मानसून में पेट के इंफेक्शन से बचना है तो आज ही बदल लें ये आदतें, डॉक्टरों ने बताए ये आसान उपाय 

मानसून में पेट के इंफेक्शन से बचना है तो आज ही बदल लें ये आदतें, डॉक्टरों ने बताए ये आसान उपाय 


Monsoon Stomach Infection: बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम जरूर लेकर आता है, लेकिन यही मौसम पेट से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. मानसून के दौरान उल्टी, दस्त, फूड प्वाइजनिंग, गैस्ट्रोएन्टराइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए जैसे संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हैं.

इसकी सबसे बड़ी वजह बारिश के दौरान पानी का दूषित होना, नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस का तेजी से बढ़ाना और खुले में रखा खाना जल्दी खराब होना है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि मानसून में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपना कर इस इंफेक्शन से बहुत हद तक बचा जा सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी मानसून में पेट के संक्रमण से बचना है, तो आपको कौन सी आदतें आज ही बदल लेनी चाहिए. 

सबसे पहले पीने के पानी पर ध्यान दें 

मानसून में पेट के अधिकांश संक्रमण दूषित पानी की वजह से होते हैं. भारी बारिश के दौरान बैक्टीरिया सीवर का पानी और गंदे पीने के पानी के सोर्स तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में साफ दिखने वाला पानी भी पूरी तरह सुरक्षित हो यह जरूरी नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या पैक्ड पानी ही पीना चाहिए. अगर पानी की क्वालिटी को लेकर संदेह हो तो अच्छे वाटर प्यूरीफायर या क्लोरीनेशन टैबलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि बाहर का पानी या बाहर के ड्रिंक पीने से बचना चाहिए. और अपने साथ पीने का पानी हमेशा रखना ज्यादा फायदेमंद होता है. 

ताजा और घर का बना खाना सबसे सुरक्षित 

डॉक्टरों के अनुसार बारिश के मौसम में लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए. नमी के कारण बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ते हैं, जिससे भोजन दूषित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर का ताजा बना भोजन सबसे सुरक्षित रहता है. सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे हुए फल और लंबे समय से बाहर रखे स्नैक्स खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है. 

फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोना जरूरी 

अक्सर लोग फल और सब्जियों को सिर्फ पानी से धोकर इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन मानसून में इतनी सावधानी काफी नहीं होती है. इनके ऊपर मिट्टी, कीटनाशक और कई तरह के सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए, जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट के लिए सिरके वाली पानी में भिगोकर भी साफ किया जा सकता है. साथ ही कच्चे स्प्राउट्स और पहले से कटे हुए फलों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा रहता है. 

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हाथ धोने की आदत बना सकती है बड़ा फर्क 

डॉक्टर के अनुसार हाथ धोना इंफेक्शन से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है.  खाना बनाने से पहले, टॉयलेट के इस्तेमाल के बाद और बाहर से आने पर साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना चाहिए. वहीं अगर किसी व्यक्ति को दस्त या उल्टी की समस्या हो जाए, तो शरीर में पानी की कमी न होने दें. हल्का भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहे. अगर तेज बुखार, खून वाली उल्टी या दस्त की समस्या हो या कुछ दिनों तक आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर से कांटेक्ट करना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट, 57 बार टली सुनवाई और हो गई मौत

दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट, 57 बार टली सुनवाई और हो गई मौत


Cancer Drug  kerala Case : कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है. ऐसे में समय पर सही इलाज और लाइफ सेवर दवाएं मिलना मरीजों के लिए बेहद जरूरी होता है, लेकिन जब इलाज महंगा हो और उससे जुड़ा मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में फंसा रहे तो इसका सीधा असर मरीज की जिंदगी पर पड़ सकता है. ऐसा ही एक मामला केरल हाईकोर्ट से सामने आया है.

