स्विमसूट में तस्वीरें पोस्ट करने पर नौकरी गंवाने वाली प्रोफेसर के खिलाफ अब 99 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

स्विमसूट में तस्वीरें पोस्ट करने पर नौकरी गंवाने वाली प्रोफेसर के खिलाफ अब 99 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस



डिजिटल डेस्क, कोलकाता। कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय में एक सहायक प्रोफेसर को स्विमिंग सूट में तस्वीरें पोस्ट करने पर पिछले साल अक्टूबर में इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था। अब विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ 99 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस जारी किया गया है।

सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसर के स्विमसूट पहनने और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर काफी हंगामा हुआ था। यह घटना पिछले साल अक्टूबर में हुई थी, जब एक छात्र के पिता ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से शिकायत की थी कि उसने अपने बेटे को सहायक प्रोफेसर के स्विमिंग सूट में साझा की गई तस्वीरों में लीन (मग्न) हुए देखा है।

अपनी शिकायत में, छात्र के परिजन ने तर्क दिया कि एक 18 वर्षीय छात्र के लिए यह अश्लील,असभ्य और अनुचित है कि वह अपने प्रोफेसर को एक सार्वजनिक मंच पर अपने शरीर को प्रदर्शित करने वाले कम कपड़े पहने हुए देखे।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण के लिए बुलाई गई प्रोफेसर ने कहा था कि किसी भी परिस्थिति में उसका कोई भी छात्र उन तस्वीरों तक नहीं पहुंच सकता है, जो उन्होंने विश्वविद्यालय ज्वाइन करने से दो महीने पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थीं, क्योंकि तब तक तस्वीरें अपने आप ट्रैश सेक्शन में चली जाती थीं।

उन्होंने तर्क दिया कि उसका इंस्टाग्राम प्रोफाइल निजी (प्राइवेट) है और इसलिए वहां की तस्वीरें उसके फॉओअर्स के अलावा कोई नहीं देख सकता। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि उनका इंस्टाग्राम प्रोफाइल हैक किया गया भी हो सकता है।

हालांकि, विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उनके तर्क को मानने से इनकार कर दिया और उन्हें इस्तीफा देने या बर्खास्त करने का विकल्प दिया गया। इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने कोलकाता पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक किया गया हो सकता है।

इस बीच, उन्होंने अपने वकील के माध्यम से विश्वविद्यालय के अधिकारियों को एक पत्र भी भेजा, जिसमें छात्रा के माता-पिता द्वारा दायर शिकायत की एक प्रति मांगी गई थी।

जवाब में, अधिकारियों ने उन्हें एक कानूनी नोटिस थमा दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि उनका कानूनी नोटिस एक बंद अध्याय (क्लोज्ड चैप्टर) को खोलने के लिए एक दुर्भावनापूर्ण, हताश और बेईमान प्रयास है, जिससे उनके संस्थान की छवि को भारी और अपूरणीय क्षति हुई है।

इस काउंटर लीगल नोटिस में, विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने 99 करोड़ रुपये के नुकसान के मुआवजे की भी मांग की है।

इस बीच, शहर में नेटिजन्स (इंटरनेट पर समय बिताने वाले) घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर जहां नैतिक आधार पर सहायक प्रोफेसर को कोसने में जुटे हुए हैं, वहीं अन्य कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि कोई भी अपने पेशेवर क्षेत्र से परे जो कुछ भी करता है, उससे उसके नियोक्ता (एंप्लॉयर) का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए।

 

आईएएनएस

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आईसेक्ट द्वारा टाइम मैनेजमेंट, कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट और नेगोशिएशन स्किल्स पर विशेष ट्रेनिंग सेशन का आयोजन

आईसेक्ट द्वारा टाइम मैनेजमेंट, कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट और नेगोशिएशन स्किल्स पर विशेष ट्रेनिंग सेशन का आयोजन


डिजिटल डेस्क, भोपाल। आईसेक्ट मुख्यालय द्वारा स्कोप कैम्पस में “टाइम मैनेजमेंट, कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट और नेगोशिएशन स्किल्स” पर एम्पलॉइज के लिए विशेष ट्रेनिंग एवं मोटिवेशनल सेशन का आयोजन किया गया। इस सेशन को बतौर मुख्य वक्ता जानी मानी करियर काउंसलर, पर्सनेलिटी ग्रूमिंग एक्सपर्ट और मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमति मनीषा आनंद ने संबोधित किया। यह सेशन कार्यस्थल पर कर्मचारियों को प्रशिक्षित एवं प्रेरित करने के लिए आयोजित किया गया था। 

