बिहार चुनाव के नतीजों से लगा सदमा तो न हो परेशान, ये 8 टिप्स ठीक करेंगे दिमागी सेहत

बिहार चुनाव के नतीजों से लगा सदमा तो न हो परेशान, ये 8 टिप्स ठीक करेंगे दिमागी सेहत



Bihar election Results: आज यानी 14 नवंबर को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की जयंती भी है और इसी दिन यह भी तय होने वाला है कि देश में सबसे बड़ी आबादी के मामले में आने वाले राज्य बिहार को अगले पांच साल तक कौन संभालेगा. एनडीए और महागठबंधन इस समय मैदान में हैं, एक तरह जहां एग्जिट पोल से लेकर बाकी सट्टा बाजार तक नीतीश के फिर से सीएम बनने का दावा कर रहे हैं, तो विपक्ष को भी उम्मीद है कि शायद इस बार तेजस्वी के नेतृत्व में महागठबंधन कुछ कमाल कर जाए. फिलहाल कौन बनेगा बिहार का अगला सीएम, किसके सर पर सजेगा सेहरा और किसका लटके चेहरा ये शाम तक पता चल जाएगा. लेकिन चलिए आपको हम बताते हैं कि अगर आपको चुनाव के नतीजों से लगा सदमा तो न हों परेशान, वो कौन से 8 टिप्स हैं, जो आपको मेंटली फिट रखने में मदद करेंगे.

सोशल मीडिया से दूरी

चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद न्यूज चैनल और सोशल मीडिया लगातार सूचनाएं, बहसें और राय दिखाते रहते हैं. इससे दिमाग पर और बोझ पड़ता है. अगर मन भारी लग रहा है, तो कुछ घंटों के लिए टीवी, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप से दूरी बना लें. यह दिमाग को ब्रेक देने का सबसे आसान तरीका है.

अपनी भावनाओं को स्वीकार करें

अगर नतीजों से निराशा हुई है, तो यह मानना जरूरी है कि ऐसा महसूस करना बिल्कुल सामान्य है. खुद को दोष देने की जरूरत नहीं है. अपनी भावना को पहचानें और समझें कि यह अस्थायी है. साइकोलॉजिस्ट भी कहते हैं कि भावनाओं को दबाने से तनाव बढ़ता है, जबकि उन्हें स्वीकार करने से राहत मिलती है.

किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें

अगर सिर भारी लग रहा है या दिमाग बेचैन है, तो अपनी बात किसी ऐसे दोस्त, परिवार के सदस्य या सहकर्मी से शेयर करें, जो आपको समझता हो. बात करने से दिमाग हल्का होता है और आप स्थिति को नए नजरिये से देख पाते हैं.

आराम और नींद को प्राथमिकता दें

चुनाव के दिनों में देर रात तक टीवी देखना, सोशल मीडिया चेक करना और लगातार चर्चा करना नींद को प्रभावित कर देता है. अच्छी नींद दिमाग के लिए दवा की तरह काम करती है. कोशिश करें कि 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें. इससे मानसिक थकान में काफी कमी आती है.

हल्की फुल्की एक्सरसाइज करें

थोड़ी देर टहलना, स्ट्रेचिंग या योग करने से दिमाग में खुश करने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं. इससे तनाव कम होता है और मूड बेहतर होता है. यह उन लोगों के लिए भी बेहद फायदेमंद है जो राजनीतिक माहौल से मानसिक रूप से परेशान महसूस कर रहे हैं.

अपनी शेड्यूल सामान्य रखें

नतीजों के बाद कई लोग अपना पूरा दिन मोबाइल या टीवी पर लगाए रहते हैं. इससे दिमाग पर दबाव बढ़ता है. बेहतर होगा कि आप अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में वापस लौटें. चाहे वह ऑफिस हो, पढ़ाई हो या घरेलू काम. नियमित रूटीन मानसिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है.