यहां कैंसर की लाइफ सेवर दवा रिबोसिक्लिब को सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका 57 बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई, लेकिन आखिरी सुनवाई नहीं हो सकी. इसी दौरान याचिकाकर्ता महिला की मौत हो गई. अब इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश से जल्द सुनवाई कराने की अपील की गई है, जिससे दवाओं तक पहुंच से जुड़े इस जरूरी मामले पर जल्द फैसला हो सके. यह मामला महंगी कैंसर दवाओं तक मरीजों की पहुंच और न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार पर भी सवाल खड़े कर रहा है. 

दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट

यह याचिका जून 2022 में केरल हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी. इसका उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर की लाइफ सेवर दवा रिबोसिक्लिब को आम मरीजों के लिए किफायती बनाना था. जनवरी 2023 से अब तक इस मामले को 57 बार आखिरी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन किसी भी तारीख पर आखिरी बहस नहीं हो सकी. इसी बीच याचिकाकर्ता महिला की मृत्यु हो गई, हालांकि महिला की मौत के बाद भी केरल हाईकोर्ट ने इस मामले को आम लोगों के हित से जुड़ा मानते हुए, याचिकाकर्ता की मौत के बाद भी अपने स्तर पर इसकी सुनवाई जारी रखने का फैसला किया. 

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिका में केंद्र सरकार से पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने की मांग की गई थी. अगर ऐसा होता, तो इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारत में बनाया जा सकता था और इसकी कीमत में 90 से 95 प्रतिशत तक कमी आ सकती थी. बताया गया कि फिलहाल रिबोसिक्लिब की कीमत करीब 78,400 रुपये प्रति माह है, जबकि दूसरी दवा एबेमासिक्लिब की कीमत 47,700 रुपये से 95,500 रुपये प्रति माह तक बताई गई है. 

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सरकार ने क्या दिया जवाब?

सरकार ने माना कि रिबोसिक्लिब एक प्रभावी दवा है, लेकिन गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने से इनकार कर दिया. सरकार का कहना था कि ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति को राष्ट्रीय आपातकाल की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है. वहीं याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन के अधिकार का हिस्सा है. इसलिए दवाओं तक सस्ती पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. मामले में केंद्र सरकार, दवा निर्माता कंपनियों और अन्य पक्ष अदालत में अपने विस्तृत जवाब दाखिल कर चुके हैं. अदालत ने इस मामले में एक एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया था. वर्किंग ग्रुप का कहना है कि सभी पक्षों की दलीलें और अदालत के तहत मांगी गई रिपोर्टें जमा हो चुकी हैं. इसके बाद भी दवाओं तक पहुंच से जुड़े संवैधानिक सवालों पर अब तक आखिरी फैसला नहीं आया है. 

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Swiggy पर FSSAI का बड़ा एक्शन, ग्राहकों की शिकायतों के बाद जारी किए 9 नोटिस

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Swiggy Instamart FSSAI Notice: ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी एक बार फिर चर्चा में है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्विगी इंस्टामार्ट को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में 9 नोटिस जारी किए हैं. यह नोटिस ग्राहकों की ओर से लगातार में मिली शिकायतों के आधार पर भेजे गए हैं, जिनमें एक्सपायर्ड, सड़े-गले, दूषित और खाने योग्य नहीं रहे खाने के प्रोडक्ट की डिलीवरी का आरोप लगाया गया है.

FSSAI ने कंपनी से सभी आरोपों पर डॉक्यूमेंट के साथ विस्तृत स्पष्टीकरण और नियमों के पालन की रिपोर्ट मांगी है. साथ ही स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के अंदर जवाब नहीं मिलने पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. 

किन शिकायतों के आधार पर जारी किए गए 9 नोटिस?