इस दौरान ट्रेनर श्रीमति मनीषा आनंद द्वारा सेल्फ-ऑडिट कैसे करें, अपने विचारों का निरीक्षण और सफाई कैसे करें इत्यादि के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमें लोगों को क्षमा करना और जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना सीखना चाहिए तभी हम दूसरे व्यक्ति को सही मायने में समझ सकते हैं और बेहतर संवाद स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा टाइम मैनेजमेंट पर बात करते हुए कहा कि अपने कार्यों को उनके महत्व एवं तत्कालिकता के आधार पर प्राथमिकताएं प्रदान करें। सत्र में श्रीमती आरती कुमार, एचओडी, एमओओसीएस (MOOCs), श्रीमती मोनिका सिंह, निदेशक- फिनिशिंग स्कूल एवं कॉर्पोरेट रिलेशंस, स्कोप इंजीनियरिंग कॉलेज, श्री सुमित मल्होत्रा, एचओडी, एचआर, ने प्रशिक्षण में विशेष रूप से हिस्सा लिया। अपने आभार वक्तव्य में श्रीमती मोनिका सिंह ने सत्र की सराहना की और इस दौरान कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अर्चना जैन द्वारा किया गया।

आईसेक्ट के निदेशक श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने इस पहल पर बात करते आईसेक्ट प्रबंधन टीम के प्रयासों को प्रोत्साहित किया और सराहना की और इस तरह के सत्रों को नियमित आयोजित करते हुए कर्मचारियों के लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।

 



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संसद के सेंट्रल हॉल में विदाई समारोह में बोले राष्ट्रपति कोविंद, राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने का मौका देने के लिए देश का आभारी हूं

संसद के सेंट्रल हॉल में विदाई समारोह में बोले राष्ट्रपति कोविंद, राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने का मौका देने के लिए देश का आभारी हूं



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आज विदाई समारोह था। इस समारोह का आयोजन संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया। जहां पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वहां पर उपस्थिति लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि पांच साल पहले, मैंने यहां सेंट्रल हॉल में भारत के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। मेरे दिल में सभी सांसदों के लिए खास जगह है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई समारोह कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के साथ ही दोनों ही सदनों के सभी सांसद भी इस विदाई समारोह में मौजूद रहे। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के लिए विदाई भाषण भी दिए। 

विदाई समारोह में कोविंद ने कही ये बात

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विदाई समारोह में कहा अंबेडकर के सपनों का नया भारत बन रहा है। लोगों को पक्के घर व पानी मिल रहे हैं।स्वच्छ भारत अभियान बेहद अहम है। देशवासियों को सपने का उड़ान मिल रहा है। राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दिन कई पुरानी स्मृतियां उमड़ रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सांसद और राष्ट्रपति एक ही विकास यात्रा के सहयात्री हैं। हमारा संविधान, हम भारत के लोगों द्वारा अंगीकृत, अधिकृत किया गया है। राष्ट्रपति को संसदीय परिवार के अभिन्न अंग के रूप में देखता हूं।

कोविंद ने कहा कि हम सब संसद रूपी परिवार के सदस्य हैं, जिसमें मतभेद हो सकते हैं। जब पूरे देश के एक विशाल संयुक्त परिवार के रूप में देखते हैं, तो मतभेद दूर करने के लिए कई रास्ते हो सकते हैं। विरोध के लिए तमाम रास्ते हो सकते हैं, लेकिन गांधीवादी ढंग से हो तो ज्यादा बेहतर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस दौरान सरकार के कार्यों की तारीफ भी की।

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस दिन लेंगी शपथ

भारत की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आने वाले 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद का शपथ लेंगी। वह देश की 15वें व पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगी। शपथ ग्रहण कार्यक्रम रविवार सुबह 10 बजकर 14 मिनट पर शुरू होगा। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बीते गुरूवार को एनडीए उम्मीदवार रहीं द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी अंतर से हराकर  जीत हासिल की थीं। द्रौपदी मुर्मू ने भारत की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति बनकर इतिहास रच दिया है।

 





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मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना ने मीडिया ट्रायल की निंदा की, इसे कंगारू कोर्ट बताया

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना ने मीडिया ट्रायल की निंदा की, इसे कंगारू कोर्ट बताया



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना ने शनिवार को इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया ट्रायल पर निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया कई बार मुद्दों पर कंगारू कोर्ट चलाती है और यहां तक कि अनुभवी जजों को भी फैसला करना मुश्किल लगता है।

