Aviation News: ईरान और यूएस के बीच फरवरी से युद्ध चल रहा है. जिसका असर दुनियाभर के कई देशों में भी देखने को मिल रहा है. हालात ये हैं कि तेल, गैस, परिचालन हर एक इंडस्ट्री पर महंगाई की मार पड़ रही है. ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, यात्रियों की संख्या कम हो रही है, गैस के दाम बढ़ रहे हैं. इस तरह से हर एक इंडस्ट्री पर इस युद्ध का गहरा असर पड़ रहा है. खासतौर से एविएशन इंडस्ट्री में काफी मारामारी मची हुई है.

एविएशन इंडस्ट्री का हाल बेहाल
एविएशन इंडस्ट्री पिछले कुछ सालों में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, इस सेक्टर को काफी बूम मिल रहा था. लेकिन ईरान युद्ध के कारण इस सेक्टर की गति में थोड़ी रुकावट आ गई है. इन दिनों कई डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयरलाइंस मुश्किल के दौर से गुजर रही हैं. ऐसे में कई महत्वपूर्ण एयरलाइंस की उड़ानों को कम किया जा रहा है. तो वहीं कई जरूरी रूट्स पर यात्रियों की संख्या भी कम देखी जा रही है.

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इन रूट्स पर आई सबसे ज्यादा गिरावट
देश के सबसे बिजी 9 एयरपोर्ट्स में से पांच पर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सीटें पिछले साल के मुकाबले कम हो गई हैं. यूके की एविएशन एनालिटिक्स कंपनी OAG के डाटा के मुताबिक, इन रूट्स पर सबसे ज्यादा गिरावट आई है:

  • हैदराबाद में 3.57 मिलियन सीटें कम हुई हैं, जिसके कारण सबसे ज्यादा 12% की गिरावट दर्ज की गई है.
  • चेन्‍नई में 2.48 मिलियन पर सीटें पहुंची हैं और 8% कमी आई है.
  • अहमदाबाद, मुंबई और कोलकाता में 2-3% की गिरावट देखी गई.
  • गुवाहाटी और बेंगलुरु में कोई बदलाव नहीं हुआ. 
  • तो वहीं दिल्ली में 9.6% और पुणे में 6% की बढ़ोतरी हुई है.

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महंगे एटीएफ का असर
देशभर में जैसे पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं, वैसे ही जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है. जिसके कारण फ्लाइट्स की उड़ानें कम कर दी गई हैं. तो वहीं ईंधन की कीमत बढ़ने की वजह से फ्लाइट्स के किराए में भी इजाफा किया गया है. ये भी एक बड़ा कारण है जिससे यात्री फ्लाइट का सफर करने से बच रहे हैं. जब यात्रियों की संख्या कम होती है, तब एयरलाइंस के पास मेंटेनेंस के लिए भी कम लागत बचती है, ऐसे में उड़ानें रद्द करने के सिवाय कोई रास्ता बाकी नहीं रहता है.

बता दें कि इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक, फरवरी से जून के बीच ATF की कीमतों में ग्लोबली करीब 52% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है. जिसके बाद ये 146.25 डॉलर प्रति बैरल हो गया.



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