रात में सोने से पहले जरूर पिएं लौंग का पानी, गहरी नींद लाने में करेगा मदद

रात में सोने से पहले जरूर पिएं लौंग का पानी, गहरी नींद लाने में करेगा मदद


आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद पूरी होना और शरीर को आराम मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है. तनाव, काम का बोझ, मोबाइल और स्क्रीन टाइम, यह सब मिलकर नींद के पैटर्न को बिगाड़ देते हैं. ऐसे में आयुर्वेद और प्राकृतिक नुस्खों का महत्व और बढ़ जाता है. इसी कड़ी में लौंग का पानी एक अद्भुत उपाय है. लौंग में कई औषधीय गुण होते हैं. सोने से पहले इसका पानी पीने से न सिर्फ नींद गहरी होती है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों को कई तरह के लाभ मिलते हैं.

लौंग के पानी से क्या होता है फायदा?

लौंग में मौजूद सबसे प्रमुख तत्व यूजेनॉल है. यह एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व है, जो शरीर के कई सिस्टम को सक्रिय करता है. यूजेनॉल पेट के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. रात में सोने से पहले लौंग का पानी पीने से पेट के एंजाइम्स सक्रिय हो जाते हैं, जिससे गैस, अपच और ब्लोटिंग की समस्या कम हो जाती है. पेट हल्का होने से नींद आरामदायक और गहरी आती है. वहीं, यूजेनॉल के कारण जोड़ों में हल्का दर्द या सूजन होने पर भी राहत मिलती है.

गहरी नींद के लिए कितना फायदेमंद?

गहरी नींद के लिए लौंग का पानी सबसे बड़ा वरदान है. इसमें मन को शांत करने वाले गुण भी मौजूद हैं. ये गुण दिमाग और शरीर दोनों को रिलैक्स करते हैं, तनाव कम करते हैं और अनिद्रा की समस्या में मदद करते हैं. लगातार लौंग का पानी पीने से रात भर आराम मिलता है, नींद नहीं टूटती और शरीर पूरी तरह से रिचार्ज रहता है.

ब्लड शुगर भी करता है कंट्रोल?

इसके अलावा लौंग का पानी ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. लौंग इंसुलिन के काम को बेहतर बनाता है, जिससे इसका नियमित सेवन करके डायबीटीज वाले लोग अपने शुगर लेवल को स्थिर रख सकते हैं. लौंग शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाती है. इससे मौसमी बीमारियों और इंफेक्शन का खतरा कम होता है.

मुंह और दांतों के लिए भी जरूरी

लौंग का पानी मुंह और दांतों के लिए भी फायदेमंद है. इसमें बैक्टीरिया मारने की क्षमता होती है, जिससे रात को पीने से मुंह की बदबू कम होती है और दांत-मसूड़ों की समस्याओं से भी राहत मिलती है. यह प्राकृतिक तरीका दांतों और मसूड़ों की सेहत बनाए रखने में सहायक होता है. 

क्या है इसे बनाने का तरीका?

लौंग का पानी बनाना बेहद आसान है. बस एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें लौंग डालकर 5-7 मिनट धीमी आंच पर उबालें, फिर हल्का ठंडा करके छान लें. गुनगुना होने पर पी लें. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें आप थोड़ा नींबू का रस या शहद भी मिला सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पेशाब के साथ बन रहा है जरूरी से ज्यादा झाग तो हो जाएं सावधान, हो सकती है ये बीमारी

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कई बाहर लोगों के पेशाब का रंग बदल जाता है, कुछ लोगों को पेशाब में जलन होती है और कई बार यूरिन करते समय झाग आने लगता है. ऐसे में अगर आपके पेशाब में भी बार-बार झाग नजर आ रहा है और यह कुछ सेकंड में खत्म नहीं हो रहा है, तो इसे नॉर्मल बात मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. दरअसल कई हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार यूरिन में झाग आना कई बार किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है. जब किडनी ठीक से खून को फिल्टर नहीं कर पाती, तो उसमें मौजूद प्रोटीन यूरिन के जरिए बाहर निकलने लगता है. इस कंडीशन को मेडिकल भाषा में प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.

क्या यूरिन में झाग आना किडनी खराब होने का लक्षण?