  • ग्राहकों ने शिकायत की कि स्विगी इंस्टामार्ट के जरिए एक्सपायर, सड़े-गले, दूषित और मानव उपभोग के लिए असुरक्षित खाने के प्रोडक्ट डिलीवर किए गए हैं. 
  • FSSAI के अनुसार नॉइस एग्स ऐसे ब्रांड नाम से बेचे जा रहे थे, जो कंपनी के मौजूदा FSSAI लाइसेंस में स्वीकृत प्रोडक्ट कैटेगरी का हिस्सा नहीं था. प्राधिकरण ने निर्देश दिया कि वैध लाइसेंस मिलने तक इस प्रोडक्ट की बिक्री न की जाए और जरूरत होने पर लाइसेंस में संशोधन कराया जाए. 
  • शिकायतों में कहा गया कि Healthify 100% Whey Protein 1 किलो और Noice Home Style Madras Mixture with Peanuts जैसे प्रोडक्ट एक्सपायरी डेट गुजरने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए.
  • Akshayakalpa Organic Egg के बारे में शिकायत मिली कि अंडे एक्सपायर्ड, सड़े हुए, बदबूदार और दूषित थे, जिससे वह खाने योग्य नहीं थे. शिकायत बढ़ाए जाने के बावजूद कथित तौर पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई. 
  • एक अन्य शिकायत में काके दा पराठा खराब और बदबूदार हालत में डिलीवरी होने की बात कही गई. शिकायत के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया गया. 
  • वहीं एक इन्फेंट फूड फॉर्मूलेशन के खराब, दूषित और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत दर्ज हुई. आरोप है कि ग्राहक की ओर से खराब प्रोडक्ट लौटने के बाद भी उसी तरह का खराब प्रोडक्ट दोबारा भेज दिया गया. 
  • FSSAI को ऐसी शिकायत भी मिली है, जिनमें दूषित अंडे, खराब दूध और फटे या क्षतिग्रस्त पैक्ड फूड आइटम ग्राहकों तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया. 
  • नोटिस में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में गलत, अमान्य या गलत FSSAI लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल किया गया. साथ ही कुछ फूड बिजनेस एंटिटी ऐसे नामों में लिस्टेड मिली जो उनके FSSAI रजिस्ट्रेशन से मेल नहीं खाते हैं. 
  • कई शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिकायत दर्ज होने और एस्केलेड किए जाने के बाद भी संतोषजनक जवाब, शिकायत निवारण या सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई. एक मामले में केवल रिफंड देकर मामला बंद करने की बात सामने आई, जबकि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे का समाधान नहीं किया गया. FSSAI ने विक्रेता ऑन बोर्डिंग, कंप्लायंस वेरिफिकेशन, ट्रेसेब्लिटी, फूड क्वालिटी मॉनिटरिंग, उपभोक्ता शिकायत निवारण और फूड सेफ्टी सिस्टम की पर्याप्तता पर  भी सवाल उठाए गए. 

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FSSAI ने स्विगी इंस्टामार्ट से क्या मांग की?

फूड रेगुलेटर ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह सभी आरोपों पर दस्तावेजों के साथ विस्तृत जवाब दे. इसके अलावा गुणवत्ता नियंत्रण, फूड सेफ्टी मॉनिटरिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, स्टॉक रोटेशन, स्टोरेज, हैंडलिंग और अतिरिक्त नियंत्रण से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई कराई. FSSAI ने कंपनी से यह भी कहा कि वह प्रत्येक मामले का रूट कॉज एनालिसिस, अपनाए गए कलेक्टिव एंड प्रीवेंटिव एक्शन उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की जानकारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी सौंपे. निर्धारित समय के अंदर अनुपालन रिपोर्ट नहीं देने पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है.

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12% से अधिक अल्कोहलिक दवाओं पर सरकार सख्त, डॉक्टर की पर्ची और लाइसेंस के बिना नहीं होगी बिक्री

12% से अधिक अल्कोहलिक दवाओं पर सरकार सख्त, डॉक्टर की पर्ची और लाइसेंस के बिना नहीं होगी बिक्री


Alcohol Based Drug: अगर आप भी बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली औषधीय दवाओं की बिक्री और निर्माण को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं. अब ऐसी दवाओं को पहले की तरह सामान्य तरीके से न तो बनाया जा सकेगा और न ही मेडिकल स्टोर से आसानी से खरीदा जा सकेगा. सरकार ने इन दवाओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत लाइसेंस व्यवस्था में लाते हुए, ड्रग्स रूल्स 1945 की अनुसूची एच1 में शामिल कर दिया है.

इसका मतलब है कि अब इनकी बिक्री केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही होगी और मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का रिकॉर्ड भी रखना होगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह फैसला उन औषधीय दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए लिया गया है जिनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है. 

किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम? 

नया नियम उन ओरल मेडिसिनल फॉर्मूलेशन पर लागू होगा, जिनमें 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल हो और जो 30 मिलीलीटर से बड़े पैक में बेचे जाते हो. इनमें इलायची, अदरक और दूसरे सुगंधित पदार्थ से तैयार किए जाने वाले कुछ टिंचर और हर्बल लिक्विड प्रिपरेशन भी शामिल है. यह प्रोडक्ट ड्रग्स रूल की अनुसूची के तहत लाइसेंस से छूट प्राप्त कैटेगरी में आते थे. इसी छूट का फायदा उठाकर कुछ प्रोडक्ट में 60 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे उनके गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ गई थी.  

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सरकार की सख्ती के बाद अब क्या बदलेगा? 

सरकार के नए संशोधन के बाद ऐसी सभी दवाओं को लाइसेंस लेकर ही बनाया और बेचा जा सकेगा. साथ ही उन्हें अनुसूची एच1 के तहत रखा गया है. इसका सीधा असर यह होगा की दवा केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर मिलेगी, मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा, इन दवाओं की सप्लाई केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मास्यूटिकल चैन के जरिए ही होगी और बिना नियम की अनुमति के इनका निर्माण और वितरण भी नहीं किया जा सकेगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के 6 महीने के बाद लागू होगा, ताकि निर्माता और विक्रेता नए नियमों के अनुसार अपनी व्यवस्था कर सके. 

सरकार ने सख्ती क्यों की? 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इलायची और अदरक जैसे पदार्थों से बनने वाले कुछ टिंचर मूल रूप से औषधीय उपयोग के लिए तैयार किए जाते हैं. इन्हें पाचन संबंधी समस्याओं सहित दूसरे चिकित्सीय जरूरतों में इस्तेमाल किया जाता रहा है, हालांकि जांच में सामने आया कि कुछ प्रोडक्ट में एथिल अल्कोहल की मात्रा 80 से 90 प्रतिशत तक थी, जिसके कारण इनका इस्तेमाल शराब के ऑप्शन के रूप में किया जाने लगा. इसी को देखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव कर इन प्रोडक्ट को सख्त निगरानी के दायरे में लाने का फैसला किया है.

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ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट समेत 39 नई दवाओं की कीमतें तय, सरकार ने जारी किया आदेश

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट समेत 39 नई दवाओं की कीमतें तय, सरकार ने जारी किया आदेश


NPPA New Drug Prices: देश में आम मरीजों को दवाओं की मनमानी कीमतों से राहत देने के लिए नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA ने एक बड़ा कदम उठाया है. अथॉरिटी ने ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर यानी डीपीसीओ 2013 के तहत 39 नई दवाओं की खुदरा कीमत तय कर दी हैं. इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारियां, एचआईवी, आंखों के इंफेक्शन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. यह कदम इन दवाओं को मरीजों के लिए ज्यादा किफायती बनाने की इरादे से उठाया गया है.

8 जुलाई को जारी हुआ आदेश 

फार्मास्युटिकल्स विभाग की तरफ से 8 जुलाई 2026 को यह मूल्य अधिसूचना जारी की गई, जिससे डीपीसीओ 2013 के पैराग्राफ 5,11 और 15 के तहत नोटिफाई किया गया है. हालांकि आपको बता दें कि यह आदेश पहले से बाजार में उपलब्ध दवाओं की कीमत घटाने के लिए नहीं, बल्कि नई दवा फॉर्मूलेशन की अधिकतम खुदरा कीमत तय करने के लिए जारी किया गया है. इन कीमतों पर लागू होने वाला जीएसटी अलग से लिया जाएगा. 

कई जरूरी दवाओं की खुदरा कीमतें तय 

एनपीपीए की ओर से जारी सूची में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Amlodipine+Bisoprolo+Telmisartan टैबलेट की खुदरा कीमत 14.74 रुपये प्रति टैबलेट तय की गई है. आंखों की सर्जरी के बाद और बैक्टीरिया संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले Nepafenac+Moxifloxacin Ophthalmic Solution दवाओं की कीमत 68.64 रुपये प्रति मिलीलीटर तय की गई है. वहीं हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए दी जाने वाली Clopidogrel+ Aspirin+Atorvastatin कैप्सूल की कीमत 6.37 रुपये प्रति कैप्सूल तय की गई है. लिस्ट में डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं की कीमतें भी तय की गई है. इनमें Dapagliflozin, Empagliflozin, Sitagliptin, Metformin, Glimepiride और Voglibose आधारित दवाएं शामिल है.

इसके अलावा संक्रमण के इलाज में उपयोग होने वाली Amoxicilline+Clavulanate टैबलेट और डिस्पर्सिबल टैबलेट, ग्लूकोमा की इलाज में इस्तेमाल होने वाली आई ड्रॉप, एचआईवी थेरेपी किट,  विटामिन डी3 ओरल सॉल्यूशन और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Imatinib Oral Solution जैसी दवाओं की कीमतें भी निर्धारित की गई है. इसके अलावा एनपीपीए की लिस्ट में सबसे महंगी दवाओं में Tenecteplase (TNK-tpa) Injection 50mg भी शामिल है. हार्ट अटैक के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इंजेक्शन की खुदरा कीमत 60,238.27 रुपये प्रति वायल तय की गई है. 

दुकानदारों के लिए प्राइस लिस्ट दिखाना अनिवार्य 

एनपीपीए ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सभी रिटेलर और डीलरों के लिए निर्माता कंपनियों की तरफ से जारी की गई प्राइस लिस्ट अपने दुकान में साफ तौर पर लगाना अनिवार्य है. डीपीसीओ 2013 के पैरा 24 (4) का हवाला देते हुए अथॉरिटी ने कहा कि हर रिटेलर और डीलर को अपनी दुकान के ऐसे हिस्से में प्राइस लिस्ट और सप्लीमेंट्री प्राइस लिस्ट प्रदर्शित करनी होगी, जहां से इसे कोई भी ग्राहक आसानी से देख और जान सकेगा. 

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तय कीमत से ज्यादा वसूलने पर होगी करवाई 

नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई निर्माता या मार्केटिंग कंपनी अधिसूचित खुदरा कीमत का पालन नहीं करती है तो उसे ज्यादा वसूली की गई रकम सहित सरकार के पास जमा करनी होगी. एनपीपीए के अनुसार अगर इन दवाओं की खुदरा कीमत इस आदेश और उसमें दिए गए नोटिस के मुताबिक तय नहीं की जाती, तो संबंधित कंपनी को डीपीसीओ 2013 और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 के प्रावधानों के तहत ज्यादा वसूली गई रकम ब्याज के साथ जमा करनी होगी.

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क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो, क्या सच में निखर जाती है स्किन?

क्या होता है प्रेग्नेंसी ग्लो, क्या सच में निखर जाती है स्किन?


प्रेग्नेंसी ग्लो उस स्थिति को कहा जाता है, जब गर्भावस्था के दौरान महिला की स्किन सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा चमकदार, गुलाबी और फ्रेश नजर आती है. कई महिलाओं के गालों पर हल्की लालिमा दिखाई देती है और चेहरा पहले से ज्यादा चमकता हुआ लगता है. यह बदलाव अक्सर सेकेंड ट्राइमेस्टर में ज्यादा देखने को मिलता है. इस समय तक शुरुआती महीनों की थकान, मॉर्निंग सिकनेस और कमजोरी जैसी परेशानियां कुछ हद तक कम होने लगती है. हालांकि कुछ महिलाओं में यह चमक पूरी प्रेगनेंसी के दौरान भी बनी रह सकती है, जबकि कई महिलाओं में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती.

