फ्लश करने से पहले बंद क्यों करना चाहिए टॉयलेट का ढक्कन, जानें यह कितना खतरनाक?

फ्लश करने से पहले बंद क्यों करना चाहिए टॉयलेट का ढक्कन, जानें यह कितना खतरनाक?


हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसे काम करते हैं, जिनके बारे में हम कभी गंभीरता से सोचते ही नहीं, टॉयलेट का यूज करना भी उन्हीं कामों में से एक है. हम बाथरूम जाते हैं, काम खत्म करते हैं, फ्लश दबाते हैं और बिना पीछे देखे बाहर निकल आते हैं. फ्लश की तेज आवाज सुनकर हमें लगता है कि सारी गंदगी बह गई, सब कुछ साफ हो गया और अब वहां कोई खतरा नहीं है. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है. 

हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस आम सोच को पूरी तरह बदल दिया है. इस शोध के अनुसार, टॉयलेट फ्लश करना जितना हम समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा गंदगी और कीटाणु हवा में फैला सकता है. यही वजह है कि अब विशेषज्ञ फ्लश करने से पहले टॉयलेट का ढक्कन बंद करने की सलाह दे रहे हैं.  तो आइए जानते हैं कि फ्लश करने से पहले टॉयलेट का ढक्कन बंद क्यों करना चाहिए. 
 
नई रिसर्च क्या कहती है?

अमेरिकन जर्नल ऑफ इन्फेक्शन कंट्रोल में छपी एक स्टडी में यह जानने की कोशिश की गई कि जब टॉयलेट फ्लश किया जाता है, तो उस समय बाथरूम के अंदर क्या-क्या होता है. रिसर्च के दौरान यह देखा गया कि ढक्कन खुला होने पर और ढक्कन बंद होने पर फ्लश करने से हवा में कितने छोटे-छोटे कीटाणु वाले कण फैलते हैं. शोध में पता चला कि जैसे ही हम फ्लश करते हैं, वैसे ही बहुत बारीक और अदृश्य बूंदें हवा में ऊपर की ओर उड़ जाती हैं. ये बूंदें इतनी छोटी होती हैं कि हमें दिखाई नहीं देतीं, लेकिन इनमें बैक्टीरिया और कीटाणु मौजूद हो सकते हैं. ये कण टॉयलेट सीट, दीवारों, फर्श, वॉशबेसिन और यहां तक कि पास रखे टूथब्रश और तौलियों पर भी जाकर बैठ सकते हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि ढक्कन बंद होने पर भी कुछ कण बाहर निकल जाते हैं. 

ढक्कन बंद होने के बाद भी कीटाणु बाहर क्यों आते हैं?

अब आपके मन में सवाल होगा कि अगर ढक्कन बंद है, तो फिर कीटाणु बाहर कैसे आ जाते हैं. इसका कारण बहुत साधारण है. जैसे टॉयलेट पूरी तरह एयरटाइट (हवा बंद) नहीं होते हैं, ढक्कन और सीट के बीच थोड़ी जगह होती है. जब फ्लश किया जाता है, तो पानी का तेज दबाव हवा को ऊपर की ओर धकेलता है. इसी के साथ बहुत छोटे-छोटे कण उस खाली जगह से बाहर निकल जाते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि ढक्कन बंद करना बेकार है, बल्कि इसका मतलब यह है कि फ्लश की प्रक्रिया हमारी सोच से कहीं ज्यादा गंदी हो सकती है. 

फ्लश करने से पहले टॉयलेट का ढक्कन बंद क्यों करना चाहिए

फ्लश करने से पहले टॉयलेट का ढक्कन बंद करना चाहिए, भले ही ढक्कन हर कीटाणु को न रोक पाए, लेकिन फिर भी इसे बंद करना बहुत फायदे भरा कदम है. ढक्कन बंद होने से बड़े छींटे सीधे बाहर नहीं आते और वहीं रुक जाते हैं. ज्यादातर घरों में टॉयलेट के पास ही टूथब्रश, साबुन, तौलिये और अन्य सामान रखा होता है. ढक्कन बंद करने से उन पर गंदगी कम गिरती है. फ्लश से निकलने वाली नमी और बदबू पूरे बाथरूम में फैलने से बचती है, कम कीटाणु फैलेंगे तो संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी कम होगा. 

