गाउट अटैक से पहले दिखते हैं यूरिक एसिड के ये 5 लक्षण, नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक

गाउट अटैक से पहले दिखते हैं यूरिक एसिड के ये 5 लक्षण, नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक


यूरिक एसिड का पहला संकेत किसी एक जोड़ में अचानक तेज दर्द होना है जो अक्सर बड़े पैर के अंगूठे में शुरू होता है. यह दर्द रात में अचानक शुरू हो सकता है और चुभन जैसा महसूस हो सकता है. यह दर्द यूरिक एसिड क्रिस्टल के जोड़ में जमने और सूजन पैदा करने के कारण होता है. यह दर्द टखनों, घुटनों, कोहनियाें और उंगलियों में भी महसूस हो सकता है.

गाउट में जोड़ों की सूजन भी आम होती है, जिससे स्किन में बदलाव आते हैं. इसमें स्किन लाल दिख सकती है और यह सूजन के साथ हो सकती है. छूने पर यह गर्म भी महसूस हो सकता है. यह लाल सूजी हुई स्किन जोड़ों को सामान्य से बड़ा या फुला हुआ दिखा सकती है. यह यूरिक एसिड क्रिस्टल के कारण होने वाली सूजन की प्रतिक्रिया होती है. कई बार स्किन इतनी कस जाती है कि हल्का सा स्पर्श भी दर्द का अहसार कराता है.

गाउट में जोड़ों की सूजन भी आम होती है, जिससे स्किन में बदलाव आते हैं. इसमें स्किन लाल दिख सकती है और यह सूजन के साथ हो सकती है. छूने पर यह गर्म भी महसूस हो सकता है. यह लाल सूजी हुई स्किन जोड़ों को सामान्य से बड़ा या फुला हुआ दिखा सकती है. यह यूरिक एसिड क्रिस्टल के कारण होने वाली सूजन की प्रतिक्रिया होती है. कई बार स्किन इतनी कस जाती है कि हल्का सा स्पर्श भी दर्द का अहसार कराता है.

कई रिसर्च बताती है कि जोड़ों में अकड़न और कार्यक्षमता का कम होना गाउट और यूरिक एसिड से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा करता है. यह लक्षण अक्सर दर्द के गंभीर होने से ठीक पहले दिखाई देता है. यह अकड़न आमतौर पर सुबह के समय होती है और जोड़ इसमें गर्म महसूस हो सकते हैं. इससे जोड़ को हिलाना या रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है. वहीं यूरिक एसिड क्रिस्टल की जलन के कारण यह सूजन होती है.

कई रिसर्च बताती है कि जोड़ों में अकड़न और कार्यक्षमता का कम होना गाउट और यूरिक एसिड से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा करता है. यह लक्षण अक्सर दर्द के गंभीर होने से ठीक पहले दिखाई देता है. यह अकड़न आमतौर पर सुबह के समय होती है और जोड़ इसमें गर्म महसूस हो सकते हैं. इससे जोड़ को हिलाना या रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है. वहीं यूरिक एसिड क्रिस्टल की जलन के कारण यह सूजन होती है.

वहीं यूरिक एसिड का हाई लेवल पेशाब की बनावट को बदल सकता है. इसमें पेशाब धुंधला या गहरा दिखाई दे सकता है और पेशाब में बदबू भी आ सकती है. इसके साथ ही पेशाब में जलन भी महसूस हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हाई यूरिक एसिड किडनी स्टोन का कारण बन सकता है. पथरी होने पर पीठ या बगल में दर्द, उल्टी और बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

वहीं यूरिक एसिड का हाई लेवल पेशाब की बनावट को बदल सकता है. इसमें पेशाब धुंधला या गहरा दिखाई दे सकता है और पेशाब में बदबू भी आ सकती है. इसके साथ ही पेशाब में जलन भी महसूस हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हाई यूरिक एसिड किडनी स्टोन का कारण बन सकता है. पथरी होने पर पीठ या बगल में दर्द, उल्टी और बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

जोड़ में गर्माहट या जलन महसूस होना हाई यूरिक एसिड लेवल का संकेत हो सकता है. इसमें जोड़ शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है और यह दर्द शुरू होने से पहले की सूजन की ओर इशारा करता है. वहीं यूरिक एसिड क्रिस्टल उत्तकों को परेशान करते हैं, जिससे उनमें सूजन आ जाती है. इसे लेकर डॉक्टर सलाह देते हैं कि पैर या टखने में हल्के दर्द या असुविधा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

जोड़ में गर्माहट या जलन महसूस होना हाई यूरिक एसिड लेवल का संकेत हो सकता है. इसमें जोड़ शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है और यह दर्द शुरू होने से पहले की सूजन की ओर इशारा करता है. वहीं यूरिक एसिड क्रिस्टल उत्तकों को परेशान करते हैं, जिससे उनमें सूजन आ जाती है. इसे लेकर डॉक्टर सलाह देते हैं कि पैर या टखने में हल्के दर्द या असुविधा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

Published at : 19 Nov 2025 07:48 AM (IST)

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गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए, जान लीजिए काम की बात

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सर्दियों का मौसम आते ही ठंडक, गरम-गरम खाना, धूप सेंकना और कंर्फटेबल कंबल, ये सब हमारी डेली लाइफ में शामिल हो जाता है. इस मौसम में पसीना कम आता है, शरीर ठंडा रहता है और प्यास भी बहुत कम लगती है. अक्सर ऐसा होता है कि हम पूरा दिन गुजार देते हैं लेकिन पानी पीना याद ही नहीं रहता है. जबकि गर्मियों में थोड़ी-सी भी गर्मी लगते ही हम बार-बार पानी पीते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में भी शरीर को उतनी ही मात्रा में पानी चाहिए जितना गर्मियों में पीते हैं. सर्दी में भी आपका शरीर अंदर से उतना ही काम करता है, और हर सिस्टम को सही चलाने के लिए पानी जरूरी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए और क्यों पानी कम पीने से आपकी सेहत पर असर पड़ सकता है. 
 
गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए 

सर्दियों में हमें प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत गर्मियों जितनी ही रहती है.  एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक सामान्य और हेल्दी व्यक्ति को रोजाना लगभग 8–10 गिलास यानी 2 से 2.5 लीटर पानी पीना चाहिए. जिन लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम होती है और जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस में बैठकर काम करते हैं, उनके लिए लगभग 2 लीटर पानी पीना सही माना जाता है. वहीं जो लोग ज्यादा एक्टिव रहते हैं, नियमित एक्सरसाइज करते हैं या बाहर काम करते हैं, उन्हें रोजाना 10 से 12 गिलास यानी 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. वहीं ठंड के मौसम में प्यास कम लगती है, इसलिए पानी पीने को आदत के रूप में अपनाना जरूरी है, नहीं तो शरीर में पानी की कमी आसानी से हो सकती है. 

सर्दियों में पानी पीना क्यों जरूरी है

1. शरीर को अंदर से पानी चाहिए, चाहे मौसम कोई भी हो – सर्दियों में पसीना कम आता है, इसलिए धोखा लगता है कि पानी की जरूरत कम है. लेकिन शरीर के हर अंग को सही से काम करने के लिए पानी हमेशा बराबर मात्रा में चाहिए. पानी कम हुआ तो डिहाइड्रेशन हो सकता है जो सर्दियों में चुपचाप हो जाता है और हमें पता भी नहीं चलता है. 

2.  स्किन को नमी मिलती है – सर्दियों में हवा सूखी होती है, जिससे स्किन फटने, सूखापन और खुजली जैसी समस्याएं बढ़ती हैं. पानी स्किन में नमी बनाए रखता है और उसे हाइड्रेटेड और ग्लोइंग बनाता है. 

3. पाचन दुरुस्त रहता है – सर्दियों में लोग तला-भुना, हैवी और मसालेदार खाना ज्यादा खाते हैं. ऐसे खाने से कब्ज होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में रोजाना सही और पूरा पानी  पाचन बेहतर करता है, कब्ज से बचाता है और पेट को हल्का रखता है. 

4. इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है – सर्दी-जुकाम और फ्लू सर्दियों में ज्यादा होते हैं. ऐसे में पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है और बार-बार बीमार पड़ने की संभावना कम हो जाती है. 

5. शरीर का टेम्परेचर बैलेंस रहता है – पानी शरीर का नेचुरल थर्मोरेगुलेटर है. सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने में पानी अहम भूमिका निभाता है. इसलिए पानी कम होगा तो शरीर जल्दी थकने लगेगा और ठंड ज्यादा महसूस होगी. 

6. जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न कम होती है – सर्दियों में कई लोगों को जोड़ों में दर्द, जकड़न या अकड़न महसूस होती है. पानी जोड़ों को लुब्रिकेशन देता है.जिससे जोड़ों की मूवमेंट आसान होती है, दर्द कम होता है और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं. 

यह भी पढ़ें Morning sugar: सुबह-सुबह क्यों हाई हो जाता है ब्लड शुगर, यह कितना खतरनाक और क्या है इसे मैनेज करने का तरीका?

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