सर्जिकल मास्क या N95… दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण में कौन सा मास्क आपके लिए बेहतर?

सर्जिकल मास्क या N95… दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण में कौन सा मास्क आपके लिए बेहतर?



Air Pollution Protection: दिल्ली में इस समय हवा काफी दूषित है, कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स का लेवर 600 तक पहुंच गया है. यह काफी खतरनाक लेवल माना जाता है. कई लोगों को डॉक्टर थोड़े दिन बाहर बिताने की सलाह दे रहे हैं. लोगों को सलाह दी जा रही है कि जहां तक हो, बाहर कम निकलें और यदि निकलते हैं, तो मॉस्क लगाकर निकलें.  

5 अक्टूबर को शेयर किए गए एक इंस्टाग्राम पोस्ट में डॉ. सोनिया गोयल, जो पिछले पांच साल से फेफड़ों की बीमारियों का इलाज कर रही हैं, उन्होंने यह समझाया कि क्या चेहरे पर लगाया जाने वाला मास्क वाकई प्रदूषण से बचाता है या नहीं.

क्या मास्क सच में प्रदूषण से बचाते हैं?

डॉ. गोयल बताती हैं कि हम सभी प्रदूषण से बचने की उम्मीद में मास्क पहनते हैं, लेकिन उनकी असली प्रभावशीलता कैसी है, यह कम लोग जानते हैं. उनका कहना है कि हर मास्क एक जैसा नहीं होता. अगर आपको लगता है कि कोई भी मास्क चाहे सर्जिकल हो, N95 हो या KN95 प्रदूषण से बचाने के लिए काफी है, तो यह आपकी गलतफहमी दूर करने का सही समय है. यह जानना जरूरी है कि कौन सा मास्क आपको हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों से सच में सुरक्षित रख सकता है.

सर्जिकल मास्क से कितना फायदा?

डॉ. गोयल कहती हैं, “सर्जिकल या कपड़े के मास्क बड़े कणों को तो रोक लेते हैं, लेकिन PM2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म और खतरनाक कण आसानी से इनके आर-पार निकल जाते हैं.” यानी जब AQI बहुत खराब होता है, तब ये मास्क पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते.

 


N95/KN95 मास्क सबसे असरदार

उनके अनुसार N95 या KN95 मास्क सबसे बेहतर विकल्प हैं. “ये मास्क हवा में मौजूद 95 प्रतिशत सूक्ष्म कणों PM2.5, धुआं और फाइन पार्टिकल्स को फिल्टर करने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन ये तभी असर दिखाते हैं जब इन्हें सही फिट के साथ पहना जाए, नोज क्लिप ठीक से सेट की जाए और किनारों पर कोई गैप न हो.” मास्क कितनी देर तक काम करता है, यह भी मायने रखता है सिर्फ मास्क पहनना ही काफी नहीं है. “समय के साथ मास्क नमी और गंदगी पकड़ लेते हैं, जिससे उनकी क्षमता कम होती जाती है. अगर आप हाई पॉल्यूशन में ज्यादा समय बाहर रहते हैं, तो मास्क को नियमित रूप से बदलना जरूरी है.” उनकी सलाह है कि मास्क के साथ कुछ और सावधानियां भी अपनानी चाहिए.

इन बातों का भी रखें ध्यान

डॉ. गोयल सुझाती हैं कि सिर्फ मास्क ही काफी नहीं होता. इसके साथ में यह भी करें:

  • पीक ट्रैफिक ऑवर्स में बाहर जाने से बचें
  • जब हवा बेहद खराब हो, तो घर में रहें
  • घर/ऑफिस में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें
  • इनडोर प्लांट्स लगाएं जो हवा को बेहतर बनाते हैं
  • बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग खास सावधानी रखें

इसे भी पढ़ें- Pregnancy Air Pollution Risk: 400+ AQI में प्रेग्नेंट महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, बच्चे पर पड़ सकता है उल्टा असर

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या 1 सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी हो जाते हैं सफेद, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

क्या 1 सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी हो जाते हैं सफेद, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?