जरूरी साफ-सफाई की आदतें

अगर आप सच में अपने बाथरूम को साफ और सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सिर्फ ढक्कन बंद करना ही काफी नहीं है. इसके साथ कुछ और अच्छी आदतें भी अपनानी जरूरी हैं. जैसे टॉयलेट सीट, फ्लश बटन, हैंडल और आसपास की सतहों को रो साफ करें. बाथरूम में खिड़की या एग्जॉस्ट फैन होना बहुत जरूरी है, ताकि हवा का सही प्रवाह बना रहे. साथ ही कोशिश करें कि टूथब्रश और तौलिये टॉयलेट से थोड़ी दूरी पर रखें या ढक कर रखें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सावधान! टॉयलेट फ्लश करते समय खुली सीट बन सकती है बीमारियों की वजह, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

सावधान! टॉयलेट फ्लश करते समय खुली सीट बन सकती है बीमारियों की वजह, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा


Bacteria Spread From Toilet Flush: टॉयलेट फ्लश करना हम सबके लिए एकदम ऑटोमैटिक आदत है. उठे, बटन दबाया और बाहर निकल गए. तेज आवाज, पानी की रफ्तार और कुछ सेकंड में सब खत्म. इतनी रोजमर्रा की चीज लगती है कि हम यह सोचते भी नहीं कि इसके बाद क्या होता है. लेकिन फ्लश के ठीक बाद जो होता है, वही बात वैज्ञानिकों को लंबे समय से परेशान कर रही है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर क्या निकला है रिसर्च में.

क्या निकला रिसर्च में?

American Journal of Infection Control में प्रकाशित एक रिसर्च में यह देखा गया कि टॉयलेट फ्लश करने पर बाथरूम के अंदर क्या फैलता है. इस स्टडी में ढक्कन खुला और बंद दोनों हालात में हवा में उड़ने वाले बेहद बारीक कणों को ट्रैक किया गया और यह देखा गया कि वे कहां जाकर बैठते हैं.नतीजे चौंकाने वाले थे. फ्लश करने पर ऐसे नग्न आंखों से न दिखने वाले कण आसपास की सतहों पर फैल सकते हैं और सिर्फ ढक्कन बंद कर देने से यह पूरी तरह नहीं रुकते. इसके बाद फ्लश करना उतना बेगुनाह नहीं लगता.

रिसर्च क्या कहती है?

स्टडी के मुताबिक, फ्लश करने पर टॉयलेट बाउल से बहुत छोटे-छोटे कण ऊपर की ओर उड़ते हैं. ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि आंखों से दिखते नहीं और हवा के साथ तेजी से फैलते हैं. हैरानी की बात यह रही कि ढक्कन बंद होने पर भी कुछ कण बाहर निकलकर बाथरूम में फैल जाते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि ढक्कन बंद करना बेकार है. इसका मतलब बस इतना है कि यह प्रक्रिया हमारी सोच से कहीं ज्यादा गंदी और जटिल है. टॉयलेट पूरी तरह सील नहीं होते.ढक्कन और सीट के आसपास छोटे गैप होते हैं, जहां से हवा और बूंदें निकल सकती हैं.

ढक्कन बंद करना क्यों जरूरी है?

भले ही ढक्कन सब कुछ न रोक पाए, लेकिन इससे फर्क जरूर पड़ता है. बड़ी बूंदें सीधे बाहर उड़ने की बजाय ढक्कन के नीचे ही टकरा जाती हैं. घरों में जहां टूथब्रश, तौलिये और हाथ पास में होते हैं, वहां यह काफी मायने रखता है. ढक्कन बंद करने से छींटे कम पड़ते हैं और नमी दूर तक नहीं फैलती. यह कोई परफेक्ट सुरक्षा नहीं है, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में जोखिम जरूर घटाता है खासकर कम्बाइंड बाथरूम में.

