हाई यूरिक एसिड में कौन-सी दाल सुरक्षित और कौन-सी खतरनाक? डाइटीशियन ने बताई दालों की पूरी लिस्ट

हाई यूरिक एसिड में कौन-सी दाल सुरक्षित और कौन-सी खतरनाक? डाइटीशियन ने बताई दालों की पूरी लिस्ट


अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है और आप दाल खाना पूरी तरह छोड़ चुके हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. अक्सर हाई यूरिक एसिड वाले लोग यह मान लेते हैं कि सभी दालें नुकसानदायक होती हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स ऐसा नहीं मानते. डाइटीशियन का कहना है कि सही दाल और सही मात्रा चुन ली जाए तो दाल पूरी तरह छोड़े बिना भी डाइट को मैनेज किया जा सकता है. यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जो किडनी के जरिए बाहर निकलता है. जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है या किडनी इसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो इसकी मात्रा बढ़ जाती है. इसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द, गाउट और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

क्या सभी तरह की दालें हैं खतरनाक?

डाइटीशियन के अनुसार, हाई यूरिक एसिड में सभी दालों से परहेज करना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि दाल में मौजूद प्यूरीन की मात्रा कितनी है. प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बनाता है, इसलिए ज्यादा प्यूरीन वाली चीजें नुकसान पहुंचा सकती है. वहीं डाइटीशियन यह भी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का यूरिक एसिड लेवल बहुत ज्यादा यानी 8 मिलीग्राम/डीएल से ऊपर है, तो उसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए और सिर्फ लो-प्यूरिन फूड्स ही लेने चाहिए.

सबसे हेल्दी दाल कौन-सी?

पीली मूंग दाल में प्यूरीन की मात्रा सबसे कम होती है. इसमें 25 से 35 मिलीग्राम प्यूरीन पाया जाता है. इसे सीमित मात्रा में रोजाना भी खाया जा सकता है, इसलिए हाई यूरिक एसिड वालों के लिए यह सबसे सुरक्षित मानी जाती है.

किन दालों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए?

मसूर दाल, अरहर दाल और हरे छिलके वाली मूंग दाल में प्यूरीन की मात्रा 35 से 50 मिलीग्राम होती है. इन्हें हफ्ते में तीन से चार बार खाया जा सकता है. लेकिन इन्हें 6 से 8 घंटे भिगोकर पकाना चाहिए. वहीं  लोबिया, साबुत मूंग, कुलथ दाल और साबुत दालों में प्यूरिन 60 से 75 मिलीग्राम तक होता है. इनका सेवन हफ्ते में दो से तीन बार किया जा सकता है. 

किन दालों से बनाएं दूरी?

चना, राजमा और काला चना में प्यूरीन की मात्रा 75 से 90 मिलीग्राम तक होती है. इनका सेवन 10 से 15 दिन में एक बार ही करने की सलाह दी जाती है. वहीं सोयाबीन और सोया चंक्स में प्यूरीन की मात्रा सबसे ज्यादा करीब 120 से 140 मिलीग्राम होती है. हाई यूरिक एसिड वालों को इनसे पूरी तरह परहेज करना चाहिए.

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वह दौर जब आम बजट से अलग पेश होता था रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा पर क्यों और कब लगा ब्रेक?

वह दौर जब आम बजट से अलग पेश होता था रेल बजट, 92 साल पुरानी परंपरा पर क्यों और कब लगा ब्रेक?


Railway Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी कि रविवार को देश का आम बजट पेश करेंगी. वित्त मंत्री के रूप में यह उनका लगातार नौवां बजट होगा. सबसे पहले उन्होंने 2019 में बजट पेश किया था. कल पेश होने वाले बजट से देश के हर इंसान, हर सेक्टर, हर वर्ग को काफी उम्मीदें हैं. इस बीच हम आपको बजट से जुड़ी एक पुरानी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अब टूट चुकी है. 

अंग्रेजाें के जमाने में शुरू हुई थी यह प्रथा

हमें यह पता है कि बजट में डिफेंस, हेल्थ, एजुकेशन जैसे कई अलग-अलग सेक्टर शामिल होते हैं. रेल बजट भी इसी में आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि पहले रेल बजट को अलग से पेश किया जाता था. रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा 1924 में अंग्रेजों के जमाने में शुरू हुई थी.

