भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. इनमें बड़ी आबादी ऐसी है, जिन्हें अपने ब्लड शुगर लेवल को काबू में रखने के लिए हर दिन इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है. रोज-रोज सुई चुभाने का यह दर्द मरीजों के लिए किसी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं होता. इसी बीच डायबिटीज के मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. 

डेनमार्क की मशहूर दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपना एक नया और आधुनिक इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च किया है, जिसका नाम अविकली है. इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक ‘साप्ताहिक बेसल इंसुलिन’ है. इसका मतलब यह है कि इसे रोज लगवाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि हफ्ते में सिर्फ एक बार लेने से ही काम चल जाएगा.

क्या सच में यह दवा डायबिटीज के इलाज में कोई जादुई चमत्कार या ‘रामबाण’ साबित होगी? इस सवाल पर पटना के जाने-माने डायबिटीज विशेषज्ञ और बिहार सरकार के ‘गार्डिनर सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल’ के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने बड़ा दावा किया और मरीजों को थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी है.

क्या वाकई चमत्कार करेगी ‘अविकली’? 

डॉ. मनोज कुमार ने इस नई दवा को लेकर खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि डेनमार्क की कंपनी ने जो दवा लॉन्च की है, वह एक तरह का इंसुलिन ही है और इसे हफ्ते में एक बार देने के लिए डिजाइन किया गया है. इस दवा को बाजार में उतारने से पहले काफी समय तक रिसर्च और क्लिनिकल स्टडीज की गईं. यह दवा शरीर में जाकर धीरे-धीरे असर करती है और हफ्ते भर शुगर को कंट्रोल रखने का दावा करती है.

हालांकि, डॉ. मनोज कुमार ने मरीजों को सचेत करते हुए कहा कि अभी इस दवा को डायबिटीज का ‘रामबाण’ या अचूक इलाज मान लेना जल्दबाजी होगी. सिर्फ एक इंसुलिन के दम पर पूरे हफ्ते का ब्लड शुगर पूरी तरह नॉर्मल रहेगा, यह प्रैक्टिकल तौर पर कहना अभी थोड़ा मुश्किल है.

दवा का असली टेस्ट अभी बाकी

डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक, जब कोई नई दवा बाजार में आती है तो कागजी दावों और हकीकत में थोड़ा अंतर हो सकता है. उन्होंने बताया कि जब हम डॉक्टर इस दवा को अपने मरीजों पर प्रैक्टिकल तौर पर इस्तेमाल करना शुरू करेंगे, तभी इसके असली नतीजों और कंडीशन के बारे में पता चलेगा. जब तक कोई डॉक्टर खुद मरीजों पर इसका रिस्पॉन्स नहीं देख लेता, तब तक किसी भी नई दवा को सौ फीसदी परफेक्ट नहीं कहा जा सकता.

उन्होंने एक पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि मेडिकल साइंस में इस तरह के प्रयोग पहले भी हो चुके हैं. पहले भी कुछ ऐसी दवाइयां या इंसुलिन आए थे, जो लंबे समय तक असर का दावा करते थे, लेकिन व्यावहारिक जीवन में वे बहुत ज्यादा कामयाब या लोकप्रिय नहीं हो पाए. 

कंपनियां कर रहीं रिसर्च, पर अभी इंतजार जरूरी

दुनियाभर में कई बड़ी दवा कंपनियां इस बात पर लगातार रिसर्च कर रही हैं कि मरीजों को रोज-रोज इंसुलिन की सुई लगाने से मुक्ति मिल सके. हफ्ते में एक दिन का सिस्टम बन जाने से मरीजों की जिंदगी बहुत आसान हो जाएगी. 

डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि यह सोचना कि आपने हफ्ते में एक बार ‘अविकली’ इंजेक्शन लगा लिया और अब आप खान-पान या लाइफस्टाइल को लेकर बिल्कुल लापरवाह हो सकते हैं तो यह बिल्कुल गलत होगा. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह दवा हमारे पास उपलब्ध होगी, हम मरीजों की स्थिति देखकर इसका इस्तेमाल शुरू करेंगे. इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि भारतीय मरीजों के शरीर पर यह नई साप्ताहिक दवा कितनी असरदार और सुरक्षित साबित हो रही है.

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