टॉयलेट हाइजीन के लिए और क्या करें?

सिर्फ ढक्कन पर भरोसा करना काफी नहीं है. सही सफाई कई आदतों को साथ मिलाकर करने से आती है. टॉयलेट सीट, फ्लश हैंडल और आसपास की सतहों को नियमित साफ करना बेहद जरूरी है. वेंटिलेशन भी अहम भूमिका निभाता है. बंद बाथरूम में हवा और भाप रुक जाती है, जिससे कण ज्यादा देर तक रहते हैं. इसके अलावा, टूथब्रश और दूसरी निजी चीजों को टॉयलेट से दूर रखना भी मदद करता है. ढक्कन बंद करना एक रूटीन का हिस्सा होना चाहिए, न कि अकेला उपाय. फ्लश से पहले ढक्कन बंद करना, समय-समय पर सफाई करना और सही तरीके से हाथ धोना ये सब मिलकर काम करते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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घर पर नॉर्मल और डॉक्टर के सामने हाई क्यों हो जाता है ब्लड प्रेशर, चौंका देगी वजह

घर पर नॉर्मल और डॉक्टर के सामने हाई क्यों हो जाता है ब्लड प्रेशर, चौंका देगी वजह


कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि जब वे घर पर अपना ब्लड प्रेशर नापते हैं तो रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य आती है, लेकिन जैसे ही अस्पताल या क्लिनिक में डॉक्टर के सामने जांच कराते हैं, ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ा हुआ दिखता है. यह देखकर लोग घबरा जाते हैं और सोचने लगते हैं कि कहीं उन्हें कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गई.

यह समस्या आज के समय में बहुत आम हो गई है और इसके पीछे एक खास मेडिकल वजह होती है, जिसे डॉक्टर व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं. यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए. तो आइए जानते हैं कि घर पर नॉर्मल और डॉक्टर के सामने हाई ब्लड प्रेशर क्यों हो जाता है.

क्या है व्हाइट कोट हाइपरटेंशन?

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर घर पर सामान्य रहता है, लेकिन डॉक्टर या अस्पताल में जांच के समय बढ़ जाता है, तो इस स्थिति को व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहा जाता है. डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल का माहौल, सफेद कोट पहने डॉक्टर, मेडिकल मशीनें और जांच की चिंता ये सभी चीजें व्यक्ति को अनजाने में तनाव में डाल देती हैं. इसी तनाव की वजह से ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ जाता है.

अस्पताल में जाते ही ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ जाता है?

अस्पताल जाते समय लोग अक्सर घबराए हुए होते हैं. किसी को बीमारी का डर होता है, तो किसी को रिपोर्ट खराब आने की चिंता, कई बार लोग जल्दी-जल्दी अस्पताल पहुंचते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या लंबा इंतजार करते हैं. ये सभी बातें ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा नींद पूरी न होना, चाय या कॉफी पीकर जांच कराना, जांच के दौरान बात करना, धूम्रपान करना, मानसिक तनाव या बेचैनी भी ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह बन सकते हैं.

स्ट्रेस हार्मोन कैसे बढ़ाते हैं ब्लड प्रेशर?

डॉक्टरों के अनुसार, जब हम तनाव में होते हैं तो शरीर में कुछ खास हार्मोन निकलते हैं. ये हार्मोन दिल की धड़कन तेज कर देते हैं और खून की नलियों को कम्प्रेस कर देते हैं. इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है और वह अचानक बढ़ जाता है. उनका कहना है कि परीक्षा का डर, डॉक्टर से मिलने की चिंता या पहले की कोई खराब मेडिकल याद, ये सब तनाव को बढ़ाते हैं और ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए ऊपर चला जाता है. 

क्या व्हाइट कोट हाइपरटेंशन खतरनाक है?

डॉक्टरों का कहना है कि हर बार अस्पताल में हाई ब्लड प्रेशर आना हमेशा खतरनाक नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. कुछ लोगों में यह आगे चलकर असली हाई ब्लड प्रेशर में बदल सकता है, जो दिल, किडनी, दिमाग और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, सही तरीके से जांच और रिपोर्ट को समझ लिया जाए, तो बेवजह दवाइयां खाने से बचा जा सकता है. 

