आज से ही खाने शुरू कर दें ये 5 फूड्स, तेज और फोकस्ड हो जाएगा आपका दिमाग
इस मुस्लिम देश में भयंकर सूखा, राष्ट्रपति बोले- खाली करना पड़ सकता है देश, सांसद ने महिलाओं को ठहराया जिम्मेदार
इस मुस्लिम देश में भयंकर सूखा, राष्ट्रपति बोले- खाली करना पड़ सकता है देश, सांसद ने महिलाओं को ठहराया जिम्मेदार
सर्दी में फटने लगी हैं एड़ियां, महंगी क्रीम नहीं ये घरेलू नुस्खे आएंगे काम
Source link
आज के समय में कमर दर्द एक बहुत ही आम समस्या बन चुकी है. पहले यह परेशानी अधिकतर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी दिखाई देने लगी है. हम सभी दिनभर किसी न किसी तरह से अपने शरीर पर तनाव डालते हैं. चाहे वह घंटों तक डेस्क पर बैठकर काम करना हो, लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर झुके रहना हो या फिर फिजिकल एक्टिविटी की कमी.
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ गलत बैठने की आदत या कुर्सी ही नहीं, बल्कि मेंटल स्ट्रेस भी आपकी पीठ और कमर दर्द की एक बड़ी वजह हो सकता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कुर्सी या खराब पोस्चर नहीं मेंटल स्ट्रेस भी कैसे पीठ और कमर दर्द की वजह बन सकती है.
मेंटल स्ट्रेस कैसे पीठ और कमर दर्द की वजह बन सकती है
हमारा दिमाग और शरीर एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. जब हम तनाव, चिंता या डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थितियों से गुजरते हैं तो शरीर उस तनाव को अलग-अलग तरीकों से महसूस करता है. कई बार हम यह नहीं समझ पाते कि हमारे मानसिक तनाव हमारे शरीर में दर्द, थकान या जकड़न के रूप में हो रही है.
जब हम लगातार तनाव में रहते हैं तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनने लगता है. यह हार्मोन मांसपेशियों में जकड़न, खिंचाव और दर्द पैदा कर सकता है. खासकर कमर और गर्दन के हिस्से में, यही कारण है कि जिन लोगों का दिमाग ज्यादा तनाव में रहता है, उन्हें अक्सर पीठ दर्द या मांसपेशियों में कसाव की शिकायत रहती है.
मानसिक तनाव कैसे बढ़ाता है पीठ और कमर दर्द?
1. मांसपेशियों में जकड़न – जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर खुद को डिफेंस मोड में ले आता है. इसका मतलब है कि मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे खिंचाव और दर्द होता है.
2. खराब पोस्चर – मानसिक तनाव में इंसान अक्सर झुक कर बैठता है, सिर झुका लेता है या शरीर ढीला छोड़ देता है. इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है और कमर दर्द की समस्या और गंभीर हो जाती है.
3. नींद की कमी – तनाव में रहने वाले लोगों को अक्सर नींद नहीं आती या उनकी नींद पूरी नहीं होती है. नींद की कमी से शरीर की मांसपेशियों को पूरा आराम नहीं मिलता, जिससे कमर और पीठ दर्द बढ़ सकता है.
4. फिजिकल इन एक्टिविटी – जब व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करता है, तो वह चलने-फिरने या व्यायाम करने से बचता है. इससे मांसपेशियां कमजोर होती हैं और दर्द बढ़ जाता है.
5. तनाव का चक्र – तनाव से दर्द होता है, और दर्द बढ़ने से तनाव और बढ़ जाता है. इस तरह यह एक विष चक्र यानी vicious cycle बन जाता है जो शरीर और मन दोनों को थका देता है.
मेंटल स्ट्रेस को कम करने और पीठ दर्द से राहत पाने के तरीके
1. नियमित एक्सरसाइज करें – हल्के स्ट्रेच, योगासन और वॉकिंग मानसिक तनाव और शारीरिक जकड़न दोनों को कम करते हैं. विशेष रूप से कैट-काउ पोज, बालासन और भुजंगासन जैसे योगासन पीठ के लिए फायदेमंद हैं.