उस दौरान स्पेशल कमेटी की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि रेलवे का बजट काफी महत्वपूर्ण और बड़ा होता है इसलिए उसे सामान्य बजट के तहत संभाला नहीं जा सकता. 1947 में देश के आजाद होने के बाद भी यह परंपरा 92 सालों तक बिना रूके चलती रही. इसके तहत, रेल मंत्री यूनियन बजट से कुछ दिन पहले रेलवे बजट पेश करते थे, जिसमें कमाई, खर्च, किराए और माल ढुलाई दरों का ब्यौरा होता था.

क्यों खत्म हुई दशकों पुरानी परंपरा? 

वित्त वर्ष 2016-17 तक केंद्रीय बजट से पहले रेल बजट अलग से पेश होता था. 2017 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आई और तब से रेलवे बजट को देश के आम बजट में मिल लिया गया. दरअसल, अलग से रेलवे बजट को खत्म करने की मुहिम को 2016 में NITI आयोग के तहत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों के बाद गति मिली.

देबरॉय और अर्थशास्त्री किशोर देसाई द्वारा लिखे गए एक पेपर में समिति ने तर्क दिया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जो अभी भी इस प्रथा का पालन कर रहा था और आधुनिक सार्वजनिक वित्त में अब इसका कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं रह गया. पेपर में फाइनेंशियल मैनेजमेंट को मॉडर्न बनाने और सरकारी खर्च की ज्यादा साफ तस्वीर पेश करने के लिए रेलवे फाइनेंस को यूनियन बजट में शामिल करने की सलाह दी गई थी.

समिति के इस प्रस्ताव पर सरकार के अंदर चर्चा हुई. तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने समिति के प्रस्ताव का समर्थन किया. बाद में वित्त मंत्री अरुण जेटली इस मामले को संसद में ले गए, जिसमें राज्यसभा में भी चर्चा हुई. जेटली ने 2017-18 के लिए पहला इंटीग्रेटेड यूनियन बजट पेश किया, जिससे आधिकारिक तौर पर अलग रेलवे बजट खत्म हो गया. 

इससे क्या हुआ फायदा? 

रेलवे बजट को आम बजट में शामिल करने के कई फायदे भी हुए. सबसे पहले इसकी तैयारी और संसद में इस पर बहस करने में जो समय जाता था, उसकी बचत हुई. इससे रेलवे की तरफ से सरकार को मिलने वाला डिविडेंड खत्म हो गया, जिससे उस पर वित्तीय बोझ कम हुआ.

इसका मकसद ट्रांसपोर्ट सेक्टर, रेलवे, सड़कों और जलमार्गों में बेहतर तालमेल बनाना भी था, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग एक ही यूनिफाइड फ्रेमवर्क के तहत की जा सके. इससे काफी पारदर्शिता भी आई क्योंकि केंद्र सरकार की कमाई और खर्च को अब एक ही डॉक्यूमेंट में दिखाए जाने से संसद और इन्वेस्टर्स के लिए वित्तीय जांच करना आसान हो गया. 

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वजन घटाने वाला इंजेक्शन बन सकता है गॉलब्लैडर निकलवाने की वजह, चौंकाने वाला खुलासा

वजन घटाने वाला इंजेक्शन बन सकता है गॉलब्लैडर निकलवाने की वजह, चौंकाने वाला खुलासा


आज के समय में मोटापा सिर्फ एक सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह कई बीमारियों की जड़ बन चुका है. इसी वजह से लोग तेजी से वजन कम करने के आसान और जल्दी असर दिखाने वाले तरीकों की तलाश में रहते हैं. जिम, डाइट प्लान और योग के साथ-साथ अब वजन घटाने वाले इंजेक्शन लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. वेगोवी (Wegovy) और मौनजारो (Mounjaro) जैसे इंजेक्शन को कई लोग मैजिक सॉल्यूशन मानने लगे हैं, क्योंकि इनसे बिना ज्यादा मेहनत के वजन तेजी से घटने लगता है.

