क्या आपको भी लगता है कि इन 9 चीजों से होता है कैंसर, जानें कितना गलत सोचते हैं आप?
Cancer Myths: क्या आपको भी लगता है कि इन 9 चीजों से होता है कैंसर, जानें कितना गलत सोचते हैं आप?
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Cancer Myths: क्या आपको भी लगता है कि इन 9 चीजों से होता है कैंसर, जानें कितना गलत सोचते हैं आप?
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Warning Signs Of High Blood Sugar On Skin: डायबिटीज दुनिया भर में सबसे आम क्रॉनिक मेटाबॉलिक बीमारियों में से एक है. यह न सिर्फ रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, बल्कि लंबे समय में गंभीर परेशानियों का कारण भी बन सकती है. हाई ब्लड शुगर के संकेत कई बार त्वचा पर साफ दिखाई देने लगते हैं. इन लक्षणों को समय पर पहचान लेना जरूरी है, ताकि बीमारी के गंभीर रूप लेने से पहले इलाज शुरू किया जा सके. चलिए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े ऐसे 7 स्किन संकेत, जो अनकंट्रोल्ड शुगर की ओर इशारा करते हैं.
शिन स्पॉट्स
शिन स्पॉट्स या डायबिटिक डर्मोपैथी, डायबिटीज से जुड़ी सबसे आम त्वचा समस्याओं में से एक है. इसे स्पॉटेड लेग सिंड्रोम भी कहा जाता है. ये गोल या अंडाकार धब्बे होते हैं, जिनका रंग भूरा या लाल-भूरा हो सकता है. आमतौर पर ये नुकसानदेह नहीं होते, लेकिन इनका दिखना ब्लड शुगर जांच की ज़रूरत का संकेत देता है. दर्द या खुजली न होने की वजह से कई लोग इन्हें उम्र के धब्बे समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
त्वचा का सख्त या मोटा होना
लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से त्वचा में कोलेजन का असामान्य जमाव हो सकता है, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी कम हो जाती है और त्वचा मोटी लगने लगती है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में स्क्लेरिडेमा डायबिटिकोरम कहा जाता है. यह आमतौर पर गर्दन, कंधों या ऊपरी पीठ पर दिखती है. यह बिना दर्द के होती है और ज्यादातर कॉस्मेटिक समस्या मानी जाती है.
खुले घाव और जख्म
डायबिटीज शरीर की घाव भरने की क्षमता को प्रभावित करती है. लंबे समय तक हाई शुगर से ब्लड सर्कुलेशन खराब हो जाता है और नर्व डैमेज भी हो सकता है. इसकी वजह से खासकर पैरों में बने घाव जल्दी ठीक नहीं होते, इन्हें डायबिटिक अल्सर कहा जाता है. समय पर इलाज न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है और अंग काटने तक की नौबत आ सकती है.
त्वचा पर छोटे-छोटे दाने
अगर अचानक त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगें, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. अनकंट्रोल्ड डायबिटीज में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है. शुरुआत में ये दाने दिखाई देते हैं और बाद में हल्की त्वचा पर पीले रंग के हो सकते हैं. शुगर कंट्रोल में आते ही ये दाने आमतौर पर गायब हो जाते हैं.
कुछ हिस्सों में त्वचा का काला पड़ना
गर्दन, बगल या जांघों के पास त्वचा का काला और मोटा होना डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है. इस स्थिति को एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है. ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती.
पलकों के आसपास पीले धब्बे
पलकों के आसपास पीले रंग के चिकने धब्बे या उभार दिखना खून में फैट का स्तर ज्यादा होने का संकेत हो सकता है. इन्हें जैंथेलाज़्मा कहा जाता है. ऐसे लोगों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स अक्सर ज्यादा पाए जाते हैं.
स्किन टैग्स
स्किन टैग्स आमतौर पर हानिरहित होते हैं, लेकिन अगर ये ज्यादा संख्या में हों, खासकर गर्दन, बगल, जांघों या पलकों के पास हो, तो यह टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ा संकेत हो सकता है. मेडिकल भाषा में इन्हें एक्रोकोर्डन्स कहा जाता है. रिसर्च बताती है कि जिन लोगों में स्किन टैग्स ज्यादा होते हैं, उनमें डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा होता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. कई मामलों में बीमारी बिना किसी तकलीफ के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है. यही वजह है कि थोड़े से भी शक पर जांच कराना जरूरी माना जाता है.

बार-बार पेशाब आना, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब शुरू या बंद करने में दिक्कत और यह महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ, इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य बुढ़ापा मान लेते हैं. लेकिन हकीकत में ये प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं.
Published at : 12 Jan 2026 12:01 PM (IST)
Who Is At Risk Of Heart Attack In Winter: सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं और इसकी बड़ी वजह शरीर में होने वाले मौसमी बदलाव हैं. WHO के अनुसार, दुनियाभर में हार्ट से जुड़ी बीमारियां मौत की सबसे बड़ी वजह हैं. हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता. ज्यादातर मामलों में यह समस्या दिल की आर्टरीज में ब्लॉकेज के कारण होती है, जिससे दिल की मांसपेशियां धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैं.
ऐसा क्यों होता है
डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक सालभर हो सकता है, लेकिन सर्दियों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है. एक्सपर्ट के अनुसार, ठंड के मौसम में हार्ट से जुड़े इमरजेंसी मामलों में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखी जाती है. तापमान गिरने के साथ शरीर में फिजियोलॉजिकल बदलाव होते हैं और लाइफस्टाइल भी बदल जाती है, जो दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है.
सर्दियों में हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण वेसोकंस्ट्रिक्शन है. ठंड में शरीर गर्मी बनाए रखने के लिए ब्लड बेसल्स को सिकोड़ लेता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इससे हार्ट को ज्यादा ताकत लगाकर खून पंप करना पड़ता है. जिन लोगों की आर्टरीज में पहले से ब्लॉकेज है या दिल कमजोर है, उनके लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. इसके अलावा ठंड में खून गाढ़ा भी हो जाता है, जिससे थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है. ठंड के मौसम में लोग शारीरिक गतिविधियां भी कम कर देते हैं. एक्सरसाइज न करने से वजन बढ़ता है, ब्लड सर्कुलेशन कमजोर होता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ सकता है. इसके साथ ही सर्दियों में तला-भुना और ज्यादा कैलोरी वाला खाना भी दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस बीच सांस से जुड़ी बीमारियां, जैसे फ्लू या वायरल इंफेक्शन, भी दिल के लिए खतरा बन सकती हैं. इनसे शरीर में सूजन बढ़ती है, जो धमनियों में जमी प्लाक को अस्थिर कर देती है और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है. सीनियर डॉ. श्राद्धेय कटियार ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, उनके अनुसार “सर्दियों में हार्ट अटैक बढ़ने की वजह महज संयोग नहीं है. ठंड पड़ते ही शरीर हीट को बचाने के लिए सर्वाइवल मोड में चला जाता है. इससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं, ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ठंड में प्लेटलेट्स भी जल्दी चिपकने लगती हैं, जिससे थक्का बनने का खतरा और बढ़ जाता है.”
Extreme cold and heart attacks are closely linked. This is not theory. It is basic physiology.
Every winter, emergency rooms see the same pattern. Temperatures drop. Heart attacks rise.
Here is why cold weather stresses the heart.
When you step into extreme cold, your body…
— Dr SHRADDHEY KATIYAR (@Wegiveyouhealt1) January 10, 2026
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज
कुछ लोग सर्दियों में सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं. इनमें पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग की आदत वाले लोग और बुजुर्ग शामिल हैं. अगर इस मौसम में सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, ज्यादा पसीना या चक्कर जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें गलती से भी नजरअंदाज न करें. समय पर जांच और इलाज ही हार्ट अटैक से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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