असहमतियों में संयम रखें

चुनाव के बाद अक्सर लोगों के बीच बहस बढ़ जाती है. बार-बार विवाद में पड़ने से तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है. कोशिश करें कि राजनैतिक मतभेदों को निजी रिश्तों पर असर न डालें. शांत रहें और जहां जरूरत हो, चर्चा को सीमित करें.

खुद को सकारात्मक गतिविधियों में लगाएं

म्यूजिक सुनना, फिल्म देखना, किताब पढ़ना या कोई कला सीखना, ये सब दिमाग को तुरंत हल्का कर देते हैं. ऐसी गतिविधियां तनाव कम करती हैं और मूड बेहतर बनाती हैं.

इसे भी पढ़ें: मेंटल हेल्थ के लिए AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना खतरनाक, अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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रोजाना काली मिर्च चबाने से मिलते हैं ये 8 फायदे, जान लेंगे तो नहीं करेंगे इग्नोर

रोजाना काली मिर्च चबाने से मिलते हैं ये 8 फायदे, जान लेंगे तो नहीं करेंगे इग्नोर


काली मिर्च में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर में जमा फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं. इससे सेल्स को नुकसान से बचाव मिलता है और बढ़ती उम्र के असर भी धीमे पड़ते हैं.

अगर आप नेचुरल तरीके से स्किन को ग्लोइंग रखना चाहते हैं, तो काली मिर्च मदद कर सकती है. इसके एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण चेहरे पर होने वाली समस्याओं को कम करते हैं और स्किन की चमक बढ़ाते हैं.

अगर आप नेचुरल तरीके से स्किन को ग्लोइंग रखना चाहते हैं, तो काली मिर्च मदद कर सकती है. इसके एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण चेहरे पर होने वाली समस्याओं को कम करते हैं और स्किन की चमक बढ़ाते हैं.

भारी खाना खाने के बाद अक्सर पेट में भारीपन या गैस महसूस होती है. ऐसे में काली मिर्च फायदेमंद है क्योंकि यह पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है.

भारी खाना खाने के बाद अक्सर पेट में भारीपन या गैस महसूस होती है. ऐसे में काली मिर्च फायदेमंद है क्योंकि यह पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है.

काली मिर्च में मौजूद पिपरीन दिमाग के लिए भी अच्छा माना जाता है. यह ऐसे केमिकल्स को बढ़ाता है जो मूड, फोकस और दिमागी सेहत को बेहतर बनाते हैं. रोजाना थोड़ा सेवन मेंटल सतर्कता बढ़ा सकता है.

काली मिर्च में मौजूद पिपरीन दिमाग के लिए भी अच्छा माना जाता है. यह ऐसे केमिकल्स को बढ़ाता है जो मूड, फोकस और दिमागी सेहत को बेहतर बनाते हैं. रोजाना थोड़ा सेवन मेंटल सतर्कता बढ़ा सकता है.

जुकाम या बलगम की दिक्कत में भी काली मिर्च आराम देती है. इसकी नैचुरल गर्मी बलगम को ढीला करने में मदद करती है, जिससे सांस लेना आसान होता है और कंजेशन में राहत मिलती है.

जुकाम या बलगम की दिक्कत में भी काली मिर्च आराम देती है. इसकी नैचुरल गर्मी बलगम को ढीला करने में मदद करती है, जिससे सांस लेना आसान होता है और कंजेशन में राहत मिलती है.

काली मिर्च मेटाबॉलिज्म को भी तेज करती है. पिपरीन नाम का तत्व शरीर की ऊर्जा को बेहतर बनाता है, जिससे कैलोरी बर्निंग भी सुचारू रहती है. इसे खाने में शामिल करना आसान और फायदेमंद है.

काली मिर्च मेटाबॉलिज्म को भी तेज करती है. पिपरीन नाम का तत्व शरीर की ऊर्जा को बेहतर बनाता है, जिससे कैलोरी बर्निंग भी सुचारू रहती है. इसे खाने में शामिल करना आसान और फायदेमंद है.