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और एचसीजी जैसे हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, इन बदलाव का असर स्क्रीन पर भी पड़ता है, जिससे चेहरा ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और एचसीजी जैसे हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, इन बदलाव का असर स्क्रीन पर भी पड़ता है, जिससे चेहरा ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से स्किन की ऑयल ग्रंथियां ज्यादा एक्टिव हो जाती है, इससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आ सकती है. हालांकि कुछ महिलाओं में यह एक्स्ट्रा तेल मुंहासे की वजह भी बन सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से स्किन की ऑयल ग्रंथियां ज्यादा एक्टिव हो जाती है, इससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आ सकती है. हालांकि कुछ महिलाओं में यह एक्स्ट्रा तेल मुंहासे की वजह भी बन सकता है.

प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों की जरूरत को पूरा करने के लिए शरीर में ब्लड की मात्रा काफी बढ़ जाती है. ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से स्किन की छोटी-छोटी ब्लड सेल्स फैल जाती है, जिससे गाल गुलाबी और चेहरा ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकता है.

प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों की जरूरत को पूरा करने के लिए शरीर में ब्लड की मात्रा काफी बढ़ जाती है. ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से स्किन की छोटी-छोटी ब्लड सेल्स फैल जाती है, जिससे गाल गुलाबी और चेहरा ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकता है.

इसके अलावा जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है. पेट और शरीर के दूसरे हिस्सों के साथ भी स्किन फैलती है. बढ़े हुए ब्लड फ्लो और हार्मोनल बदलाव के साथ यह खिंचाव भी स्क्रीन में अलग-अलग तरह की चमक ला सकता है.

इसके अलावा जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है. पेट और शरीर के दूसरे हिस्सों के साथ भी स्किन फैलती है. बढ़े हुए ब्लड फ्लो और हार्मोनल बदलाव के साथ यह खिंचाव भी स्क्रीन में अलग-अलग तरह की चमक ला सकता है.

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस होती है. शरीर का तापमान बढ़ने और ब्लड फ्लो तेज होने की वजह से चेहरे पर हल्की लालिमा और चमक दिखाई दे सकती है.

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस होती है. शरीर का तापमान बढ़ने और ब्लड फ्लो तेज होने की वजह से चेहरे पर हल्की लालिमा और चमक दिखाई दे सकती है.

वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर संतुलित आहार और प्रेगनेंसी सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं. फल, हरी सब्जियां, प्रोटीन, डेयरी प्रोडक्ट और जरूरी विटामिन शरीर के साथ-साथ स्किन की सेहत पर भी पॉजिटिव असर डाल सकते हैं.

वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर संतुलित आहार और प्रेगनेंसी सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं. फल, हरी सब्जियां, प्रोटीन, डेयरी प्रोडक्ट और जरूरी विटामिन शरीर के साथ-साथ स्किन की सेहत पर भी पॉजिटिव असर डाल सकते हैं.

वहीं डॉक्टर के अनुसार हर महिला की बॉडी अलग तरह से रिएक्ट करती है, जिस तरह हर महिला में प्रेग्नेंसी के लक्षण अलग-अलग होते हैं. उसी तरह प्रेग्नेंसी ग्लो भी सभी में नहीं दिखता है. इसलिए अगर किसी महिला के चेहरे पर ऐसे चमक नजर नहीं आती तो इसे किसी तरह की समस्या नहीं माना जाता है.

वहीं डॉक्टर के अनुसार हर महिला की बॉडी अलग तरह से रिएक्ट करती है, जिस तरह हर महिला में प्रेग्नेंसी के लक्षण अलग-अलग होते हैं. उसी तरह प्रेग्नेंसी ग्लो भी सभी में नहीं दिखता है. इसलिए अगर किसी महिला के चेहरे पर ऐसे चमक नजर नहीं आती तो इसे किसी तरह की समस्या नहीं माना जाता है.

Published at : 11 Jul 2026 11:18 AM (IST)

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