पैरों में सूजन जिसे मेडिकल भाषा में एडिमा कहा जाता है जिसका मतलब है कि आपके शरीर के ऊतकों में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो गया है. जब शरीर का परिसंचरण तंत्र या अंग ठीक से काम नहीं कर रहे होते, तो यह तरल पदार्थ नीचे की ओर गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों और टखनों में इकट्ठा होने लगता है. यह शरीर का एक रक्षात्मक तरीका हो सकता है जिससे वह आपको सचेत करता है कि कुछ तो गलत है.

इस सूजन के पीछे सबसे गंभीर कारणों में से एक हृदय रोग हो सकता है. जब आपका दिल शरीर में रक्त को पूरी क्षमता से पंप नहीं कर पाता, तो रक्त वापस नसों में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन आती है.  अगर सूजन के साथ आपको सांस लेने में तकलीफ, थकान या सीने में दर्द महसूस हो, तो इसे आपातकालीन स्थिति मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

इस सूजन के पीछे सबसे गंभीर कारणों में से एक हृदय रोग हो सकता है. जब आपका दिल शरीर में रक्त को पूरी क्षमता से पंप नहीं कर पाता, तो रक्त वापस नसों में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन आती है. अगर सूजन के साथ आपको सांस लेने में तकलीफ, थकान या सीने में दर्द महसूस हो, तो इसे आपातकालीन स्थिति मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

एक और प्रमुख कारण किडनी की बीमारी है. हमारी किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालने का काम करती है. अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो शरीर में सोडियम और पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पैरों, टखनों और आंखों के नीचे सूजन आ सकती है. अगर आपको पेशाब की आदतों में बदलाव महसूस हो, तो यह किडनी की जांच कराने का स्पष्ट संकेत है.

एक और प्रमुख कारण किडनी की बीमारी है. हमारी किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालने का काम करती है. अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो शरीर में सोडियम और पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पैरों, टखनों और आंखों के नीचे सूजन आ सकती है. अगर आपको पेशाब की आदतों में बदलाव महसूस हो, तो यह किडनी की जांच कराने का स्पष्ट संकेत है.

लिवर से जुड़ी समस्याएं भी पैरों में सूजन का कारण बन सकती हैं. लिवर एल्ब्यूमिन नाम का एक प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ को बाहर लीक होने से रोकता है. जब लिवर सिरोसिस या अन्य समस्याओं से ग्रस्त होता है, तो एल्ब्यूमिन का स्तर गिर जाता है, जिससे तरल पदार्थ आसपास के ऊतकों में रिसने लगता है और पैरों में सूजन पैदा करता है. इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.

लिवर से जुड़ी समस्याएं भी पैरों में सूजन का कारण बन सकती हैं. लिवर एल्ब्यूमिन नाम का एक प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ को बाहर लीक होने से रोकता है. जब लिवर सिरोसिस या अन्य समस्याओं से ग्रस्त होता है, तो एल्ब्यूमिन का स्तर गिर जाता है, जिससे तरल पदार्थ आसपास के ऊतकों में रिसने लगता है और पैरों में सूजन पैदा करता है. इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.

इसके अलावा नसों से जुड़ी बीमारी जैसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस भी बहुत खतरनाक हो सकती है. इसमें पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है. अगर केवल एक पैर में अचानक तेज सूजन, दर्द या लालिमा दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. यह थक्का अगर टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है.

इसके अलावा नसों से जुड़ी बीमारी जैसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस भी बहुत खतरनाक हो सकती है. इसमें पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है. अगर केवल एक पैर में अचानक तेज सूजन, दर्द या लालिमा दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. यह थक्का अगर टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है.

वहीं अगर सूजन के साथ दर्द, सांस फूलना, पेशाब में कमी या एक ही पैर में भारी सूजन जैसे लक्षण हैं, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. समय रहते की गई जांच और इलाज न केवल आपकी समस्या को दूर कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं से भी आपको बचा सकते हैं.

वहीं अगर सूजन के साथ दर्द, सांस फूलना, पेशाब में कमी या एक ही पैर में भारी सूजन जैसे लक्षण हैं, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. समय रहते की गई जांच और इलाज न केवल आपकी समस्या को दूर कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं से भी आपको बचा सकते हैं.

Published at : 08 Jul 2026 10:09 AM (IST)

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