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इनके चमत्कारी नतीजों की खूब चर्चा हो रही है. इसी बीच ब्रिटेन के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाली चेतावनी दी है. उनका कहना है कि तेजी से वजन घटाने वाले इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों में गॉलब्लैडर की समस्या और गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी के मामले बढ़ते दिख रहे हैं. हालांकि अभी पूरी तरह यह साबित नहीं हुआ है कि इसकी वजह सिर्फ इंजेक्शन हैं, लेकिन शुरुआती संकेत चिंता बढ़ाने वाले जरूर हैं. तो आइए जानते हैं कि वजन घटाने वाला इंजेक्शन कैसे गॉलब्लैडर निकलवाने की वजह बन सकता है. 

आखिर वजन घटाने वाले इंजेक्शन होते क्या हैं?

वजन घटाने वाले ये इंजेक्शन दरअसल GLP-1 एगोनिस्ट नाम की दवाएं होती हैं. इनमें वेगोवी और मौनजारो जैसी दवाएं शामिल हैं. ये दवाएं शरीर में भूख को कम करती हैं, पेट को ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस कराती हैं और खाने की मात्रा अपने आप घट जाती है. इसी कारण वजन तेजी से कम होने लगता है. शुरुआत में इन दवाओं को डायबिटीज और मेटाबॉलिक बीमारियों के इलाज के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में इनके वजन घटाने वाले प्रभाव के कारण इन्हें मोटापे के इलाज में भी यूज किया जाने लगा. 

ब्रिटेन में गॉलब्लैडर की सर्जरी क्यों बढ़ रही है?

ब्रिटेन के अस्पतालों में डॉक्टरों ने देखा है कि पिछले कुछ सालों में गॉलब्लैडर की पथरी और गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी के मरीज बढ़े हैं. इनमें से कई मरीज ऐसे हैं जिन्होंने हाल ही में तेजी से वजन घटाया था. खासकर वजन घटाने वाले इंजेक्शनों की मदद से, डॉक्टरों का कहना है कि भले ही अभी कोई सीधा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन एक स्पष्ट पैटर्न जरूर दिख रहा है, जिस पर और रिसर्च की जरूरत है. 

तेजी से वजन घटने से गॉलब्लैडर पर क्या असर पड़ता है?

जब शरीर का वजन बहुत तेजी से कम होता है, तो शरीर में कई अंदरूनी बदलाव होते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से वजन घटने पर लीवर पित्त (bile) में ज्यादा कोलेस्ट्रॉल छोड़ने लगता है. इससे पित्त गाढ़ा हो सकता है. गाढ़े पित्त से पित्त की पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है.पित्त की पथरी ही गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी की सबसे आम वजह होती है. 

गॉलब्लैडर की बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है?

गॉलब्लैडर की समस्या कोई छोटी बात नहीं है. इसके लक्षणों में  पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, उल्टी और मतली, खाना पचाने में दिक्कत, बार-बार पेट खराब होना शामिल हैं कई मामलों में दवाइयों से आराम नहीं मिलता और गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी ही आखिरी विकल्प बचता है. हालांकि लोग बिना गॉलब्लैडर के भी सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन यह एक बड़ी सर्जरी होती है, जिसमें रिकवरी में समय लगता है, खर्च होता है और कुछ लोगों को लंबे समय तक पाचन की दिक्कत रहती है. 

ब्रिटेन की नियामक एजेंसी क्या कहती है?

ब्रिटेन की मेडिसिन्स एंड हेल्थ केयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (MHRA) इन वजन घटाने वाले इंजेक्शनों की सुरक्षा पर नजर बनाए हुए है. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इन इंजेक्शनों से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, गॉलब्लैडर से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं, कुछ मामलों में डॉक्टर की मदद जरूरी हो सकती है. हालांकि एजेंसी यह भी मानती है कि कई लोग बिना किसी गंभीर साइड इफेक्ट के इन इंजेक्शनों का यूज कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय के असर को समझने के लिए और शोध जरूरी है. 

वजन घटाने वाला इंजेक्शन लेने से पहले क्या ध्यान रखें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि इंजेक्शन शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूरी सलाह जरूर लें. इसके संभावित दुष्प्रभावों, खासकर गॉलब्लैडर से जुड़े जोखिमों को समझें. अगर संभव हो तो धीरे-धीरे वजन घटाने पर ध्यान दें.वजन घटाने के दौरान नियमित जांच करवाते रहें.किसी भी तरह के दर्द या परेशानी को नजरअंदाज न करें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें 

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सुबह उठते ही आने लगती है छींक तो हो जाएं अलर्ट, इस बीमारी के हो सकते हैं लक्षण

सुबह उठते ही आने लगती है छींक तो हो जाएं अलर्ट, इस बीमारी के हो सकते हैं लक्षण


सुबह की शुरुआत आमतौर पर ताजगी, चाय की खुशबू और नए दिन की उम्मीद से होती है. लेकिन कुछ लोगों के लिए सुबह का मतलब होता है, लगातार छींकें, बहती नाक और रुमाल की तलाश. आंख खुलते ही छीं-छीं की आवाजें आने लगती हैं और समझ नहीं आता कि आखिर हुआ क्या. अक्सर हम सोचते हैं कि शायद रात में ठंड लग गई होगी या हल्का सा जुकाम हो गया है. लेकिन जब यही समस्या रोज होने लगे और दिन चढ़ते-चढ़ते अपने आप ठीक भी हो जाए, तो सवाल उठता है क्या ये सिर्फ ठंड है या शरीर किसी बड़ी समस्या की ओर इशारा कर रहा है. 

सुबह उठते ही बार-बार छींक आना एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है. बहुत से लोग इसे हल्के में लेते हैं, जबकि यह एलर्जी, साइनस या नाक से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है. अच्छी बात यह है कि समय रहते इसके कारण समझ लिए जाएं, तो इससे आसानी से राहत पाई जा सकती है. आइए जानते हैं कि सुबह छींक क्यों आती है, इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं, किन बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं और इससे बचाव कैसे किया जाए. 

सुबह उठते ही छींक क्यों आती है?

1. प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र – छींक आना हमारे शरीर का एक प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र है. जब नाक के अंदर कोई चीज जैसे धूल, गंदगी, तेज गंध या ठंडी हवा जाती है, तो शरीर छींक के जरिए उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है. 

2. आपका बिस्तर ही बन सकता है समस्या की जड़ – जिस बिस्तर पर आप सुकून की नींद लेते हैं, वही कभी-कभी छींक की वजह बन जाता है. गद्दे, तकिये और चादरों में बहुत बारीक धूल के कण (डस्ट माइट्स) होते हैं, जो हमें दिखाई नहीं देते, ये कण रात भर बिस्तर में जमा रहते हैं. सुबह जैसे ही आप करवट बदलते हैं या उठते हैं, ये धूल हवा में उड़ जाती है और आपकी नाक में चली जाती है. नाक इसे खतरा समझकर तुरंत प्रतिक्रिया देती है और छींकें शुरू हो जाती हैं. 

3. कमरे में जमा एलर्जी फैलाने वाली चीजें – अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो उनके बाल भी बिस्तर और कमरे में जमा हो सकते हैं. खुली खिड़की से परागकण (पोलन), धूल और बाहर की गंदगी रात भर कमरे में आ जाती है. सुबह उठते ही जब आपकी नाक इन सबके संपर्क में आती है, तो वह जरूरत से ज्यादा रिएक्शन कर बैठती है. 

4. तापमान में अचानक बदलाव – रात में आप रजाई या कंबल के अंदर गर्म माहौल में होते हैं. सुबह उठते ही पंखा, एसी या ठंडी हवा से सामना होता है. यह अचानक तापमान बदलना नाक की संवेदनशील त्वचा को परेशान करता है और छींक आने लगती है. इसे एलर्जी नहीं बल्कि नाक की संवेदनशील प्रतिक्रिया भी कहा जा सकता है. 

5. तेज खुशबू और केमिकल्स – कुछ लोग रात में तेज परफ्यूम लगाते हैं, मच्छर भगाने वाली मशीन चलती रहती है या नया डिटर्जेंट इस्तेमाल किया जाता है. बंद कमरे में ये गंध रात भर जमा हो जाती है और सुबह नाक में जलन पैदा करती है. 

6. पेट की गड़बड़ी भी हो सकती है कारण – कई बार रात में एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है. इससे पेट का एसिड गले और नाक के पीछे के हिस्से को परेशान करता है. इसके कारण सुबह छींक और हल्की खांसी होने लगती है. 

सुबह छींक आना किन बीमारियों का संकेत हो सकता है?

