ग्रहण में प्रेग्नेंट महिला बाहर आ जाए तो बच्चा हो जाता है विकलांग?


मां बनना एक महिला एक लिए सुखद एहसास होता है. इस लंबे सफर के दौरान गर्भवती महिला के शरीर और दिमाग में हार्मोनल चेंजेज के साथ दिमाग में कई तरह की बातें भी आती है. प्रेग्नेंसी को लेकर हमारे समाज कई सारी ऐसी बातें जो अक्सर कही जाती है. एक बात जो अक्सर कही जाती है वह यह कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को बाहर नहीं निकलना चाहिए या खुली आंखों से ग्रहण नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर होता है. और बच्चा विकलांग हो सकता है. अब सवाल यह उठता है कि क्या सच में हो सकता है? 

मिथ Vs फैक्ट्स

दरअसल, एबीपी लाइव हिंदी ने ‘मिथ vs फैक्ट्स’ को लेकर एक सीरिज शुरू किया है. इस सीरिज के जरिए प्रेग्नेंसी को लेकर समाज में जितने भी मिथ है. जिसे लोग सच समझकर फॉलो करते हैं हम उनका लॉजिकल तरीके से जवाब देने की कोशिश करेंगे.

 ‘मिथ vs फैक्ट्स’ सीरिज में हम ऐसे मुद्दों को उठाते हैं. उसके तह तक जाने की कोशिश करते हैं. जिससे अक्सर बोलचाल की भाषा में लोग इस्तेमाल करते हैं. जैसे हमारे समाज में प्रेग्नेंसी को लेकर कई सारी ऐसी बातें है जिसे डॉक्टर मिथ मानती है.

जैसे- प्रेग्नेंसी के दौरान केसर का दूध पीने से बच्चे का रंग गोरा होता है, पपीता नहीं खाना चाहिए क्यों गर्भपात हो जाता है, प्रेग्नेंसी के दौरान बैठकर पोछा लगाने से नॉर्मल डिलीवरी होती है. प्रेग्नेंसी में खूब घी खाना चाहिए इससे नॉर्मल डिलीवरी होती है. ऐसे कई सारी बातें हैं जिसे साइंस नहीं मानती है. इस Myth VS Truth सीरिज के जरिए ऐसी बातों को तथ्य के साथ हम आम जनता के साथ पेश करेंगे. ताकि आप दकियानूसी झूठी बातों के दलदल में न फंसे. 

गर्भवती महिला को ग्रहण में घर के अंदर रहना चाहिए

घर के बड़े-बुजुर्ग ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को घर के अंदर रहने की सलाह देते हैं. कहा जाता है कि अगर ग्रहण की हल्की सी भी छाया गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ी तो वह किसी न किसी विकलांगता का शिकार हो जाएगा. साइंस के मुताबिक ग्रहण एक नैचुरल प्रोसेस है. उससे बच्चे को कई नुकसान नहीं होता है. ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए यह सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए ही जरूरी नहीं बल्कि ऐसा करने से सभी को मना किया जाता है क्योंकि इससे आंख खराब हो सकती है. 

ये भी पढ़ें: Myths Vs Facts: प्रेग्नेंसी में घी खाने से नॉर्मल डिलीवरी आसान हो जाती है? जान लीजिए सच

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

सोरायसिस से परेशान थीं किम कार्दशियन, जानें ये कितनी खतरनाक?


Kim Kardashian Psoriasis : अमेरिकन एक्ट्रेस किम कार्दशियन अनंत अंबानी की शादी में शामिल होने मुंबई पहुंच चुकी हैं. उनकी एक झलक पाने के हर कोई बेताब दिखा. अपनी खूबसूरती और टैलेंट से हर किसी के दिल पर राज करने वाली किम कार्दशियन (Kim Kardashian) सोरायसिस जैसी बीमारी से गुजर चुकी हैं. कुछ समय पहले ही उन्होंने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 25 साल की उम्र में उन्हें पहली बार पैरों में दाग दिखा.

