Latent View Analytics to invest USD 3 million in Healtheon AI Inc.
Disclaimer: No Business Standard Journalist was involved in creation of this content
First Published: Apr 02 2026 | 9:50 AM IST
Disclaimer: No Business Standard Journalist was involved in creation of this content
First Published: Apr 02 2026 | 9:50 AM IST
सबसे जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से जुड़े रहें. चाहे वह हार्ट स्पेशलिस्ट (कार्डियोलॉजिस्ट) हो या आपका सामान्य डॉक्टर अपने लक्षण छुपाएं नहीं, आजकल दिल की बीमारी के लिए कई तरह के इलाज मौजूद हैं जैसे दवाइयां, विशेष मशीनें (जैसे ICD), और अन्य आधुनिक तरीके. सही समय पर इलाज शुरू करने से आपकी स्थिति काफी बेहतर हो सकती है.

बीमारी की असली वजह को समझें. सिर्फ लक्षणों को दबाना काफी नहीं है, बल्कि यह जानना जरूरी है कि दिल कमजोर क्यों हुआ. कई बार इसके पीछे कारण हो सकते हैं. जैसे थायराइड की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज. अगर इन बीमारियों को कंट्रोल कर लिया जाए, तो दिल पर दबाव कम होता है और आपकी सेहत में सुधार आने लगता है.
Published at : 02 Apr 2026 09:44 AM (IST)
MS Dhoni has reignited hopes of an early comeback in IPL 2026 after being spotted in the nets, just days after Chennai Super Kings confirmed he would miss two weeks with a calf strain. While the franchise has not officially revised its medical timeline, visuals of Dhoni batting in Chennai have triggered speculation over whether the veteran could return sooner than expected, possibly as early as CSK’s next fixture. The development comes at a critical juncture for CSK, who are looking to recover from an underwhelming start to their campaign. Dhoni’s presence in training, even in a controlled environment, is being viewed as a positive sign of recovery, though questions remain around his match fitness.
– Thala has started his practice for his return to IPL 2026. pic.twitter.com/YKxhH7sdNM
— Johns. (@CricCrazyJohns) April 2, 2026
Videos circulating on social media show Dhoni walking out with his kit bag and facing deliveries during a net session. The 44-year-old appeared to be batting with ease, playing a mix of defensive strokes and lofted shots, including a few trademark sixes.
However, the session did not reflect full-intensity match simulation. Observers noted that Dhoni was easing into his shots, focusing on timing rather than power, which typically indicates a phased return following injury rehabilitation.
The timing of the videos, which surfaced on April 1, has also led to mixed reactions among fans, with some questioning their recency. Despite the buzz, CSK have maintained silence on any change in the original recovery timeline.
CSK’s dependence on Dhoni was evident in their opening defeat to Rajasthan Royals. Batting first on a challenging surface, CSK were restricted to 127, failing to build partnerships or accelerate in the death overs.
The absence of an experienced finisher stood out, with the middle order struggling to manage pressure situations. While Jamie Overton’s 43 provided some resistance, the innings lacked the composure typically associated with Dhoni’s presence.
Beyond his batting, Dhoni’s influence in reading match situations and guiding younger players remains a key component of CSK’s setup. His absence not only weakens the lower order but also impacts on-field decision-making in crunch moments.
Attention has now shifted to CSK’s upcoming match against Punjab Kings on April 3. The possibility of Dhoni featuring in that game has become a major talking point, especially after his return to training.
An early comeback would provide immediate balance to CSK’s lineup, particularly in the finishing role. However, team management is expected to remain cautious, given the nature of calf injuries and the risk of aggravation.
From a strategic standpoint, rushing Dhoni back could offer short-term gains but may compromise his availability later in the tournament. CSK have historically managed senior players conservatively, prioritising long-term impact over immediate returns.
Dhoni’s IPL record underlines why his return is so significant. With over 5400 runs in the league at an average above 38 and a strike rate exceeding 137, he remains one of the most reliable finishers in T20 cricket.
Yet, at this stage of his career, workload management is equally crucial. Even if declared fit, CSK could consider using him in a limited role initially, potentially as a specialist batter.
The current situation reflects a familiar CSK approach, where experience is leveraged carefully to maximise impact across the tournament rather than in isolated games.
Despite the growing speculation, there has been no official word from CSK regarding Dhoni’s availability for the next match. The franchise’s earlier statement clearly indicated a two-week recovery period, and any deviation from that would require medical clearance.
For now, Dhoni’s return to the nets serves as an encouraging update rather than a confirmed comeback.
प्रेग्नेंसी हर महिला के जीवन का एक खास समय होता है, इस दौरान मां और बच्चे दोनों की सेहत का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, ज्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि उनकी डिलीवरी नॉर्मल हो, क्योकि अक्सर महिलाओं का मानना होता है कि सी-सेक्शन के मुकाबले नॉर्मल डिलीवरी के बाद रिकवरी जल्दी होती है, ऐसे मे अगर आप भी गर्भवती हैं और नॉर्मल डिलीवरी की इच्छा रखती हैं, तो इसके लिए सिर्फ किस्मत नहीं बल्कि सही आदतें और देखभाल भी बहुत जरूरी होती है, आपको अपनी डेली रूटीन में कुछ जरूरी आदतों को शामिल करना होगा, क्योंकि इससे आपको नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ाने में मदद मिलेगी. अगर गर्भावस्था के दौरान कुछ अच्छी आदतें अपना ली जाएं, तो नॉर्मल डिलीवरी के चांस काफी बढ़ जाता है, आइए जानते हैं ऐसी 5 जरूरी आदतों के बारे में.
यह भी पढ़ेंः दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में! लैंसेट की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, जानें पूरा मामला
प्रेग्नेंसी में हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है, जैसे महिलाओं को दिन की शुरुआत से ही ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए, साथ ही वॉक करना, प्रेग्नेंसी योग या स्ट्रेचिंग करना इससे शरीर एक्टिव रहता है और शरीर, मन दोनों को शांत करने में मदद करता है साथ ही डिलीवरी के समय ज्यादा ताकत मिलती है, ध्यान रखें कि कोई भी एक्सरसाइज करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपनी डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए, नॉर्मल डिलीवरी के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है, अपनी डाइट में हल्का और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शामिल करें जैसे हरी सब्जियां, फल, दूध, दाल और प्रोटीन वाली चीजें, इसके अलावा मसालेदार, जंक फूड और तला-भुने खाने से परहेज करना बेहतर होता है. ताकि पाचन सही बना रहे और सही पोषण से मां और बच्चे दोनों स्वस्थ रहते हैं.
यह भी पढ़ेंः दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में! लैंसेट की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, जानें पूरा मामला
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, ऐसा करने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कई समस्याओं से बचाव होता है, दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं, साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान पेट मे अनपच की समस्या आम होती है, ऐसे मे भरपूर मात्रा मे पानी पिने से गैस कि भारी समस्या से भी राहत मिलती है.
अकसर गर्भावस्था के दौरान मां डिलीवरी के बारे मे सोचती रहती है जिसकी वजह से वो तनाव मे रहती है साथ ही डिलीवरी तनाव का असर सीधे मां और बच्चे दोनों पर पड़ता है, इसलिए कोशिश करना चाहिए कि खुश रहें,हमेशा पॉजिटिव सोच रखें और ज्यादा चिंता न करें, ज्यादा सोचना आपके सेहत पर असर कर सकता है. इससे बचने के लिए म्यूजिक सुनना, मेडिटेशन करना या परिवार के साथ समय बिताना चाहिए जो तनाव कम करने में मदद करता है.
यह भी पढ़ेंः सावधान! 30 की उम्र पार करते ही ‘बूढ़ा’ होने लगा आपका दिल, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?
अक्सर काफी महीलाएं घर के काम काज के वजह से डॉक्टर से चेकअप कराने नही जा पाती ऐसे मे आपको बता दे की प्रेग्नेंसी के दौरान समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराना बहुत जरूरी है, इससे बच्चे की ग्रोथ और मां की सेहत का पता चलता रहता है, और डिलीवरी का अनुमान भी लगता है, साथ ही अगर कोई समस्या हो तो समय रहते इलाज किया जा सकता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
यह भी पढ़ेंः चेकअप में सबकुछ नॉर्मल, फिर भी दिनभर रहती है सुस्ती और थकान? जानें दिक्कत की असली वजह
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
आज के समय में हार्ट अटैक एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है, वही अक्सर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक अचानक आता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा शरीर कई हफ्तों पहले ही इसके संकेत देने लगता है, अक्सर इन लक्षणों कोहल्केमें लेने या नजरअंदाज करने की वजह से बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है. वही वैश्विक अनुमानों को अनुसार हृदय रोग आज भी सबसे बड़ा जानलेवा रोग बना हुआ है, दिल से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं, जिससे हर साल लगभग 1.8 करोड़ मौतें होती हैं.
