बढ़ाती है और एचडीएल कम करती है, जिससे ब्लड वेसल्स जल्दी संकरी होने लगती है.

वहीं इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड सूप, अचार, चिप्स और रेस्टोरेंट फूड्स में सोडियम काफी ज्यादा मात्रा में होता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और आर्टरी वॉल्स को नुकसान होता है, जिससे प्लाक जमना तेज हो जाता है.

वहीं इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड सूप, अचार, चिप्स और रेस्टोरेंट फूड्स में सोडियम काफी ज्यादा मात्रा में होता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और आर्टरी वॉल्स को नुकसान होता है, जिससे प्लाक जमना तेज हो जाता है.

इनके अलावा मटन, बीफ और लैम्ब में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है. यह TMAO बढ़ता है जो प्लाक फॉर्मेशन से जुड़ा एक कंपाउंड है. एक्सपर्ट इसे सिर्फ कभी-कभी खाने की सलाह देते हैं.

इनके अलावा मटन, बीफ और लैम्ब में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है. यह TMAO बढ़ता है जो प्लाक फॉर्मेशन से जुड़ा एक कंपाउंड है. एक्सपर्ट इसे सिर्फ कभी-कभी खाने की सलाह देते हैं.

वहीं डाइट सोडा मेटाबॉलिज्म को खराब कर सकता है और क्रेविंग बढ़ा सकता है. एनर्जी ड्रिंक्स दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, जिससे समय के साथ दिल पर एक्स्ट्रा दबाव भी बढ़ता है.

वहीं डाइट सोडा मेटाबॉलिज्म को खराब कर सकता है और क्रेविंग बढ़ा सकता है. एनर्जी ड्रिंक्स दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, जिससे समय के साथ दिल पर एक्स्ट्रा दबाव भी बढ़ता है.

Published at : 07 Dec 2025 09:31 AM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी



Source link

सर्दियों में आपके बाल हो रहे रूखे-कमजोर तो आजमाए ये हॉट ऑयल हैक, बालों को जड़ों से करेंगे मजबूत

सर्दियों में आपके बाल हो रहे रूखे-कमजोर तो आजमाए ये हॉट ऑयल हैक, बालों को जड़ों से करेंगे मजबूत



सर्दियों में ठंडी हवा, कम नमी और हीटर की गर्मी बालों की नमी छीन लेती है जिससे बाल रूखे, बेजान और टूटने लगते हैं. ऐसे में गर्म तेल से बालों की मालिशसिर्फ एक आराम देने वाला पुराना घरेलू नुस्खा है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है. दरअसल सही तरीके से और नियमित रूप से किया गया हॉट ऑयल मसाज स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, बाल टूटने को कम करता है और बालों को जड़ों से मजबूत बनाता है.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp