ठंड में खाना खाने के बाद आपको भी होती है मीठे की क्रेविंग, ये चीजें करें ट्राई

ठंड में खाना खाने के बाद आपको भी होती है मीठे की क्रेविंग, ये चीजें करें ट्राई


Why Do We Crave Sugar In Winter: सर्दियों में दिन छोटे और तापमान कम होते ही शरीर का झुकाव अपने-आप ज्यादा एनर्जी देने वाले खाने की तरफ बढ़ने लगता है. इसमें मीठी चीजें भी शामिल हैं. दरअसल, ठंड के मौसम में शरीर अतिरिक्त एनर्जी की तलाश करता है, ताकि खुद को गर्म और संतुलित रख सके. यही वजह है कि खाना खाने के बाद भी मिठाई या कुछ मीठा खाने की तलब महसूस होने लगती है.

इस मौसमी बदलाव का असर सिर्फ भूख पर नहीं, बल्कि मूड पर भी पड़ता है. कुछ स्टडी में पाया गया है कि सर्दियों में कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजों की क्रेविंग का संबंध मौसमी उदासी या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से भी हो सकता है. हालांकि अच्छी बात यह है कि रोशनी, सही खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी जैसी आदतों से इन क्रेविंग्स को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

सर्दियों में मीठे की तलब क्यों बढ़ती है?

2022 में Food Quality and Preference जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, ठंडा मौसम, कम होती धूप और सर्दियों से जुड़ी मानसिक धारणाएं लोगों को हल्के खाने के बजाय ज्यादा कैलोरी वाले फूड की ओर आकर्षित करती हैं. आसान शब्दों में कहें तो जैसे-जैसे मौसम ठंडा और अंधेरा होता है, शरीर और दिमाग दोनों ज्यादा एनर्जी देने वाले खाने की मांग करने लगते हैं.

वहीं, मेंटल हेल्थ से जुड़े रिसर्च बताते हैं कि सर्दियों का असर हमारी भावनाओं पर भी पड़ता है. The American Journal of Psychiatry में प्रकाशित एक पुराने लेकिन जरूरी स्टडी में पाया गया कि सीजनल डिप्रेशन से जूझ रहे लोग सर्दियों में वसंत या गर्मियों की तुलना में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीज़ें खाते हैं. रिसर्चर के अनुसार, मीठे और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग सर्दियों में होने वाले डिप्रेशन के प्रमुख लक्षणों में से एक है.

मीठे की क्रेविंग को कैसे करें कंट्रोल?

अगर सर्दी आपको मीठे की तरफ खींच रही है, तो भी इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बेबस मान लें। इन आसान उपायों से आप क्रेविंग को संभाल सकते हैं:

धूप को दिनचर्या में शामिल करें
धूप में कुछ समय बिताना या लाइट थेरेपी लैम्प का इस्तेमाल मूड और बॉडी क्लॉक को बेहतर करता है, जिससे मीठे की तलब कम हो सकती है.

हेल्दी और गर्म खाना चुनें
सूप, स्टू, गर्म अनाज, सब्ज़ियां जैसे भरपेट और पौष्टिक विकल्प अपनाएं. ये आपको संतुष्टि देंगे और बार-बार मीठा खाने की इच्छा नहीं होगी.

एक्टिव रहें
हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या घर के अंदर की एक्सरसाइज ब्लड शुगर को बैलेंस रखती है और मूड भी बेहतर बनाती है.

मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें
सर्दियों में अकेलापन और तनाव बढ़ सकता है. दोस्तों से बातचीत, हॉबीज़ या क्रिएटिव एक्टिविटी इसमें मददगार हो सकती हैं.

पहले से तैयारी रखें
घर में हेल्दी विकल्प जैसे मेवे, गर्म चाय, फल या होल ग्रेन स्नैक्स रखें, ताकि मीठा ही एकमात्र विकल्प न बने.

इसे भी पढ़ें- Knuckle Cracking: बार-बार चटकाने से कमजोर हो जाती हैं उंगलियों की हड्डियां, कितनी सही है यह बात?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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केवल कसरत नहीं जीवन का आधार है योग, रामदेव बोले- प्रोसेस्ड शुगर और पाम ऑयल से बचें

केवल कसरत नहीं जीवन का आधार है योग, रामदेव बोले- प्रोसेस्ड शुगर और पाम ऑयल से बचें


आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां लोग बीमारियों के ‘त्वरित समाधान’ ढूंढ रहे हैं, वहीं योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बार फिर पारंपरिक योग और अनुशासन की ओर लौटने का आह्वान किया है. अपने दैनिक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान दर्शकों को संबोधित करते हुए, रामदेव ने जोर देकर कहा कि योग केवल शरीर को हिलाना-डुलाना नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी जीवनशैली है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाती है.

