एंटी निकोटिन का काम करती है किचेन में रखी ये चीज, रोज जमकर सिगरेट पीने वाले जान लें ये बात

एंटी निकोटिन का काम करती है किचेन में रखी ये चीज, रोज जमकर सिगरेट पीने वाले जान लें ये बात



आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, गुस्सा, अकेलापन या सिर्फ आदत, कई वजहों से लोग सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं. जबकि सिगरेट में मौजूद निकोटिन नाम का केमिकल कुछ पल के लिए दिमाग को आराम महसूस कराता है. यही सुकून धीरे-धीरे लत में बदल जाता है और फिर वही लत आगे चलकर फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर, दिल की बीमारी, सांस की तकलीफ जैसी कई गंभीर समस्याएं पैदा कर देती है.लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर सही तरीका अपनाया जाए, तो यह लत पूरी तरह छोड़ी जा सकती है और आपकी रसोई में ही एक ऐसी चीज मौजूद है, जो एंटी-निकोटिन की तरह काम करती है और सिगरेट की तलब को तेजी से कम करती है. तो आइए जानते हैं कि किचन में रखी  कौन सी चीज एंटी निकोटिन का काम करती है. 

किचन में रखी कौन सी चीज एंटी निकोटिन का काम करती है

जब भी सिगरेट की इच्छा हो, बस एक चुटकी सौंफ और थोड़ा-सा मिश्री मुंह में रख लें. यह दो तरह से मदद करता है. इससे मुंह का टेस्ट बदल जाता है, जिससे तलब शांत होती है. दिमाग को हल्का-सा मीठा और ताजगी का एहसास मिलता है, जो निकोटिन जैसी बेचैनी को कम करता है. यह तरीका बेहद आसान है और किसी भी समय किया जा सकता है. कई लोगों ने बताया है कि जब भी उन्हें सिगरेट की इच्छा होती है, वे सौंफ-मिश्री चबाते हैं, जिससे मन शांत होता है और तलब कम होती है. 

धीरे-धीरे सिगरेट की आदत छोड़ने के आसान उपाय

अगर तलब बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह से निकोटिन गम, पैच या लॉजेंस का यूज किया जा सकता है. ये धीरे-धीरे शरीर में निकोटिन की मात्रा कम करते हैं और लत से बाहर निकलने में काफी मददगार होते हैं. अकेले लत छोड़ने से कई बार मन टूट जाता है. लेकिन जब कोई अपना आपके साथ खड़ा हो आपका मोटिवेशन बढ़ता है, आप मजबूत महसूस करते हैं और कोशिशें सफल होने लगती हैं इसलिए  सिगरेट की आदत छोड़ते समय किसी अच्छे दोस्त या परिवार का सपोर्ट लें. शराब पीने पर ज्यादातर लोगों को सिगरेट की इच्छा अचानक बढ़ जाती है. इसलिए शुरुआत में शराब, देर रात की पार्टी, या सिगरेट पीने वालों की संगत से थोड़ा दूर रहें.इससे वापस लत लगने का खतरा कम हो जाता है. जब सिगरेट पीने का मन करे, तो मुंह सौंफ और थोड़ी-सी मिश्री, हार्ड कैंडी, बादाम या अखरोट, शुगर-फ्री च्युइंग गम रख लें. 

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क्या आप भी भूलने लगे हैं बातें? इन 8 आदतों से पाएं तेज दिमाग और मजबूत याददाश्त

क्या आप भी भूलने लगे हैं बातें? इन 8 आदतों से पाएं तेज दिमाग और मजबूत याददाश्त


अगर आप दिमाग और याददाश्त को मजबूत रखना चाहते हैं तो इसके लिए कोशिश करें कि आप नई स्किल्स सीखें. नई स्किल में जैसे नई भाषा, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट, डांस फॉर्म या कोडिंग सीखने से दिमाग में नए नेचुरल कनेक्शन बनते हैं जो लॉन्ग टर्म मेमोरी और सोने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं.

इसके अलावा आप रोजाना एक पजल सर्किट भी कर सकते हैं. क्रॉसवर्ड, सुडोकू, वर्ड गेम और लॉजिक पजल को रोज 10 से 15 मिनट दें. इससे दिमाग हल्के दबाव में सोने और जानकारी को याद रखने की ट्रेनिंग करता है.

इसके अलावा आप रोजाना एक पजल सर्किट भी कर सकते हैं. क्रॉसवर्ड, सुडोकू, वर्ड गेम और लॉजिक पजल को रोज 10 से 15 मिनट दें. इससे दिमाग हल्के दबाव में सोने और जानकारी को याद रखने की ट्रेनिंग करता है.

वहीं कोशिश करें कि आप रोजाना थोड़ी देर तेज चले. तेज चलना या साइकलिंग जैसे एरोबिक्स एक्सरसाइज दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ता है और हिप्पोकेंपस को सपोर्ट देती है जो याददाश्त बढ़ाने और संभालने में जरूरी हिस्सा माना जाता है.

वहीं कोशिश करें कि आप रोजाना थोड़ी देर तेज चले. तेज चलना या साइकलिंग जैसे एरोबिक्स एक्सरसाइज दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ता है और हिप्पोकेंपस को सपोर्ट देती है जो याददाश्त बढ़ाने और संभालने में जरूरी हिस्सा माना जाता है.

आप रोजाना लिस्ट रिकॉल की प्रैक्टिस भी कर सकते हैं. इसके लिए आप शॉपिंग लिस्ट या टुडू लिस्ट को याद करें, फिर छुपा कर जितना याद हो उतना रिकॉल करें. इससे वर्किंग मेमोरी और ध्यान दोनों मजबूत होते हैं.

आप रोजाना लिस्ट रिकॉल की प्रैक्टिस भी कर सकते हैं. इसके लिए आप शॉपिंग लिस्ट या टुडू लिस्ट को याद करें, फिर छुपा कर जितना याद हो उतना रिकॉल करें. इससे वर्किंग मेमोरी और ध्यान दोनों मजबूत होते हैं.

याददाश्त को तेज करने के लिए नाम और चेहरे पहचानने की ट्रेनिंग भी कर सकते हैं. इसके लिए आप किसी से मिलते समय उनका नाम दोहराए, एक सवाल पूछें और चेहरे की किसी खास बात से नाम को जोड़कर उस व्यक्ति की दिमाग में एक इमेज बनाएं, जिससे याद रखना आसान हो जाता है.

याददाश्त को तेज करने के लिए नाम और चेहरे पहचानने की ट्रेनिंग भी कर सकते हैं. इसके लिए आप किसी से मिलते समय उनका नाम दोहराए, एक सवाल पूछें और चेहरे की किसी खास बात से नाम को जोड़कर उस व्यक्ति की दिमाग में एक इमेज बनाएं, जिससे याद रखना आसान हो जाता है.

वहीं दिमाग तेज रखने के लिए आप नॉन डोमिनेंट हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं. उलटे हाथ से ब्रश करना, चाय हिलाना या माउस चलाना दिमाग के कम इस्तेमाल होने वाले हिस्सों को एक्टिव करता है और कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ता है.

वहीं दिमाग तेज रखने के लिए आप नॉन डोमिनेंट हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं. उलटे हाथ से ब्रश करना, चाय हिलाना या माउस चलाना दिमाग के कम इस्तेमाल होने वाले हिस्सों को एक्टिव करता है और कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ता है.

दिमाग को तेज करने के लिए आप छोटे, फोकस्ड मेडिटेशन भी कर सकते हैं. इसके लिए आप 5 से 10 मिनट की सिंपल ब्रीदिंग मेडिटेशन करें. यह मेडिटेशन ध्यान बढाती है और दिमाग को कल्टर फ्री करती है, जिससे नहीं यादें बनाना और उन्हें याद रखना आसान होता है.

दिमाग को तेज करने के लिए आप छोटे, फोकस्ड मेडिटेशन भी कर सकते हैं. इसके लिए आप 5 से 10 मिनट की सिंपल ब्रीदिंग मेडिटेशन करें. यह मेडिटेशन ध्यान बढाती है और दिमाग को कल्टर फ्री करती है, जिससे नहीं यादें बनाना और उन्हें याद रखना आसान होता है.

याददाश्त मजबूत रखने के लिए आप जो सीखते हैं उसे किसी को समझाने या सीखाने की कोशिश करें. दरअसल किसी किताब, पॉडकास्ट या लेक्चर को किसी और को समझाने से दिमाग की जानकारी व्यवस्थित होती है और मेमोरी ट्रेस और मजबूत होती है.

याददाश्त मजबूत रखने के लिए आप जो सीखते हैं उसे किसी को समझाने या सीखाने की कोशिश करें. दरअसल किसी किताब, पॉडकास्ट या लेक्चर को किसी और को समझाने से दिमाग की जानकारी व्यवस्थित होती है और मेमोरी ट्रेस और मजबूत होती है.

Published at : 07 Dec 2025 07:14 AM (IST)

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पित्त की पथरी अब बच्चों में भी आम, क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

पित्त की पथरी अब बच्चों में भी आम, क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?



अब तक पित्त की पथरी यानी Gallstones को एक ऐसी बीमारी माना जाता था जो आमतौर पर बड़ो या बुजुर्गों को होती है. लेकिन हाल के सालों में डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने एक चौंकाने वाली बात बताई है कि अब यह बीमारी छोटे बच्चों, यहां तक कि 5-6 साल के बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है.  देशभर के हॉस्पिटल और क्लीनिकों में यह देखा जा रहा है कि पित्त की पथरी के मामलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है. पहले यह स्थिति बहुत ही खराब मानी जाती थी, लेकिन अब यह एक नई चिंता का विषय बन गई है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पित्त की पथरी क्या होती है, यह बच्चों में क्यों हो रही है, इसके लक्षण क्या हैं, और कैसे इससे बचा जा सकता है. 

क्या होती है पित्त की पथरी?
पित्त की पथरी यानी Gallstones, ये छोटे-छोटे ठोस टुकड़े होते हैं जो शरीर के अंदर गॉलब्लेडर में बनते हैं. गॉलब्लेडर एक छोटा थैला होता है जो पेट के अंदर होता है और पाचन में मदद करता है, पथरी दो चीजों से बन सकती है, पहला कोलेस्ट्रॉल और दूसरा बिलीरुबिन, अगर पथरी बड़ी हो जाए या पित्त के बहाव को रोक दे, तो पेट में तेज दर्द, उल्टी, मतली और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. 

बच्चों में पित्त की पथरी के बढ़ते कारण
आजकल बच्चे बाहर खेलने के जगह मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम में ज्यादा समय बिताते हैं. इससे उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है, जिससे मोटापा बढ़ रहा है और पित्त की पथरी की संभावना भी. इसके अलावा राब खानपान की आदतें, जैसे जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, तले-भुने और प्रोसेस्ड खाने का बढ़ता चलन बच्चों की सेहत बिगाड़ रहा है. वहीं बच्चों में पित्त की पथरी के बढ़ते कारण की बड़ी वजह यह भी है कि अगर परिवार में किसी को पहले से पित्त की पथरी रही हो, तो बच्चों में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है. थैलेसीमिया जैसी बल्ड की बीमारियों वाले बच्चों में भी पित्त की पथरी की संभावना होती है. 

पित्त की पथरी के लक्षण क्या हैं
बच्चों में पित्त की पथरी के लक्षण कई बार साफ दिखाई नहीं देते हैं. यही वजह है कि पेरेंट्स इसे मामूली पेट दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में इसके कुछ आम लक्षण बार-बार पेट दर्द, खासकर ऊपरी हिस्से में, उल्टी या मतली महसूस होना हो, खाने से मन हटना, गैस या पेट फूलना और कभी-कभी तेज बुखार या पीलिया हो सकते हैं. अगर बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करता है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर को दिखाना चाहिए. 

बचाव कैसे करें?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह बीमारी बचपन में रोकी जा सकती है, अगर सही लाइफस्टाइल और खानपान अपनाया जाए. बच्चों को हरी सब्जियां, फल, दालें और फाइबर वाला खाना देना चाहिए. जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट और बाहर का खाना कम से कम देना चाहिए. बच्चों को खेलने-कूदने के लिए प्रेरित करें, टीवी, मोबाइल, टैबलेट पर समय सीमित करें, अगर परिवार में किसी को पथरी या मेटाबोलिक बीमारी रही हो, तो बच्चों की समय-समय पर जांच करवाते रहें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सिगरेट पीने वालों को पीना चाहिए इस चीज का जूस, कभी नहीं खराब होंगे फेफड़े

सिगरेट पीने वालों को पीना चाहिए इस चीज का जूस, कभी नहीं खराब होंगे फेफड़े



सिगरेट पीने से हमरे स्वास्थ्य पर बहुत ही नकारात्मक असर पड़ता है, जिसमें सबसे खतरनाक है कैंसर जैसी बीमारी, जो धूम्रपान की वजह से होती है. धूम्रपान करने से शरीर में और भी खतरनाक बीमारियां होती है जैसे सांस लेने में दिक्कत, बेजान त्वचा, कमजोर इम्यून सिस्टम और सबसे अधिक फेफड़ों का खराब होना सबसे आम बीमारी है. स्मोकिंग या धूम्रपान करने से सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर ही पड़ता है. इसी से मानव शरीर श्वास लेता है और अगर इसमें खराबी या बीमारी हो जाये तो जीवन बहुत कष्टकारक हो जाता है.

स्मोकिंग छोड़ने के बाद सबसे बड़ा सवाल: फेफड़े कैसे साफ हों

अगर आप भी स्मोकिंग या धूम्रपान करते थे और अब स्मोकिंग छोड़ दी है या छोड़ने का प्रयास कर रहे है तो आपके सामने या मन में एक सवाल उठता होगा की अब में फेफड़ों को कैसे स्वस्थ करूं? तो आपके लिए सबसे जरूरी घरेलू उपचार है गन्ने का जूस, जो शरीर को अंदर से साफ करने, ऊर्जा बढ़ाने और फेफड़ों की कार्यक्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है. इनके भीतर मौजूद एंटीऑक्सिडेंट टॉक्सिन को कम करने में सहायक होते हैं.

गन्ने के रस का फेफड़ों पर असर

अगर आपने लंबे समय तक स्मोकिंग की है तो गन्ने का जूस आपके फेफड़ों के लिए बहुत जरूरी है. यह पूरी तरह से तो आपके फेफड़ों को लाभ नहीं पहुंच पायेगा लेकिन फेफड़ों को साफ करने में मदद जरूर करेगा. धूम्रपान से होने वाले गंभीर नुकसान को पूरी तरह खत्म करने के लिए धूम्रपान छोड़ना ही एकमात्र प्रभावी उपाय है और गन्ने का रस जैसे घरेलू उपाय केवल सहायक हो सकते हैं. डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी कदम है.

फेफड़ों से गंदगी और टॉक्सिन निकालने में सहयोग

गन्ने का रस फेफड़ों में जमा गंदगी या टॉक्सिन्स को फेफड़ों से बाहर निकलने में मदद करता है. हालांकि ये पूरी तरह से फेफड़े साफ नहीं करता, बस सहयोग देता है जिससे फेफड़े काफी हद तक साफ हो सकते हैं. अगर आपको पूरी तरह से फेफड़े स्वस्थ रखने हैं तो जरूरी है स्मोकिंग की लत को जड़ से खत्म करना.

हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद

गन्ने का रस हाई हाइड्रेशन वाला पेय है. धूम्रपान करने वालों में मुँह, गला और श्वसन मार्ग अक्सर सूखे रहते हैं. गन्ने का रस नमी बनाए रखने में मदद करता है जिससे सांस लेते समय जलन कम महसूस हो सकती है.

फेफड़ों की सूजन कम करने में सहायक

धूम्रपान या ज्यादा स्मोकिंग करने से व्यक्ति के फेफड़ों की नली सूज जाती है जो बहुत कष्टकारक है. गन्ने के रस में मौजूद प्राकृतिक एंटीइंफ्लेमेटरी तत्व फेफड़ों की नली की सूजन को कम करने में सहयोग करता है.

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना

ज्यादा स्मोकिंग करने की वजह से स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति का इम्यून सिस्टम स्वाभाविक रूप से कमजोर होता है जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता शरीर में नहीं रहती. गन्ने के जूस में जरूरी मात्रा में विटामिन, आयरन और मैग्नीशियम होता है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है.

म्यूकस पतला करने और बलगम कम करने में मदद

स्मोकिंग की वजह से शरीर में म्यूकस जमा जाता है जो गले में बलगम बनाता है जिससे खाँसी और सांस लेने की समस्या बढ़ती है. गन्ने का रस शरीर में हाइड्रेशन बढ़ाकर म्यूकस को पतला करता है.

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देश की लगभग आधी आबादी में कम होता जा रहा ये विटामिन, शाकाहारियों को ज्यादा खतरा

देश की लगभग आधी आबादी में कम होता जा रहा ये विटामिन, शाकाहारियों को ज्यादा खतरा



भारत की एक बहुत बड़ी आबादी में विटामिन B12 की कमी है जो हमारे देश के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के शाकाहारी लोगों में विटामिन B12 की कमी मुख्य तौर पर है. अगर शरीर में विटामिन B12 की कमी हो जाए तो स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव देखने को मिलते हैं, जिसमें शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और नसों पर भी सीधा असर पड़ता है.

खास बात यह है कि शाकाहारियों में यह खतरा और ज्यादा है क्योंकि B12 प्राकृतिक रूप से पशु आधारित फूड प्रोडक्ट्स में मिलता है. सर्वे के अनुसार भारत के करीब 47% लोगों में B12 की कमी है जो चिंता का विषय है.

इंस्टाग्राम वीडियो ने उठाया बड़ा सवाल

हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो देखने को मिली जिसका टाइटल है “शुद्ध शाकाहारी लोगों में क्यों होती है विटामिन B12 की कमी!” इस वीडियो में डॉ प्रियंका सहरावत ने इस मुद्दे को उठाया है जिसे जानना हमारी हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है.

शाकाहारियों में B12 की कमी क्यों होती है

इस इंस्टाग्राम वीडियो में डॉ प्रियंका सहरावत जो दिल्ली के एम्स अस्पताल के MD मेडिसिन और न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की DM, न्यूरोलॉजिस्ट और जनरल फिजिशियन हैं उन्होंने समझाया कि कैसे शाकाहारी लोगों में विटामिन B12 की कमी होती है. क्योंकि पौधों को विटामिन B12 की जरूरत नहीं होती इसलिए वे इसे बना नहीं पाते. यही कारण है कि शाकाहारी आहार में B12 स्वाभाविक रूप से नहीं मिलता. लेकिन हमारे शरीर को नसों के कामकाज, खून बनाने और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन B12 की जरूरी मात्रा चाहिए होती है. वीडियो में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रियंका सहरावत ने बताया है कि शुद्ध शाकाहारी लोगों में विटामिन B12 की कमी क्यों होती है और इसके क्या कारण हैं और इसकी कमी से स्वास्थ्य पर कैसा असर पड़ता है.

विटामिन B12 की कमी से शरीर पर क्या असर होता है

विटामिन B12 की वजह से ही हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) बनती हैं जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है और रक्त की मात्रा कम या कमजोर हो सकती है. Vitamin B12 के बिना रक्त की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शरीर को ऊर्जा व स्वस्थ जीवन बनाए रखने में दिक्कत होती है.

B12 नसों और दिमाग के लिए क्यों जरूरी है

Vitamin B12 वास्तव में हमारे शरीर की कोशिकाओं के लिए जरूरी है. यह न सिर्फ लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में बल्कि नई कोशिकाओं के भीतर DNA बनाने में भी मदद करता है. Vitamin B12 हमारी नसों के सुरक्षात्मक कवर (मायलिन) को बनाए रखने में मदद करता है इसलिए इसकी कमी से नसों, याददाश्त और मूड पर सीधा असर पड़ सकता है.

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