लिवर की सेहत के लिए भी काली मिर्च मददगार है. यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करती है और लिवर के काम को सपोर्ट देती है, जिससे शरीर हल्का और स्वस्थ महसूस होता है.

लिवर की सेहत के लिए भी काली मिर्च मददगार है. यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करती है और लिवर के काम को सपोर्ट देती है, जिससे शरीर हल्का और स्वस्थ महसूस होता है.

काली मिर्च इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है. इसमें मौजूद विटामिन C और अन्य पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे छोटी-मोटी बीमारियां आसानी से पास नहीं आतीं.

काली मिर्च इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है. इसमें मौजूद विटामिन C और अन्य पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे छोटी-मोटी बीमारियां आसानी से पास नहीं आतीं.

Published at : 14 Nov 2025 10:36 AM (IST)

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हार्ट-किडनी के साथ फ्लेक्सिबिलिटी पर भी असर डालता है हाई ब्लड शुगर, जानें कितना होता है नुकसान?

हार्ट-किडनी के साथ फ्लेक्सिबिलिटी पर भी असर डालता है हाई ब्लड शुगर, जानें कितना होता है नुकसान?



भारत में डायबिटीज का संकट तेजी से बढ़ रहा है. अब यह सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि युवा पीढ़ी भी इससे प्रभावित हो रही है. आईसीएमआर-इंडियाबी अध्ययन के अनुसार, 2000 में भारत में 32 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 101 मिलियन हो गई है. सबसे चिंता की बात यह है कि युवा लोग भी टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं. इसका मुख्य कारण हमारा डेली रूटीन और लाइफस्टाइल में बदलाव है. जैसे कि ज्यादा बैठने वाला डेली रूटीन, मोटापा, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला खाना और पारिवारिक इतिहास. 

ज्यादातर लोग जानते हैं कि डायबिटीज आंखों, दिल, किडनी और नर्वस को नुकसान पहुंचा सकती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह हमारी मोबिलिटी और शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी को भी प्रभावित करती है. हेल्थकेयर लिमिटेड के ऑर्थोपेडिक और मोबिलिटी एड्स एक्सपर्ट, बताते हैं कि हम अक्सर डायबिटीज को आंखों, किडनी और नसों की समस्या से जोड़ते हैं. लेकिन यह शरीर के जोड़ों और रीढ़ की हड्डी को भी धीरे-धीरे प्रभावित करती है, जिससे  फ्लेक्सिबिलिटी कम होती है और रोजमर्रा की एक्टिविटी मुश्किल हो जाती हैं. 

हाई ब्लड शुगर और किडनी का कनेक्शन

जब शरीर में ब्लड शुगर बहुत ज्यादा रहता है, तो यह सिर्फ आंखों और किडनी की माइक्रोस्कोपिक ब्लड वेसल्स को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि रीढ़ की हड्डी तक पोषण पहुंचाने वाली ब्लड वेसल्स को भी प्रभावित करता है.

अनकंट्रोल शुगर रीढ़ की डिस्क और  Vertebral Column तक पोषक तत्व नहीं पहुंचने देता, समय के साथ, इससे डिस्क कमजोर हो जाती हैं, कुशनिंग क्षमता कम हो जाती है और पीठ दर्द या चोट का खतरा बढ़ जाता है. अध्ययन बताते हैं कि डायबिटीज वाले लोगों में रीढ़ की डिस्क का खतरा तेज होता है, जिससे लंबे समय में पठ्ठियों और रीढ़ में दर्द बढ़ जाता है. 

हाई ब्लड शुगर से फ्लेक्सिबिलिटी प्रभावित

लंबे समय तक डायबिटीज रहने से हाथ और उंगलियों में एक बीमारी हो सकती है जिसे डायबिटिक काइरोआर्थ्रोपैथी कहते हैं. इसके शुरुआत में यह हल्का दर्द या थकान लग सकता है. इससे धीरे-धीरे उंगलियों और हाथों की फ्लेक्सिबिलिटी कम हो जाती है. रोजमर्रा के काम जैसे बटन लगाना, वस्तुएं पकड़ना या हाथ हिलाना मुश्किल हो जाता है. इसके पीछे मुख्य कारण कोलेजन प्रोटीन में बदलाव है. हाई ब्लड शुगर कोलेजन को कठोर और कम फ्लेक्सिबल बना देता है. साथ ही छोटी ब्लड वेसल्स भी प्रभावित होती हैं, जिससे हाथ और स्किन सख्त हो जाते हैं. 

हाई ब्लड शुगर में मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी कैसे बनाए 

1. एक्सरसाइज और योग – नियमित चलना, तेज चलना, स्विमिंग और हल्की एक्सरसाइज 

2. बैलेंस डाइट –  कम चीनी और हाई ग्लाइसेमिक फूड्स से बचें. 

3. आर्थोपेडिक सहायता – विशेष उपकरण जोड़ों और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा के लिए सहायक बेल्ट और रैप, रीढ़ को स्थिर रखते हैं और पीठ पर दबाव कम करते हैं. एर्गोनोमिक कुशन बैठने और सोने के दौरान रीढ़ के उचित संरेखण को बनाए रखते हैं. कलाई और अंगूठे के ब्रेसेज हाथों और कलाई पर दबाव कम करते हैं. 

4.  एक्सपर्ट्स की राय – नियमित एक्सरसाइज और सही लाइफस्टाइल के साथ आर्थोपेडिक सहायता जोड़ने से हाई ब्लड शुगर के कारण जोड़ों और हड्डियों के नुकसान को कम किया जा सकता है. 

यह भी पढ़ें  Eyelash Lice Case Gujarat: गुजरात की इस महिला की पलकों में 250 जुओं ने बनाया घर, जानें इससे कैसे मिली निजात?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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खराब लाइफस्टाइल से बिगड़ रहा लिवर? रोजाना खाएं ये 5 फूड्स, जो नैचुरली करेंगे लिवर की सफाई

खराब लाइफस्टाइल से बिगड़ रहा लिवर? रोजाना खाएं ये 5 फूड्स, जो नैचुरली करेंगे लिवर की सफाई


ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां ग्लूकोसिनोलेट्स नामक तत्वों से भरपूर होती है जो लिवर के डिटॉक्स एंजाइम्स को एक्टिव करती है. यह सब्जियां टॉक्सिन्स खत्म करके लीवर को साफ करने में मदद करती है. साथ ही इनमें मौजूद फाइबर सूजन को कम करता है और लिवर सेल्स को हेल्दी रखता है.

चुकंदर में मौजूद बेटा लेंस नामक पिगमेंट लिवर की सफाई में मदद करता है और सूजन कम करता है. यह लिवर की डिटॉक्स प्रक्रिया को भी तेज करता है और डैमेज टिश्यू की मरम्मत में सहायता करता है. रोजाना चुकंदर का जूस पीना या इसे सलाद में शामिल करना लिवर हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

चुकंदर में मौजूद बेटा लेंस नामक पिगमेंट लिवर की सफाई में मदद करता है और सूजन कम करता है. यह लिवर की डिटॉक्स प्रक्रिया को भी तेज करता है और डैमेज टिश्यू की मरम्मत में सहायता करता है. रोजाना चुकंदर का जूस पीना या इसे सलाद में शामिल करना लिवर हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन जैसी मछलियों में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड लिवर में सूजन और फैट के जमाव को रोकते हैं. यह फैटी लिवर डिजीज के खतरे को कम करते हैं और लिवर सेल्स को रिजनरेट करने में मदद करते हैं. ऐसे में हफ्ते में दो बार फैटी फिश खाने से लिवर एंजाइम का लेवल नॉर्मल रहता है.

सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन जैसी मछलियों में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड लिवर में सूजन और फैट के जमाव को रोकते हैं. यह फैटी लिवर डिजीज के खतरे को कम करते हैं और लिवर सेल्स को रिजनरेट करने में मदद करते हैं. ऐसे में हफ्ते में दो बार फैटी फिश खाने से लिवर एंजाइम का लेवल नॉर्मल रहता है.

लहसुन में मौजूद सल्फर से भरपूर एलिसिन और सेलेनियम लिवर की सफाई प्रक्रिया को तेज करते हैं.  यह टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करते हैं और फैट जमा होने से रोकते हैं. साथ ही लहसुन ब्लड में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का लेवल भी घटाता है जिससे लिवर हेल्दी रहता है.

लहसुन में मौजूद सल्फर से भरपूर एलिसिन और सेलेनियम लिवर की सफाई प्रक्रिया को तेज करते हैं. यह टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करते हैं और फैट जमा होने से रोकते हैं. साथ ही लहसुन ब्लड में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का लेवल भी घटाता है जिससे लिवर हेल्दी रहता है.

पालक, केला और अरुगुला जैसी हरी सब्जियां क्लोरोफिल से भरपूर होती है. यह सभी सब्जियां शरीर से मेटल्स और केमिकल्स को बाहर निकालने में मदद करती है. यह लिवर का बोझ भी कम करती है और डाइजेशन सुधरती है. नियमित रूप से इनका सेवन करने से लिवर बेहतर तरीके से काम करता है और डैमेज का खतरा भी कम होता है.

पालक, केला और अरुगुला जैसी हरी सब्जियां क्लोरोफिल से भरपूर होती है. यह सभी सब्जियां शरीर से मेटल्स और केमिकल्स को बाहर निकालने में मदद करती है. यह लिवर का बोझ भी कम करती है और डाइजेशन सुधरती है. नियमित रूप से इनका सेवन करने से लिवर बेहतर तरीके से काम करता है और डैमेज का खतरा भी कम होता है.

Published at : 14 Nov 2025 08:00 AM (IST)

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शुगर कंट्रोल नहीं की तो बॉडी में होंगी ये 5 दिक्कतें, जिंदगी हो जाएगी तबाह

शुगर कंट्रोल नहीं की तो बॉडी में होंगी ये 5 दिक्कतें, जिंदगी हो जाएगी तबाह



आजकल डायबिटीज की बीमारी बेहद कॉमन हो चुकी है. अगर शुगर को कंट्रोल न किया जाए तो यह बीमारी चुपके-चुपके पूरे शरीर को खोखला कर देती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, अनियंत्रित डायबिटीज से नसों और ब्लड वेसल्स को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिससे हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी जाने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं. भारत में हालात और भी खराब हैं.

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) की 2025 डायबिटीज एटलस रिपोर्ट कहती है कि देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं और इनमें से आधे को तो बीमारी के बारे में पता भी नहीं चलता. आइए आपको बताते हैं कि शुगर कंट्रोल नहीं करने से बॉडी में क्या-क्या दिक्कतें होती हैं और उससे जिंदगी पर क्या असर पड़ता है?

यह होती है पहली दिक्कत

मुंबई के नामी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शैलजा पाटिल के मुताबिक, हाई शुगर से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और आर्टरीज में प्लाक जमने लगता है. इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है. डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों में हार्ट अटैक का रिस्क 4 गुना ज्यादा होता है. IDF की 2025 में आई रिपोर्ट में भारत में 40 पर्सेंट डायबिटीज मरीजों को कार्डियोवस्कुलर प्रॉब्लम्स बताई गई है. वहीं, CDC की 2025 की रिपोर्ट भी कहती है कि डायबिटीज से हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक के हॉस्पिटलाइजेशन रेट्स लगातार बढ़ रहे हैं. 

ब्लड वेसल्स हो जाते हैं खराब

डॉ. पाटिल ने बताया कि डायबिटीज की वजह से किडनी डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि शुगर के हाई लेवल से किडनी के छोटे ब्लड वेसल्स खराब हो जाते हैं, यूरिन में प्रोटीन आने लगता है. इससे आखिर में डायलिसिस की नौबत आ जाती है. दरअसल, अनियंत्रित डायबिटीज से किडनी फेल्योर का खतरा पांच गुना तक बढ़ जाता है. भारत में 25% डायबिटीज मरीजों को क्रॉनिक किडनी डिजीज है. शुरुआत में सूजन या थकान लगती है, लेकिन इग्नोर करने से लाइफ तबाह हो जाती है.