रांची में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ द्वारा आयोजित जस्टिस एस बी सिन्हा मेमोरियल लेक्च र पर लाफ ऑफ ए जज पर उद्घाटन भाषण देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने उचित न्यायिक बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने की आवश्यकता, मीडिया परीक्षण द्वारा बनाई गई समस्याएं न्यायिक प्रशासन, न्यायपालिका की भविष्य की चुनौतियाँ और संविधान के संरक्षण में न्यायिक समीक्षा के महत्व पर जोर दिया।

यह कहते हुए कि हम एक जटिल समाज में रह रहे हैं, रमना ने कहा कि न्यायपालिका या शासन में एक पद धारण करने वाले व्यक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि महत्वपूर्ण मोड़ पर उनके निर्णय मानवता की वृद्धि और प्रगति को प्रभावित करते हैं।

मीडिया ट्रायल की बढ़ती संख्या की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, न्याय करना कोई आसान जिम्मेदारी नहीं है। यह हर गुजरते दिन के साथ चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा, नए मीडिया टूल्स में व्यापक विस्तार करने की क्षमता है, लेकिन वे सही और गलत, अच्छे और बुरे और असली और नकली के बीच अंतर करने में असमर्थ हैं। मीडिया ट्रायल मामलों को तय करने में एक मार्गदर्शक कारक नहीं हो सकता है।

सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले पक्षपातपूर्ण विचारों की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, न्याय वितरण से जुड़े मुद्दों पर गलत जानकारी और एजेंडा संचालित बहस लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया द्वारा प्रचारित पक्षपातपूर्ण विचार लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं और व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस प्रक्रिया में, न्याय वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा, अपनी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर आप हमारे लोकतंत्र को दो कदम पीछे ले जा रहे हैं।

(आईएएनएस)

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ bhaskarhindi.com की टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.



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यूक्रेन युद्ध के बीच एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़कर भारत लौट छात्रों ने शुरू की भूख हड़ताल, केंद्र सरकार के सामने रखी ये मांग

यूक्रेन युद्ध के बीच एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़कर भारत लौट छात्रों ने शुरू की भूख हड़ताल, केंद्र सरकार के सामने रखी ये मांग



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यू्क्रेन और रूस युद्ध के बीच एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़कर भारत लौटे छात्र सरकार से अपनी मांग के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें यूक्रेन से लौटे हुए करीब पांच माह हो रहा है लेकिन क्रेंद्र सरकार ने देश के किसी मेडिकल कॉलेज में उनकी शिक्षा जारी रखने की मांग पूरी नहीं की है। छात्रों ने इन्हीं वजहों से नाराज होकर 23 जुलाई से दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। 

छात्रों के समर्थन में उतरीं विपक्षी पार्टियां

गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत सरकार ने वहां फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा अभियान चलाया था। इस ऑपरेशन के तहत सभी छात्रों को सुरक्षित निकाला गया था जबकि एक भारतीय छात्र का निधन भी हो गया था। अब मेडिकल के सभी छात्र अपनी अधर में लटकी शिक्षा को लेकर काफी परेशान है। अपनी मांग पूरी होती न देख छात्र रामलीला मैदान में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रमुख विपक्षी दल के बड़े नेता छात्रों से मिलने पहुंच सकते हैं।

वहीं छात्रों के इस भूख हड़ताल का कांग्रेस, एनएसयूआई व आम आदमी पार्टी ने समर्थन किया है। खबर ये भी है कि जल्द ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तारिक अनवर, राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक और आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात करेंगे।

मानसून की वजह से छात्रों के लिए वाटर प्रूफ टेंट की व्यवस्था की गई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से करीब 500 छात्र-छात्राएं व उनके परिजन पहुंच रहे हैं। ये वही छात्र हैं जो यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे और युद्ध शुरू होने के बाद वहां से पढ़ाई छोड़कर वतन वापस आ चुके हैं। 

पीएयूएमएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कही ये बात

पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरबी गुप्ता के मुताबिक, दिल्ली के रामलीला मैदान में 23 जुलाई शनिवार से शुरू हुई भूख हड़ताल 27 जुलाई तक चलेगी। इस आंदोलन में करीब देशभर के कई हिस्सों से सैकड़ों छात्र व उनके परिजन पहुंचेंगे।

अगर केंद्र सरकार इन छात्रों की मांगे नहीं मानती है तो यह भूख हड़ताल और आगे तक चलता रहेगा। पीएयूएमएस महासचिव के मुताबिक, यूक्रेन से 14 मेडिकल स्टूडेंट्स भारत वापस हुए हैं। भारत सरकार से वे सभी अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने की मांग कर रहे हैं। 

