कार्लोस अल्कारेज बनाम नोवाक जोकोविच ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल आज, जानिए लाइव स्ट्रीमिंग, प्राइज मनी

कार्लोस अल्कारेज बनाम नोवाक जोकोविच ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल आज, जानिए लाइव स्ट्रीमिंग, प्राइज मनी


ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 मेंस का खिताबी मुकाबला आज (1 फरवरी) कार्लोस अल्कारेज और नोवाक जोकोविच के बीच है. चैंपियन को 100 मिलियन डॉलर से अधिक की ईनामी मिलेगी. बेशक नोवाक अनुभवी खिलाड़ी हैं और खिताब के प्रबल दावेदार हैं. लेकिन सामने 22 वर्षीय युवा कार्लोस हैं, जिन्होंने अपने खेल से दुनिया में एक अलग पहचान बनाई है. जानिए फाइनल कितने बजे से शुरू होगा और भारत में इसका लाइव प्रसारण कहां होगा.

कार्लोस अल्कारेज पहली बार ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में पहुंचे हैं. इसके आलावा वह तीनों ग्रैंडस्लैम 2-2 बार जीत चुके हैं. उन्होंने 2022 में अपना पहला ग्रैंडस्लैम (यूएस ओपन) जीता था. 2023 में विंबलडन और 2024 में कार्लोस ने फ्रेंच ओपन और विंबलडन जीता. पिछले साल उन्होंने फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन खिताब जीता.

सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविच रिकॉर्ड 24 ग्रैंडस्लैम जीत चुके हैं. सिर्फ ऑस्ट्रेलियन ओपन ही वह 10 बार जीत चुके हैं. उन्होंने 2008 में अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीता था. 

नोवाक जोकोविच द्वारा जीते गए ग्रैंडस्लैम

ऑस्ट्रेलियन ओपन: 2008, 2011, 2012, 2013, 2015, 2016, 2019, 2020, 2021, 2023.
फ्रेंच ओपन: 2016, 2021, 2023.
विंबलडन: 2011, 2014, 2015, 2018, 2019, 2021, 2022.
यूएस ओपन: 2011, 2015, 2018, 2023.

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 फाइनल कितने बजे शुरू होगा?

कार्लोस अल्कारेज और नोवाक जोकोविच के बीच ऑस्ट्रेलियन ओपन का फाइनल मैच आज (1 फरवरी) दोपहर 2 बजे से शुरू होगा. 

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 फाइनल कहां पर खेला जाएगा?

रॉड लेवर एरिना, मेलबर्न.

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 फाइनल का लाइव प्रसारण कहां होगा?

कार्लोस अल्कारेज और नोवाक जोकोविच के बीच ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल मैच का भारत में लाइव प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा.

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 फाइनल की लाइव स्ट्रीमिंग किस ऐप पर होगी?

कार्लोस अल्कारेज बनाम नोवाक जोकोविच ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल की लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव ऐप और वेबसाइट पर होगी.

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 विनर प्राइज मनी

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2025 के चैंपियन के लिए प्राइज मनी को पिछले साल के मुकाबले 15 मिलियन डॉलर बढ़ाया गया है. 2025 में प्राइज मनी 96.5 मिलियन डॉलर थी, 2026 में चैंपियन बनने वाले खिलाड़ी को 111.5 मिलियन डॉलर मिलेंगे.





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शुगर-कैंसर की सस्ती दवाओं से लेकर बायोफार्मा हब तक, जानें हेल्थ सेक्टर को बजट में क्या मिला?

शुगर-कैंसर की सस्ती दवाओं से लेकर बायोफार्मा हब तक, जानें हेल्थ सेक्टर को बजट में क्या मिला?


Health Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर रही हैं. यह उनका लगातार नौंवा बजट है और इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार है जब बजट रविवार को पेश किया जा रहा है. सभी सेक्टरों में स्वास्थ्य सेक्टर पर काफी ज्यादा फोकस किया गया है. आइए जानते हैं कि इस बजट में हेल्थ सेक्टर को क्या-क्या मिलेगा.

भारत बनेगा बायोफॉर्मा हब

इस साल स्वास्थ्य क्षेत्र पर काफी ज्यादा जोर दिया जा रहा है. क्योंकि इसके पीछे एक बड़ा विजन है, भारत को एक वैश्विक बायोफार्मा हब बनाना. स्वास्थ्य सेक्टर के लिए सबसे बड़ी घोषणा बायोफार्मा शक्ति पहल की शुरुआत है. इसे अगले 5 सालों में ₹10,000 करोड़ के आवंटन का समर्थन दिया गया है. इसका लक्ष्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के लिए एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम को बनाना है, आयात पर निर्भरता को कम करना है और साथ ही भारत को दवाओं के ग्लोबल सप्लायर के रूप में स्थापित करना है.

मधुमेह और कैंसर के लिए सस्ती दवाएं

बायोफॉर्मा पर जोर देने का एक बड़ा परिणाम मधुमेह और कैंसर के लिए कम लागत वाली दवाएं भी होंगी. यह भारत की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में से दो हैं. बायोलॉजिक दवाओं के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करके सरकार का लक्ष्य विनिर्माण लागत को कम करना है. इससे सीधे तौर पर मरीजों के लिए कीमतें कम होंगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च पर भी दबाव कम होगा.

इसी के साथ इस इकोसिस्टम का समर्थन करने के लिए बजट में तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना के साथ-साथ सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करने का भी प्रस्ताव है. यह संस्थान एडवांस्ड फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करेंगे. 

क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क 

एक और बड़ा कदम पूरे भारत में 1000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क बनाना है. इससे दवा परीक्षण, क्लीनिकल अनुसंधान और नई थेरेपी के तेजी से अनुमोदन के लिए भारत की मजबूती में काफी वृद्धि होगी.  सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि जिला अस्पतालों को भी अपडेट किया जाएगा. वहां इमरजेंसी वार्ड बढ़ाए जाएंगे ताकि लोगों को फायदा पहुंच पाए.

क्षेत्रीय मेडिकल हब का होगा निर्माण 

इसी के साथ बजट में यह ऐलान किया गया है कि पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब का निर्माण किया जाएगा. यहां मेडिकल और ट्रेनिंग के साथ-साथ रिसर्च पर काम किया जाएगा. इतना ही नहीं बल्कि देश में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज को भी बनाने का ऐलान किया गया है. इसी के साथ मेंटल हेल्थ का ध्यान रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है की मेंटल इंस्टिट्यूट को भी मजबूत किया जाएगा.

देश में तीन नए आयुर्वेद संस्थान 

आपको बता दें कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए मौजूदा संस्थाओं को अपग्रेड किया जाएगा. इसी के साथ दोनों सेक्टर में एएचपीआई  संस्थान स्थापित किए जाएंगे. साथ ही देश में तीन नए आयुर्वेद संस्थान बनाए जाएंगे.

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क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन, भारत में युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रही यह बीमारी?

क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन, भारत में युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रही यह बीमारी?


Secondary Hypertension In India: भारत में हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी इससे अनजान हैं. समय-समय पर जांच, सही लाइफस्टाइल और जागरूकता से स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी फेल होने जैसे गंभीर खतरे टाले जा सकते हैं. लेकिन चिंता सिर्फ सामान्य हाईपरटेंशन की नहीं है, बल्कि इसके एक ज्यादा खतरनाक रूप सेकेंडरी हाइपरटेंशन की है, जिसमें हार्ट और दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा कहीं ज्यादा होता है. डॉक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट लंबे समय से इस बदलाव को महसूस कर रहे थे और अब नए रिसर्च ने इसकी पुष्टि भी कर दी है.

क्या निकला रिसर्च में?

स्टडी के मुताबिक, 18 से 40 साल की उम्र के जिन भारतीय युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर पाया गया, उनमें से 22 प्रतिशत से ज्यादा लोग सेकेंडरी हाइपरटेंशन से पीड़ित थे. यह आंकड़ा वैश्विक अनुमानों से बिल्कुल उलट है, जहां माना जाता है कि करीब 90 प्रतिशत मामलों में हाईपरटेंशन प्राइमरी होता है. यानी भारत में युवाओं के बीच हाई ब्लड प्रेशर का सेकेंडरी रूप अब दुर्लभ नहीं रहा और तेजी से बढ़ रहा है.

रिसर्चर का कहना है कि भारत में युवा एड में हाईपरटेंशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इस आयु वर्ग में सेकेंडरी कारणों की भूमिका अहम होती जा रही है। यह ट्रेंड भविष्य के लिए गंभीर संकेत देता है.

दुनिया में सबसे ज्यादा मौत के कारणों में से एक 

हाईपरटेंशन दुनिया भर में हार्ट रोगों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल करीब 1.79 करोड़ मौतें हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं, जो वैश्विक मौतों का लगभग 31 प्रतिशत है. जब ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mm Hg या उससे ज्यादा बना रहता है, तो उसे हाईपरटेंशन कहा जाता है. सिस्टोलिक प्रेशर वह दबाव होता है, जब हार्ट ब्लड को पंप करता है, जबकि डायस्टोलिक प्रेशर हार्ट के आराम की स्थिति में मापा जाता है.सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम माना जाता है.

लोगों के लिए साइलेंट किलर

हालिया वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि भारत में हाईपरटेंशन की कुल दर 30 से 35.5 प्रतिशत के बीच है, जिससे अनुमानित 31.4 करोड़ लोग प्रभावित हैं. हालात को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि हाईपरटेंशन से जूझ रहे करीब आधे पुरुष और एक-तिहाई से ज्यादा महिलाएं दवाएं लेने के बावजूद अपना ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं रख पा रहे हैं, इसी वजह से इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है.

क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन?

Mayoclinic की रिपोर्ट के अनुसार, सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर, जिसे सेकेंडरी हाइपरटेंशन कहा जाता है, वह स्थिति है जिसमें ब्लड प्रेशर किसी दूसरी बीमारी की वजह से बढ़ता है. यह समस्या किडनी, आर्टरीज, हार्ट या हार्मोन से जुड़े सिस्टम में गड़बड़ी के कारण हो सकती है और कई बार गर्भावस्था के दौरान भी देखी जाती है. यह आम हाई ब्लड प्रेशर प्राइमरी हाइपरटेंशन से अलग होता है, जिसमें कोई साफ वजह सामने नहीं आती. सेकेंडरी हाइपरटेंशन की पहचान समय पर हो जाए तो मूल बीमारी और ब्लड प्रेशर, दोनों को कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे हार्ट डिजीज, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है.

कैसे होते हैं इसके लक्षण?

प्राइमरी हाईपरटेंशन की तरह ही सेकेंडरी हाईपरटेंशन में भी अक्सर कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, यहां तक कि तब भी जब ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका हो. हालांकि, अगर किसी व्यक्ति में हाई ब्लड प्रेशर के साथ कुछ खास संकेत दिखाई दें, तो यह सेकेंडरी हाइपरटेंशन की ओर इशारा कर सकता है. जैसे कि दवाएं लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर का कंट्रोल में न आना, अचानक बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर होना (सिस्टोलिक 180 mm Hg से ऊपर या डायस्टोलिक 120 mm Hg से ज्यादा), पहले जिन दवाओं से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता था उनका असर खत्म हो जाना, 30 साल से पहले या 55 साल के बाद अचानक हाई ब्लड प्रेशर शुरू होना, परिवार में हाई ब्लड प्रेशर का कोई हिस्ट्री  न  होना और व्यक्ति का मोटापे से ग्रस्त न होना.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सूर्यकुमार यादव ने विराट कोहली का रिकॉर्ड किया ध्वस्त, 5 मैचों की सीरज में बना दिए इतने रन

सूर्यकुमार यादव ने विराट कोहली का रिकॉर्ड किया ध्वस्त, 5 मैचों की सीरज में बना दिए इतने रन


IND vs NZ 5th T20I: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला पूरी तरह से सूर्यकुमार यादव के नाम रहा. तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारतीय कप्तान ने बल्ले से ऐसा तूफान मचाया कि रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो गया. इस मुकाबले के साथ ही सूर्या ने विराट कोहली का एक बड़ा रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया.

विराट कोहली का रिकॉर्ड टूटा

न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की सीरज ने सूर्या ने 242 रन बना डाले. इसी के साथ ही सूर्या एक टी20 इंटरनेशनल सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम था, जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरीज में 231 रन बनाए थे. सूर्या ने इस आंकड़े को पार कर नया कीर्तिमान रच दिया है.

टीम इंडिया की आक्रामक पारी

पांचवें टी20 मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक शुरुआत की. ओपनिंग से लेकर मिडिल ऑर्डर तक बल्लेबाजों ने खुलकर शॉट्स खेले. 20 ओवर के खेल में भारत ने 5 विकेट खोकर 271 रन बना डाले, जो न्यूजीलैंड के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं था. इस बड़े स्कोर में सूर्यकुमार यादव की पारी बेहद अहम रही.

सूर्यकुमार यादव ने इस मैच में 4 चौके और 6 छक्के जड़ते हुए 30 गेंदों पर 63 रन बना डाले. मिडिल ओवर्स में जब रन गति को और तेज करने की जरूरत थी, तब सूर्या ने जिम्मेदारी अपने हाथ में ली. उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए और कीवी गेंदबाजों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया.

सीरीज में शानदार वापसी

इस सीरीज से पहले सूर्यकुमार यादव की फॉर्म को लगातार आलोचना हो रही थी. उनके ऊपर कप्तानी के साथ बल्लेबाजी का दबाव साफ नजर आ रहा था. हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ इस सीरीज में उन्होंने पूरी तरह से खुद को साबित किया. पांच मैचों में सूर्या ने तीन अर्धशतक लगाए और कुल 242 रन बनाए. यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े मैचों के खिलाड़ी क्यों कहे जाते हैं.

पूरी सीरीज में सूर्यकुमार यादव ने 39 बाउंड्री जड़ी. उन्होंने 25 चौके और 14 छक्के लगाए, जो उनकी आक्रामक सोच को साफ दिखाता है. वह इस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे.

टी20 वर्ल्ड कप से पहले बढ़ा भरोसा

भारत ने यह सीरीज 4-1 से अपने नाम की और कप्तान सूर्यकुमार यादव की फॉर्म टीम इंडिया के लिए बड़ी राहत बनकर आई है. टी20 वर्ल्ड कप से पहले सूर्या का इस तरह लय में आना भारतीय टीम के आत्मविश्वास को मजबूत करेगा. 



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