आरपीएससी पेपर लीक : राजस्थान पुलिस ने 2 प्रमुख आरोपियों पर इनाम घोषित किया

आरपीएससी पेपर लीक : राजस्थान पुलिस ने 2 प्रमुख आरोपियों पर इनाम घोषित किया



डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान पुलिस ने पेपर लीक के मुख्य आरोपी भूपेंद्र सरन और सुरेश ढाका के बारे में सूचना देने वाले को 25-25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। भूपेंद्र सरन और सुरेश ढाका दोनों फरार चल रहे हैं। दोनों राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित द्वितीय श्रेणी शिक्षक परीक्षा के पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी हैं। हालांकि, पुलिस ने राजस्थान में कई जगहों पर छापेमारी की, लेकिन दोनों फरार आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा है। पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने दोनों मुख्य आरोपियों भूपेंद्र सरन व जाने-माने कोचिंग डायरेक्टर सुरेश ढाका पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

निजी कोचिंग निदेशक सुरेश ढाका जयपुर में वैशाली नगर क्षेत्र के नेमी नगर और भूपेंद्र सरन अजमेर रोड स्थित करणी विहार कॉलोनी का रहने वाला है। हाल ही में उदयपुर पुलिस के इनपुट पर जयपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। पड़ताल में सामने आया कि सुरेश कई राजनीतिक नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट को हैंडल कर रहा था।

(आईएएनएस)

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ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता ने कर्नाटक में रंगायन के खिलाफ दर्ज करायी शिकायत

ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता ने कर्नाटक में रंगायन के खिलाफ दर्ज करायी शिकायत



डिजिटल डेस्क, मैसूर। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लोकप्रिय कन्नड़ साहित्यकार डॉ. चंद्रशेखर कंबार ने हाल ही में प्रदर्शित एक नाटक में उनके साहित्यिक कलाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के संबंध में मंगलवार को मैसूर के पुलिस आयुक्त से शिकायत की। कंबार ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी किताब संबाशिव प्रहसन पर आधारित नाटक को घृणित तरीके से तोड़ा-मरोड़ा गया है। नाटक का प्रदर्शन करने वाली संस्था रंगायन ने उनसे सहमति लिए बिना इसका प्रदर्शन किया।

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, मेरे किसी भी काम में व्यक्तिगत दुर्व्यवहार नहीं है। उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, जिन्होंने नाटक के प्रदर्शन से पहले मेरी अनुमति नहीं मांगी। निर्देशक ने आपत्तिजनक सीन्स जोड़ दिए।

नाटक का प्रदर्शन 31 दिसंबर को रंगायना में किया गया था। विपक्ष के नेता सिद्दारमैया के समर्थकों और राज्य कुरुबा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुब्रमण्यम ने जयलक्ष्मीपुरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है कि नाटक में उनके नेता सिद्दारमैया का अपमान किया गया है। सिद्दारमैया के समर्थकों ने भी नाटक की प्रदर्शनी के तुरंत बाद एक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें दावा किया गया था कि नाटक ने सिद्दारमैया और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार का अपमान किया है।

उनकी शिकायत में कहा गया है कि नाटक में सिद्दारमैया सरकार की प्रमुख अन्न भाग्य (मुफ्त चावल) परियोजना का मजाक उड़ाया गया था। नाटक में एक संवाद है जिसमें कहा गया है कि अन्न भाग्य जैसी योजना देकर लोगों को सुस्त बना दिया जाता है। शिवकुमार को केडी अंकल कहा गया, जिसका मतलब खलनायक होता है। शिकायत में नाटक में अभिनय करने वाले सभी 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

सोर्सः आईएएनएस

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यूपी के मदरसों में दी जाएगी आधुनिक शिक्षा

यूपी के मदरसों में दी जाएगी आधुनिक शिक्षा



डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड ने धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा देने की तैयारी शुरू कर दी है। मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा, मदरसा के बच्चे इस साल एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) के पाठ्यक्रम का भी अध्ययन करेंगे। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाएगी।

नए शैक्षणिक वर्ष में राजकीय मदरसों का फोकस आधुनिक शिक्षा पर ज्यादा रहेगा। इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा, अब मदरसे के बच्चे कंप्यूटर, गणित, विज्ञान की पढ़ाई कर सकेंगे।

मदरसों के लिए नया सिलेबस मार्च में जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा, केजी, एलकेजी और यूकेजी जैसी प्री-प्राइमरी कक्षाएं मार्च से शुरू होंगी।

 

(आईएएनएस)

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रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय गणित सप्ताह मनाया गया

रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय गणित सप्ताह मनाया गया



डिजिटल डेस्क, भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के विज्ञान विभाग और मध्य प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वाधान में महान गणितज्ञ श्री रामानुजन जी की स्मृति में राष्ट्रीय गणित सप्ताह 2022 का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के प्रथम दिवस बतौर मुख्य अतिथि डॉ. विकास शेंडे, प्रमुख वैज्ञानिक एमपीसीएसटी ने दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने उपस्थित छात्रों व प्रतिभागियों को बताया कि कैसे गणित दैनिक जीवन का अंग है और किस प्रकार हमें प्रभावित करता है। इस अवसर पर डॉ. निपुण सिलावट, प्रमुख वैज्ञानिक एमपीसीएसटी भी उपस्थित रहे। जिन्होंने भारतीय प्राचीन विज्ञान में गणित और गणितज्ञों की भूमिका पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक डॉ संजीव कुमार गुप्ता ने की। कार्यक्रम में विज्ञान प्रसार संचार केंद्र व इलेक्ट्रोनिकी आपके लिए के संयोजक एवं सह-संपादक, श्री मोहन सहोरिया जी एवं श्री रवि जैन जी ने प्रसिद्ध वैज्ञानिकों विक्रम साराभाई, एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनवृत्त पुस्तिकाएं (मोनोग्राफ) का विमोचन किया गया।

द्वितीय दिवस पर डॉ. प्रो. वी.पी. सक्सेना, पूर्व कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय आंगतुक वैज्ञानिक कैंब्रिज यू. के. मुख्य अतिथि रहे एवं डॉ. माधवी शाक्य, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष गणित विभाग, एमएसीटी ने अपने लब्धप्रतिष्ठित ज्ञान से छात्रों को प्रबुद्ध किया। कार्यक्रम में गणित विषय एवं गणितज्ञ रामानुजम जी के जीवन पर सत्र हुए जिसमें छात्रों ने अपनी जिज्ञासाओं को भरपूर शांत किया। श्री सक्सेना जी ने बताया कैसे गणित मॉडलिंग द्वारा जीवविज्ञान जैसे विषयों की समस्याएं भी हल की जा रहीं हैं। डॉ माधवी ने अपने व्याख्यान में रामानुजम द्वारा खोजे गए क्रेजी नंबर्स, मैजिकल नंबर्स, अदभुद गणित श्रृंखलाएं, संख्याओं की सेल्फी जैसे रोचक तथ्यों से छात्रों को अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अंकिता सिकोरिया ने किया। इस अवसर पर विज्ञान विभाग की अधिष्ठाता डॉ पूर्वी भारद्वाज, विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति रावत, एकेडमिक संयोजक श्री पद्मेश चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष डॉ अंकित अग्रवाल, डॉ प्रज्ञा श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 



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उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार की 100 फीसदी ऑनलाइन डिजिटल विवि योजना

उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार की 100 फीसदी ऑनलाइन डिजिटल विवि योजना



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आने वाले नए वर्ष के दौरान देशभर के छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सुविधा मिलने जा रही है। वर्ष 2023 में देशभर के छात्रों के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी शुरू की जानी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय डिजिटल यूनिवर्सिटी शुरू करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर के साथ मिलकर काम कर रहा है। मंत्रालय का मानना है वर्ष 2023 से ही छात्रों को देश की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

खास बात यह है कि यह डिजिटल विश्वविद्यालय देश के अन्य सभी उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों से कनेक्टेड रहेगा। देश के सभी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान, इस डिजिटल यूनिवर्सिटी के सहयोगी के रूप में काम करेंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक डिजिटल यूनिवर्सिटी में दाखिले से लेकर अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए ऑनलाइन माध्यमों को मान्यता दी जाएगी। डिजिटल यूनिवर्सिटी में छात्रों का एडमिशन भी ऑनलाइन होगा। डिजिटल यूनिवर्सिटी के छात्र परीक्षाएं भी ऑनलाइन माध्यमों से ही देंगे। वहीं पढ़ाई का माध्यम भी ऑनलाइन होगा। छात्र शिक्षा मंत्रालय के पोर्टल स्वयं के माध्यम से भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के मुताबिक नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी, हब एंड स्पोक मॉडल पर स्थापित होने की संभावना है। इससे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुके सभी छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

प्रोफेसर कुमार का कहना है कि इस डिजिटल विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए दाखिले व सीटों की संख्या सीमित नहीं होगी। इसका लाभ सभी छात्रों को मिल सकेगा। देश के हर हिस्से के छात्र अपने पसंदीदा पाठ्यक्रमों के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी में दाखिला ले सकेंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक देश की इस आधुनिकतम डिजिटल यूनिवर्सिटी में छात्रों को मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट जैसे ऑप्शंस मिलेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत उद्योग आधारित शिक्षा नीति और सामूहिक ²ष्टिकोण के साथ काम करने का आह्वान किया है।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक नई डिजिटल यूनिवर्सिटी में छात्रों की सुविधा के लिए मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्पों के साथ साथ एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। गौरतलब है कि यह विकल्प नई शिक्षा नीति के आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रत्येक छात्र को डिजिटल रूप में एक अद्वितीय व्यक्तिगत शैक्षणिक बैंक खाता खोलने की सुविधा प्रदान करता है। इसमें प्रत्येक खाताधारक छात्र को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है। एबीसी के प्रमुख कार्य, उच्च शिक्षण संस्थानों का पंजीकरण और, छात्रों के शैक्षणिक खातों को खोलना, सत्यापन, क्रेडिट सत्यापन, क्रेडिट संचय, क्रेडिट हस्तांतरण और हितधारकों के बीच एबीसी को बढ़ावा देना है।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की शैक्षणिक डिजिटल डाटा का रिकॉर्ड रखेगा। इसके लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके उपरांत छात्रों का एकेडमिक बैंक में अकाउंट खोला जाएगा।

खाता खोलने के उपरांत छात्रों को एक विशेष आईडी प्रदान की जाएगी। शिक्षण संस्थान छात्रों के एकेडमिक अकाउंट में उनके पाठ्यक्रमों के आधार पर क्रेडिट अंक प्रदान करेंगे। इस तरह से कॉलेजों या फिर अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का डेटा स्टोर होना शुरू हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में यदि कोई छात्र किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है तो उसके क्रेडिट (टाइम पीरियड) के हिसाब से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री दी जाएगी। फस्र्ट ईयर पास करने पर सर्टिफिकेट, सेकेंड ईयर पास करने पर डिप्लोमा और कोर्स पूर करने पर डिग्री दी जाएगी।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनके पोर्टल पर कुल 854 विश्वविद्यालय व अन्य शिक्षण संस्थान पंजीकृत हैं। वहीं अब तक 48 लाख छात्रों की आईडी बनाई जा चुकी हैं।

 

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योगी सरकार ने की सीएसजेएमयू के कुलपति के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश

योगी सरकार ने की सीएसजेएमयू के कुलपति के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश



डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति विनय पाठक के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की है। उन पर आगरा विश्वविद्यालय में परीक्षा कराने वाली एक निजी कंपनी के बिलों के भुगतान के लिए पैसे लेने का आरोप है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) अब तक पाठक के चार साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

अक्टूबर में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में परीक्षा आयोजित करने वाली एक कंपनी के मालिक डेविड मारियो दानिश ने विनय पाठक पर अपनी कंपनी के बिलों के भुगतान के लिए 1.4 करोड़ रुपये निकालने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में मामला एसटीएफ को सौंप दिया गया था।

पाठक और उसके सहयोगी अजय मिश्रा के खिलाफ 29 अक्टूबर को लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में जबरन वसूली, धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एसटीएफ ने अजय मिश्रा, संतोष सिंह और अजय जैन सहित तीन को गिरफ्तार कर लिया। संतोष कुमार सिंह अजय मिश्रा का करीबी सहयोगी है।

मिश्रा कथित रूप से पाठक की मदद से विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों से परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की छपाई का ठेका लेता था और फिर उन्हें सिंह को सौंप देता था। गुड़गांव के अजय जैन ने भ्रष्ट आचरण से कमाए गए पैसे का लेन-देन किया और नकली और छेड़छाड़ किए गए बिल और ई-वे बिल बनाकर लेनदेन को प्रबंधित किया। उन पर धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था।

एसटीएफ के अधिकारियों ने कहा कि आगरा, कानपुर और बरेली के विश्वविद्यालयों में अनियमितताएं सामने आई हैं। आगरा यूनिवर्सिटी में जांच के दौरान एसटीएफ को कई सबूतों से छेड़छाड़ मिली।

दूसरी ओर विनय पाठक ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए एक नवंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का रूख किया था। हालांकि न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति वी. के. सिंह की अदालत ने 15 नवंबर को कहा था कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और जांच में जुटाए गए सबूतों को देखते हुए प्रथम ²ष्टया उनके खिलाफ अपराध बनता है।

प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने 13 वर्षों की अवधि में आठ राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के रूप में कार्य किया है। पहली बार उन्हें 2009 में उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी का वी-सी नियुक्त किया गया था। 2013 में, उन्होंने वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी, कोटा में वी-सी के पद पर कार्य किया।

एक साल बाद उन्हें राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद प्रोफेसर पाठक ने उत्तर प्रदेश का रुख किया। 2015 में उन्हें अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया।

2017 में, पाठक ने हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर में वी-सी के रूप में एक साथ अतिरिक्त प्रभार संभाला, जबकि 2021 में, उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के वी-सी और कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वी-सी के रूप में कार्य किया, जहां वे वर्तमान में सेवारत हैं।

 

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