क्या होती है वैजिनोप्लास्टी, जिसे कराने जा रहीं अनाया बांगर?

क्या होती है वैजिनोप्लास्टी, जिसे कराने जा रहीं अनाया बांगर?


पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की बेटी अनाया बांगर एक बार फिर चर्चा में हैं. दरअसल, अनाया बांगर ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में बताया कि वह मार्च में वैजिनोप्लास्टी सर्जरी करवाने जा रही है. उनकी यह सर्जरी थाईलैंड के बैंकॉक में होगी. इससे पहले साल 2024 में वह हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले चुकी है. अनाया बांगर के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर वैजिनोप्लास्टी को लेकर लोगों के बीच जिज्ञासा बढ़ गई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि वैजिनोप्लास्टी क्या होती है जिसे अनाया बांगर कराने जा रही है. 

क्या होती है वैजिनोप्लास्टी?

वैजिनोप्लास्टी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें ऑपरेशन के जरिए वजाइना बनाया जाता है. यह प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का हिस्सा मानी जाती है. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ महिलाओं में वजाइना जन्म से पूरी तरह विकसित नहीं होता है, ऐसे मामलों में वजाइना की संरचना को ठीक करने के लिए यह सर्जरी की जाती है. इसके अलावा जेंडर कंफर्मेशन सर्जरी के तहत ट्रांसजेंडर महिलाएं भी वैजिनोप्लास्टी करवाती है, ताकि शरीर की बनावट उनकी जेंडर पहचान के अनुरूप हो सके. 

किन स्थितियों में पड़ती है जरूरत?

यह सर्जरी सिर्फ जेंडर ट्रांजिशन का हिस्सा नहीं है. कुछ जन्मजात समस्याओं, हार्मोनल कारणों या मेडिकल कंडीशन की वजह से भी वजाइना का विकास प्रभावित हो सकता है. कुछ प्रकार के कैंसर या अन्य सर्जरी के बाद वजाइना की ओपनिंग पर असर पड़ने की कंडीशन में भी डॉक्टर वैजिनोप्लास्टी की सलाह देते हैं. इसका उद्देश्य शरीर की संरचना को सुधारना और नॉर्मल शारीरिक कार्यों को सुचारू बनाना होता है. 

कैसे की जाती है यह सर्जरी?

वैजिनोप्लास्टी एक समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसे एक्सपीरियंस प्लास्टिक सर्जन की ओर से किया जाता है. इसके ऑपरेशन के दौरान शरीर के प्राइवेट पार्ट की स्किन या अन्य टिशु की मदद से वजाइना का निर्माण किया जाता है. वहीं सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है, दवाइयां दी जाती है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्पेशल देखभाल करनी होती है. वहीं वैजिनोप्लास्टी सर्जरी के बाद पूरी तरह रिकवर होने में आमतौर पर कुछ हफ्तों का समय लगता है. 

कितना आता है खर्च? 

भारत में वैजिनोप्लास्टी का खर्चा आमतौर पर 3 लाख से 10 लाख रुपये के बीच बताया जाता है.  हालांकि यह रकम सर्जन के एक्सपीरियंस, केस कितना गंभीर हैं और हॉस्पिटल या शहर कौन सा है इस पर भी निर्भर करता है. वहीं भारत के मुकाबल इस सर्जरी के लिए दूसरे देशों में खर्च ज्यादा आ सकता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद बनने लगता है ब्रेस्ट मिल्क या नहीं, एक्सपर्ट से जानें सच?

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20 से 30 की उम्र में ही क्यों घेर रहा बीपी, किन दिक्कतों से हो रही यह बीमारी?

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Why Is High Blood Pressure Increasing In Young Adults: हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है. आजकल स्कूल जाने वाले किशोरों से लेकर 20  से 30 की उम्र के प्रोफेशनल्स तक में हाइपरटेंशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि यह एक “साइलेंट” समस्या है, जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. पहले लोग 40 की उम्र के बाद बीपी को लेकर सजग होते थे, लेकिन अब डॉक्टरों के पास कम उम्र के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है. 