संतुलन ही है असली स्वास्थ्य रामदेव ने आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए बताया कि आधुनिक जीवनशैली की अधिकांश समस्याओं की जड़ शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन है. उन्होंने कहा कि ‘पावर योग’ और ‘एंटी-एजिंग योग’ जैसी पद्धतियां शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं. जब ये तीन तत्व संतुलित रहते हैं, तो शरीर पुरानी बीमारियों, थकान और लाइफस्टाइल विकारों से लड़ने में अधिक सक्षम होता है. उनके अनुसार, “योग जीवन की नींव है, जो हमें अनुशासन और आंतरिक स्थिरता प्रदान करता है.”

योग में ‘तीव्रता’ से ज्यादा मायने रखती है ‘निरंतरता’

दैनिक अभ्यास और खान-पान पर जोर सत्र के दौरान उन्होंने सूर्य नमस्कार और प्राणायाम जैसे सरल अभ्यासों का प्रदर्शन किया. उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह कही कि योग में ‘तीव्रता’ से ज्यादा ‘निरंतरता’ मायने रखती है. स्वास्थ्य केवल चटाई पर योग करने से नहीं, बल्कि रसोई के अनुशासन से भी आता है.

रामदेव ने खान-पान के प्रति सचेत रहने की सलाह देते हुए कहा कि हमें पैकेज्ड फूड के बजाय प्राकृतिक और घर के बने भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए. उन्होंने प्रोटीन के लिए मूंगफली, दालें और दूध जैसे सुलभ विकल्पों का सुझाव दिया. साथ ही, उन्होंने चीनी के स्थान पर शहद का उपयोग करने और खाना पकाने में पाम ऑयल से बचने की सख्त हिदायत दी.

अनुशासित जीवनशैली को सही पोषण देना भी जरूरी

वेलनेस और सप्लीमेंट्स की भूमिका कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बताया कि एक अनुशासित जीवनशैली को सहारा देने के लिए सही पोषण भी जरूरी है. उन्होंने पतंजलि के वेलनेस और पोषण उत्पादों का जिक्र करते हुए कहा कि जब इन उत्पादों को नियमित योग और संतुलित आहार के साथ जोड़ा जाता है, तो बेहतर और लंबे समय तक टिकने वाले स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं.

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बाबा रामदेव ने दिए सेहत के सूत्र, बोले- ‘ब्रह्मांड का सबसे बड़ा चमत्कार है मानव शरीर’

बाबा रामदेव ने दिए सेहत के सूत्र, बोले- ‘ब्रह्मांड का सबसे बड़ा चमत्कार है मानव शरीर’


हाल ही में एक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान योग गुरु स्वामी रामदेव ने मानव शरीर की अद्भुत संरचना और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि मानव शरीर ब्रह्मांड के सबसे बड़े अजूबों में से एक है. रामदेव के अनुसार, शरीर के भीतर अनगिनत जटिल प्रक्रियाएं हर पल चलती रहती हैं, लेकिन अक्सर हम उन पर तब तक ध्यान नहीं देते जब तक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने नहीं आती.

प्राकृतिक खान-पान और अच्छी नींद

रामदेव ने स्वस्थ रहने के लिए दैनिक आदतों और खान-पान में सुधार पर जोर दिया. उन्होंने एक दिलचस्प जानकारी साझा करते हुए बताया कि रसोई में आसानी से उपलब्ध ‘प्याज’ प्राकृतिक रूप से अच्छी नींद लाने में सहायक हो सकता है. उनके अनुसार, कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को शांत करने में मदद करते हैं, जिससे बिना किसी बाहरी दवाओं के बेहतर आराम और गहरी नींद मिल सकती है.

लिवर और किडनी की भूमिका

शरीर के अंगों की कार्यप्रणाली को समझाते हुए उन्होंने लिवर और किडनी को ‘स्वास्थ्य का आधार’ बताया. रामदेव ने कहा कि लिवर न केवल पाचन में मदद करता है, बल्कि शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने (Detoxification) और मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखने में भी महत्वपूर्ण है. इसी तरह, किडनी खून को साफ करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने का आवश्यक कार्य करती है. इन अंगों का स्वस्थ होना ही शरीर की ऊर्जा और संतुलन के लिए अनिवार्य है.

योग और जड़ी-बूटियों का महत्व

रामदेव ने कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायामों के लाभों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि इन श्वसन क्रियाओं से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और मानसिक स्पष्टता आती है. साथ ही, उन्होंने ‘अश्वगंधा’ जैसी पारंपरिक जड़ी-बूटियों के महत्व को रेखांकित किया, जो तनाव कम करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने में कारगर हैं.

अनुशासित जीवनशैली ही कुंजी है

सत्र के अंत में उन्होंने लोगों को एक अनुशासित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि योग में निरंतरता, जागरूक खान-पान और पतंजलि के आयुर्वेद उत्पादों के सही उपयोग से व्यक्ति दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है. उनके अनुसार, प्रकृति के करीब रहना और अपनी शारीरिक क्षमताओं का सम्मान करना ही स्वस्थ जीवन का असली मार्ग है.

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सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रामदेव बाबा ने दिए टिप्स; च्यवनप्राश को बताया सुरक्षा कवच

सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रामदेव बाबा ने दिए टिप्स; च्यवनप्राश को बताया सुरक्षा कवच


कड़ाके की ठंड और बदलते मौसम के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी ‘इम्यूनिटी’ को मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. हाल ही में एक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान योग गुरु स्वामी रामदेव ने सर्दियों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और बीमारियों से लड़ने के लिए जरूरी सुझाव साझा किए.

इम्यूनिटी रातों-रात नहीं, निरंतरता से बनती है

रामदेव बाबा ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को समझाते हुए कहा कि इम्यूनिटी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रातों-रात हासिल किया जा सके. उन्होंने इसकी तुलना ‘कंपाउंड इंटरेस्ट’ (चक्रवृद्धि ब्याज) से की. उन्होंने बताया कि जिस तरह धीरे-धीरे जमा किया गया धन समय के साथ कई गुना बढ़ जाता है, उसी तरह जब हम शरीर को लंबे समय तक सही पोषण और अच्छी आदतें देते हैं तो उसके फायदे कई गुना बढ़कर मिलते हैं. यही अनुशासन हमें लंबी उम्र, बेहतर स्टैमिना और बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है.

पतंजलि च्यवनप्राश: 51 जड़ी-बूटियों का संगम

सत्र के दौरान उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि ‘च्यवनप्राश’ के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि पतंजलि बैलेंस सेंटर्स में अलग-अलग उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के हिसाब से कई तरह के च्यवनप्राश उपलब्ध हैं. एक विशेष फार्मूले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 51 जड़ी-बूटियों से निकले 5,000 से अधिक औषधीय यौगिक शामिल हैं. ये तत्व शरीर के प्राकृतिक रक्षा तंत्र को मजबूत करते हैं और सर्दियों के दौरान होने वाली थकान और संक्रमण से बचाते हैं.

शुगर के मरीजों के लिए खास विकल्प

अक्सर मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोग मीठा होने के कारण च्यवनप्राश के सेवन से बचते हैं. इस समस्या का समाधान बताते हुए रामदेव बाबा ने कहा कि अब शुगर-फ्री विकल्प भी मौजूद हैं. इससे मधुमेह रोगी भी बिना किसी चिंता के अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं और सर्दियों की बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी औषधि तभी असरदार होती है जब आपकी जीवनशैली सही हो. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे च्यवनप्राश जैसे पारंपरिक सप्लीमेंट्स के साथ-साथ:

  • प्रतिदिन योगाभ्यास करें.
  • अनुशासित जीवन जिएं.
  • खान-पान में सावधानी बरतें.

स्वामी रामदेव के अनुसार, पारंपरिक आयुर्वेद और आधुनिक अनुशासन का मेल ही हमें स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रख सकता है.

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बार-बार चटकाने से कमजोर हो जाती हैं उंगलियों की हड्डियां, कितनी सही है यह बात?

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Scientific Truth Behind Knuckle Cracking: कई लोगों का मानना है कि उंगलियां चटकाने से हाथों की पकड़ कमजोर हो जाती है. लेकिन साइंटफिक रिसर्च इस धारणा का समर्थन नहीं करते. स्टडी में सामने आया है कि इस आदत से न तो ग्रिप स्ट्रेंथ कम होती है और न ही आर्थराइटिस का कोई पुख्ता संबंध पाया गया हैय एक डॉक्टर ने तो 50 साल तक रोज एक हाथ की उंगलियां चटकाईं, फिर भी उन्हें किसी तरह की समस्या नहीं हुईय हालांकि, अगर उंगलियां चटकाने के बाद दर्द या सूजन हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ज्यादातर लोगों के लिए यह आदत सुरक्षित मानी जाती है.

उंगलियां चटकाने में एक अजीब-सी सुकून मिलता है, लेकिन इसके साथ अक्सर यह चेतावनी भी सुनने को मिलती है कि इससे हाथ कमजोर हो सकते हैं. इस आवाज के पीछे अनुमान और वर्षों से चली आ रही धारणाओं का मिक्सअप है, जो लोगों को सोचने पर मजबूर करता है क्या यह मामूली-सी आदत वाकई हाथों को नुकसान पहुंचा सकती है?

उंगलियाँ चटकाने पर आवाज क्यों आती है?

उंगलियां या जोड़ चटकाने पर जो चट-चट या दूसरी तरह की आवाज आती है, वह हड्डियों के टकराने से नहीं होती. एक्सपर्ट के मुताबिक, यह आवाज जोड़ों में मौजूद तरल साइनोवियल फ्लूइड में गैस के बुलबुले बनने और फूटने से आती हैय एक बार आवाज आने के बाद इन गैसों को दोबारा घुलने में समय लगता है, इसलिए तुरंत उसी जोड़ को फिर से चटकाया नहीं जा सकता.

रिसर्च क्या कहती है?

ग्रिप स्ट्रेंथ और कार्टिलेज एक चर्चित स्टडी में नियमित रूप से उंगलियां चटकाने वालों और न चटकाने वालों की पकड़ की ताकत और कार्टिलेज की मोटाई की तुलना की गई. नतीजा यह रहा कि रोज कई बार उंगलियां चटकाने वालों की ग्रिप स्ट्रेंथ दूसरों से कम नहीं थी.

लंबे समय में जोड़ों पर असर

लंबे समय के अध्ययनों में भी यह साबित नहीं हो पाया कि उंगलियां चटकाने से गठिया होता है। शोध बताते हैं कि अगर चटकाने में दर्द नहीं हो रहा, तो इससे लिगामेंट्स या जोड़ों को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचता.

कब सावधान होने की जरूरत है?

हालांकि यह आदत आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन अगर उंगलियां चटकाने के बाद दर्द या सूजन हो, जोड़ों में कमजोरी महसूस हो या फिर किसी असामान्य जोड़ में चटकाने पर तकलीफ हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. इसी के साथ आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि अब तक के साइंटफिक सबूत यही बताते हैं कि बिना दर्द के नियमित रूप से उंगलियां चटकाने से न तो हाथ कमजोर होते हैं और न ही जोड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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शकरकंद या आलू… गट हेल्थ के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन?

शकरकंद या आलू… गट हेल्थ के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन?


भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद दोनों को ही जरूरी माना जाता है. एक तरफ आलू है, जिसे सब्जियों का राजा कहा जाता है तो वहीं  दूसरी तरफ शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से जाना जाता है. दोनों ही जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां है और अंग्रेजी में इनके नाम भी मिलते-जुलते हैं. लेकिन जब बात गट हेल्थ की आती है, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि इनमें से कौन-सा ज्यादा फायदेमंद है. ऐसे में चलिए आज आपको बताते हैं कि शकरकंद या आलू गट हेल्थ के लिए बेस्ट ऑप्शन क्या है

आलू और गट हेल्थ का कनेक्शन

गट हेल्थ सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं है. अच्छी आंतों की सेहत का सीधा कनेक्शन इम्यूनिटी, ब्लड शुगर कंट्रोल, वजन और यहां तक कि मूड से भी जुड़ा होता है. ऐसे में आ डाइट में क्या खाते हैं यह बहुत जरूरी माना जाता है. आलू को सिर्फ कार्बोहाइड्रेट से भरपूर माना जाता है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो आंतों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. दरअसल आलू में पाया जाने वाला रेसिस्टेंट स्टार्च छोटी आंत में पचता नहीं है, बल्कि सीधे बड़ी आंत तक पहुंचता है. यहां यह गुड बैक्टीरिया के लिए फूड की तरह काम करता है और गट माइक्रोबायोम को मजबूत करता है. इसके अलावा आलू में फाइबर, विटामिन C और B6 भी होता है, जो पाचन के प्रोसेस को सपोर्ट करता है. हालांकि अगर किसी को गैस, एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या रहती है, तो ज्यादा मात्रा में आलू खतरनाक हो सकता है.

शकरकंद को माना जाता है गट फ्रेंडली

शकरकंद को गट हेल्थ के लिए आलू से ज्यादा बेहतर ऑप्शन माना जाता है और इसकी वजह इसमें मौजूद फाइबर और प्रीबायोटिक गुण है. शकरकंद के छिलके में भरपूर फाइबर होता है, जो आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है. यही बैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसके अलावा शकरकंद में भी रेसिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है, जो ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने देता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है. 

किसका फाइबर ज्यादा असरदार?

शकरकंद में आलू की तुलना में लगभग दोगुना फाइबर पाया जाता है. यह फाइबर पाचन को दुरुस्त रखने, सूजन कम करने और आंतों की एक्टिविटी को नियमित बनाने में मदद करता है. वहीं आलू में फाइबर की मात्रा कम होती है, लेकिन उसका रेसिस्टेंट स्टार्च गट बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद रहता है. आलू हो या शकरकंद दोनों को ही डीप फ्राई करने या ज्यादा नमक और मसालों के साथ खाने से इनके गुण कम हो जाते हैं. ऐसे में इन्हें उबालकर, भूनकर या सब्जी के रूप में खाना ही गट हेल्थ के लिए सही माना जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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