आपको क्या करना चाहिए?

घर पर डिजिटल बीपी मशीन से नियमित जांच करें, बीपी नापने से पहले कम से कम 5 मिनट शांति से बैठें. जांच से 30 मिनट पहले चाय, कॉफी, सिगरेट या एक्सरसाइज से बचें. रोज की रीडिंग एक डायरी में लिखें. डॉक्टर को घर पर नापी गई सभी रीडिंग दिखाएं. कुछ मामलों में डॉक्टर 24 घंटे की एम्बूलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की सलाह भी दे सकते हैं, जिससे पूरे दिन का सही औसत ब्लड प्रेशर पता चल सके. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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काली-पीली और नीली… कितनी तरह की होती है हल्दी और किन बीमारियों में आती है काम?

काली-पीली और नीली… कितनी तरह की होती है हल्दी और किन बीमारियों में आती है काम?


Turmeric Types and Uses: हल्दी अपने सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है. इसका नियमित सेवन जोड़ों की सेहत को बेहतर बनाता है, पाचन सुधारता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. यह त्वचा के लिए भी हल्दी फायदेमंद है और मुंहासों को कम करने और पिग्मेंटेशन घटाने में मदद करती है. चाहे आप हल्दी को खाने में इस्तेमाल करें या घरेलू नुस्खों में, यह आपकी सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाती है.

यह कई तरह की होती है और हर तरह की हल्दी का अपना अलग महत्व है. कोई स्वाद के लिए खास है, तो कोई त्वचा और दवाइयों के लिए. अगर आप जानते हैं कि कौन-सी हल्दी किस काम की है, तो आप इसे सही तरीके से अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में शामिल कर सकते हैं. सेहत सुधारनी हो, त्वचा निखारनी हो या खाने में सुनहरा रंग जोड़ना हो, हल्दी हर रूप में काम की है.

सामान्य हल्दी

सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली हल्दी यही है, जो आमतौर पर पाउडर के रूप में हर घर में मिल जाती है. यही वह पीली हल्दी है जो करी, सब्जी और दाल में रंग व स्वाद देती है. इसमें मौजूद कर्क्यूमिन इसे चमकीला रंग देता है और यही तत्व सूजन कम करने व शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाने में मदद करता है. खाना बनाने में यह स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है.

सफेद हल्दी

सफेद हल्दी आम हल्दी की तुलना में कम पाई जाती है. इसका रंग पीला नहीं होता और स्वाद भी हल्का होता है. आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने और सूजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कई एशियाई व्यंजनों, खासकर अचार और मसाला मिश्रण में इसका हल्का फ्लेवर देने के लिए उपयोग होता है.

जंगली हल्दी

जंगली हल्दी की खुशबू तेज होती है और इसका स्वाद भी सामान्य हल्दी से थोड़ा अलग होता है. इसका इस्तेमाल खाने में कम और आयुर्वेद व स्किन केयर में ज्यादा होता है. इसके पाउडर से फेस पैक बनाए जाते हैं, जो त्वचा की रंगत निखारने और दाग-धब्बे कम करने में मदद करते हैं.

काली हल्दी

काली हल्दी बहुत रेयर होती है और अंदर से इसका रंग गहरा, लगभग काला होता है। यह आमतौर पर रोज़मर्रा के खाने में इस्तेमाल नहीं की जाती. आयुर्वेद में इसे दर्द, सूजन, जोड़ों की परेशानी और सांस से जुड़ी दिक्कतों में उपयोगी माना जाता है.

एलेप्पी हल्दी

भारत के एलेप्पी शहर के नाम पर जानी जाने वाली यह हल्दी कर्क्यूमिन से भरपूर होती है. इसका रंग गहरा पीला और स्वाद तेज होता है. इसमें कर्क्यूमिन की मात्रा ज्यादा होने की वजह से इसे सेहत के लिहाज से बेहद असरदार माना जाता है. यही कारण है कि यह अच्छी क्वालिटी के मसालों और सप्लीमेंट्स में ज्यादा इस्तेमाल की जाती है.

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क्या खाना रखने के लिए आप भी इस्तेमाल करती हैं एल्यूमीनियम फॉयल, जानें अपने परिवार को किस खतरे म

क्या खाना रखने के लिए आप भी इस्तेमाल करती हैं एल्यूमीनियम फॉयल, जानें अपने परिवार को किस खतरे म


Is Aluminium Foil Safe for Food Storage: क्या आप भी पका हुआ खाना एल्युमिनियम फॉयल या एल्युमिनियम के डिब्बों में रख देते हैं?. ज्यादातर घरों में बची हुई रोटियां लपेटने, सब्ज़ी ढकने या टिफिन पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल आम बात है. यह आसान, हल्का और तुरंत काम आने वाला तरीका लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी सेहत के लिए कितनी सुरक्षित है?. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. 

इससे क्या होता है नुकसान?

दिसंबर 2024 में Food Bioscience जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जब मछली को एल्युमिनियम फॉयल में तेज तापमान पर रोस्ट किया गया, तो फॉयल से धातु मछली के अंदर चली गई. रिसर्चर ने पाया कि जितना ज्यादा फॉयल इस्तेमाल हुआ, उतनी ही ज्यादा मात्रा में धातु खाने में मिली.

एक दूसरी स्टडी में यह देखा गया कि बेकिंग के दौरान एल्युमिनियम फॉयल से खाना कितनी मात्रा में प्रभावित होता है. इसमें पाया गया कि सैल्मन, मैकेरल, चिकन, पोर्क, टमाटर और चीज़ जैसे कई फूड आइटम्स में एल्युमिनियम की मात्रा 40 गुना तक बढ़ गई.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इस मामले में डॉक्टर्स का कहना है कि एल्युमिनियम फॉयल और कंटेनर का गलत इस्तेमाल सेहत के लिए खतरा बन सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, एल्युमिनियम खासतौर पर खट्टे, नमकीन और मसालेदार खाने जैसे टमाटर, नींबू, सिरका, अचार और ग्रेवी के साथ रिएक्ट करता है. जब ऐसा खाना फॉयल या एल्युमिनियम के बर्तन में रखा या पकाया जाता है, तो धातु खाने में मिल सकती है.

डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक ज्यादा एल्युमिनियम शरीर में जाने से हड्डियों की समस्या, किडनी पर दबाव और नसों से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.  किडनी के मरीजों में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. 

रायपुर के जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर सर्जन Dr Jayesh Sharma ने  सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया था. उन्होंने वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “गरम रोटी को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटना कितना सुरक्षित है और कितना नुकसानदेह? हम रोजाना लंच पैक करने और खाना स्टोर करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. लेकिन यह भी चर्चा में है कि जब एल्युमिनियम को गर्म किया जाता है, तो क्या वह खाने में मिलकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है.”

 

कैसे रखें खाना सुरक्षित?

एक्सपर्ट के अनुसार,  रोजाना खाना पकाने या लंबे समय तक स्टोर करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल या कंटेनर से बचें. इसके लिए खट्टा, नमकीन और मसालेदार खाना फॉयल में न रखें, पका हुआ खाना स्टील, कांच या सिरेमिक के बर्तनों में रखें और अगर बेकिंग या ग्रिलिंग में फॉयल इस्तेमाल करें, तो खाने और फॉयल के बीच बटर पेपर या बेकिंग पेपर लगाएं. इसके अलावा डिस्पोज़ेबल एल्युमिनियम कंटेनर दोबारा इस्तेमाल न करें. 

एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले ट्रेंड्स के चक्कर में आकर खाना स्टोर करने के गलत तरीके न अपनाएं. सेहत से जुड़े मामलों में काफी सावधानी रखने की जरूरत होती  है. सही जानकारी और एक्सपर्ट की सलाह से ही अपने और परिवार के लिए सुरक्षित विकल्प चुनें.

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