यूरिन में झाग आना हमेशा किडनी फेल होने का मतलब नहीं होता है, लेकिन यह चेतावनी जरूर हो सकती है. कई बार तेज धार से पेशाब आना शरीर में पानी की कमी या ज्यादा प्रोटीन वाली डाइट के कारण भी अस्थाई रूप से झाग बन सकता है. लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक झागदार यूरिन दिखना किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कमजोर होने का लक्षण हो सकता है.

किडनी खराब होने की शुरुआती लक्षण

अगर यूरिन में झाग के साथ हाथ-पैरों और चेहरे पर सूजन आना, थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, डार्क या बदबूदार यूरिन आना, सांस फूलना स्किन में खुजली होना और उल्टी या फिर मतली जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह आपकी किडनी खराब होने की शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

 झाग आना और कौन सी बीमारियों का हो सकता है संकेत?

यूरिन में झाग आना कई बार सिर्फ किडनी नहीं बल्कि दूसरी बीमारियों की तरफ भी इशारा करता है. दरअसल यूरिन में ज्यादा झाग आना डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की ओर भी इशारा कर सकता है. इसके अलावा हार्ट से जुड़ी समस्याएं, प्रेगनेंसी, तनाव और यूरिन इन्फेक्शन के दौरान भी यूरिन में ज्यादा झाग दिखाई दे सकते हैं. इसके अलावा हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि शरीर में कोई गंभीर बीमारी पनप रही हो तो उसका पहला संकेत पेशाब से ही मिलता है. ऐसे में झागदार पेशाब आना, यूरिन का रंग गहरा पीला या भूरा होना, तेज बदबू और जलन होना या फिर यूरिन में ब्लड आना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो आपको तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या प्रेग्नेंसी में पैरासिटामोल खाने से बच्चे को हो जाती है दिमागी बीमारी, कितनी सच है ये बात?

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Does Paracetamol During Pregnancy Cause Autism: प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामोल लेने को लेकर हाल के दिनों में कई दावे सामने आए हैं. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं ने भी यह कह दिया कि प्रेग्नेंसी में पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज़्म जैसी दिमागी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. लेकिन अब इस दावे पर बड़ा फैक्ट-चेक सामने आया है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या सच में यह खतरनाक है या फिर इसको लेकर फेक दावों की बौछार लगा दी गई थी. 

रिसर्च में निकला कोई खतरा नहीं

मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक रिव्यू में साफ कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी या आर्टिफिशियल डिसेबिलिटी का कोई क्लिनिकली महत्वपूर्ण खतरा नहीं बढ़ता. इस स्टडी में अब तक हुए रिसर्च की गहराई से रिव्यू की गई. रिसर्चर का कहना है कि पहले जो स्टडी पैरासिटामोल को दिमागी बीमारियों से जोड़ती थीं, उनमें कई तरह की खामियां थीं. इनमें डेटा कन्फ्यूज़न, गलत याददाश्त पर आधारित जानकारी और दूसरे हेल्थ फैक्टर्स का असर शामिल था, जिससे नतीजे भरोसेमंद नहीं माने जा सकते.

इस नई रिव्यू के मुताबिक, बच्चों में ऑटिज़्म या न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं की वजह पारिवारिक और जेनेटिक फैक्टर्स ज्यादा हो सकते हैं. यानी एक ही परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसे लक्षण दिखना ज्यादा तर्कसंगत वजह है, न कि पैरासिटामोल का सीधा असर. रिसर्च में उन स्टडीज को ज्यादा अहमियत दी गई, जिनमें एक ही मां की दो प्रेग्नेंसी की तुलना की गई. एक में पैरासिटामोल लिया गया और दूसरी में नहीं. ऐसे स्टडी जेनेटिक्स और घर के माहौल जैसे फैक्टर्स को बेहतर तरीके से अलग कर पाते हैं.

तीन स्टेप में बांटा गया है

रिसर्चर ने पैरासिटामोल और प्रेग्नेंसी से जुड़े स्टडीज को तीन स्टेप्स में जांचा. पहले स्टेप में गर्भवती महिलाओं द्वारा पैरासिटामोल के इस्तेमाल से जुड़ी 4,147 स्टडी को देखा गया, जिनमें से 4,092 को इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उनके नतीजे इस विषय से सीधे तौर पर जुड़े नहीं थे. दूसरे स्टेप में 55 फुल टेक्स्ट रिसर्च पेपर्स की गहराई से रिव्यू की गई. इनमें से भी 12 स्टडी को डिजाइन की कमी, डेटा अधूरा होने या विषय से मेल न खाने की वजह से हटा दिया गया.