छात्रों ने लिखी चिट्ठी फिर भी जवाब नहीं

बताया जा रहा है कि यूक्रेन से लौटे छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार पीएमओ और कई सांसदों को पत्र लिखा है। लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जिसके बाद छात्र मजबूर होकर शांतिपूर्वक स्वास्थ्य मंत्रालय, एनएमसी, जंतर मंतर व जनपद मुख्यलायों पर विरोध प्रदर्शन भी किया। फिर केंद्र सरकार की तरफ से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।



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सीजेआई रमन्ना बोले- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जीरो अकाउंटेबिलिटी पर काम कर रहा, यह न्याय और लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह

सीजेआई रमन्ना बोले- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जीरो अकाउंटेबिलिटी पर काम कर रहा, यह न्याय और लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह



डिजिटल डेस्क, रांची। भारत के चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना रिपोटिर्ंग और बहस की वजह से न्यायपालिका को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रिंट मीडिया में आज भी एक अकाउंटबिलिटी दिखती है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जीरो अकाउंटबिलिटी के आधार पर काम कर रहा है। कई मामलों मे मीडिया कंगारू कोर्ट लगा लेता है। मीडिया ट्रायल किसी भी हाल में लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है।

चीफ जस्टिस शनिवार को रांची स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी में जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्च र में लाइफ ऑफ जज विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मीडिया अक्सर मामलों को इस तरह उछालता है, जिससे न्यायपालिका की छवि तो प्रभावित होती ही है, अनुभवी जजों को भी फैसला लेने में दिक्कत आती है। न्याय देने से जुड़े मुद्दों पर गलत सूचना और एजेंडा चलाने वाली मीडिया बहस लोकतंत्र की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रही है। सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अपनी आवाज का उपयोग लोगों को शिक्षित करने, उन्हें दिशा दिखाने के लिए करना चाहिए।

न्यायपालिका की चुनौतियों का जिक्र करते जस्टिस रमन्ना ने कहा कि अदालतों में काफी संख्या में लंबित मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। फ्रैजाइल ज्यूडिशियरी के लिए हमारे पास आधारभूत संरचना नहीं है। इस चुनौती का सामना करने के लिए हमें आधारभूत संरचना विकसित करनी होगी, ताकि जज फूल पोटेंशियल के साथ काम कर सकें। उन्होंने कहा कि जज सामाजिक दायित्वों से भाग नहीं सकते हैं। ज्यूडिशियरी को भविष्य की चुनौतियों के लिए लंबी अवधि की योजना बनानी होगी।

जज और ज्यूडिशियरी को एक यूनिफार्म सिस्टम विकसित करना होगा। मल्टी डिसिप्लीनरी एक्शन मोड में काम करना होगा। जरूरी है कि हम सस्टेनेबल मेथड ऑफ जस्टिस की अवधारणा लागू करने की दिशा में आगे बढ़ें। जजों को भी सिस्टम को टालने योग्य संघर्षों और बोझ से बचाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर मामलों की सुनवाई करनी होगी।

उन्होंने जजों पर बढ़ते हमलों पर चिंता जतायी। कहा कि रिटायरमेंट के बाद जज को भी समाज में जाना पड़ता है। रिटायरमेंट के बाद उन्हें उन कनविक्टेड लोगों से जूझना पड़ता है, जिनके खिलाफ एक जज ने कई आदेश पारित किये। जिस तरह पुलिस और राजनेताओं को रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षा दी जाती है, उसी तरह जजों को भी सुरक्षा दी जानी चाहिए।

अपने निजी जीवन की चर्चा करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने पहली बार सातवीं कक्षा में अंग्रेजी पढ़नी शुरू की। वह राजनीति में भी जाना चाहते थे, लेकिन नियति ने उनके लिए जज की भूमिका तय की और उन्हें इसका कोई मलाल भी नहीं है।

चीफ जस्टिस ने चांडिल और नगर उंटारी अनुमंडलीय अदालत भवन का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया। इसके अलावा उन्होंने झारखंड स्टेट लीगर सर्विसेज अथॉरिटी के प्रोजेक्ट शिशु के तहत कोरोना काल में अपने माता पिता को खोने वाले बच्चों के बीच छात्रवृत्ति का भी वितरण किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत झारखंड के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन ने किया।

 

(आईएएनएस)

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ bhaskarhindi.com की टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.



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