2. ध्यान और मेडिटेशन – रोजाना 10 से 15 मिनट ध्यान करने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर रिलैक्स महसूस करता है.
3. सही पोस्चर अपनाएं – बैठते या खड़े होते समय अपनी रीढ़ को सीधा रखें. कुर्सी ऐसी चुनें जो कमर को सपोर्ट दे.
4. पूरी नींद लें – हर दिन 7 से 8 घंटे की नींद शरीर को रिचार्ज करती है और मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करती है.
5. काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें – हर 30 से 40 मिनट बाद खड़े होकर थोड़ा चलें, स्ट्रेच करें या गहरी सांस लें.
इसे भी पढ़ें- Kidney Disease sSymptoms: मौत होने की टॉप-10 वजहों में से एक हैं किडनी की बीमारियां, इन्हें वक्त पर कैसे पहचानें?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
कई बार हम सुबह उठते हैं तो महसूस करते हैं कि मुंह बहुत सूखा हुआ है या तकिए पर लार के निशान हैं. ये संकेत हो सकते हैं कि हम रात में मुंह खोलकर सांस ले रहे थे, यानी नाक के बजाय मुंह से सांस ले रहे थे. सुनने में यह बात सामान्य लग सकती है, लेकिन लगातार ऐसा करना सेहत पर कई तरह से असर डाल सकता है. सामान्य तौर पर हमारा शरीर नाक से सांस लेने के लिए बना है. जब हम नाक से सांस लेते हैं तो हवा पहले नाक के रास्ते से होकर गुजरती है, जहां वो साफ, गर्म और नम होती जाती है.
नाक के अंदर छोटे-छोटे सिलिया और म्यूकस धूल, प्रदूषण, बैक्टीरिया जैसी चीजों को रोकते हैं. इससे फेफड़ों तक पहुंचने वाली हवा शरीर के लिए ज्यादा अच्छी होती है, लेकिन जब किसी कारण नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है तो शरीर अपने-आप मुंह से सांस लेने लगता है. यही आदत अगर लंबे समय तक बनी रहे तो इसे मुंह से सांस लेना कहा जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कुछ लोग नाक के बजाय मुंह से सांस क्यों लेते हैं और इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है.
लोग नाक के बजाय मुंह से सांस क्यों लेते हैं
1. नाक बंद होना – सर्दी-जुकाम, एलर्जी, या साइनस की समस्या के कारण नाक बंद हो जाती है. ऐसे में नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है, तो शरीर मुंह का यूज करने लगता है.
2. बढ़े हुए एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स – बच्चों में अक्सर एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स बड़े हो जाते हैं, जिससे नाक का रास्ता बंद हो जाता है. इसके कारण भी लोग नाक के बजाय मुंह से सांस लेते हैं.
3. नाक के अंदर की बनावट में गड़बड़ी – अगर किसी का सेप्टम टेढ़ा है या नाक में पॉलीप्स हैं, तो हवा का रास्ता रुक सकता है. जिसकी वजह से भी लोग नाक के बजाय मुंह से सांस लेते हैं.
4. जबड़े या चेहरे की बनावट- कुछ लोगों के चेहरे या जबड़े की बनावट ऐसी होती है कि मुंह थोड़ा खुला रहता है, जिससे मुंह से सांस लेना आसान हो जाता है.
5. आदत या व्यवहार – कई बार बचपन में अंगूठा चूसने या बार-बार मुंह खुला रखने की आदत से भी यह समस्या बन जाती है.
6. स्लीप एपनिया – यह एक नींद से जुड़ी समस्या है जिसमें सोते समय सांस रुक-रुक कर चलती है. इस स्थिति में भी लोग मुंह खोलकर सांस लेने लगते हैं.
इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है?
1. मुंह का सूखापन और बदबूदार सांस – लार हमारे मुंह को साफ और नम बनाए रखती है. जब हम मुंह से सांस लेते हैं, तो लार सूख जाती है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और सांस से बदबू आने लगती है.
2. दांत और मसूड़ों की बीमारियां – लार में ऐसे खनिज होते हैं जो दांतों को मजबूत रखते हैं. मुंह का सूखापन दांतों में कैविटी और मसूड़ों की सूजन का कारण बन सकता है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर दांत ढीले भी हो सकते हैं.
3. नींद से जुड़ी समस्याएं – मुंह से सांस लेने से नींद की क्वालिटी घट जाती है. इससे स्लीप एपनिया जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें रात में सांस रुक-रुक कर चलती है और दिमाग को पूरी तरह ऑक्सीजन नहीं मिलती. इसके कारण दिन में थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है.
4. बच्चों में चेहरे और दांतों की ग्रोथ पर असर होना – अगर कोई बच्चा लगातार मुंह से सांस लेता है, तो उसका चेहरा लंबा और जबड़ा पतला हो सकता है. इससे दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं और आगे चलकर ऑर्थोडॉन्टिक इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
5. ब्रेन फॉग और थकान – मुंह से सांस लेने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम जाती है, जिससे दिमाग ठीक से काम नहीं करता है. इसके कारण व्यक्ति दिनभर सुस्ती और धुंधलेपन यानी ब्रेन फॉग का एक्सपीरियंस करता है.
यह भी पढ़ें मां बनने का सपना तोड़ सकता है तेजी से बढ़ रहा बेली फैट, जानें इस पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Signs of Insulin Resistance: इन 6 लक्षणों को हल्के में न लें, बढ़ सकता है इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा
Source link
Kidney Disease: दुनिया भर में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है. लैंसेट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन दशकों में किडनी रोग के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है. 1990 की तुलना में अब लगभग 80 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर मरीजों में बीमारी के शुरुआती स्टेज यानी स्टेज 1 से 3 CKD पाई गई, जिसकी कुल दर करीब 13.9 प्रतिशत है. साल 2023 में CKD दुनिया भर में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बना, जिसने करीब 14.8 लाख लोगों की जान ली. यही नहीं, किडनी की काम करने की क्षमता में कमी को हार्ट की बीमारियों से जुड़ी मौतों के 11.5 प्रतिशत मामलों में एक बड़ा जोखिम बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लड शुगर का बढ़ा स्तर, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग के सबसे प्रमुख कारण हैं.
भारत में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, किडनी रोग से प्रभावित लोगों की संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है. 2023 में चीन 15.2 करोड़ और भारत 13.8 करोड़ में CKD के सबसे ज्यादा मरीज पाए गए. वहीं अमेरिका, इंडोनेशिया, जापान, ब्राजील, रूस, मेक्सिको, नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और तुर्किये जैसे देशों में भी 1 करोड़ से ज्यादा वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं.
किडनी रोग के मुख्य कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स और मौसमी तापमान का असंतुलन किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले सबसे बड़े कारण हैं. उम्र बढ़ने के साथ ये खतरे और बढ़ जाते हैं. 20 से 69 वर्ष की आयु में ये सभी फैक्टर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि 70 साल के बाद हाई ब्लड प्रेशर, BMI से भी बड़ा खतरा बन जाता है. वहीं, ब्लड शुगर का बढ़ा स्तर हर उम्र में CKD का सबसे बड़ा योगदानकर्ता पाया गया है.
शुरुआती स्टेज में नहीं दिखते लक्षण
CKD की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ सामान्य संकेत सामने आने लगते हैं. इसके प्रमुख लक्षणों में कुछ इस प्रकार हैं-
जल्दी पहचान और बचाव ही है उपाय
ज्यादातर लोग तब तक लक्षण नहीं पहचान पाते जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती. ऐसे में समय-समय पर मूत्र परीक्षण, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच, और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट के मुताबिक, शुरुआती स्टेज में दवाओं और खानपान में सुधार से बीमारी की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है और गंभीर दिक्कतों से बचाव संभव है.
इसे भी पढ़ें- PCOS Symptoms: महिलाओं में बढ़ रहा पीसीओएस का खतरा, जानें इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator