कौन सी अंडरवियर पहनते हैं आप, कहीं आपके अंडर गारमेंट आपको तो नहीं बना रहे नामर्द?

कौन सी अंडरवियर पहनते हैं आप, कहीं आपके अंडर गारमेंट आपको तो नहीं बना रहे नामर्द?



Tight Underwear Effects On Male Fertility: पुरुषों की फर्टिलिटी को लेकर अक्सर एक सवाल उठता है कि क्या टाइट अंडरवियर पहनने से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है?  कई टेस्ट और स्टडीज की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि आखिर टाइट अंडरवियर टेस्टिकल्स को किस तरह प्रभावित करता है. कुछ समय पहले ह्यूमन रिप्रोडक्शन जर्नल में छपी एक स्टडी में पाया गया कि जो पुरुष टाइट अंडरवियर पहनते हैं, उनमें स्पर्म काउंट कम देखा गया. हालांकि एक्सपर्ट अभी भी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इसका कारण सिर्फ टाइट अंडरवियर है या फिर टेस्टिकल्स के आसपास बढ़ने वाला तापमान. हीट एक बड़ा फैक्टर है, और टाइट कपड़े उसे और बढ़ा देते हैं. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में.

क्या निकला रिसर्च में?

साल 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार,अमेरिका के हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर 656 पुरुषों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि बॉक्सर पहनने वाले पुरुषों में टाइट अंडरवियर पहनने वालों की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा स्पर्म कंसंट्रेशन देखा गया. माना जा रहा है कि टेस्टिकल्स के आसपास का ठंडा तापमान इसका मुख्य कारण हो सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ अंडरवियर की स्टाइल बदलने जैसा एक साधारण लाइफस्टाइल चेंज भी पुरुषों की फर्टिलिटी को सुधार सकता है. स्पर्म प्रोडक्शन 34°C (92°F) से ऊपर तापमान के प्रति संवेदनशील होता है, यही वजह है कि टेस्टिकल्स शरीर से थोड़ा दूर लटके होते हैं.

कुछ अंडरवियर या ब्रीफ्स स्क्रोटम को शरीर के पास खींच लेते हैं, जिससे तापमान बढ़ जाता है. वहीं बॉक्सर शॉर्ट्स जैसे ढीले अंडरवियर स्क्रोटम को ठंडा रखते हैं. अब तक की सबसे बड़ी स्टडी में रिसर्चर ने पाया कि फर्टिलिटी क्लिनिक आने वाले पुरुषों में, जो ढीले बॉक्सर पहनते थे, उनमें टाइट अंडरवियर पहनने वालों की तुलना में ज्यादा स्पर्म कंसंट्रेशन, 17 प्रतिशत अधिक कुल स्पर्म काउंट और 33 प्रतिशत मोटाइल स्पर्म पाए गए.

टाइट अंडरवियर पुरुषों पर कैसे असर डालता है?

टाइट अंडरवियर पहनना कुछ लोगों को सुरक्षित और फिट महसूस करा सकता है, लेकिन जब यह बहुत ज्यादा टाइट हो जाए, तो कई समस्याएं शुरू हो सकती हैं. पुरुषों में टाइट अंडरवियर के ये असर देखे जा सकते हैं-

 ब्लड सर्कुलेशन में कमी

बहुत टाइट अंडरवियर ग्रोइन में रक्त प्रवाह को सीमित कर देता है, जिससे सुन्नपन, असहजता या लंबे समय में सर्कुलेशन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.

 स्किन इरिटेशन का खतरा

कपड़े का घर्षण बढ़ जाता है, जिससे रैशेज, लालपन, जलन और कभी-कभी दर्दनाक कट तक हो सकते हैं.

 स्पर्म प्रोडक्शन पर असर

टाइट अंडरवियर स्क्रोटम का तापमान बढ़ा देता है, जिससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और समय के साथ फर्टिलिटी कम हो सकती है.

 मूवमेंट में रुकावट और असहजता

बहुत टाइट अंडरवियर पिन्चिंग, दर्द और मूवमेंट में खिंचाव पैदा करता है, जिससे रोजमर्रा के काम या एक्सरसाइज में दिक्कत आती है.

 इंफेक्शन का खतरा बढ़ना

टाइट अंडरवियर गर्मी और नमी को फंसा लेता है, जिससे बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है.

 टेस्टिकल्स पर दबाव

टाइट फिटिंग टेस्टिकल्स को दबा सकती है, जिससे दर्द, खिंचाव या लंबे समय में नुकसान तक हो सकता है.

पॉश्चर पर असर

जब अंडरवियर बहुत टाइट हो, तो बॉडी का नैचुरल अलाइनमेंट बिगड़ सकता है, जिससे लोअर बैक में दर्द और पॉश्चर खराब हो सकता है.

पसीना और बदबू बढ़ना

एयरफ्लो कम होने से ज्यादा पसीना आता है और गर्मी फंसने से बदबू भी बढ़ जाती है.

फिजिकल एक्टिविटी में दिक्कत

खेलते या जिम करते समय टाइट अंडरवियर चफिंग और असहजता पैदा करता है, जिससे परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है.

वैरिकोज वेन्स का खतरा

लंबे समय तक टाइट अंडरवियर पहनने से ग्रोइन में नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे वैरिकोज वेन्स बनने का जोखिम हो सकता है.

इसे भी पढ़ें: Palash Muchhal: स्मृति मंधाना से शादी करने वाले थे पलाश मुच्छल, अब अस्पताल में भर्ती; जानें उन्हें कौन सी बीमारी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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स्मृति मंधाना से शादी करने वाले थे पलाश मुच्छल, अब अस्पताल में भर्ती; जानें उन्हें क्या बीमारी?

स्मृति मंधाना से शादी करने वाले थे पलाश मुच्छल, अब अस्पताल में भर्ती; जानें उन्हें क्या बीमारी?



Palash Muchhal Health: स्मृति मंधाना की शादी की तैयारियां सोमवार को सांगली में पूरे जोश के साथ चल रही थीं, लेकिन अचानक हालात ऐसे बने कि पूरे समारोह को रोकना पड़ा. शादी स्थल पर ही स्मृति के पिता, श्रीनिवास मंधाना, को तेज सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत ICU में भर्ती कराया गया. इसी बीच, उनके मंगेतर पलाश मुच्छल भी वायरल इंफेक्शन की वजह से डॉक्टरों की देखरेख में थे, हालांकि अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्मृति मंधाना के मंगेतर और संगीतकार पलाश मुच्छल की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई. वायरल इंफेक्शन और बढ़ी हुई एसिडिटी के कारण उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया. हालांकि इलाज के बाद उसी शाम उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. पलाश सीधे होटल वापस लौट आए. चलिए आपको बताते हैं कि उनके पिता की हेल्थ अपडेट क्या है. 

मंधाना के पिता की तबियत कैसी है?

स्मृति मंधना के फैमिली डॉक्टर, डॉ. नमन शाह, ने बताया कि मेडिकल टीम उनके पिता की हालत पर लगातार नजर रख रही है. उनका कहना है कि अगर श्रीनिवास मंधना की तबीयत उम्मीद के मुताबिक सुधरती है, तो उन्हें आज ही अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है.

उन्होंने PTI को बताया, “करीब 1.30 बजे श्रीनिवास मंधना के बाएं हिस्से में सीने में दर्द हुआ. मेडिकल टर्म में इसे ‘ऐंजाइना’ कहते हैं. लक्षण दिखते ही उनके बेटे ने मुझे कॉल किया. हमने एंबुलेंस भेजी और उन्हें अस्पताल शिफ्ट किया. जांच में ECG और दूसरे टेस्ट में पता चला कि कार्डियक एंजाइम्स बढ़े हुए हैं, इसलिए उन्हें कुछ समय और ऑब्जर्वेशन में रखना जरूरी है.”

शादी कब होगी?

स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की शादी की नई तारीख अभी तय नहीं की गई है. कोई नई घोषणा नहीं हुई है और फिलहाल समारोह को अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दिया गया है. मंधाना की शादी को लेकर फैंस बेहद उत्साहित थे. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनकी शादी से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे थे. हालांकि अब हेल्थ रीजन की वजह से शादी पोस्टपोन होने के बाद फैंस को इंतजार करना पड़ेगा. शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं. मेहंदी, हल्दी और संगीत जैसी पारंपरिक रस्में पूरे उत्‍साह के साथ की जा रही थीं. माहौल को और मजेदार बनाने के लिए कपल ने दूल्हा–दुल्हन टीम के बीच एक फ्रेंडली क्रिकेट मैच भी आयोजित किया था. इस मैच ने मेहमानों का खूब मनोरंजन किया और पूरे कार्यक्रम में हंसी-ठिठोली का माहौल नजर आया.

इसे भी पढ़ें- Kidney Disease: दुनियाभर में मौत की 9वीं सबसे बड़ी वजह है किडनी की यह बीमारी, ये लक्षण दिखते ही तुरंत हो जाएं अलर्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दुनियाभर में मौत की 9वीं सबसे बड़ी वजह है किडनी की यह बीमारी, ये लक्षण दिखते ही हो जाएं अलर्ट

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Chronic Kidney Disease: क्रॉनिक किडनी डिजीज धीरे-धीरे दुनिया के सामने एक बड़ी हेल्थ क्राइसिस बनकर आ रही है. द लैंसेट में छपी एक नई ग्लोबल स्टडी जिसे इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन ने तैयार किया है. इस रिपोर्ट में यह देखने को मिलता है कि 2023 में CKD दुनिया में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है. सिर्फ पिछले साल ही इस बीमारी ने करीब 15 लाख लोगों की जान ली.

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में आज 788 मिलियन (78.8 करोड़) एडल्ट किसी न किसी स्तर की किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं, जो 1990 के मुकाबले दोगुना है. यह सीधे-सीधे बताता है कि CKD एक ऐसी खामोश बीमारी है जो अमीर-गरीब हर देश में तेजी से फैल रही है. खास तौर पर नॉर्थ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया जैसे क्षेत्रों में इसकी दर सबसे अधिक है. और बात सिर्फ किडनी तक सीमित नहीं है. इस बीमारी का हार्ट पर भी गहरा असर पड़ता है. रिपोर्ट बताती है कि कमजोर किडनी फंक्शन दुनिया भर में होने वाली 11.5 प्रतिशत कार्डियोवैस्कुलर मौतों के पीछे जिम्मेदार है. यानी अगर सरल शब्दों में कहा जाए, तो CKD दिल की बीमारियों को कई गुना बढ़ा देती है.

रिपोर्ट में सबसे अहम क्या निकला?

ताजा ग्लोबल एनालिसिस के मुताबिक, 2023 में CKD मौतों के टॉप-10 कारणों में शामिल हो गई. लगभग 1.48 मिलियन मौतें इसी के कारण हुईं. आज पूरी दुनिया भर में लगभग 800 मिलियन लोग कम या ज्यादा किडनी फंक्शन लॉस के साथ जी रहे हैं. 1990 के 378 मिलियन मामलों से यह संख्या आज 788 मिलियन पहुंच गई है, यानी दोगुना से भी ज्यादा. दुनिया के हर 10 में से 1 से भी ज्यादा वयस्क में किडनी से जुड़ी समस्या पाई जा रही है.

सबसे ज्यादा असर वाले एरिया

नॉर्थ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट (सबसे ऊंची प्रीवेलेंस) वाले एरिया में आते हैं. साउथ एशिया में इससे करीब 16 प्रतिशत एडल्ट प्रभावित हैं. चीन और भारत में तो संख्या सबसे बड़ी है, चीन में लगभग 152 मिलियन लोग और भारत में करीब 138 मिलियन लोग CKD से प्रभावित हैं.

आखिर किडनी की बीमारी इतनी क्यों बढ़ रही है?

अगर बात करें कि इसके मामले लगातार बढ़ क्यों रहे हैं, तो इसके तीन बड़े कारण साफ नजर आते हैं, जिसमें-

मेटाबॉलिक बीमारियां

इसमें पहले नंबर पर मेटाबॉलिक डिजीज का नाम आता है. डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा CKD के सबसे बड़े कारण हैं. ये धीरे-धीरे किडनी के नाजुक फिल्टर को नुकसान पहुंचाते हैं.

बुजुर्ग आबादी का बढ़ना

दूसरे नंबर पर बुजुर्ग आबादी का मामला आता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कम होती जाती है, इसलिए उम्रदराज़ देशों में CKD के मामले ज़्यादा मिलते हैं.

जांच और इलाज की कमी

बहुत से देशों में शुरुआती जांच आसानी से उपलब्ध नहीं है. लोग तब पता लगाते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है.

इस पर ध्यान क्यों देना चाहिए?

किडनियां चुपचाप हर दिन आपके शरीर से जहर निकालती हैं, पानी-नमक का संतुलन रखती हैं और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती हैं. समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में CKD कोई खास लक्षण नहीं देती और यही वजह है कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. किडनी कमजोर होने पर दिल पर बुरा असर पड़ता है. ब्लड प्रेशर बढ़ता है, शरीर में वेस्ट जमा होता है, और दिल पर दबाव बढ़ने लगता है. यही वजह है कि किडनी की खराबी दुनिया भर में होने वाली दिल की मौतों को बढ़ा रही है.

शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें

  • यूरिन में बदलाव – बहुत ज्यादा या बहुत कम यूरिन आना, रात में बार-बार उठना, झाग वाला या खून मिला यूरिन
  • सूजन – पैर, हाथ या आंखों के नीचे सूजन
  • थकान और कमजोरी – शरीर में गंदगी जमा होने से थकावट बढ़ती है
  • खुजली, सूखी त्वचा, मिचली – ब्लड में वेस्ट बढ़ने की वजह से
  • सांस फूलना, भूख कम होना – बीमारी बढ़ने पर ये लक्षण दिखते हैं
  • अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो इसे थकान या उम्र कहकर टालें नहीं, जांच कराएं.

आप क्या कर सकते हैं?

  • नियमित जांच – GFR और Urine Albumin टेस्ट से शुरुआती CKD पकड़ में आ सकती है
  • रिस्क फैक्टर्स कंट्रोल करें – ब्लड शुगर, बीपी, वजन नियंत्रण में रखें
  • लाइफस्टाइल बदलें – नमक कम, पानी पर्याप्त, धूम्रपान से दूरी बना कर रखें

इसे भी पढ़ें- Male Fertility Decline: खाने में मौजूद यह चीज मर्दों को बना रही नामर्द, लगातार घट रहा स्पर्म काउंट

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रोहिणी आचार्य ने पिता लालू यादव को दी थी एक किडनी, इससे कितनी बढ़ जाती है उम्र?

रोहिणी आचार्य ने पिता लालू यादव को दी थी एक किडनी, इससे कितनी बढ़ जाती है उम्र?



Kidney Transplant Health: बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद की बेटी रोहणी आचार्य इस समय सुर्खियों में हैं. बिहार विधानसभा में आरजेडी की करारी हार के बाद परिवार के बीच अनबन देखने को मिली थी. उन्होंने परिवार से नाता तोड़ने के साथ-साथ राजनीति छोड़ने का एलान किया है. लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने 2022 में अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी डोनेट की थी. चलिए आपको बताते हैं कि एक किडनी डोनेट करने से कितनी उम्र बढ़ जाती है. 

कितनी बढ़ जाती है उम्र?

किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वालों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि ऑपरेशन के बाद कोई व्यक्ति कितने साल तक जी सकता है. इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं होता, क्योंकि यह कई बातों पर निर्भर करता है किडनी कितनी अच्छी तरह मैच हुई, मरीज की पुरानी बीमारियां क्या हैं और शरीर नई किडनी को कैसे स्वीकार करता है.

praram9 हॉस्पिटल के अनुसार, अगर किडनी किसी नजदीकी रिश्तेदार से मिलती है और टिश्यू मैच अच्छा होता है, तो उसके लंबे समय तक ठीक चलते रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है. ऐसे मामलों में मरीज की उम्र बढ़ने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद भी अधिक रहती है. वहीं, यदि किडनी किसी गैर-रिश्तेदार या मरे हुए दाता से मिलती है, तो सफलता दर थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन फिर भी परिणाम काफी अच्छे ही माने जाते हैं.

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद बढ़ी जिंदगी

थाई ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी के 2017 के आंकड़े बताते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले 78.2 प्रतिशत मरीज कम से कम 10 साल तक जीवित रहे. यानी हर 100 लोगों में से 78 मरीजों ने ट्रांसप्लांट के बाद एक दशक से ज्यादा का जीवन जिया. यह किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता को स्पष्ट दिखाता है. हालांकि, लंबी उम्र सिर्फ ऑपरेशन पर नहीं टिकी होती. ट्रांसप्लांट के बाद मरीज कितनी ईमानदारी से दवाइयां लेता है, अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखता है और डॉक्टर की सलाह का पालन करता है लंबे समय की सफलता काफी हद तक इसी पर निर्भर करती है.

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद खुद का ख्याल कैसे रखें? 

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि मरीज कितनी जल्दी अपनी सामान्य जिंदगी में लौट पाएगा और नई किडनी कितने समय तक अच्छी तरह काम करेगी. कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें रोजमर्रा की आदत बनाना बहुत जरूरी होता है.

दवाइयों का सही इस्तेमाल

ट्रांसप्लांट के बाद शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे, इसके लिए इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां लेनी पड़ती हैं. ये दवाएं शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को थोड़ा कमजोर कर देती हैं, इस वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बीमार लोगों के संपर्क से बचना, भीड़भाड़ से दूरी रखना और दवाइयां समय पर लेना बेहद जरूरी है.

नियमित जांच और डॉक्टर की फॉलो-अप

डॉक्टर द्वारा तय की गई हर अपॉइंटमेंट पर जाना अनिवार्य है. अगर तेज बुखार, सर्दी-जुकाम जैसा महसूस होना, पेशाब में बदलाव, टांकों वाली जगह पर दर्द या सूजन, घाव से पस जैसा रिसाव, सांस लेने में तकलीफ, दस्त, या नई किडनी के आसपास किसी तरह की अजीब दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. इस तरह के लक्षण शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं.

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दुनिया के इस हिस्से में हर तीन में से एक शख्स को टीबी, डरा देगी WHO की यह रिपोर्ट

दुनिया के इस हिस्से में हर तीन में से एक शख्स को टीबी, डरा देगी WHO की यह रिपोर्ट



TB Disease Treatment: दुनिया में हर साल सामने आने वाले नए टीबी मरीजों में से एक-तिहाई से ज्यादा सिर्फ दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलते हैं. यह हिस्सा आबादी के लिहाज से दुनिया का सिर्फ चौथा हिस्सा है, लेकिन टीबी का बोझ यहां अनुपात से कहीं अधिक है. मंगलवार 18 नवंबर को जारी की गई अपनी ताजा रिपोर्ट में WHO ने इस स्थिति पर चिंता जताई और देशों से बीमारी को खत्म करने की दिशा में तेज कार्रवाई की अपील की.

WHO के ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, साल 2024 में करीब 10.7 मिलियन लोग टीबी से इंफेक्टेड हुए और 12.3 लाख लोगों की मौत हुई. इनमें सबसे अधिक केस भारत के हैं लगभग 2.71 मिलियन. इसके बाद बांग्लादेश (3.84 लाख), म्यामांर (2.63 लाख), थाईलैंड (1.04 लाख) और नेपाल (67 हजार) का नंबर आता है.

WHO का क्या है कहना?

WHO साउथ-ईस्ट एशिया की ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. कैथरीना बोह्मे ने कहा कि टीबी अब भी इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा और विकास के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है और सबसे ज्यादा असर गरीब आबादी झेल रही है. उनके मुताबिक बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान, तेज इलाज और मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचा ही सबसे असरदार उपाय हैं. लेकिन इन कदमों को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से लागू करने की जरूरत है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में क्षेत्रीय तस्वीर काफी असमान रही. म्यामांर और तिमोर-लेस्ते में टीबी की दर अब भी बहुत ज्यादा है. हर एक लाख की आबादी पर 480 से 500 मामले. जबकि बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और थाईलैंड में यह दर 146 से 269 के बीच रही. श्रीलंका और मालदीव अभी भी कम-इंसीडेंस वाले देश माने जाते हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे बड़ी चुनौती

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक और बड़ी चिंता ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी है. 2024 में यहां ऐसे 1.5 लाख नए मामले अनुमानित हैं. हालांकि 2015 के बाद से क्षेत्र ने टीबी संक्रमण दर में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है, जो वैश्विक औसत 12 प्रतिशत से बेहतर है. लेकिन मौतों में कमी की रफ्तार अभी भी धीमी है. क्षेत्र की टीबी इन्सीडेंस रेट 201 प्रति लाख है, जो वैश्विक औसत 131 से कहीं ऊपर है. कुछ देशों ने बेहतरीन प्रगति भी दिखाई है. बांग्लादेश, भारत और थाईलैंड ने अनुमानित केसों की तुलना में अधिक मरीजों की पहचान की है, जिससे डिटेक्शन गैप कम हुआ है. टीबी से होने वाली मौतों में भी 2015 के मुकाबले कमी देखी गई है. खासकर कोविड के बाद जब टीबी सेवाएं दोबारा पटरी पर आईं. इलाज कवरेज 85 प्रतिशत पार कर चुका है और सफलता दर दुनिया में सबसे बेहतर मानी जा रही है. एचआईवी मरीजों और घर के संपर्कों के लिए प्रिवेंटिव थेरेपी भी तेजी से बढ़ी है.

इसे भी पढ़ें- Vitamin D Heart Health: सेकेंड हार्ट अटैक से कैसे बचा सकता है यह विटामिन? आज ही जानें मौत से बचने का तरीका

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किस बीमारी से जूझ रहे हैं स्मृति मंधाना के पिता, जिसकी वजह से तक गई पलाश मुच्छाल संग उनकी शादी?

किस बीमारी से जूझ रहे हैं स्मृति मंधाना के पिता, जिसकी वजह से तक गई पलाश मुच्छाल संग उनकी शादी?



Smriti Mandhana Father Health: भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना और म्यूजिक कंपोजर पलाश मुच्छल की शादी में सोमवार को तय थी. हालांकि, परिवार में आई इमरजेंसी स्थिति के चलते आज होने वाला विवाह समारोह टाल दिया गया. तैयारियां जोरों पर थीं, तभी स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना को हार्ट अटैक आया, जिसकी पुष्टि उनकी बिजनेस मैनेजर तुहिन मिश्रा ने की.

जानकारी के मुताबिक, श्रीनिवास मंधाना को तुरंत सांगली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. 

फिलहाल राहत की बात यह है कि उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन अभी भी उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. शादी प्रबंधन टीम ने मीडिया को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है कि आज का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है. समारोह दोबारा कब आयोजित होगा, इस पर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. चलिए आपको बताते हैं कि मंधाना के पिता किस बीमारी से पीड़ित हैं. 

किस बीमारी से पीड़ित हैं मंधाना के पिता? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्मृति मंधाना के पिता श्रीनिवास मंधाना अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बेचैनी महसूस करने लगे. शुरुआत में लोगों ने सोचा कि शायद शादी की भागदौड़ का तनाव होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में उनकी स्थिति गंभीर हो गई. पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है. शादी का माहौल पूरी तरह बदल गया. परिवार वाले तुरंत उनकी मदद के लिए पहुंचे. एंबुलेंस बुलाकर उन्हें सांगली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया.

डॉक्टरों ने बताया कि अभी हालत स्थिर है, लेकिन लगातार निगरानी जरूरी है. स्मृति और परिवार के बाकी सदस्य भी तुरंत अस्पताल पहुंच गए.

ऐसे माहौल में अचानक क्यों आते हैं हार्ट अटैक?

यह पहला मामला नहीं है कि शादी के दौरान किसी को हार्ट अटैक आया है. देश में पहले भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं, जहां शादी के दौरान दूल्हे को, डांस करने वाले लोगों को अचानक हार्ट अटैक आया. इनमें से कई केस ऐसे आए हैं, जिसमें व्यक्ति की मौत हो गई. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसे मौकों पर हार्ट अटैक क्यों आते हैं.

American Heart Association (AHA) के अनुसार, ऐसे समय शरीर में एड्रेनालिन तेजी से बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन अचानक ऊपर जाती है और पहले से मौजूद ब्लॉकेज टूटकर हार्ट अटैक ट्रिगर कर सकता है. इसके अलावा हार्ट अटैक अक्सर उस समय होता है जब आर्टरी में जमा प्लाक अचानक फटता है. यह फटना कई बार तनाव, थकान, तेज भावनाओं या शारीरिक दबाव की वजह से होता है न कि सिर्फ बीमारी के धीरे-धीरे बढ़ने से.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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