by Hansraj Agrawal | Sep 4, 2022 | Current Affairs
डिजिटल डेस्क, मुंबई। आज दोपहर एक सड़क दुर्घटना में मारे गए उद्योगपति साइरस पी. मिस्त्री के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए मुंबई ले जाया जाएगा, हालांकि गुजरात के वापी के एक अस्पताल में पुंडोले दंपति की हालत नाजुक लेकिन उनकी स्थिर है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार देर रात यहां यह जानकारी दी।
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, डॉ अनाहिता पुंडोले न्यूमोथोरैक्स और हिप फ्रैक्च र से पीड़ित हैं, लेकिन उनका रक्तचाप मैंटेन हुआ है और वह निगरानी में हैं।
उनके पति डेरियस पुंडोले जबड़े के फ्रैक्च र से जूझ रहे हैं, जिससे एयरवे में बाधा उत्पन्न होती है।
एक सर्जन ने तार लगाकर जबड़े को बाहर निकाला और वायुमार्ग को साफ किया और वह भी स्थिर है।
घायल दंपति का इलाज डॉ नीता वार्टी, डॉ कार्ल वजीफदार, डॉ मेहली नजीर और अन्य की टीम कर रही है।
उन्हें रात भर वहीं रखने के बाद सोमवार को गुजरात या मुंबई में आगे के इलाज के लिए फैसला लिया जाएगा।
साइरस मिस्त्री और जहांगीर पुंडोले के पार्थिव शरीर को सीधे सर जे.जे. अस्पताल मुंबई पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाएगा।
(आईएएनएस)
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ bhaskarhindi.com की टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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by Hansraj Agrawal | Sep 4, 2022 | Current Affairs
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति से रविवार को इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि वह किसानों के समूह के सैनिक बने रहेंगे। उन्होंने अपने पत्र में इस्तीफे के पीछे की वजह भी बताई है।
योगेंद्र यादव ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि बीते 31 अगस्त की जूम मीटिंग में मैने सूचित कर दिया था कि मैं अब संयुक्त किसान मोर्चा की कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य की जिम्मेदारी नहीं निभाने में असमर्थ हूं। उन्होंने इस्तीफे में आगे कहा है कि अपनी पार्टी स्वराज इंडिया के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश में हूं ताकि किसान आंदोलन के हाथ भी होंगे।
इस्तीफे की वजह
गौरतलब है कि योगेंद्र यादव के इस्तीफे वाले पत्र से स्पष्ट है कि अब वो अपनी पार्टी स्वराज इंडिया पर ज्यादा ध्यान देने में जुट गए। जिसकी वजह से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही से नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि अब मेरे लिए संभव नहीं हो पाएगा कि मैं संयुक्त किसान मोर्चा की कोऑर्डिनेशन कमेटी की जिम्मेदारी के साथ न्याय कर पाऊंगा।
ऐसे में माना जा रहा है कि योगेंद्र यादव ने इन्हीं वजहों से अपने दायित्वों से हटने का फैसला लिया है। उन्होंने आगे पत्र में लिखा कि कृपया मेरे इस पत्र को संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय बैठक के सामने रखकर मुझे इस जिम्मेवारी से मुक्त किया जाए। मेरी जगह मेरे संगठन जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवीक साहा इस जिम्मेदारी के लिए उपलब्ध रहेंगे।’
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by Hansraj Agrawal | Sep 4, 2022 | Current Affairs
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उद्योगपति और टाटा ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री, जिनकी रविवार को महाराष्ट्र के पालघर में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई, 2012 में 44 साल की उम्र में टाटा संस के अध्यक्ष बने थे, लेकिन लंबे समय तक नहीं टिक सके। मिस्त्री रतन टाटा के बाद टाटा संस के छठे अध्यक्ष थे। उन्हें अक्टूबर 2016 में पद से हटा दिया गया। वह शापूरजी पल्लोनजी समूह के प्रमुख पल्लोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे थे, जो कई तरह के व्यवसायों का एक समूह है, जिसे 19वीं शताब्दी में पल्लोनजी मिस्त्री के दादा ने शुरू की थी।
पल्लोनजी मिस्त्री का इस साल जून में 93 साल की उम्र में निधन हो गया था। 1968 में पैदा हुए मिस्त्री ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने 1991 में पारिवारिक व्यवसाय में प्रवेश किया और शापूरजी पलोनजी एंड कंपनी लिमिटेड के निदेशक बने।
साइरस मिस्त्री ने 2006 में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद टाटा समूह के बोर्ड में अपने पिता का स्थान ग्रहण किया। वह शापूरजी पल्लोनजी समूह के साथ अपनी जिम्मेदारियों को संभालने के अलावा कई टाटा कंपनियों के निदेशक भी बने। वह 2011 में टाटा समूह के डिप्टी चेयरमैन बने और फिर 2012 में रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद चेयरमैन बने। साइरस मिस्त्री टाटा समूह का नेतृत्व करने वाले पहले गैर-भारतीय थे। उनके पास आयरलैंड का पासपोर्ट था।
उनके और टाटा परिवार के बीच ग्रुप चलाने को लेकर मतभेद पैदा होने के बाद ग्रुप के चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल 2016 में अचानक समाप्त हो गया। साइरस मिस्त्री ने बोर्ड से हटाने को लेकर कोर्ट में चुनौती दी लेकिन 2018 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि 2019 में नेशनल कंपनी लॉ एपीलेट ट्रिब्यूनल ने उस फैसले को पलट दिया। फिर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने मिस्त्री की बर्खास्तगी को बरकरार रखा।
(आईएएनएस)
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by Hansraj Agrawal | Sep 4, 2022 | Current Affairs
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे रविवार को काठमांडू पहुंचे। अपने नेपाली समकक्ष, जनरल प्रभु राम शर्मा के निमंत्रण पर की गई अपनी यात्रा में, वह 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, जनरल पांडे राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मुलाकात करेंगे, जो रक्षा मंत्री भी हैं, और अपने समकक्ष जनरल शर्मा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे।
यह उम्मीद की जाती है कि दोनों पक्ष भारत सरकार की सैनिकों के लिए नई भर्ती योजना अग्निपथ पर चर्चा करेंगे, जिसके तहत 75 प्रतिशत चार साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे और उन्हें ग्रेच्युटी मिलेगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत को पूर्णकालिक सेवा देने का मौका मिलेगा और पेंशन प्राप्त करेंगे। नेपाली युवाओं को भी भारतीय सेना में लंबे समय से भर्ती किया गया है, लेकिन अब नई योजना के कारण नेपाल आगे बढ़ने से हिचकिचा रहा है। नेपाल सरकार ने भारतीय पक्ष से अनुरोधित भर्ती प्रक्रिया की अनुमति नहीं दी है।
नेपाली अधिकारियों ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच अन्य नियमित सैन्य और रक्षा मुद्दों के अलावा, अग्निपथ योजना पर भी यात्रा के दौरान चर्चा की जाएगी। दोनों सेनाओं के बीच दोस्ती की परंपरा को जारी रखते हुए, भारतीय सेना प्रमुख को 5 सितंबर को राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास सीतल निवास में एक समारोह में नेपाल सेना के जनरल के मानद पद से सम्मानित किया जाएगा।
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, पांडे का नेपाल सेना मुख्यालय का दौरा करने का कार्यक्रम है, जहां वह शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे और नेपाली सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे। वह भारतीय सेना से उपहार के रूप में 10 बख्तरबंद कर्मियों के वाहक नेपाल सेना को सौंपेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, पांडे शिवपुरी में नेपाली आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के छात्र अधिकारियों और शिक्षकों के साथ भी बातचीत करेंगे। उनका छह सितंबर को प्रधानमंत्री देउबा से भी मिलने का कार्यक्रम है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक, बहुआयामी हैं और आपसी सम्मान और विश्वास के अलावा आम सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों से चिह्न्ति हैं। भारत अपनी पड़ोसी पहले और एक्ट ईस्ट नीतियों के अनुसार नेपाल के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। यह यात्रा मौजूदा द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का जायजा लेने और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।
(आईएएनएस)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के निधन पर गहरा शोक जताया। मिस्त्री का महाराष्ट्र के पालघर में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। उन्होंने मिस्त्री के निधन को वाणिज्य और उद्योग की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति बताया।
साइरस मिस्त्री का असामयिक निधन चौंकाने वाला है। वो एक होनहार उद्योगपति थे, जो भारत के आर्थिक कौशल में विश्वास करते थे। उनका निधन वाणिज्य और उद्योग की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। उनकी आत्मा को शांति मिले, मोदी ने ट्वीट किया। 54 वर्षीय मिस्त्री ने मुंबई के पास पालघर में अपनी कार के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद दम तोड़ दिया। वह अहमदाबाद से मुंबई लौट रहे थे जब उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
(आईएएनएस)
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डिजिटल डेस्क, गांधीनगर। गुजरात सरकार ने स्थानीय निकायों में ओबीसी के प्रतिनिधित्व के मुद्दे का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश के. एस. झावेरी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया है। स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग जल्द ही राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
आयोग की सिफारिशों और रिपोर्ट को लागू करने के राज्य के फैसले से पहले ही, ओबीसी आरक्षण का श्रेय लेने की होड़ दो प्रमुख दलों – भाजपा और कांग्रेस के बीच शुरू हो गई है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने स्वीकार किया है कि राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी 52 प्रतिशत है। कुल 146 उपजातियां ओबीसी श्रेणी में आती हैं। कांग्रेस स्थानीय निकायों, पंचायतों और नगर पालिकाओं में ओबीसी के लिए कम से कम 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रही है।
भाजपा ने सुझाव दिया है कि जनसंख्या को देखते हुए आयोग को उचित आरक्षण की सिफारिश करनी चाहिए। साथ ही, पार्टी ने आयोग को सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि एससी/एसटी/ओबीसी के लिए आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक दलों में घमासान शुरू हो चुका है। भाजपा प्रवक्ता भरत डांगर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी किसी पिछड़े समुदाय के उत्थान और आरक्षण की परवाह नहीं की। उनके शासन में कालेलकर आयोग की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में चली गई। इसके खिलाफ जनसंघ समर्थित स्वर्गीय बाबूभाई पटेल सरकार ने 1977 में बख्शी आयोग की सिफारिश को स्वीकार कर लिया।
भाजपा के इस दावे पर पलटवार करते हुए गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमित चावड़ा ने आरोप लगाया है कि अगर राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समय पर ओबीसी आयोग का गठन किया होता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती और राज्य चुनाव आयोग स्थानीय निकायों में 10 प्रतिशत आरक्षण को रद्द नहीं करता। जुलाई से अब तक चावड़ा ने जागरूकता पैदा करने के लिए कई ओबीसी समुदाय की बैठकों को संबोधित किया है।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी ने तर्क दिया कि कांग्रेस एक समुदाय के लिए आरक्षण और स्थानीय निकायों में उनके प्रतिनिधित्व की मांग कर रही है, इससे सभी दलों को फायदा होने वाला है। भाजपा ने अपनी सभी जिला समितियों को स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने का निर्देश दिया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि इस मुद्दे से किस पार्टी को फायदा हुआ।
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