क्या है कारण?

Maxhealthcare की रिपोर्ट के अनुसार,  युवा वर्ग में बढ़ते हाई ब्लड प्रेशर के पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है. तेज रफ्तार रूटीन, लंबे वर्किंग ऑवर, अनियमित नींद, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी हार्ट की सेहत पर सीधा असर डालती है, लगातार तनाव और चिंता भी बड़ी वजह बन रहे हैं. जब शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं तो ब्लड वेसल्स संकरी हो जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. मोटापा भी एक अहम कारण है, क्योंकि बढ़ा हुआ वजन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है. इसके अलावा धूम्रपान और शराब का सेवन कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर को असंतुलित कर सकता है. जिन लोगों के परिवार में पहले से हाई बीपी की समस्या रही है, उनमें जोखिम और अधिक होता है.

क्या होते हैं लक्षण?

हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि ज्यादातर मामलों में शुरुआती संकेत नजर नहीं आते. फिर भी कुछ लोगों को सुबह के समय सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, थकान, घबराहट या कभी-कभी नाक से खून आने जैसी दिक्कत हो सकती है. अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी डैमेज, आंखों की रोशनी पर असर और यहां तक कि ब्रेन क्षमता में कमी का कारण बन सकता है.

कैसे इससे बचा जा सकता है?

अच्छी बात यह है कि कम उम्र में ही सावधानी बरतकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है. संतुलित आहार लें, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल हों. नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें.  हफ्ते में कम से कम पांच दिन 30 मिनट एक्सरसाइज करें. तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग या अपनी पसंद की गतिविधियां अपनाएं. रोज 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लें और धूम्रपान से दूरी बनाएं. 18 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार बीपी की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते उठाया गया छोटा कदम भविष्य की बड़ी बीमारियों से बचा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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देख नहीं सकते तो क्या? अब ‘सुनकर’ पहचानेंगे दुनिया, एम्स ने दिए खास स्मार्ट ग्लासेस

देख नहीं सकते तो क्या? अब ‘सुनकर’ पहचानेंगे दुनिया, एम्स ने दिए खास स्मार्ट ग्लासेस


How AI Glasses Help Blind People In India: तकनीक के जरिये दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए एम्स ने सोमवार को 53 नेत्रहीन और गंभीर दृष्टिबाधित लोगों को एआई आधारित स्मार्ट विज़न ग्लासेस वितरित किए. ये खास चश्मे आसपास के दृश्य को ध्वनि में बदल देते हैं, जिससे यूज करने वाले अपने आसपास की दुनिया को “सुन” सकते हैं. यह डिवाइस प्रिंटेड टेक्स्ट पढ़कर सुनाने, वस्तुओं की पहचान करने, चेहरों को पहचानने, रास्ते में आने वाली बाधाओं को बताने और नेविगेशन में मदद करने में सक्षम है. चलिए आपको बताते हैं कि ये कैसे काम करता है और इससे न देखपाने वाले लोगों को क्या फायदा होगा. 

रोजमर्रा की जिंदगी को बनाता है आसान

रियल-टाइम ऑब्जेक्ट रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक से लैस यह चश्मा रोजमर्रा के काम आसान बनाता है, चाहे दवाइयों के लेबल पढ़ना हो, नोट पहचानना हो या दरवाजे का रास्ता ढूंढना. लाभार्थियों में अमर कॉलोनी स्थित एक ब्लाइंड स्कूल के 28 बच्चे और डॉ. आरपी सेंटर, एम्स से जुड़े 25 एडल्ट शामिल थे. इनमें लो-विजन और रिहैबिलिटेशन क्लिनिक के वे मरीज भी थे, जिन्हें अपूरणीय दृष्टिहानि है.