1. एलर्जिक राइनाइटिस – यह सबसे आम कारण है. इसमें शरीर धूल, पराग या जानवरों के बालों को दुश्मन समझ कर प्रतिक्रिया करता है. इसके लक्षण सुबह लगातार छींक आना, नाक बहना या बंद होना, आंखों में खुजली या पानी, गले में खराश होना. 

2. साइनसाइटिस – अगर छींक के साथ सिरदर्द, चेहरे पर दबाव या नाक भारी लगे, तो यह साइनस की समस्या हो सकती है. 

3. फीवर – मौसमी एलर्जी जिसमें नाक, आंख और गले में जलन होती है. 

रोज सुबह छींक आए तो क्या करें

1. बिस्तर और कमरे की सफाई करें. चादर और तकिए के कवर हर हफ्ते गर्म पानी में धोएं. भारी पर्दे और कालीन हटाएं. सूखे झाड़ू के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें.

2. जल्दी-जल्दी न उठें, पहले कुछ मिनट बैठें, उठते ही गुनगुने पानी से चेहरा धोएं और एक गिलास सादा पानी पिएं. 

3. नमक मिले गुनगुने पानी से नाक साफ करना फायदेमंद है. 

4. कमरे में धूल कम रखें, पालतू जानवरों को बिस्तर से दूर रखें, जरूरत हो तो एयर प्यूरीफायर का यूज करें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें 

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Kerala Tourism Minister Riyas says inclusive tourism is a shared responsibility

Kerala Tourism Minister Riyas says inclusive tourism is a shared responsibility


Kerala Tourism Minister P A Mohammed Riyas speaks at the opening session of the two-day Kerala for All Conclave, a knowledge conclave on inclusive and accessible tourism, organised jointly by Kerala Tourism and The Hindu in Kochi on Saturday, January 31, 2026.
| Photo Credit:
THULASI KAKKAT

Kerala Tourism Minister P A Mohammed Riyas on Saturday said that inclusive and accessible tourism is not a special service for a few, but a shared responsibility of governments, industry, stakeholders, communities and citizens.

Inaugurating the two-day Kerala for All Conclave, a knowledge conclave on inclusive and accessible tourism organised by The Hindu Group in association with Kerala Tourism in Kochi, the Minister said the State had taken the first step in this direction by drafting a design policy— a first-of-its-kind initiative in India.

Taking a cue from Kerala’s initiative, several other States are now coming up with similar design policies, reflecting the growing acceptance and necessity of inclusive planning across the country, he said.

Emphasising that inclusive tourism enhances the quality of life for both visitors and host communities, Riyas underscored the need for strong policy support, robust regulatory frameworks and the smart use of technology, including assistive applications and digital guides, to accelerate the transformation.

Stressing the importance of removing physical, social, informational and attitudinal barriers, the Minister said the right to travel safely, comfortably and with dignity belongs to everyone. Accessibility, he noted, is not limited to persons with disabilities alone, but also benefits senior citizens, families with young children, people with temporary injuries and all travellers. Barrier-free infrastructure such as ramps, lifts, accessible toilets and well-designed public spaces makes destinations safer and more comfortable for all.

He also highlighted the need for clear and easy-to-understand signage, accessible information and digitally inclusive platforms to enhance the travel experience. However, infrastructure alone is insufficient, he said, pointing out that trained and sensitised tourism personnel play a critical role in creating inclusive hospitality environments. Inclusive tourism, he added, is built on universal design principles that ensure facilities and services are usable by everyone without the need for special adaptation.

Accessible transportation, inclusive accommodation and culturally sensitive services are essential for a seamless tourism experience, the Minister said, adding that inclusive tourism must also embrace cultural, linguistic and economic diversity. Community participation, he noted, is the backbone of successful inclusive tourism, making it more meaningful, sustainable and socially inclusive.

The Tourism Department has initiated a project in the Beypore constituency to develop it as a fully disabled-friendly constituency, in association with a specialised agency. The initiative is committed to ensuring accessibility for all.

Riyas said the collaboration between Kerala Tourism and The Hindu Group would open a new chapter in making travel and related experiences more democratic and inclusive.

Kerala Tourism Director S Sikha Surendran was present at the event. The Hindu Editor Suresh Nambath welcomed the gathering.

Published on January 31, 2026



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