यूएस-ईरान तनाव के बीच खुला एक और फ्रंट, ड्रैगन के सीधे एक्शन ने बढ़ा दी इस देश की टेंशन

यूएस-ईरान तनाव के बीच खुला एक और फ्रंट, ड्रैगन के सीधे एक्शन ने बढ़ा दी इस देश की टेंशन


China Japan Tensions: पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ा है. मिडिल ईस्ट और Ukraine युद्ध के बाद अब अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव और एशिया में नई खींचतान देखने को मिल रही है. ताजा घटनाक्रम में China और Japan के बीच तनाव बढ़ गया है, जहां बीजिंग ने जापान की 40 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है. चीन का आरोप है कि ये कंपनियां जापान की सैन्य क्षमताओं को दोबारा मजबूत करने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हैं.

तनाव उस समय और बढ़ा जब जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कदम उठाता है तो टोक्यो हस्तक्षेप पर विचार कर सकता है. चीन लंबे समय से Taiwan को अपना हिस्सा बताता रहा है और इस मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है.

चीन-जापान में ठनी

इसके बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने जापान की 20 कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में डाल दिया, जबकि 20 अन्य कंपनियों को अलग वॉच लिस्ट में रखा गया है. एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल कंपनियां अब चीन से ‘ड्यूल यूज’ (दोहरे इस्तेमाल वाले) सामान का आयात नहीं कर पाएंगी. ड्यूल यूज वस्तुएं वे होती हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.

इस कार्रवाई की जद में कई बड़ी जापानी कंपनियां आई हैं, जिनमें Mitsubishi Heavy Industries (जहाज निर्माण, लड़ाकू विमान इंजन और समुद्री मशीनरी), Kawasaki Heavy Industries और Fujitsu जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल बताई जा रही हैं. चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इन कंपनियों को चीन में कार्यरत विदेशी संस्थाओं से भी ड्यूल यूज सामान की आपूर्ति पर प्रतिबंध रहेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक व कूटनीतिक संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है.

बीजिंग के एक्शन से टेंशन

Ministry of Commerce of the People’s Republic of China ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट कहा है कि दोहरे इस्तेमाल (ड्यूल-यूज़) वाले सामानों से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, यदि उसका संबंध सैन्य उपयोग से हो सकता है. मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जिन 20 कंपनियों को वॉच लिस्ट में रखा गया है, उनके संदर्भ में चीन ने अतिरिक्त निगरानी तंत्र लागू किया है.

अब चीन से इन कंपनियों को निर्यात करने वाले किसी भी आपूर्तिकर्ता को पहले एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा. इसके साथ एक विस्तृत रिस्क मैनेजमेंट रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित सामान का उपयोग किस उद्देश्य से होगा. साथ ही एक औपचारिक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) भी देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह आश्वासन देना होगा कि ड्यूल-यूज़ सामान का इस्तेमाल Japan की सैन्य गतिविधियों में नहीं किया जाएगा. विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल व्यापारिक नियंत्रण नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है, जिससे China क्षेत्रीय सुरक्षा और ताइवान मुद्दे पर अपने रुख को सख्ती से लागू करना चाहता है.

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शुरुआती तेजी गंवा मामूली बढ़त के साथ बंद बाजार, गिरे RIL-SBI शेयर, जानें कल की मार्केट की चाल

शुरुआती तेजी गंवा मामूली बढ़त के साथ बंद बाजार, गिरे RIL-SBI शेयर, जानें कल की मार्केट की चाल


Stock Market News: शेयर बाजार ने बुधवार को आईटी शेयरों में मजबूती के दम पर शानदार शुरुआत की, लेकिन दिन चढ़ने के साथ भारी-भरकम शेयरों में मुनाफावसूली के कारण बढ़त सीमित हो गई. बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक BSE Sensex 50.15 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 82,276.07 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह एक समय 731.99 अंक उछलकर 82,957.91 तक पहुंच गया था.

शेयर बाजार में मामूली तेजी

वहीं एनएसई का Nifty 50 57.85 अंक यानी 0.23 प्रतिशत चढ़कर 25,482.50 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स की कंपनियों में HCL Technologies, Tata Steel, Tata Consultancy Services, InterGlobe Aviation, Sun Pharmaceutical, Mahindra & Mahindra, Maruti Suzuki और Tech Mahindra के शेयर बढ़त में रहे. दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Adani Ports और Eternal में गिरावट दर्ज की गई.

ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म Enrich Money के सीईओ Ponmudi R ने कहा कि सकारात्मक वैश्विक संकेतों और अमेरिकी टेक शेयरों में तेजी से बाजार ने मजबूत शुरुआत की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली और वैश्विक व्यापार चिंताओं से बढ़त सिमट गई. एशियाई बाजारों में Kospi, Shanghai Composite, Nikkei 225 और Hang Seng Index बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजार भी सकारात्मक दायरे में रहे.

अमेरिकी बाजार में भी उछाल

अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 102.53 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,161.22 करोड़ रुपये की खरीदारी की. वैश्विक तेल मानक Brent Crude 0.14 प्रतिशत गिरकर 70.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को सेंसेक्स 1,068.74 अंक टूटकर 82,225.92 और निफ्टी 288.35 अंक गिरकर 25,424.65 पर बंद हुआ था.

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डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)



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Guidance Tamil Nadu establishes Korea Desk to grow investment ties with the country

Guidance Tamil Nadu establishes Korea Desk to grow investment ties with the country


With South Korea emerging as a key investment partner for Tamil Nadu, the state’s investment facilitation agency has launched a dedicated Korea Desk to support Korean companies.

Guidance Tamil Nadu announced on Wednesday that Korean companies looking to explore, invest, or expand in Tamil Nadu can connect directly with their new Korea Desk.

Jaewon Chang has been appointed as the Guidance Representative for the desk, and will serve as the primary point of contact for Korean companies and institutions for seamless coordination with government departments and industry stakeholders.

“From investment to execution, we bring speed, structure, and trust. Tamil Nadu is not just a market, it is a partner that engineers growth,” Guidance TN said.

“We have laid a strong direct bridge for investments from Chennai to Seoul. Happy to announce that Guidance Tamil Nadu has established a dedicated ‘Korea Desk’ to deepen economic and investment ties between Tamil Nadu and the Republic of Korea,” State Industries Minister TRB Rajaa said in a social media post. “This will give us a structured, on-ground presence to support Korean companies exploring manufacturing, expansion and partnerships in our State,” he added.

Korean companies hold a strong presence across Tamil Nadu’s automobiles and EVs, electronics, renewable energy, heavy engineering, shipbuilding, semiconductors and advanced manufacturing sectors. The minister noted that the Korea Desk will function as a single-window facilitation platform across the entire investment lifecycle.

“From market intelligence and sectoral insights to site identification, policy guidance, regulatory approvals and post-investment expansion support,” he said.

Published on February 25, 2026



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सोने की तेजी क्या सिर्फ ट्रेंड या बड़ा बदलाव? ब्रोकरेज फर्म ने बता दिया आगे कैसी रहेगी सोने की

सोने की तेजी क्या सिर्फ ट्रेंड या बड़ा बदलाव? ब्रोकरेज फर्म ने बता दिया आगे कैसी रहेगी सोने की


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Gold Price Outlook: सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से तेजी देखने को मिल रही है. हालांकि, यह उतार-चढ़ाव लगातार जारी है. निवेशक इस बात को लेकर चिंता में हैं कि, सोने की चाल आगे कैसी रहने वाली है? विषय की समझ रखने वाले जानकारों का मानना है कि सोने की कीमतों में आया यह उछाल सिर्फ अस्थायी तेजी नहीं है. बल्कि ये वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थायी बदलाव का संकेत हो सकती है. 