नसों में होती है यह दिक्कत

डॉक्टर के मुताबिक, हाई ब्लड शुगर की वजह से नर्व डैमेज या डायबिटिक न्यूरोपैथी की दिक्कत होती है. दरअसल, हाई शुगर से नसों को ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स कम मिलते हैं, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या दर्द होता है. यह दर्द रातों की नींद उड़ा देता है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. 

आंखों की रोशनी पर असर

डायबिटीज के कारण आंखों में खराबी आने लगती है या डायबिटिक रेटिनोपैथी हो जाती है. शुगर से रेटिना के ब्लड वेसल्स लीक हो जाते हैं, जिससे धुंधला दिखना या अंधापन हो सकता है. डॉ. पाटिल के मुताबिक, अनियंत्रित डायबिटीज से 20 पर्सेंट मरीजों को विजन लॉस हो जाता है. ADA की 2025 की रिपोर्ट कहती है कि शुरुआती चेकअप से 80 पर्सेंट केस बचाए जा सकते हैं. IDF के अनुसार, भारत में 10 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं.

नर्व डैमेज का खतरा

डॉक्टर ने बताया कि डायबिटीज की वजह से फुट अल्सर होने का खतरा भी बढ़ जाता है. दरअसल, हाई शुगर होने से नर्व डैमेज हो जाती हैं और खराब ब्लड फ्लो के कारण घाव नहीं भरते हैं. इससे इंफेक्शन फैलता है और एम्पुटेशन हो जाता है. अनकंट्रोल्ड डायबिटीज से फुट अल्सर का रिस्क 25 गुना बढ़ जाता है. ऐसी कंडीशन में मरीजों को पैरों में जलन या कटने का दर्द नहीं महसूस होता, जो घाव को गंभीर बना देता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये 5 लक्षण दिखें तो समझ जाएं हो गई डायबिटीज, तुरंत शुरू कर दें ये परहेज

ये 5 लक्षण दिखें तो समझ जाएं हो गई डायबिटीज, तुरंत शुरू कर दें ये परहेज



आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायबिटीज जैसी बीमारी किसी को भी चुपके से घेर लेती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 83 करोड़ लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं और आधे से ज्यादा को तो पता ही नहीं चलता कि उनकी बॉडी में शुगर का लेवल बढ़ चुका है. भारत में भी हालात बेहद गंभीर हैं. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) की 2025 की डायबिटीज एटलस रिपोर्ट कहती है कि भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में हैं और 2.5 करोड़ लोग अब भी इससे अनजान हैं. वर्ल्ड डायबिटीज डे के मौके पर हम आपको उन 5 लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे डायबिटीज होने का पता चलता है. अगर समय पर सही परहेज शुरू कर दिए जाएं तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है.

कैसे रखें अपना ध्यान?

दिल्ली के नामी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. वी. सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह चुपचाप हार्ट, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाती है. अगर आपको बार-बार पेशाब आ रहा है या ज्यादा प्यास लग रही है, थकान, वजन का अचानक कम होना और धुंधला दिखना जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत ब्लड टेस्ट करवाएं. ये लक्षण टाइप-2 डायबिटीज में ज्यादातर देखे जाते हैं, जो 90 पर्सेंट मामलों में होता है.

रात में दिखता है यह लक्षण

डायबिटीज का पहला लक्षण बार-बार पेशाब आना है. दरअसल, जब ब्लड शुगर बढ़ता है तो किडनी उसे बाहर निकालने की कोशिश करती है. इसके चलते रात में भी 4-5 बार टॉयलेट जाना पड़ता है. डॉ. सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, मरीज अक्सर कहते हैं कि रात भर नींद नहीं आती, क्योंकि पेशाब रोक नहीं पाते हैं. यह शुरुआती संकेत है, जिसे इग्नोर करने से किडनी डैमेज हो जाती है. IDF की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वक्त पर चेकअप न हे तो भारत में 40 पर्सेंट डायबिटीज के मरीजों को किडनी प्रॉब्लम हो जाती है.