तो क्या आपका शरीर वाकई दिल का दौरा पड़ने से हफ़्तों पहले चेतावनी दे सकता है? कई मामलों में, हां. स्ट्रक्चरल हार्ट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. विवेक कुमार कहते हैं कि लक्षण कई दिन या हफ़्तों पहले भी दिख सकते हैं, लेकिन वे हमेशा गंभीर नहीं होते, यह एक अजीब तरह की थकान हो सकती है जो दूर नहीं होती, या सीने में हल्का दबाव जो आता-जाता रहता है. साथ ही कुछ लोगों को रोज़मर्रा के काम करते समय सांस फूलने लगती है, और कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें कुछ भी महसूस नहीं होता.
रिपोर्ट में हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हार्ट अटैक आने से पहले शरीर कुछ चेतावनी संकेत देता है, लेकिन लोग इन्हें सामान्य थकान या गैस समझकर इग्नोर कर देते हैं, जो आगे चल कर खतरनाक हो सकता है इसलिए अगर शरीर बार-बार कोई संकेत दे रहा है, तो उसे हल्के में लेना सही नहीं है तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहीए.
दिल का दौरा पड़ने के कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो वास्तव में दौरा पड़ने से कई दिन या सप्ताह पहले दिखाई दे सकते हैं . इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. विनीत भाटिया बताते है कि शुरुआती लक्षणों में ज्यादातर हल्के सीने में दर्द या दबाव, असामान्य थकान, सांस लेने में तकलीफ, अपच जैसी बेचैनी और जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलने वाला दर्द शामिल होता है, इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत होना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना और चक्कर आना एक सुरुआती संकेत है , कई मरीज बाद में बताते हैं कि उन्होंने थकान को नजरअंदाज कर दिया या सीने की तकलीफ को गैस समझकर अनदेखा कर दिया था. जो की आगे चल कर एक दर्द नाक हार्ट अटैक का कारण बन जाता है.
डॉ. विवेक कुमार बताते है की पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जहां पुरुषों में सीने में दर्द एक सबसे आम लक्षण होता है, वहीं महिलाओं में सीने में तेज दर्द के बजाय थकान, मतली, या सांस फूलने जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं , इसी कारण महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा पहचानना थोड़ा ज्यादा मुश्किल हो जाता है.
यह संभव है कि सामान्य जांच के नतीजे नेगेटिव आ सकते है, जैसे ईसीजी में हृदय की लय में कोई समस्या न दिखाइ दे, और रक्त परीक्षण के परिणाम सामान्य हों, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई बार सामान्य मेडिकल टेस्ट भी हार्ट अटैक के खतरे को नहीं पहचान पाते, छिपे हुए जोखिम अप्रत्याशित रूप से उत्पन्न हो सकते हैं और तत्काल दिल का दौरा पड़ सकता है, इसलिए शुरुआती जांच के नतीजों की परवाह किए बिना किसी भी लक्षण को कभी भी नज़रअंदाज़ न करे.
पहनने योग्य स्मार्टवॉच और हेल्थ ट्रैकिंग डिवाइस आपकी हृदय गति को ट्रैक करने और उसमें होने वाली अनियमितताओं का पता लगाने में सक्षम होतो है, जिससे आपके हृदय की स्थिति के बारे में, ऑक्सीजन लेवल और अन्य संकेतों को मॉनिटर करने में मदद मिलती है, हालांकि, ये उपकरण दिल के दौरे को रोकने में सक्षम नहीं होते हैं, बल्की शुरुआती बदलावों को पकड़ने में सहायक हो सकते हैं, जिससे समय रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है
यदि किसी व्यक्ति को कुछ मिनटों से अधिक समय तक सीने में तकलीफ महसूस हो या सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक पसीना आना, बार-बार यह तकलीफ हो, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सहायता लेनी चाहिए, मुश्किल बात यह है कि ये लक्षण हमेशा जरूरी नहीं लगते, लेकिन अगर कुछ गड़बड़ लगे और बार-बार हो, तो ध्यान देना जरूरी है, समय पर इलाज से बड़ी समस्या को रोका जा सकता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator