Budget 2026: LTCG & STCG Tax में बड़ी राहत | Investors के लिए Game-Changer | Paisa Live

Budget 2026: LTCG & STCG Tax में बड़ी राहत | Investors के लिए Game-Changer | Paisa Live


इस Budget में Investors के लिए बड़ी राहत आ सकती है। अभी Long-Term Capital Gains (LTCG) और Short-Term Capital Gains (STCG) पर भारी Tax लागू है, जो Share और Mutual Fund Investors की कमाई प्रभावित कर रहा है। उम्मीद है कि सरकार इन Tax दरों को कम करके Investors को बढ़ावा देगी, ताकि share market में liquidity बढ़े और निवेशक होकर invest कर सकें। Budget 2026 के दौरान इस पर अंतिम घोषणा और details का खुलासा होगा। इस Video में आप जानेंगे किस तरह यह बदलाव आपकी pocket और investment strategy को प्रभावित कर सकता है।                  



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IMD forecast for February: Higher temperature, less rainfall pose risk to crops

IMD forecast for February: Higher temperature, less rainfall pose risk to crops


The government has fixed a target of 119 million tonnes (mt) of wheat production in 2025-26, which will be harvested from April
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Except Rajasthan, other States in the north west region may have below normal rainfall, and above normal temperatures in February, India Meteorological Department (IMD) said on Saturday. Though details of Statewise temperature forecast was not announced, any higher temperature beyond a limit may affect yield of wheat, the main cereal of Rabi season.

“The probability forecast for minimum temperature indicates that during February 2026, minimum temperatures are likely to be above normal over most parts of the country, except some regions of south peninsular where normal minimum temperatures are expected. Also above normal maximum temperatures are likely over most parts of the country except some isolated regions in the central India and the southern parts of peninsular India, where normal maximum temperatures are likely,” IMD’s Director General M Mohaptra said.

Briefing media on the weather outlook, he also said that monthly rainfall over the country as a whole in February is most likely to be below normal (<81 per cent of LPA). However, some areas of north-west (parts of Rajasthan) and east central India (mainly Chhattisgarh), and extreme southern parts of northeast India (Tripura) may have normal to above-normal rainfall, he added.

Further, Mohapatra also highlighted that rainfall over north-west region consisting of Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana, Punjab, Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir, Delhi and Ladakh is most likely to be below normal, which means lower than 78 per cent of its Long Period Average (LPA).

“The ideal temperature for wheat crop during February is upto 12 degree censius in night and 25 degree celsius in day. However, even if the day temperature rises to 30 degree and does not prolong for a week there is no threat to its yield. There will be risk only if both day and night temperature are higher and prolong for more than a week, and such situation normally does not happen,” said Gyanendra Singh, former director of Karnal-based Indian Institute of Wheat and Barley Research (IIWBR). “Let’s wait and watch,” he added.

The government has fixed a target of 119 million tonnes (mt) of wheat production in 2025-26, which will be harvested from April. Total wheat acreage stood at an all time high 334.17 lh this year, compared with 328.04 lh in 2024-25, up 2 per cent. The output was an all time high of 117.54 mt in 2024-25.

On the other hand, IMD has cautioned that above-normal temperatures may accelerate crop growth and shorten the crop duration of rabi crops, particularly in north-west, and central India. “Crops like wheat and barley may experience forced maturity, leading to sterile spikelets and chaffy grains, resulting in yield reduction,” Mohapatra said.

Further, oilseeds and pulses such as mustard, gram (chana), lentil (masur), and field pea may show early flowering and premature maturity, resulting in poor pod development, reduced seed size, and lower yields, it said adding warmer conditions may also favour rapid multiplication of aphids and other sucking pests.

Vegetable crops such as potato, onion, garlic, tomato, cauliflower, cabbage, and peas may be adversely affected during critical stages of its life cycle . Elevated temperatures can induce bolting in onion and garlic, reduce tuber bulking in potato, because flower drop in tomato and deteriorate crops like cabbage and cauliflower, thereby lowering yield and market value, it said.

Among other risks associated with an above-normal temperatures in February, IMD said that horticultural crops such as mango, citrus, banana, and grapes may experience early flowering, uneven fruit set and increased fruit drop as well as irregular flowering and poor fruit development in temperate fruits like apple, pear and peach.

Published on January 31, 2026



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Live: भारत ने टॉस जीतकर चुनी बैटिंग, प्लेइंग 11 में हुए 3 बदलाव; संजू नहीं हुए बाहर

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांचवां टी20 तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में है. भारतीय टीम मुकाबले में जीत के साथ सीरीज समाप्त करना चाहेगी. इससे पहले बुधवार को विशाखापट्टनम में खेले गए सीरीज के चौथे मैच में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा था.

अब सूर्यकुमार यादव की कप्ताना वाली टीम इंडिया पांचवां टी20 जीतकर सीरीज 4-1 से समाप्त करने की कोशिश करेगी. आखिरी टी20 के लिए भारत की प्लेइंग 11 में कुछ बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं. टीम में ईशान किशन की वापसी हो सकती है. इसके अलावा श्रेयस अय्यर को भी मौका मिल सकता है. वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को प्लेइंग 11 से बाहर किया जा सकता है. 

संजू अब तक चारों ही मैचों में बुरी तरह से फ्लॉप नजर आए हैं. नागपुर में खेले गए पहले वनडे में संजू सिर्फ 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे. इसके बाद रायपुर में हुए दूसरे टी20 में सैमसन सिर्फ 06 रन ही बना सके थे. हद तो तब हो गई, जब गुवाहटी के तीसरे मुकाबले में वह जीरो रन पर ही आउट हो गए. इसके बाद भी संजू पर भरोसा करके उन्हें चौथे टी20 में शामिल किया गया. लेकिन चौथे मैच में भी सिर्फ 24 रन ही बना सके. 

टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी 

बताते चलें कि न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही टी20 सीरीज भारत के लिए आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले आखिरी सीरीज है. हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय टीम शुरुआती 3 मैच जीतकर सीरीज अपने नाम कर चुकी है. लेकिन टीम इंडिया को चौथे मैच में हार का सामना करना पड़ा था. 

टी20 सीरीज के लिए भारतीय स्क्वॉड 

संजू सैमसन (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, हर्षित राणा, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती. 

टी20 सीरीज के लिए न्यूजीलैंड का स्क्वॉड 

टिम सीफर्ट (विकेटकीपर), मिचेल सैंटनर (कप्तान), डेवन कॉनवे, रचिन रविंद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डैरिल मिशेल, जाकरी फाउल्क्स, मैट हेनरी, इश सोढ़ी, जैकब डफी, जेम्स नीशम, माइकल ब्रैसवेल, लॉकी फर्ग्यूसन, बेवन जैकब्स, काइल जैमीसन.



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हाई यूरिक एसिड में कौन-सी दाल सुरक्षित और कौन-सी खतरनाक? डाइटीशियन ने बताई दालों की पूरी लिस्ट

हाई यूरिक एसिड में कौन-सी दाल सुरक्षित और कौन-सी खतरनाक? डाइटीशियन ने बताई दालों की पूरी लिस्ट


अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है और आप दाल खाना पूरी तरह छोड़ चुके हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. अक्सर हाई यूरिक एसिड वाले लोग यह मान लेते हैं कि सभी दालें नुकसानदायक होती हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स ऐसा नहीं मानते. डाइटीशियन का कहना है कि सही दाल और सही मात्रा चुन ली जाए तो दाल पूरी तरह छोड़े बिना भी डाइट को मैनेज किया जा सकता है. यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जो किडनी के जरिए बाहर निकलता है. जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है या किडनी इसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो इसकी मात्रा बढ़ जाती है. इसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द, गाउट और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

क्या सभी तरह की दालें हैं खतरनाक?

डाइटीशियन के अनुसार, हाई यूरिक एसिड में सभी दालों से परहेज करना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि दाल में मौजूद प्यूरीन की मात्रा कितनी है. प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बनाता है, इसलिए ज्यादा प्यूरीन वाली चीजें नुकसान पहुंचा सकती है. वहीं डाइटीशियन यह भी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का यूरिक एसिड लेवल बहुत ज्यादा यानी 8 मिलीग्राम/डीएल से ऊपर है, तो उसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए और सिर्फ लो-प्यूरिन फूड्स ही लेने चाहिए.

सबसे हेल्दी दाल कौन-सी?

पीली मूंग दाल में प्यूरीन की मात्रा सबसे कम होती है. इसमें 25 से 35 मिलीग्राम प्यूरीन पाया जाता है. इसे सीमित मात्रा में रोजाना भी खाया जा सकता है, इसलिए हाई यूरिक एसिड वालों के लिए यह सबसे सुरक्षित मानी जाती है.

किन दालों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए?

मसूर दाल, अरहर दाल और हरे छिलके वाली मूंग दाल में प्यूरीन की मात्रा 35 से 50 मिलीग्राम होती है. इन्हें हफ्ते में तीन से चार बार खाया जा सकता है. लेकिन इन्हें 6 से 8 घंटे भिगोकर पकाना चाहिए. वहीं  लोबिया, साबुत मूंग, कुलथ दाल और साबुत दालों में प्यूरिन 60 से 75 मिलीग्राम तक होता है. इनका सेवन हफ्ते में दो से तीन बार किया जा सकता है. 

किन दालों से बनाएं दूरी?

चना, राजमा और काला चना में प्यूरीन की मात्रा 75 से 90 मिलीग्राम तक होती है. इनका सेवन 10 से 15 दिन में एक बार ही करने की सलाह दी जाती है. वहीं सोयाबीन और सोया चंक्स में प्यूरीन की मात्रा सबसे ज्यादा करीब 120 से 140 मिलीग्राम होती है. हाई यूरिक एसिड वालों को इनसे पूरी तरह परहेज करना चाहिए.

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वह दौर जब आम बजट से अलग पेश होता था रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा पर क्यों और कब लगा ब्रेक?

वह दौर जब आम बजट से अलग पेश होता था रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा पर क्यों और कब लगा ब्रेक?


Railway Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी कि रविवार को देश का आम बजट पेश करेंगी. वित्त मंत्री के रूप में यह उनका लगातार नौवां बजट होगा. सबसे पहले उन्होंने 2019 में बजट पेश किया था. कल पेश होने वाले बजट से देश के हर इंसान, हर सेक्टर, हर वर्ग को काफी उम्मीदें हैं. इस बीच हम आपको बजट से जुड़ी एक पुरानी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अब टूट चुकी है. 

अंग्रेजाें के जमाने में शुरू हुई थी यह प्रथा

हमें यह पता है कि बजट में डिफेंस, हेल्थ, एजुकेशन जैसे कई अलग-अलग सेक्टर शामिल होते हैं. रेल बजट भी इसी में आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि पहले रेल बजट को अलग से पेश किया जाता था. रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा 1924 में अंग्रेजों के जमाने में शुरू हुई थी.

उस दौरान स्पेशल कमेटी की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि रेलवे का बजट काफी महत्वपूर्ण और बड़ा होता है इसलिए उसे सामान्य बजट के तहत संभाला नहीं जा सकता. 1947 में देश के आजाद होने के बाद भी यह परंपरा 92 सालों तक बिना रूके चलती रही. इसके तहत, रेल मंत्री यूनियन बजट से कुछ दिन पहले रेलवे बजट पेश करते थे, जिसमें कमाई, खर्च, किराए और माल ढुलाई दरों का ब्यौरा होता था.

क्यों खत्म हुई दशकों पुरानी परंपरा? 

वित्त वर्ष 2016-17 तक केंद्रीय बजट से पहले रेल बजट अलग से पेश होता था. 2017 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आई और तब से रेलवे बजट को देश के आम बजट में मिल लिया गया. दरअसल, अलग से रेलवे बजट को खत्म करने की मुहिम को 2016 में NITI आयोग के तहत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों के बाद गति मिली.

देबरॉय और अर्थशास्त्री किशोर देसाई द्वारा लिखे गए एक पेपर में समिति ने तर्क दिया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जो अभी भी इस प्रथा का पालन कर रहा था और आधुनिक सार्वजनिक वित्त में अब इसका कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं रह गया. पेपर में फाइनेंशियल मैनेजमेंट को मॉडर्न बनाने और सरकारी खर्च की ज्यादा साफ तस्वीर पेश करने के लिए रेलवे फाइनेंस को यूनियन बजट में शामिल करने की सलाह दी गई थी.

समिति के इस प्रस्ताव पर सरकार के अंदर चर्चा हुई. तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने समिति के प्रस्ताव का समर्थन किया. बाद में वित्त मंत्री अरुण जेटली इस मामले को संसद में ले गए, जिसमें राज्यसभा में भी चर्चा हुई. जेटली ने 2017-18 के लिए पहला इंटीग्रेटेड यूनियन बजट पेश किया, जिससे आधिकारिक तौर पर अलग रेलवे बजट खत्म हो गया. 

इससे क्या हुआ फायदा? 

रेलवे बजट को आम बजट में शामिल करने के कई फायदे भी हुए. सबसे पहले इसकी तैयारी और संसद में इस पर बहस करने में जो समय जाता था, उसकी बचत हुई. इससे रेलवे की तरफ से सरकार को मिलने वाला डिविडेंड खत्म हो गया, जिससे उस पर वित्तीय बोझ कम हुआ.

इसका मकसद ट्रांसपोर्ट सेक्टर, रेलवे, सड़कों और जलमार्गों में बेहतर तालमेल बनाना भी था, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग एक ही यूनिफाइड फ्रेमवर्क के तहत की जा सके. इससे काफी पारदर्शिता भी आई क्योंकि केंद्र सरकार की कमाई और खर्च को अब एक ही डॉक्यूमेंट में दिखाए जाने से संसद और इन्वेस्टर्स के लिए वित्तीय जांच करना आसान हो गया. 

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