क्या कहना है एक्सपर्ट का?

करीब 35,000 रुपये कीमत वाला यह उपकरण ‘प्रोजेक्ट दृष्टि’ के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराया गया. यह पहल रोटरी, विजन एड और अन्य सहयोगियों के समर्थन से चलाई जा रही है. एम्स के कम्युनिटी ऑप्थैल्मोलॉजी विभाग से जुड़े डॉ. प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार, इस पहल को एक संरचित रिसर्च परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है. लाभार्थियों का एक वर्ष तक हर महीने फॉलो-अप किया जाएगा, ताकि उनकी लाइफ क्वालिटी में आए बदलाव का आकलन किया जा सके. स्टडी के नतीजों को दस्तावेजित कर प्रकाशित भी किया जाएगा.  जिससे आगे इसपर काम हो सके. 

भारत में एक बड़ी समस्या

भारत में लगभग एक करोड़ लोग अंधत्व या गंभीर अंधापन से जूझ रहे हैं. जहां कई मामलों का इलाज संभव है, वहीं कुछ मरीज एडवांस ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, एज-रिलेटेड मैक्युलर डीजेनेरेशन या ऑप्टिक नर्व डैमेज जैसी स्थितियों से पीड़ित होते हैं, जिनमें सर्जरी समाधान नहीं होती. ऐसे में पुनर्वास ही स्वतंत्र जीवन की राह बनता है. एसएचजी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा विकसित ये स्मार्ट ग्लासेस अब अपने पांचवें संस्करण में हैं. पहले के मॉडल अपेक्षाकृत भारी और बटन-आधारित थे, जबकि नया एडिशन  हल्का, सेंसर-आधारित और अधिक उन्नत एआई क्षमताओं से लैस है. एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसी एआई आधारित सहायक तकनीक क्लिनिकल इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि उसका मजबूत पूरक है, जो दृष्टिहीन लोगों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत देती है. 

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मसूड़ों से खून आना और नीले निशान पड़ना है खतरे की घंटी, शरीर में हो गई है इस खास विटामिन की कमी

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What Happens If You Have Vitamin K Deficiency: विटामिन K की कमी शरीर के लिए काफी दिक्कतें पैदा कर सकती है. नवजात शिशुओं में यह हेमोरेजिक डिजीज ऑफ द न्यूबॉर्न यानी विटामिन K डिफिशिएंसी ब्लीडिंग का कारण बन सकती है. इसके अलावा खून बहने की गड़बड़ी, हड्डियों की कमजोरी और पहले से मौजूद लिवर की बीमारी को और बिगाड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन K दरअसल फैट में घुलनशील कंपाउंड का एक समूह है, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी है. यह खून के थक्के बनने की प्रक्रिया में शामिल कई प्रोटीन को सक्रिय करता है, जिससे ज्यादा खून बहने से बचाव होता है और शरीर में संतुलन बना रहता है.

क्या होता है शरीर में विटामिन के का रोल

खून जमने के अलावा विटामिन K हड्डियों के स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभाता है. यह ऑस्टियोकैल्सिन नामक प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है, जो कैल्शियम को हड्डियों से जोड़कर उन्हें मजबूत बनाता है. इसकी कमी से हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है. इसके साथ ही विटामिन K हार्ट की सेहत से भी जुड़ा है, क्योंकि यह आर्टरीज में कैल्शियम जमने को कंट्रोल करने में मदद करता है. यदि शरीर में इसका लेवल कम हो जाए तो आर्टरीज में कैल्शियम जमा हो सकता है, जिससे हार्ट रोग का जोखिम बढ़ता है. कुल मिलाकर, पर्याप्त मात्रा में विटामिन K लेना खून बहने से बचाव, मजबूत हड्डियों और लंबे समय तक हार्ट की सेहत के लिए जरूरी है.

नए जन्मे बच्चों के लिए क्यों यह जरूरी

नवजात शिशुओं में एचडीएन इसलिए होता है क्योंकि उनके शरीर में विटामिन K का भंडार कम होता है और आंतों में वे बैक्टीरिया मौजूद नहीं होते जो विटामिन K बनाते हैं. गंभीर मामलों में ब्रेन के भीतर खून बहने जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है. एडल्ट में इसकी कमी से नाक से खून आना, मसूड़ों से खून बहना, हल्की चोट में ज्यादा खून निकलना या आसानी से नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

किन लोगों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत

यूएस की  National Library of Medicine के अनुसार, कुछ लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं. जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, लंबे समय तक एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं या भोजन से पर्याप्त विटामिन K नहीं लेते, उनमें इसकी कमी हो सकती है. विटामिन A या E की बहुत अधिक मात्रा भी इसके असर को कम कर सकती है. कुछ मेडिकल स्थितियां, जिनमें शरीर फैट को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता, भी विटामिन K की कमी का कारण बन सकती हैं. समय रहते पहचान और संतुलित लाइफस्टाइल के जरिए इस कमी से बचाव संभव है.

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पेट दर्द और थकान को न करें नजरअंदाज, युवाओं को अपना शिकार बना रहा है ये खतरनाक कैंस

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Why Is Colon Cancer Increasing in Young People: अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 50 वर्ष से कम उम्र के अमेरिकियों में कैंसर से होने वाली मौतों में 1990 के बाद से 44 प्रतिशत की कमी आई है. यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसका क्रेडिट बेहतर इलाज और धूम्रपान में कमी को दिया गया है. लेकिन इसी बीच एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया है कि कोलन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. जहां लंग्स, ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर से मौतों में गिरावट आई है, वहीं कम उम्र में होने वाला कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. 50 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में यह कैंसर से मौत का प्रमुख कारण बन चुका है और महिलाओं में दूसरा सबसे बड़ा कारण है.

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लगातार पेट दर्द उनमें से एक है.  कभी-कभार होने वाला पेट दर्द आम बात है, लेकिन अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे, खासकर एक ही जगह पर, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट मायो क्लिनिक के अनुसार, के अनुसार, शरीर में इसके कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. 

बिना वजह वजन कम होना

बिना वजह वजन कम होना भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है. अगर खानपान सामान्य है, फिर भी वजन घट रहा है, तो यह चिंता का विषय है. कैंसर सेल्स शरीर की ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करती हैं, जिससे शरीर कमजोर और थका हुआ महसूस कर सकता है. कपड़े ढीले होने लगें और कारण समझ न आए, तो जांच कराना जरूरी है.

लगातार थकान
लगातार थकान भी एक अहम संकेत है. व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण थकान होना सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर आराम करने के बाद भी कमजोरी बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कोलन कैंसर की वजह से अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है और व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है.

मल में होने वाली दिक्कतें
मल में खून आना एक गंभीर लक्षण है. कई लोग इसे बवासीर समझकर अनदेखा कर देते हैं, जो बड़ी गलती हो सकती है. अगर मल में खून दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. चमकीला लाल खून कभी-कभी हल्की समस्या का संकेत हो सकता है, लेकिन गहरा रंग किसी गंभीर कारण की ओर इशारा कर सकता है. इसके अलावा मल त्याग की आदतों में बदलाव भी ध्यान देने योग्य है। लंबे समय तक कब्ज रहना या अचानक दस्त की समस्या होना सामान्य नहीं है. अगर ये बदलाव कुछ हफ्तों से ज्यादा बने रहें, तो जांच कराना जरूरी है. ट्यूमर आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है या हार्मोनल बदलाव के कारण मल त्याग की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

कब आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है

अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको लगातार दिखता है, तो बिना किसी देरी के आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है. एक्सपर्ट बताते हैं कि शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी है. समय पर जांच और इलाज से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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