पहले तो मामूली इंफेक्शन समझा लेकिन धीरे-धीरे ये बीमारी पूरे शरीर पर फैलने लगी. जिसके बाद उन्हें पता चला कि उन्हें सोरायसिस हो गया है, जिसका कोई इलाज नहीं है. उन्हें अपने दाग को मेक्प और कपड़ों से छिपाकर रखना पड़ता था. जानिए आखिर सोरायसिस कितनी खतरनाक बीमारी है…

सोरायसिस का कोई इलाज नहीं
सोरायसिस स्किन से जुड़ी बीमारी है, जो काफी खतरनाक होती है. यह किसी भी उम्र में हो सकती है और इसका कोई इलाज नहीं है. मतलब यह कभी खत्म न होने वाली बीमारी है. इसे सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे लोग जिन्हें पहले से ही स्किन की कोई बीमारी है, उन्हें इस बीमारी से ज्यादा खतरा हो सकता है.

सोरायसिस होने का कारण
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोरायसिस इम्यून सिस्टम में खराबी की वजह से होती है. इस डिजीज में इम्यून सिस्टम ओवरएक्टिव होता है. इससे शरीर की अच्छी सेल्स खत्म होने लगती है. जिसका स्किन पर असर होता है. इसकी शुरुआत में स्किन पर खुजली होती है. अगर समय पर इसका ध्यान न दिया जाए तो ये बीमारी लगातार बढ़ती जाती है और स्किन पर पपड़ी सी जमने लगती है. कई बार घाव भी बन जाते हैं. सिरोसिस होने का कारण जेनेटिक भी हो सकता है.

सोरायसिस का ज्यादा प्रभाव कहां
डॉक्टरों के मुताबिक, सोरायसिस का सबसे ज्यादा प्रभाव हाथ और पीठ पर देखने को मिलता है, फिर यह पूरे शरीर पर फैल सकता है. बढ़ती उम्र में ये बीमारी ज्यादा खतरनाक होती जाती है. खानपान सही रखकर और डॉक्टर के हिसाब से स्किन केयर फॉलो कर इसे कंट्रोल में रख सकते हैं. 

सोरायसिस के साइड इफेक्ट्स
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोरायसिस की बीमारी की वजह से मेंटल हेल्थ पर भी असर होता है. ऐसा इस बीमारी का मरीज बाहर निकलने और लोगों से मिलने से बचने की वजह से होता है. इस बीमारी में इंसान हीन भावना आने लगती है. जिससे एंग्जाइटी और डिप्रेशन बढ़ने लगता है.

सोरायसिस से कैसे बचें

1. स्किन ड्राई न रखें
2. खुजली की समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं
3. शराब न पिएं
4. स्किन पर मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें: Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

भारत में महिलाएं या पुरुष- कौन हैं अकेलेपन का अधिक शिकार


अकेलेपन की व्याख्या करना बेहद मुश्किल है. आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में हर इंसान एक दूसरे से कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है. एक तरफ आप देखेंगे कि एक व्यक्ति के कई सारे दोस्त हैं वहीं इसका दूसरा पहलू देखेंगे तो वह व्यक्ति अपनी जिंदगी में बेहद अकेला है. 

क्‍या है अकेलापन?

अकेलापन एक मानसिक दुख है. जिसमें व्यक्ति खुद को सबसे अलग-थलग महसूस करता है. जिससे वह जुड़ा होता है. ऐसे व्यक्ति आमतौर पर अंदर से असंतुष्ट होते हैं.  नेशनल सेम्‍पल सर्वे ऑफिस द्वारा 2004 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 4.91 मिलियन लोग अकेले रह रहे थे और अकेलेपन से पीड़ित थे.

अकेलापन के शिकार आजकल हाउस वाइफ काफी बड़ी संख्या में है. वहीं एक व्यक्ति जिसके बहुत सारे दोस्त है लेकिन जब वह घर आता है तो वह अकेलापन महसूस करता है. दरअसल, अकेलापन एक मेंटल हेल्थ इश्यू है जिसमें व्यक्ति अपने पसंद के लोगों को काफी ज्यादा मिस करता है. आजकल भारत में महिला हो या पुरुष अकेलापन के कारण कई सारी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. 

