Why Women Get Thyroid Problems: अगर किसी घर में एक ही बीमारी की बात सबसे ज्यादा सुनने को मिलती है, तो वह थायराइड है और हैरानी की बात यह है कि इसके मरीजों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा होती है. कई बार लोग इसे सिर्फ बढ़ते वजन या कमजोरी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच यह है कि थायराइड शरीर के कई जरूरी कामों को प्रभावित करता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थायराइड की समस्या ज्यादा क्यों होती है? इसके पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई जैविक और हार्मोनल कारण जिम्मेदार माने जाते हैं.

महिलाओं में क्यों होती है यह दिक्कत ज्यादा?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली cadabamsdiagnostics के अनुसार, अपने जीवनकाल में हर आठ में से एक महिला को कभी न कभी थायराइड की समस्या हो सकती है. महिलाओं में यह बीमारी होने का खतरा पुरुषों की तुलना में करीब पांच से आठ गुना ज्यादा माना जाता है. उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है और कई मामलों में इसके लक्षण लंबे समय तक पहचान में नहीं आते. दरअसल, थायराइड गर्दन में मौजूद तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और विकास को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है. जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तब हाइपोथायराइडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं.

क्या होते हैं इसके पीछे के कारण?

महिलाओं में थायराइड की समस्या ज्यादा होने की सबसे बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव और ऑटोइम्यून बीमारियां मानी जाती हैं. महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन और इम्यून सिस्टम पुरुषों से अलग होती है. यही कारण है कि ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं. ऐसी स्थिति में शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से थायराइड ग्रंथि पर ही हमला करने लगती है, जिससे हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस और ग्रेव्स डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

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महिलाओं के लाइफ में किन फेस में होते हैं ये बदलाव?

महिलाओं के जीवन के कुछ खास पड़ाव भी थायराइड के जोखिम को बढ़ा देते हैं. गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और  मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोन तेजी से बदलते हैं. इन बदलावों का असर थायराइड ग्रंथि पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि इन चरणों में महिलाओं को नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है. थायराइड का असर सिर्फ वजन या थकान तक सीमित नहीं रहता. यह पीरियड्स को अनियमित कर सकता है, गर्भधारण में दिक्कत पैदा कर सकता है और गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है. वहीं बढ़ती उम्र में इसके लक्षण कई बार मेनोपॉज जैसे लगते हैं, जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है.

किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए इग्नोर?

अगर बिना किसी वजह के लगातार थकान महसूस हो, अचानक वजन बढ़ने या घटने लगे, बाल झड़ने लगें, त्वचा रूखी हो जाए, मूड बार-बार बदलने लगे या गर्दन में सूजन दिखाई दे, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेकर टीएसएच, टी3 और टी4 जैसे जरूरी ब्लड टेस्ट कराना बेहतर रहता है. समय पर जांच और सही इलाज से थायराइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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