India-UK Trade Deal : भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से जिस व्यापार समझौते का इंतजार किया जा रहा था, वह अब लागू हो चुका है. इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. इसका असर सिर्फ लग्जरी कारों, स्कॉच व्हिस्की या फैशन प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हेल्थकेयर सेक्टर पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा.

खासकर ब्रिटेन से भारत आने वाले मेडिकल डिवाइसेस और कुछ विशेष दवाओं की कीमतों में आने वाले समय में कमी आ सकती है. आइए जानते हैं कि भारत यूके से कौन-कौन सी दवाएं और मेडिकल प्रोडक्ट्स आयात करता है और नई ट्रेड डील के बाद अब इनका दाम कितना कम हो जाएगा. 

भारत-यूके ट्रेड डील क्या है?

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है. करीब साढ़े तीन साल तक चली बातचीत और 14 दौर की चर्चा के बाद यह समझौता अंतिम रूप में पहुंचा. इस डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, आयात-निर्यात को आसान बनाना और कई प्रोडक्ट्स पर लगने वाले आयात शुल्क को कम या खत्म करना है. इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत प्रोडक्ट्स को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. वहीं ब्रिटेन से आने वाले कई प्रोडक्ट्स पर भारत में आयात शुल्क तरीके से कम किया जाएगा.

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यूके कौन-कौन सी दवाएं और मेडिकल प्रोडक्ट्स आयात होती हैं?

भारत मुख्य रूप से ब्रिटेन से स्पेशलाइज्ड जेनेरिक दवाएं और कई तरह के मेडिकल डिवाइसेस आयात करता है. इनमें सर्जिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक मशीनें, ईसीजी मशीन, एक्स-रे मशीन और अन्य एडवांस हेल्थकेयर डिवाइस शामिल हैं. नई ट्रेड डील के बाद इन प्रोडक्ट्स पर लगने वाला आयात शुल्क कम होने से इनके भारतीय बाजार में सस्ते होने की संभावना है.

क्या घट जाएंगे इनके दाम? 

नई ट्रेड डील के तहत ब्रिटेन से आने वाले मेडिकल डिवाइसेस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी चरणबद्ध तरीके से कम की जाएगी. पहले जहां इन प्रोडक्ट्स पर आमतौर पर 7.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, वहीं इसे घटाकर लगभग 3 प्रतिशत तक लाया जाएगा. इसमें इमेजिंग सिस्टम, डायग्नोस्टिक डिवाइस, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स शामिल हैं. उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि इससे भारत में आधुनिक मेडिकल डिवाइस पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो सकेंगे. आयात शुल्क कम होने से ब्रिटेन से आने वाले हेल्थकेयर डिवाइस और कुछ विशेष दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. इसके अलावा अगले 10 सालों में करीब 85 प्रतिशत ऐसे प्रोडक्ट्स पूरी तरह टैरिफ-फ्री हो जाएंगे. इससे अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और मरीजों को आधुनिक मेडिकल डिवाइस पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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