Watermelon, Muskmelon Sidesffects: गर्मियां आते ही रसदार फल के रूप में लोगों को तरबूज और खरबूजा खाना बहुत भाता है. ये दोनों ही ऐसे फ्रूट्स हैं जो स्वाद में तो मीठे हैं ही, साथ ही इनमें ढेर सारा पानी और पोषण भी होता है. लेकिन इन दिनों देखा जा रहा है कि इन दोनों का सेवन करने पर लोगों को फूड प्वाइजनिंग की शिकायत हो रही है. देखा जाए तो अगर आप सही फल का सही अनुपात में सेवन करेंगे तो फूड पॉइजनिंग नहीं होनी चाहिए, लेकिन फिर भी खरबूजा और तरबूज खाने पर लोगों की तबीयत बिगड़ रही है. चलिए जानते हैं कि हेल्थ एक्सपर्ट इस मामले में क्या राय देते हैं.

फलों को जल्दी पकाने के लिए मिलाए जा रहे हैं केमिकल
आजकल ऐसा देखा जा रहा है कि इन दोनों फलों के सेवन के बाद लोगों को पेट संबंधी परेशानियां हो रही हैं. इस संबंध में हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अगर खरबूजा और तरबूज खाने के बाद  फूड पॉइजनिंग हो रही है तो इसके दो कारण हो सकते हैं. पहला कारण है कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विक्रेता इन फलों में मिलावट कर रहे हैं. ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में खरबूजे और तरबूज को जल्दी पकाया जा रहा है.

तरबूज को जल्दी पकाने और उसका रंग लाल करने के लिए विक्रेता कैल्शियम कार्बाइड और एरीथ्रोसिन जैसे केमिकल्स का यूज कर रहे हैं. इससे तरबूज और खरबूज जैसे ये फल जल्दी पक जाते हैं और इनका रंग भी गहरा हो जाता है. लेकिन इसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. इन केमिकलों के पेट में जाने पर फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और डायरिया का रिस्क बढ़ जाता है.

डाई इंजेक्शन और दूषित मिट्टी है वजह   
डॉक्टर बताते हैं कि तरबूज का रंग लाल करने के लिए घपलेबाज उसमें Erythrosine नामक डाई सिरिंज के जरिए लगा रहे हैं. इससे अंदर से तरबूज लाल दिखता है. कुछ जगहों पर तरबूज को कृत्रिम तौर पर मीठा बनाने के लिए उसमें सिरप के सिरिंज लगाए जाते हैं और ये सिरप सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके साथ साथ तरबूज और खरबूजे ऐसी मिट्टी में उगाए जा रहे हैं जो सही नहीं है. बैक्टीरिया युक्त दूषित मिट्टी में उगने के कारण खरबूज और तरबूज सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

दूषित मिट्टी में पाए जाने वाले कई तरह के बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला, ई कोली, लिस्टीरिया आदि इन फलों के जरिए लोगों के पेट तक पहुंचते हैं और उनकी तबीयत खराब कर रहे हैं. आपको बता दें कि लिस्टीरिया बैक्टीरिया प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि इसके शरीर में जाने पर गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है. यहां तक कि बच्चे की समय से पहले डिलीवरी और नवजात बच्चों में खतरनाक इंफेक्शन तक हो सकता है. ई कोली बैक्टीरिया शरीर में जाने पर किडनी फेलियर का रिस्क बढ़ जाता है. वहीं साल्मोनेला बैक्टीरिया उल्टी, दस्त, बुखार, पेट में दर्द और डायरिया का कारण बन जाता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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