बार-बार प्यास लगना भी खतरनाक

दूसरा लक्षण अजीब-सी प्यास लगना है. दरअसल, शुगर बढ़ने से बॉडी डिहाइड्रेट हो जाती है और आप जितना पानी पिएंगे, उतनी ही प्यास लगती है. डॉ. सुब्रह्मण्यम कहते हैं कि गर्मी में प्यास तो लगती ही है, लेकिन ठंडे मौसम में भी बार-बार पानी पीना पड़ रहा है तो शुगर चेक कराएं. हमने हाल ही में एक स्टडी में देखा कि 70 पर्सेंट मरीजों में यह लक्षण सबसे पहले नजर आया. ADA (अमेरिकन डायबिटीज असोसिएशन) की 2025 गाइडलाइंस में भी यही कहा गया है कि प्यास का बढ़ना हाइपरग्लाइसीमिया का सिग्नल होता है. 

लगातार थकान लग रही तो कराएं जांच

डायबिटीज में कोशिकाएं शुगर को एनर्जी में बदल नहीं पाती हैं, जिसकी वजह से हर वक्त थकान महसूस होती है. डॉ. सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, मरीज सोचते हैं कि काम की थकान है, लेकिन ऐसा डायबिटीज की वजह से होता है. WHO की स्टडी भी बताती है कि अनट्रीटेड डायबिटीज से थकान हार्ट अटैक का रिस्क दोगुना कर देती है.

अचानक घट रहा वजन तो दें ध्यान

टाइप-1 डायबिटीज के दौरान वजन काफी तेजी से कम होने लगता है, क्योंकि बॉडी फैट और मसल्स को तोड़कर एनर्जी बनाने लगती है. डॉ. सुब्रह्मण्यम ने बताया कि एक महीने में 4-5 किलो वजन घटना नॉर्मल नहीं होता है. यह इंसुलिन की कमी का संकेत है. IDF की लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 10 मिलियन टाइप-1 केस हैं, जिनमें यह लक्षण प्रमुख है.

धुंधला दिख रहा है तो हो जाएं अलर्ट

डायबिटीज का पांचवां लक्षण आंखों से धुंधला दिखना है. दरअसल, हाई शुगर की वजह से आंखों के लेंस में सूजन आ जाती है, जिससे विजन ब्लर हो जाता है. डॉ. सुब्रह्मण्यम बताते हैं कि डायबिटिक रेटिनोपैथी से 20 पर्सेंट मरीज अंधे हो जाते हैं. 2025 की ADA रिपोर्ट कहती है कि शुरुआती चेकअप से 80 पर्सेंट केस बचाए जा सकते हैं. यह लक्षण बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है. 

कैसे करना चाहिए परहेज?

डॉ. सुब्रह्मण्यम सलाह देते हैं कि अगर डायबिटीज को कंट्रोल करना है तो चीनी, मैदा, प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट से तौबा करें. इसकी जगह फाइबर वाली चीजें खाएं. IDF की 2025 में पब्लिश रिपोर्ट में बताया गया है कि हेल्दी डाइट से 58 पर्सेंट केस प्रिवेंट हो सकते हैं. इसके अलावा सुबह उठते ही गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पिएं. ब्रेकफास्ट में ओट्स, दलिया या मल्टीग्रेन पराठा लें. सुबह 7 से 8 बजे के बीच नाश्ता करें, जिसमें 300 कैलोरी हो. फल में सेब, अमरूद या पपीता चुनें, केला कम खाएं. लंच में ब्राउन राइस, दाल, हरी सब्जी और सलाद रखें. रोटी 2-3 ही लें. शाम के स्नैक में मुट्ठी भर बादाम या स्प्राउट्स खाएं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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