Gold rises over 1% to ₹1.51 lakh/10g in futures trade

Gold rises over 1% to ₹1.51 lakh/10g in futures trade


Gold prices rose over 1 per cent to ₹1.51 lakh per 10 grams in futures trade on Monday amid escalating geopolitical tensions in West Asia.

On the Multi Commodity Exchange, the yellow metal for June delivery climbed ₹1,621, or 1.08 per cent, to ₹1,51,301 per 10 grams, from Thursday’s closing level of ₹1,49,680 per 10 grams.

Commodity markets were closed on Friday due to Good Friday.

Since the onset of the conflict in West Asia, gold has lost its sheen by ₹14,358, or nearly 9 per cent, from ₹1,65,659 per 10 grams recorded on February 27, 2026.

In overseas markets, gold futures for June contract gained $47.55, or 1.02 per cent, to $4,727.25 per ounce.

According to analysts, market sentiment remained volatile after US President Donald Trump said he would bring “hell” to Iran and set a new deadline for Tuesday for the opening of the Strait of Hormuz.

Tehran has rejected the latest ultimatum and continued to carry out attacks on energy assets across West Asia.

Meanwhile, gold has struggled to perform its safe-haven role amid rising crude prices and expectations of tighter monetary policy by global central banks, analysts said.

“Gold remains down roughly 12 per cent since the conflict began, as surging energy prices fuelled inflation concerns and strengthened expectations of interest rate hikes,” Jigar Trivedi, Senior Research Analyst at IndusInd Securities, said.

He added that forced liquidations in precious metals to cover losses in other markets also weighed on prices.

Investors are now keeping a close watch on the geopolitical situation, and awaiting US macroeconomic data such as GDP numbers and CPI readings for further direction, Renisha Chainani, Head of Research at Augmont, said.

Traders will also closely watch the US Fed Reserve’s Federal Open Market Committee (FOMC) meeting minutes for signals on the interest rate cycle, she added.

On the outlook, Chainani expected gold prices to trade in the range of ₹1.44-1.54 lakh in the domestic markets this week.

Published on April 6, 2026



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Yes Bank names Vinay Muralidhar Tonse as MD & CEO

Yes Bank names Vinay Muralidhar Tonse as MD & CEO


Vinay Muralidhar Tonse has taken charge as Managing Director & Chief Executive Officer of YES Bank
| Photo Credit:
Balakrishnan K 4279@Chennai

Vinay Muralidhar Tonse has taken charge as Managing Director & Chief Executive Officer of YES Bank Ltd (YBL) with effect from April 6, 2026 for three years.

Tonse’s appointment follows Prashant Kumar demitting office as the MD & CEO of YBL on April 5, 2026.

Tonse, a 1988-batch Probationary Officer from SBI, last held the position of Managing Director (Retail Business and Operations) at India’s largest bank from November 2023 till November 2025.

Kumar, ex-Deputy Managing Director and CFO of SBI, first joined YBL as an Administrator in early March 2020. Later that month, he was appointed as MD & CEO following its reconstruction, which then entailed equity infusion of ₹10,000 crore from SBI and other domestic financial institutions.

Published on April 6, 2026



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UCO Bank records 19% rise in loan growth in Q4

UCO Bank records 19% rise in loan growth in Q4


State-owned UCO Bank on Monday reported a 19 per cent credit growth at ₹2.62 lakh crore in the January-March quarter of FY26.

Total advances were at ₹2.20 lakh crore in the year-ago quarter that ended in March 2025, UCO Bank said in a regulatory filing.

The Kolkata-based lender reported an 11 per cent rise in total deposits at ₹3.27 lakh crore during the reporting quarter, as against ₹2.94 lakh crore registered at the end of the fourth quarter of the preceding financial year.

During the period under review, low-cost CASA deposits improved to 38.48 per cent as compared to 37.91 per cent of total deposits in the fourth quarter of the preceding financial year, it said.

The bank’s total business (advances and deposits) increased by 15 per cent to ₹5.89 lakh crore from ₹5.14 lakh crore at the end of March 2025.

The government holds 90.95 per cent equity shares in the bank as of March 31, 2026.

Published on April 6, 2026



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ICICI प्रूडेंशियल: म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका, एक ही स्कीम में पाएं ग्रोथ-डेट की सुरक्षा

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ईरान वॉर: डबल डिजिट में कमाई पर लगा ‘ग्रहण’, कैसे 0 का कच्चा तेल चकनाचूर करेगा आपका ख्वाब?

ईरान वॉर: डबल डिजिट में कमाई पर लगा ‘ग्रहण’, कैसे $110 का कच्चा तेल चकनाचूर करेगा आपका ख्वाब?


Iran-Israel War: कच्चे तेल की कीमत का 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और ईरान में बढ़ता तनाव भारतीय इकोनॉमी के साथ-साथ India Inc. के लिए भी किसी अलर्ट से कम नहीं है. इससे कारोबारी साल 2026-27 के लिए कॉर्पोरेट कमाई में डबल-डिजिट (Double digit) ग्रोथ का सपना सिंगल डिजिट में सिमट सकता है. FY26 की चौथी तिमाही के लिए कंपनियों ने अपने नतीजे का ऐलान करना शुरू कर दिया है.

कमाई में जबरदस्त कटौती की आशंका

IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) भी 9 अप्रैल को अपने नतीजे घोषित करेगी. जिस तिमाही से India Inc. की रिकवरी की राह पक्की होने की उम्मीद थी, उसी दौरान सभी सेक्टरों में मुनाफे की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.  

Geojit Investments Limited के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. V K Vijayakumar चेतावनी देते हुए कहते हैं, “अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और गैस की उपलब्धता पर पाबंदियां जारी रहती हैं, तो कमाई में कटौती का एक और दौर आना तय है.” “कमाई में कटौती उन सेक्टरों में होगी, जो ज्यादा आयात पर निर्भर हैं और कच्चे तेल से जुड़े हैं.”

क्या है India Inc.? 

India Inc. देश के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला टर्म है. इसमें सरकारी के साथ रिलायंस, अडानी और टाटा जैसे बड़े बिजनेस घरानों के अलावा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी आती है. इनका देश की नॉमिनल जीडीपी में लगभग 60 परसेंट का योगदान होता है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, बिजनेस सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टर्स आते हैं.

India Inc. के लिए खतरे की घंटी

  • कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी, तो इसका पेंट, लुब्रिकेंट्स, प्लास्टिक और केमिकल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन पर बेस्ड इन प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन का कॉस्ट बढ़ेगा. इससे कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटेगा क्योंकि बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट का बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है. 
  • तेल महंगा होगा, तो ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ेगा. इससे चौतरफा महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ेगी, तो लोगों के खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी. इससे FMCG और ऑटो जैसे सेक्टरों में डिमांड कम होगी.
  • एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर पर बनी रहती है, तो इससे भारत की GDP 6 परसेंट के नीचे गिर सकती है, जिसके पहले 7 परसेंट के ऊपर बने रहने का अनुमान लगाया गया था. 
  • जंग ज्यादा लंबे समय तक खींचने पर Nifty-50 में शामिल कंपनियों की कमाई 4 परसेंट तक गिर सकती है. 

किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो मूल रूप से एनर्जी-बेस्ड हैं. विजयकुमार बताते हैं, “पेंट्स, एडहेसिव और टायर्स जैसे पेट्रोलियम इनपुट का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर इसका असर पड़ेगा. विट्रिफाइड टाइल्स जैसे उत्पादों के निर्माण में LNG को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं को तो भारी नुकसान हुआ है.”