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इस पर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है. फर्म के अनुसार, सोने में आई यह तेजी निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की बदलती सोच को दर्शाती हैं….

बदलती आर्थिक चिंताओं के बीच सोने की खरीद बढ़ी

सोने की कीमतों का रुख वास्तविक ब्याज दरों के उलटा माना जाता है. लेकिन 2023 से 2025 के दौरान पॉजिटिव ब्याज दरों के बावजूद सोने में तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक निवेशक अब केवल ब्याज दरों पर निर्भर नहीं हैं. बल्कि वे वित्तीय स्थिरता और बढ़ते कर्ज दबाव जैसी वजहों पर भी ध्यान दे रहे हैं.  

मोतीलाल ओसवाल के एनालिस्ट मनव मोदी का कहना है कि सोना अब महंगाई से बचाव के साथ-साथ भविष्य में पैदा होने वाली आर्थिक और वित्तीय संकट के समय पूंजी को सुरक्षित रखने का माध्यम भी बन रही है. जिससे निवेशक इसकी खरीदारी कर रहे हैं. 

देश में बढ़ रही सोने की मांग

दुनिया में सोने का उत्पादन सीमित है और नए खनन प्रोजेक्ट शुरू करने में समय और खर्च दोनों ज्यादा लगते हैं. दूसरी तरफ भारत सहित कई उभरते बाजारों में मुद्रा कमजोर होने से सोने की कीमतें बढ़ी हैं. साथ ही देश में सोने की मांग भी बनी हुई है. गोल्ड ETF में निवेश दोबारा बढ़ रहा है. इन सभी कारणों से सोने के दाम स्थिर बने हुए है.

सोना निवेशकों के लिए अब भी सुरक्षित निवेश

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ, व्यापार विवादों से निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने की तरफ लौट रहा है. फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिर महंगाई और मौजूदा हालात में सोना सुरक्षित निवेश बन गया है. साथ ही केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं. जिससे इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला है. 

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PL Capital sets Nifty 50 base target at 27,958, Adani Ports, HAL, L&T, Tata Steel, M&M among top picks

PL Capital sets Nifty 50 base target at 27,958, Adani Ports, HAL, L&T, Tata Steel, M&M among top picks


The base case assumes the Nifty index with a 12-month target of 27,958. In a bullish scenario, a 20x multiple implies upside toward 30,497, while a conservative bear case suggests 26,486.

Equity markets appear poised for their next leg of expansion after nine months of tight consolidation, with the Nifty trading in a narrow 5–6 per cent band amid global uncertainties and earnings recalibrations. According to PL Capital’s latest India Strategy report, the index has weathered a 9–9.5 per cent moderation in FY26–27 EPS estimates, yet underlying corporate performance remains resilient.

The base case assumes the Nifty index with a 12-month target of 27,958. In a bullish scenario, a 20x multiple implies upside toward 30,497, while a conservative bear case suggests 26,486.

The brokerage remains overweight on banks, diversified financials, healthcare, consumer, auto and capital goods/defence, citing sustained infrastructure spending and asset creation. It is underweight IT services and commodities, while preferring select cement and metals names.

Top picks and high-conviction

PL Capital’s large-cap top picks include Adani Port & SEZ, Britannia Industries, Hindustan Aeronautics, ICICI Bank, Larsen & Toubro, Mahindra & Mahindra, Shriram Finance, Tata Steel and Titan Company.

Among mid- and small-caps, it favours HealthCare Global Enterprises, Ingersoll-Rand (India), Ipca Laboratories, KEI Industries and LG Electronics India.

The brokerage has dropped HDFC Life Insurance Company, State Bank of India, Aster DM Healthcare, Fine Organic Industries and Max Healthcare Institute from its high-conviction list. In their place, it has added HealthCare Global Enterprises, Ingersoll-Rand (India) and Ipca Laboratories.

Trade diplomacy and capex push

PL Capital identifies India’s accelerating trade diplomacy as a defining catalyst. The recently concluded India–EU Free Trade Agreement, covering nearly 19 per cent of India’s exports, grants preferential access across 97 per cent of tariff lines and 99.5 per cent of trade value. Immediate duty elimination on over 70 per cent of tariff lines is expected to benefit textiles and apparel, marine products, leather, gems and jewellery, chemicals, machinery and electrical equipment.

The services component also opens opportunities for IT and ITeS, financial services, telecom, education and digital trade, alongside collaboration in semiconductors and critical electronics.

Published on February 25, 2026



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ट्रंप टैरिफ के रिफंड से अब कंपनियों की होगी भरपाई, लेकिन अमेरिकी जनता का क्या होगा?

ट्रंप टैरिफ के रिफंड से अब कंपनियों की होगी भरपाई, लेकिन अमेरिकी जनता का क्या होगा?


US Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को उस समय बड़ा झटका लगा जब Supreme Court of the United States ने उनके द्वारा लगाए गए कई उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) को अमान्य करार दे दिया. इन टैरिफ के जरिए अमेरिकी प्रशासन ने लगभग 134 अरब डॉलर का राजस्व जुटाया था. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह रकम किसे और कैसे वापस की जाएगी?

टैरिफ सीधे आम अमेरिकी नागरिकों से वसूला गया कर नहीं था. यह आयातित वस्तुओं पर लगाया गया शुल्क था, जिसे अमेरिका में सामान मंगाने वाली कंपनियों जैसे Walmart और Costco ने सीमा शुल्क विभाग को चुकाया. यानी कानूनी रूप से भुगतानकर्ता कंपनियां थीं. हालांकि व्यवहारिक रूप से कंपनियां यह अतिरिक्त लागत अपने उत्पादों की कीमतों में जोड़ देती हैं, जिससे अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

उदाहरण के लिए, अगर किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 15% टैरिफ लगा, तो आयातक कंपनी ने सरकार को वह शुल्क दिया, लेकिन बाद में उसी अनुपात में कीमत बढ़ाकर उपभोक्ता से वसूला.

रिफंड किसे मिलेगा?

कानूनी दृष्टि से रिफंड उसी इकाई को दिया जाता है जिसने सरकार को भुगतान किया हो. चूंकि सीमा शुल्क का भुगतान कंपनियों ने किया था, इसलिए यदि रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है तो वह कंपनियों को ही मिलेगा, न कि सीधे उपभोक्ताओं को. उपभोक्ताओं को सीधे भुगतान करना संभव नहीं है, क्योंकि उन्होंने सरकार को कोई सीधा कर नहीं चुकाया.

रिफंड की प्रक्रिया आसान नहीं है. कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने किस अवधि में कितना टैरिफ जमा किया था और वह अदालत के फैसले के तहत अमान्य श्रेणी में आता है. इसके बाद कस्टम अथॉरिटी की समीक्षा, दस्तावेज़ी जांच और कानूनी प्रक्रियाएं होंगी. इसमें ब्याज भुगतान का मुद्दा भी शामिल हो सकता है.

कितना समय लग सकता है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि पूरी प्रक्रिया में करीब पांच साल तक का समय लग सकता है. कारण यह है कि हजारों कंपनियों और करोड़ों आयात लेनदेन की समीक्षा करनी होगी. इसके अलावा सरकार यह भी देख सकती है कि क्या किसी वैकल्पिक कानूनी प्रावधान के तहत नए टैरिफ लागू कर पहले के राजस्व की भरपाई की जा सकती है. उपभोक्ताओं पर असर भले ही कंपनियों को रिफंड मिल जाए, यह जरूरी नहीं कि वे वह रकम उपभोक्ताओं को लौटाएं.

कंपनियां उस पैसे को अपने घाटे की भरपाई, बैलेंस शीट मजबूत करने या भविष्य के निवेश में लगा सकती हैं. इसलिए आम जनता को सीधे तौर पर रिफंड मिलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.

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