अंतिम स्टेप में 43 स्टडी को व्यवस्थित तरीके से रिव्यू किया गया. इनमें से 17 हाई क्वालिटी वाली रिसर्च को डिटेल स्टैटिक्स एनालिसिस के लिए चुना गया, जिसमें खासतौर पर भाई-बहनों की तुलना वाले स्टडीज को प्राथमिकता दी गई, ताकि जेनेटिक और पारिवारिक प्रभाव को अलग किया जा सके.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

स्टडी की सीनियर राइटर प्रोफेसर अस्मा खलील का कहना है कि बिना पुख्ता सबूत ऐसे दावे करना गर्भवती महिलाओं में बेवजह डर पैदा कर सकता है. मौजूदा साइंटफिक साक्ष्य इन दावों का समर्थन नहीं करते. एक्सपर्ट ने दोहराया है कि मौजूदा मेडिकल गाइडलाइंस के तहत डॉक्टर की सलाह से लिया गया पैरासिटामोल प्रेग्नेंसी में सुरक्षित माना जाता है, दर्द या बुखार जैसी स्थिति में यह अब भी एक भरोसेमंद विकल्प है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये सब्जियां खाने से जल्दी बढ़ती है लंबाई, फायदे जान लेंगे तो नहीं करेंगे इग्नोर

ये सब्जियां खाने से जल्दी बढ़ती है लंबाई, फायदे जान लेंगे तो नहीं करेंगे इग्नोर


Which Vegetable Helps Increase Height: लंबाई भले ही काफी हद तक जेनेटिक्स पर निर्भर करती हो, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही पोषण के बिना शरीर का संतुलित विकास संभव नहीं है. खासकर ग्रोथ एज में हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए कुछ सब्ज़ियों का नियमित सेवन बेहद जरूरी होता है. चलिए आपको कुछ सब्जियों और फूड्स के बारे में बताते हैं, जो बच्चों की हाइट ग्रोथ में मददगार साबित होंगी.

हरी पत्तेदार 

पालक, केल, पत्ता गोभी और अरुगुला जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियां लंबाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं. इनमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैंय साथ ही इनमें मौजूद विटामिन K बोन डेंसिटी बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जो ग्रोथ के लिए जरूरी है.

केल 

केल को सुपरफूड माना जाता है. इसमें कैल्शियम और विटामिन C अच्छी मात्रा में होता है, जो हड्डियों की मजबूती और शरीर के विकास को सपोर्ट करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्रोथ एज में केल को डाइट में शामिल करने से हड्डियों का विकास बेहतर हो सकता है.

पत्ता गोभी और अरुगुला

पत्ता गोभी पाचन तंत्र को मजबूत करती है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से एब्ज़ॉर्ब कर पाता है. वहीं अरुगुला में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों की ग्रोथ और मजबूती में मदद करते हैं.

शकरकंद

शकरकंद विटामिन A से भरपूर होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है. इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर गट हेल्थ को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर को ग्रोथ से जुड़े पोषक तत्व सही तरह से मिल पाते हैं. आप इसे उचित मात्रा में डाइट में शामिल कर सकते हैं.

बीन्स और क्विनोआ

बीन्स पौधों से मिलने वाला अच्छा प्रोटीन और आयरन का स्रोत हैं, जो टिश्यू ग्रोथ में मदद करते हैं. वहीं क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम और फॉस्फोरस हड्डियों की मजबूती को सपोर्ट करते हैं, जिससे लंबाई के विकास में मदद मिल सकती है. आप इसको डाइट में शामिल कर सकते हैं.

ध्यान रखने वाली बात
यह साफ है कि एक तय उम्र के बाद लंबाई बढ़ना संभव नहीं होता, लेकिन सही सब्ज़ियों से भरपूर डाइट हड्डियों को मजबूत बनाकर ग्रोथ को सपोर्ट जरूर करती है और लंबाई को बनाए रखने में मदद करती है. अगर लंबाई बढ़ाने या बच्चों की ग्रोथ को लेकर चिंता है, तो हरी पत्तेदार सब्जियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. सही डाइट के साथ ये सब्जियां शरीर के विकास में के लिए जरूरी होती हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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