वह आगे कहते हैं कि इस असर की सबसे ज्यादा तीव्रता Q4 के बजाय FY27 की पहली तिमाही (Q1) में महसूस की जाएगी.  Swastika Investmart में रिसर्च हेड संतोष मीना कहते हैं, ”सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर वे हैं जिनमें ऊर्जा की खपत ज़्यादा होती है—जैसे कि फर्टिलाइजर, केमिकल, सिरेमिक, पेंट, कांच और टायर, जिन्हें LPG/LNG की भारी कमी, प्लांट बंद होने और इनपुट लागत में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण मार्जिन पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. ऑटो और एविएशन सेक्टर भी इसी तरह उत्पादन में रुकावटों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर मुनाफा कम हो रहा है और ग्राहकों की मांग घट रही है.

IT सेवाओं के लिए उम्मीद है कि वित्त वर्ष का अंत धीमा रहेगा, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण ऑडर्स के पूरे होने में देरी हो रही है.  इनके अलावा, तेल विपणन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रत्न व आभूषण जैसे निर्यात-प्रधान सेक्टर भी व्यापक मंदी का सामना कर रहे हैं.  इसके विपरीत, अपस्ट्रीम और रक्षा क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं.

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अमीर और अमीर, गरीब और गरीब! देश के 1688 रईसजादों के पास है 50% GDP के बराबर दौलत

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India Wealth Inequality Report 2026: देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनुसार, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास लगभग 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो कुल जीडीपी का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है. जानिए इस रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

क्या कहती है रिपोर्ट?

देश में पैसों को लेकर इस असमानता पर बड़ी बात कही गई है. रिपोर्ट में इशारा किया गया है कि मौजूदा हालात किसी हद तक औपनिवेशिक समय वाली असमानता की याद दिला रहे हैं. रिपोर्ट में इस स्थिति को संतुलित करने के लिए सुझाव भी दिए गए है. 

देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर जारी ‘Wealth Tracker India 2026’ रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है. जिसे सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी ने ‘Tax the Top’ अभियान के साथ 1 अप्रैल 2026 को जारी किया है.

रिपोर्ट बताती है कि 2019 से 2025 के बीच ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ. जबकि निचले तबके की हिस्सेदारी में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला.

आंकड़ों से समझिए पूरा गणित

आंकड़ों की बात करें तो, देश के टॉप 1 प्रतिशत लोगों के पास 40 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति है. वहीं निचले 50 फीसदी लोग कुल आय के सिर्फ 15 प्रतिशत हिस्से पर निर्भर हैं.

इसी दौरान 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति रखने वालों की संख्या 77 प्रतिशत से बढ़ी है. जबकि उनकी कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जो करीब 227 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है. 

अमीर हो रहे और अमीर

बीते कुछ सालों में देश के सबसे अमीर परिवारों की दौलत में तेज उछाल देखने को मिला है. मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की कुल संपत्ति 2019 से 2025 के बीच करीब 400 प्रतिशत तक बढ़ गई है.

आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान मुकेश अंबानी की संपत्ति में लगभग 153 प्रतिशत का इजाफा हुआ. जबकि गौतम अडानी की दौलत 625 फीसदी तक बढ़ी. इन पांचों परिवारों की कुल संपत्ति 2019 में करीब 6.68 लाख करोड़ रुपये थी. जो 2025 तक बढ़कर लगभग 26.54 लाख करोड़ रुपये हो गई है. 

अमीरों पर टैक्स से बढ़ सकती है सरकार की कमाई

रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि बेहद अमीर लोगों पर progressive वेल्थ टैक्स लागू करने से सरकार की इनकम में बड़ा इजाफा हो सकता है. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के मुताबिक, 1,688 सबसे धनी परिवारों पर 2 से 6 प्रतिशत तक का टैक्स और साथ में एक-तिहाई इनहेरिटेंस टैक्स लगाया जाए, तो हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं.

इन पैसों का उपयोग सामाजिक योजनाओं पर किया जा सकता है. जिससे गरीब परिवारों तक पहले की तुलना में ज्यादा मदद पहुंचेगी. जिससे दोनों वर्गों के बीच असमानता को कम करने में मदद मिलेगी.  

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