30 की उम्र तक आते-आते लगभग हर कोई सफेद बालों की समस्या से जूझने लगता है. कुछ लोगों को यह समस्या इससे पहले भी होने लगती है, जिसे अर्ली ग्रेइंग कहते हैं. हालांकि, सफेद बाल होना आपकी खूबसूरती को कम नहीं करता, लेकिन कई लोग इसे लेकर असहज महसूस करते हैं. इस कारण वे शुरू-शुरू में दिखाई देने वाले कुछ सफेद बालों को तोड़कर छिपाने की कोशिश करते हैं. क्या सच में ऐसा करना सुरक्षित है?

अक्सर हम दूसरों से यह भी सुनते हैं कि अगर एक सफेद बाल तोड़ दिया तो उसके आसपास और भी सफेद बाल उगने लगते हैं. क्या वाकई ऐसा होता है? यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करता है. तो आइए जानते हैं क्या 1 सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद हो जाते हैं.  

क्या एक सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद हो जाते हैं?

सफेद बाल तोड़ने से बाकी बाल भी सफेद नहीं होते हैं. यह पूरी तरह मिथ है. स्किन और बालों के विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि एक सफेद बाल को तोड़ने से बाकी बालों का रंग बदलने वाला नहीं है. हर बाल अपनी अलग जड़ यानी हेयर फॉलिकल में बनता है और हर फॉलिकल की अपनी एक कलर फैक्टरी होती है जिसे मेलानोसाइट्स कहते हैं. ये मेलानोसाइट्स ही मेलेनिन बनाते हैं, जिससे बाल काले या भूरे दिखते हैं. 

जब किसी फॉलिकल में मेलेनिन बनना कम हो जाता है, तभी उस फॉलिकल से सफेद बाल निकलते हैं. इसलिए एक सफेद बाल तोड़ने से दूसरे फॉलिकल्स पर कोई असर नहीं होता है. बाकी काले बाल सिर्फ इसलिए सफेद नहीं होते कि आपने एक बाल उखाड़ दिया जाता है. उस जगह वही बाल दोबारा उगेगा और अगर वह फॉलिकल अब मेलेनिन नहीं बना रहा तो बाल फिर से सफेद ही आएगा. हालांकि, सफेद बाल तोड़ना सही नहीं माना जाता है क्योंकि इसके कारण कई नुकसान और होते हैं

सफेद बाल तोड़ने के असली नुकसान

1. संक्रमण यानी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है – बार-बार बालों को उखाड़ने से फॉलिकल के आसपास की जगह कमजोर और सेंसिटिव हो जाती है. वहां बैक्टीरिया आसानी से पहुंच जाते हैं, जिससे लालपन, सूजन, दर्द पिंपल जैसे दाने हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से फॉलिकल इंफेक्ट होकर खराब भी हो सकता है. 

2. इनग्रोन हेयर की समस्या – जब आप एक बाल को जोर से खींचकर निकालते हैं, तो कभी-कभी बाल की बढ़ने की दिशा बदल जाती है. इसकी वजह से नया बाल बाहर आने के बजाय स्किन के अंदर ही मुड़ जाता है, जिससे लाल उभार, खुजली, दर्द और जलन हो सकती है. इसे इनग्रोन हेयर कहते हैं. 

3. स्कैल्प पर जलन और इरिटेशन – बार-बार बाल खींचने से उस जगह की स्किन पर चोट लग जाती है. खासकर सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को खुजली, चुभन और लाल धब्बे ज्यादा महसूस होते हैं. 

4. हाइपरपिग्मेंटेशन और निशान – कुछ लोग बार-बार बाल उखाड़ते-उखाड़ते उस जगह पर दाग या काले निशान बना लेते हैं. फॉलिकल पर दबाव पड़ने से स्किन में पिगमेंटेशन बढ़ जाता है. 

5. फॉलिकल कमजोर होने से बाल कम उगना – लगातार खींचने की वजह से फॉलिकल इतना कमजोर हो सकता है कि उस जगह बाल उगना कम हो जाए या बंद भी हो जाए. इससे पैची हेयर ग्रोथ हो सकती है. 

ग्रे हेयर की सही देखभाल कैसे करें?

1. बालों को अच्छी तरह मॉइस्चराइज करें – सफेद या ग्रे बाल सामान्य बालों की तुलना में ज्यादा सूखे हो जाते हैं, इसलिए मॉइस्चराइजिंग शैम्पू, कंडीशनर,. हेयर सीरम, नारियल या ऑलिव ऑयल का यूज करें. 

2. धूप से बचाएं – तेज सूरज से बाल और ज्यादा खराब दिखने लगते हैं. इसलिए स्कार्फ, कैप, यूवी प्रोटेक्ट स्प्रे का यूज करें. 

3. समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं – ट्रिमिंग से स्प्लिट एंड्स कम होते हैं, स्ट्रक्चर बेहतर होता है, बाल सॉफ्ट और अच्छे दिखते हैं. 

4. षक तत्व लें – बालों के रंग और मजबूती के लिए कुछ न्यूट्रिएंट बहुत जरूरी हैं. जैसे  विटामिन B12, विटामिन E, आयरन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन. इससे बाल मजबूत बनते हैं और झड़ना कम होता है. 

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स्किन कैंसर में दिखते हैं ये लक्षण, देखते ही भागें डॉक्टर के पास

स्किन कैंसर में दिखते हैं ये लक्षण, देखते ही भागें डॉक्टर के पास



Skin Cancer: स्किन कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है. भारत में भी स्किन कैंसर के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, यह उन कैंसरों में शामिल है, जिनके शुरुआती लक्षण स्किन पर साफ दिखाई देने लगते हैं. इसलिए समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो स्किन कैंसर का इलाज आसान और काफी हद तक सफल हो सकता है.

हालांकि, स्किन कैंसर को लेकर समस्या तब बढ़ जाती है, जब लोग स्किन पर होने वाले शुरुआती बदलाव को नजरअंदाज कर देते हैं और इसे नॉर्मल स्किन से जुड़ी समस्या समझ लेते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि स्किन कैंसर में कौन से लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें आपको बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

क्या होते हैं स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण?

ज्यादातर लोगों को अपने  शरीर पर तिल, झाइयों और स्किन पर मौजूद धब्बों के बारे में जानकारी होती है. स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण इन्हीं में बदलाव के रूप में सबसे पहले दिखाई देते हैं. अगर आपकी स्किन पर कोई नया धब्बा बन जाए या पुराना तिल अचानक रंग या बनावट बदलने लगे तो यह स्किन कैंसर का सबसे पहला लक्षण माना जाता है.

ABCDE नियम से भी कर सकते हैं स्किन कैंसर की पहचान

  • A – Asymmetry- स्किन कैंसर की पहचान करने के लिए एक्सपर्ट ABCDE नियम फॉलो करने की सलाह देते हैं. इसमें A का मतलब तिल का एक ऐसा हिस्सा होता है जो दूसरे हिस्से से मेल न खाए.
  • B – Border- बी का मतलब तिल का वह हिस्सा होता है जो तिल के किनारे अनियमित, धुंधला या कटा-फटा दिखाई दें.
  • C – Color- सी का मतलब तिल में एक से ज्यादा रंग जैसे भूरा, काला या सफेद नजर आए तो वह भी स्किन कैंसर का लक्षण हो सकता है.
  • D – Diameter- डी का मतलब तिल का आकार बढ़ रहा हो, खासकर यह 6 मीमी से ज्यादा हो जाए तो इसे भी नजरअंदाज न करें.
  • E – Evolving- ई का मतलब समय के साथ तिल बदल रहा हो. इसमें तिल में खुजली, दर्द, खून या नया तिल बना शामिल होता है.

स्किन कैंसर के अन्य शुरुआती लक्षण

  • अगर आपकी स्किन पर कोई नया उभार या घाव होता है जो हफ्तों में भी नहीं भर रहा हो तो वह भी स्किन कैंसर का लक्षण हो सकता है.
  • वहीं तिल या पेच में लगातार खुजली, दर्द या जलन होना भी स्किन कैंसर का शुरुआती लक्षण होता है.
  • किसी घांव पर बार-बार पपड़ी बनना या खून निकलना भी इसका आम लक्षण है.
  • वहीं स्किन पर धब्बे का आकार लगातार बढ़ना या आसपास की स्किन में फैलना भी स्किन कैंसर का लक्षण होता है.
  • स्किन पर मोम जैसा या चमकदार उभार होना भी स्किन कैंसर का आम लक्षण है.
  • स्किन लाल, खुरदरी या स्किन पर स्केली धब्बा बना जाना भी स्किन कैंसर का लक्षण होता है.

किसे होता है स्किन कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा?

एक्सपर्ट्स के अनुसार उन लोगों को स्किन कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा होता है, जिनकी स्किन बहुत गोरी होती है, जो लंबे समय तक धूप में रहते हैं या जिनके परिवार में पहले यह बीमारी रही हो. वहीं बुजुर्ग, कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज और जिनके शरीर में बहुत सारे तिल हो उनमें भी स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आपकी स्किन पर अगर कोई भी असामान्य बदलाव दिखाई दें, घांव समय पर न भरें या किसी तिल में अचानक बदलाव हो तो इस हलके में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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दूसरे, तीसरे या चौथे… पीरियड्स शुरू होने के बाद किस दिन धुलने चाहिए बाल, क्या कहते हैं एक्सपर

दूसरे, तीसरे या चौथे… पीरियड्स शुरू होने के बाद किस दिन धुलने चाहिए बाल, क्या कहते हैं एक्सपर



Hair Wash During Periods: हर महीने महिलाओं को पीरियड्स आते हैं. यह एक पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है. इसमें यूट्रस की परत से रक्त और ऊतक शरीर से बाहर निकलते हैं. पुराने समय में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए कई तरह के नियम बना दिए गए थे. उन्हीं में से एक था. पीरियड्स के पहले तीन दिन बाल न धोना. कई जगहों पर माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान शरीर से गंदगी निकलती है और इस समय शरीर का गर्म रहना जरूरी होता है ताकि ब्लीडिंग ठीक से हो सके.

क्योंकि हर महिला का पीरियड साइकिल अलग होता है, किसी की ब्लीडिंग तीन दिन चलती है, किसी की पांच, तो किसी की सात. ऐसे में लोगों का मानना था कि पहले तीन दिन बाल धोने से शरीर का तापमान कम होता है और इससे ब्लीडिंग रुक सकती है या कम हो सकती है, जिससे आगे चलकर कई दिक्कतें हो सकती हैं. लेकिन साइंस दृष्टि से ये बातें सच नहीं हैं. पीरियड्स के दौरान बाल धोने या किसी खास दिन बाल धोने से ब्लड फ्लो पर कोई असर नहीं पड़ता. यह एक आम मिथ है, जिसे मेडिकल साइंस सपोर्ट नहीं करता. महिलाएं अपने पीरियड्स में भी बिल्कुल सामान्य तरीके से सफाई और नहाने की आदत बनाए रख सकती हैं.

सबसे पहले पीरियड को समझ लीजिए

अमेरिका के National Institute of Child Health and Human Development (NICHD) के अनुसार, पीरियड में यूट्र्स की परत से निकलने वाले रक्त और टिश्यू का सामान्य प्रवाह है, जो हर महीने महिलाओं केमेनस्ट्रुअल साइकिल का हिस्सा होता है. यह प्रक्रिया मेनार्क (पहला पीरियड आमतौर पर 10 से 16 वर्ष की उम्र में) से लेकर मेनोपॉज (45 से 55 वर्ष के बीच) तक चलती है. सामान्यत: एक पीरियड लगभग पांच दिन तक रहता है.

मेंस्ट्रुअल साइकिल क्या है

NICHD बताता है कि मेंस्ट्रुअल साइकिल एक मासिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर एक अंडा रिलीज करता है, गर्भाशय की परत गर्भधारण की तैयारी में मोटी होती है, और गर्भ न होने पर यही परत रक्त के रूप में बाहर निकल जाती है. औसतन मासिक चक्र 28 दिनों का होता है, लेकिन यह महिलाओं और उम्र के अनुसार बदलता रहता है. कम उम्र की लड़कियों  में यह 21 से 45 दिन और वयस्क महिलाओं में 21 से 35 दिन तक हो सकता है.

स्कैल्प की सेहत क्यों जरूरी है

CDC के एक्सपर्ट के अनुसार, स्कैल्प प्राकृतिक तेल यानी सीबम बनाता है, जो त्वचा को नमी देने और संक्रमण से बचाने का काम करता है. अगर बाल लंबे समय तक न धोए जाए, तो सीबम, गंदगी, पसीना और प्रोडक्ट बिल्ड-अप जमा होने लगता है. इससे बाल चिपचिपे दिखते हैं, बदबू आ सकती है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.  एक स्टडी (Journal of Skin Appendage Disorders) में पाया गया कि बाल न धोने से स्कैल्प पर जमा सीबम रासायनिक रूप से बदलने लगता है. इसमें मौजूद फ्री फैटी एसिड और ऑक्सीडाइज लिपिड त्वचा को इरिटेट कर सकते हैं. अध्ययन में यह भी पाया गया कि कम बार बाल धोने वालों में डैंड्रफ और अन्य स्कैल्प समस्याएं अधिक देखी गईं.

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400+ AQI में प्रेग्नेंट महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, बच्चे पर पड़ सकता है उल्टा असर

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Air Pollution During Pregnancy: ठंड आते ही देश की राजधानी दिल्ली गैस चैंबर की तरह दिखने लगती है. हर तरफ प्रदूषण का कहर दिखाई देने लगता है. सोमवार 17 नवंबर को कई जगह एक्‍यूआई लेवल 400 के पार दर्ज किया गया है, जो गंभीर स्तर माना जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे प्रदूषित इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं में प्री-टर्म डिलीवरी (37 हफ्ते से पहले जन्म). कम वजन वाले बच्चे. स्टिलबर्थ और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है. आइए समझते हैं कि प्रदूषण मां और उसके होने वाले बच्चे को कैसे प्रभावित करता है और इससे बचाव के तरीके क्या हैं.

गर्भवती महिला और भ्रूण पर प्रदूषण के खतरे

सर्दियों में हर साल अस्पताल खांसी. सर्दी. दमा और सांस की दिक्कत वाले मरीजों से भर जाते हैं. लेकिन असल नुकसान उस बच्चे को भी होता है. जो अभी मां के गर्भ में है. Americanpregnancy नॉर्मल गर्भावस्था में आमतौर पर 38 से 40 हफ्तों के बीच छह से नौ पाउंड वजन वाला बच्चा जन्म लेता है. पांच पाउंड आठ औंस से कम वजन वाले बच्चे को “लो बर्थ वेट” माना जाता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. लेकिन माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान एयर पॉल्यूशन के संपर्क में आना भी इस समस्या का एक बड़ा कारण बन सकता है. हवा में मौजूद जहरीले कण प्लेसेंटा तक पहुंचकर मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

गर्भवती महिलाओं में प्रदूषण के कारण हाई ब्लड प्रेशर. सांस फूलना या अस्थमा का अटैक हो सकता है. जिससे बच्चे पर सीधा असर पड़ता है. कई शोधों में यह भी पाया गया है कि गर्भ में प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चों में आगे चलकर अस्थमा की समस्या होने की संभावना अधिक रहती है.

प्रेग्नेंसी में प्रदूषण से बचने के तरीके

अगर आपको अपने बच्चे की सेहत का ख्याल रखना है. तो आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा. जैसे कि-

घर में रहें

इसमें पहले नम्बर पर आता है कि घर में रहें. गर्भवती महिलाओं पर प्रदूषण का असर ज्यादा तेज़ पड़ता है. इसलिए खासकर पीक पॉल्यूशन टाइम में बाहर जाने से बचें.

भरपूर पानी पिएं

शरीर को हाइड्रेट रखने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और खांसी-जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं. पानी अंगों को स्वस्थ रखता है.

बाहर जाएं तो मास्क पहनें

एक अच्छी मेडिकल या N95 मास्क हवा में मौजूद हानिकारक कणों को काफी हद तक फिल्टर कर देता है.

घर की हवा शुद्ध रखें

अपने घर को सुरक्षित माहौल बनाएं. अंदर पौधे लगाएं. एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और खराब AQI के समय खिड़कियां बंद रखें.

इसे भी पढ़ें- Morning sugar: सुबह-सुबह क्यों हाई हो जाता है ब्लड शुगर, यह कितना खतरनाक और क्या है इसे मैनेज करने का तरीका?

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आज लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव, घट जाएगा कल लिवर कैंसर होने का खतरा

आज लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव, घट जाएगा कल लिवर कैंसर होने का खतरा



Ways to Prevent Liver Cancer: लिवर हमारे शरीर का सबसे मेहनती लेकिन सबसे अनदेखा अंग है. यह लगातार काम करता रहता है जो कुछ हम खाते, पीते या सांस के जरिए अंदर लेते हैं, उसे फिल्टर करता है. यही अंग हमारी एनर्जी, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को बैलेंस में रखता है. लेकिन सेहत की बात आती है तो अक्सर लिवर पर ध्यान सबसे आखिर में जाता है. दुनिया भर में लंग्स कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट के मुताबिक हर पांच में से तीन मामले रोके जा सकते हैं. इसका राज किसी बड़ी दवा में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में छिपा है. चलिए आपको बताते हैं कि आपको किन लाइफस्टाइल को चेंज करना है.

ज्यादा चलें, कम बैठें

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे असरदार और आसान तरीका है  एक्टिव रहना. रिसर्च बताती है कि अगर आप हफ्ते में सिर्फ एक घंटे भी तेज चाल से चलते हैं, तो लिवर कैंसर का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक घट सकता है. अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें लंबे समय तक बैठना पड़ता है, तो कोशिश करें कि हर घंटे कुछ मिनट टहल लें. फोन पर बात करते हुए उठकर चलें, मीटिंग्स के बीच स्ट्रेच करें या लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां लें. ये छोटे-छोटे बदलाव आपके लिवर के साथ-साथ पूरे शरीर को एक्टिव रखते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं.

वजन पर रखें नजर और सही खाएं

ज़्यादा वजन सिर्फ दिखने की बात नहीं है, यह सीधा लिवर की सेहत को प्रभावित करता है. शरीर में जमा फैट धीरे-धीरे लिवर में सूजन और स्कारिंग पैदा करता है, जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकता है. शोध बताते हैं कि हर 5 यूनिट BMI बढ़ने पर लिवर कैंसर का खतरा लगभग 39 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप अपने वजन का सिर्फ 10 प्रतिशत भी कम कर लेते हैं, तो फैटी लिवर जैसी स्थिति को पलटा जा सकता है. इसके लिए डाइट में साबुत अनाज, दालें, ताजे फल और सब्जियां जरूर शामिल करें. ये लिवर को रिपेयर करने और मजबूत बनाने में मदद करती हैं.

शराब और स्मोकिंग से दूरी बनाएं

कैंसर से बचाव के लिए शराब की कोई मात्रा सेफ नहीं मानी जाती. अगर महिलाएं दिन में एक और पुरुष दो से ज़्यादा ड्रिंक लेते हैं, तो लिवर कैंसर का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. शराब कम करना या पूरी तरह छोड़ देना लिवर को खुद को रिपेयर करने का मौका देता है. यही बात स्मोकिंग पर भी लागू होती है. तंबाकू लिवर की सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अगर आप इसे छोड़ दें तो कुछ समय बाद आपका रिस्क लगभग सामान्य हो सकता है.

लिवर को सुरक्षा दें और बीमारियों से बचाएं

क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और C लिवर कैंसर के मुख्य कारणों में से हैं. हेपेटाइटिस B का टीका लगभग 70 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करता है. इसके साथ ही सुरक्षित यौन संबंध, डिस्पोजेबल सुई का इस्तेमाल और सही समय पर एंटीवायरल इलाज करवाना बेहद जरूरी है. साथ ही अफ्लाटॉक्सिन जैसे जहरीले फंगस से भी बचें, जो पुराने अनाज या खराब तरीके से रखे गए ड्राई फ्रूट्स में बनता है. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड से सामान खरीदें.

नींद और लाइफस्टाइल का ध्यान रखें

रोज 7 से 8 घंटे की नींद आपके लिवर को खुद को रीजेनेरेट करने का समय देती है. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना. ये सब चीजें फैटी लिवर जैसी बीमारियों से बचाती हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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