क्‍या है ऐंगज़ाइअटी डिसऑर्डर?  जानें इसके कारण

वाटरलू विश्वविद्यालय में शेली बर्सिल के रिसर्च के मुताबिक महिलाएं अपने अकेलेपन को ज्यादा व्यक्त करती हैं. पुरुष और महिला दोनों अपनी दिमाग संरचनाओं और भावनाओं को अलग-अलग तरीके से व्यक्त करती है. वहीं पुरुष अकेलापन और अपनी भावनाओं को ज्यादा छिपाते हैं वहीं महिला नहीं छिपा पाती हैं. 

सिज़ोफ्रेनिया: कारण और लक्षण

अगर किसी पुरुष में सिज़ोफ्रेनिया के लक्षण दिखाई देते हैं वह अपनी इस बीमारी के बारे में अपने दोस्तों से बात करते हैं. दूसरी ओर महिलाएं को अगर इस तरह की बीमारी का पता चलता है तो वह अपने आसपास के लोगों को बताना पसंद नहीं करती हैं. वह जल्दी किसी से जुड़ना पसंद नहीं करती है. ब्रेकअप या शादी के बाद महिलाएं शुरुआत के दिनों में काफी ज्यादा अकेलापन महसूस करती है. वहीं पुरुषों को शुरुआत में नहीं बल्कि बाद में इसका एहसास होता है. पुरुष अपने भावनाओं को अक्सर दबाकर रखना ज्यादा पसंद करते हैं. 

नींद की कमी

अकेलापन के कारण अक्सर लोग उदास हो जाते हैं. रिसर्चर के मुताबिक इसके कारण नींद की कमी हो सकती है. और बाद में लोग अवसाद का शिकार हो जाते हैं. जब भावनाएं खुद को अलग-थलग करने और दूसरे के लायन न मानने से इंकार करे. तो यह बाद में जा कर सेल्फ डिस्ट्रक्शन में बदल जाती हैं.

अकेलापन से निपटने के खास उपाय

अकेलेपन से निपटना है तो अपनी फैमिली, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलना-जुलना शुरू करें

अपना ध्यान किसी क्रिएटिव चीज पर लगाएं

थेरेपी और डॉक्टर की सलाह लें

अपनी सोच वाले लोगों से मिलें. 

अच्छी किताब पढ़ें

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें: Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

शरीर में है खून की कमी तो रोजाना एक चम्मच खाएं हलीम सीड्स, हफ्तेभर में दिखेगा फायदा


हलीम के बीज सालों से भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है. खासकर डिलीवरी के बाद महिलाओं को चमसुर का हलवा और लड्डू और दूसरी रेसिपी के साथ मिलाकर खिलाई जाती है. यह पोषक तत्व से भरपूर होता है. अगर किसी के शरीर में पोषक तत्व की कमी है तो उन्हें इसके बीज जरूर खाना चाहिए.

हलीम में फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह सेहत के लिए काफी ज्यादा अच्छा होता है. हालांकि हलीम की तासीर गर्म होती है इसलिए इसे अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए. सर्दियों में लोग अक्सर हलीम का बीज खाते हैं. लेकिन इसकी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में किसी भी सीजन में खा सकते हैं.

जिन लोगों के शरीर के खून की कमी होती है उन्हें जरूर खाना चाहिए हलीम सीड्स

जिन लोगों के शरीर में खून की कमी होती है उन्हें हलीम सीड्स जरूर खाना चाहिए इशसे उनके हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है. इसे हर रोज खाने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है और एनीमिया की शिकायत ठीक होती है. यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के बाद हलीम के बीज खाने के लिए दिए जाते हैं.

जैसा कि आपको पता है खून की कमी भारतीय महिलाओं में एक बड़ी समस्या है. इसलिए खासकर महिलाओं को हर रोज एक चम्मच जरूर खाना चाहिए. 1 चम्मच हलीम के बीज में 12 मिलीग्राम आयरन होते हैं. 

ब्रेस्ट फीडिंग वाली महिलाएं

अगर कोई महिला ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं. उन्हें हलीम सीड्स जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में दूध का लेवल बढञता है. डिलीवरी के बाद महिलाओं को हर रोज 1 चम्मच हलीम का बीज खाना चाहिए. इससे रोजाना इस्तेमाल करने से दूध का लेवल शरीर में बढ़ता है. जिसका सीधा फायदा आपके शिशु को मिलता है. जिन महिलाओं में दूध की कमी होती है उन्हें हलीम का बीज जरूर खाना चाहिए. 

कब्ज की समस्या से छुटकारा

हलीम सीड्स में काफी ज्यादा फाइबर होता है. जो कब्ज की समस्या को दूर करती है. इसे हर रोज खाने से पेट साफ रहता है जिससे आंत ठीक रहता है. जिन लोगों को कब्ज और पेट साफ नहीं रहता है उन्हें हलीम सीड्स खाना चाहिए. 

मसल्स बनाने में होता है फायदेमंद

हलीम बीज सुपरफूड होता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है. अगर आप रोजाना हलीम बीज खाते हैं तो इससे शरीर की चर्बी कम होती है. और इससे मसल्स बढ़ता है. जिम जाने वाले लोगों के लिए यह बहुत अच्छा होता है. रोजाना खाली पेट हलीम सीड्स पानी में डालकर पीना चाहिए. यह शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. 

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें: Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या गैस चूल्हे पर रोटी सेकने से भी होता है कैंसर? ये है सच


Cancer Myth and Fact : पुराने समय में चूल्हे की आंच पर सेंकी जाती थी लेकिन आजकल घर-घर गैस सिलेंडर आ गया है. अब रोटियां गैस की आंच पर ही बनाई जाती हैं. बहुत से घरों में रोटी गैस की आंच पर सीधे ही सेंकी जाती है. कहा जाता है कि ऐसा करने से कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है. सोशल मीडिया पर तमाम दावे किए जाते हैं कि गैस चूल्हे पर रोटी सेंकने से कैंसर (Cancer ) हो सकता है.

अगर आपके भी मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या गैस चूल्हे में भी रोटी बनाना कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को बुलवा देना हो सकता है. तो चलिए जान क्या जानते हैं क्या है सच. ऐसी बातों को लेकर ‘एबीपी लाइव हिंदी’ की खास पेशकश है Myth Vs Facts.  ‘Myth Vs Facts सीरीज‘ की कोशिश है कि आपको दकियानूसी बातों की दलदल से निकालकर आपतक सच्चाई पहुंचाना. 

ऐसे में आइए जानते हैं इस बात में कितनी सच्चाई है,  क्या वाकई गैस की आंच पर बनी रोटी कैंसर का कारण बन सकती है.

Myth- क्या गैस चूल्हे पर रोटी सेंकने से कैंसर होता है

Fact– बहुत से लोग जल्दी-जल्दी खाना बनाना चाहते हैं. ऐसे में शॉर्टकट अपनाते हैं. गैस की आंच पर रोटी जल्दी पकती है, इसलिए ज्यादातर लोग रोटी बनाते समय सीधे आंच पर ही उसे सेंक लेते हैं. कहा जाता है कि गैस की आंच पर रोटी पकाते समय इसमें कई तरह के केमिकल्स आ जाते हैं.

इतना ही नहीं बहुत ज्यादा आंच पर रोटी पकाने से वे हेट्रोसायक्लिक एमाइन (HCA) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) जैसे कार्सिनोजेन्स के संपर्क में आती हैं. गैस पर रोटी सेंकने से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड समेत कई खतरनाक प्रदूषक भी रोटी में आ सकते हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
जानी-मानी डाइटिशिन शिखा कुमारी ने भी इंस्टाग्राम पर अपनी एक पोस्ट पर गैस पर रोटी सेंकने के नुकसान बताए हैं. उन्होंने कहा, ‘पहले के जमाने में रोटियां तवे पर दूसरी रोटी से दबाकर या किसी कपड़े की मदद से दबाकर पकाई जाती थी लेकिन अब चिमटे का इस्तेमाल होता है. इससे आंच पर रोटियां सीधे ही सेंकी जाती हैं. आंच पर रोटी सेंकने से उमें कई प्रदूषक आ सकते हैं, जिससे रोटी जहरीली हो सकती है और उसे खाने से कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.’

गैस की आंच पर रोटी सेंकना क्यों खतरनाक

1. रोटी हमेशा ही हल्की या मध्यम आंच पर सेंकनी चाहिए, कोशिश करें की गैस के फ्लेम में रोटी सीधे न आए.
2. ज्यादा आंच पर रोटी सेंकने से कार्सिनोजेनिक्स रिलीज होते हैं, जो रोटी को हानिकारक बना सकते हैं.
3. चिमटे या टॉन्ग्स की मदद से रोटी को सीधे गैस पर रखने से रोटी में कई हानिकारक केमिकल्स आ सकते हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें :

Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बार-बार सर्दी जुकाम इन गंभीर बीमारियों के हो सकते हैं संकेत



<p style="text-align: justify;">सर्दी-जुकाम एक आम बीमारी है जो पूरे साल बदलते मौसम जैसे बरसात. ठंड, या गर्मी के मौसम में हमें परेशान करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं बार-बार सर्दी जुकाम होने सिर्फ कमजोर इम्युनिटी के लक्षण नहीं बल्कि गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं. अगर आपको भी लगातार सर्दी-जुकाम की परेशानी रहती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सर्दी-जुकाम के साथ थकान इस बीमारी के हैं लक्षण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सर्दी-जुकाम के साथ आपको थकान होती है, बुखार रहता है साथ ही सांस लेने में तकलीफ होती है. तो यह किसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि बार-बार सर्दी जुकाम के पीछे कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती है. साथ ही इनके लक्षण और बचाव के बारे में चर्चा करेंगे.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एलर्जी:</strong> बार-बार नाक बहना, छींक आना, आंखों से पानी निकलना और खांसी जैसे लक्षण इन बीमारियों के संकेत हो सकते हैं. एलर्जी धूल, पराग, पालतू जानवरों के बाल, या कुछ फूड्स के कारण भी एलर्जी हो सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अस्थमा:</strong> अस्थमा सांस से संबंधित बीमारी है जो सांस लेने वाली नली में सूजन और सिकुड़न का कारण बनती है. इसके शुरुआती लक्षण होते हैं सांस लेने में दिक्कत, खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट शामिल है. बार-बार सर्दी-जुकाम अस्थमा को भी ट्रिगर कर सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इम्युनिटी कमजोर:</strong> अगर आपकी इम्युनिटी कमजोर है तो बार-बार कोल्ड कफ की परेशानी होने लगती है. इसमें सर्दी-जुकाम भी शामिल है. कमजोर इम्युनिटी स्ट्रेस, खराब पोषण और दवाओं के कारण होती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर:</strong> क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर फेफड़ों से संबंधित बीमारी है. जो धीरे-धीरे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन हो सकती है. इसके लक्षणों में शामिल है सांस में तकलीफ, खांसी, बलगम का बढ़ना और बार-बार सीने में इंफेक्शन शामिल है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>टीबी:</strong> टीबी एक गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन वाली बीमारी है, इसके शुरुआती लक्षण ऐसे होते हैं कि हफ्ते भर में खांसी, बलगम में खून आना, बुखार, रात में पसीना आना और थकान शामिल है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सर्दी-खांसी के उपाय:</strong> इसके लिए सबसे पहले पौष्टिक तत्व से भरपूर डाइट लें, रेगुलर एक्सरसाइज करें. नींद पूरी लें और स्ट्रेस कम लें.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बचाव करने का तरीका</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एलर्जी से बचें:</strong>&nbsp;अपने हाथ-पैर को धोएं और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें. ताकि वायरस या बैक्टीरिया फैले नहीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं:</strong> धूम्रपान और अल्कोहल न लें. पूरी नींद लें. एक्सरसाइज जरूर करें. क्योंकि आप जितना एक्टिव रहेंगे आपको बीमारी का खतरा कम रहेगा.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डॉक्टर से सलाह लें:</strong> अगर आपको बार-बार सर्दी जुकाम हो रहा है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a title="Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/health-tips-lung-cancer-myths-and-facts-know-causes-and-prevention-in-hindi-2733256/amp" target="_blank" rel="noopener">Myth vs Facts: क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है लंग कैंसर? कम उम्र में नहीं होती बीमारी, जानें क्या है हकीकत</a></p>



Source link