क्या लिवर इन्फेक्शन खतरनाक है? जानिए इसके लक्षण और बचाव

क्या लिवर इन्फेक्शन खतरनाक है? जानिए इसके लक्षण और बचाव


Liver Infection Symptoms: हमारा लिवर शरीर की सबसे अहम मशीनों में से एक है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने से लेकर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने तक कई जरूरी काम करता है. लेकिन जब यही लिवर संक्रमण का शिकार हो जाता है, तो छोटी-सी लापरवाही भी बड़े खतरे में बदल सकती है.

डॉ. सरीन का कहना है कि, लिवर इन्फेक्शन को हल्के में लेना गंभीर बीमारियों की ओर पहला कदम हो सकता है. अगर इसके लक्षण समय पर पहचान लिए जाएं और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो इस समस्या से बचाव संभव है.

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लिवर इन्फेक्शन कितना खतरनाक है?

  • यह संक्रमण धीरे-धीरे लिवर की कार्यक्षमता को कम कर देता है
  • शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं
  • पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है
  • लंबे समय में लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है

लिवर इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण

  • पीलिया (जॉन्डिस) आंखों और त्वचा का पीला होना
  • लगातार थकान छोटी-सी मेहनत में भी कमजोरी महसूस होना
  • भूख न लगना खाने में रुचि कम हो जाना
  • पेट में दर्द या सूजन खासकर दाईं तरफ ऊपर की ओर
  • जी मिचलाना और उल्टी
  • पेशाब का रंग बदल जाना, यानी गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल होना

लिवर इन्फेक्शन के कारण

  • दूषित पानी और भोजन का सेवन
  • अत्यधिक शराब पीना
  • दवाइयों का ओवरडोज
  • असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित सुई का उपयोग
  • कमजोर इम्यूनिटी

बचाव के आसान उपाय

  • स्वच्छ पानी और भोजन लें दूषित खाने-पीने से बचें
  • शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं
  • टीकाकरण करवाना जरूरी है यानी हेपेटाइटिस A और B से बचने के लिए कराना चाहिए
  • साफ-सफाई पर ध्यान दें व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें

लिवर इन्फेक्शन भले ही शुरुआती दौर में मामूली लगे, लेकिन इसे नज़रअंदाज करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. समय पर लक्षण पहचान कर चिकित्सक से संपर्क करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही इस समस्या से बचने का सबसे कारगर उपाय है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मिल गया कैंसर का इलाज! ट्यूमर को सीधे खत्म करेगी ये थेरेपी, नहीं होगी इम्यून सिस्टम की जरूरत

मिल गया कैंसर का इलाज! ट्यूमर को सीधे खत्म करेगी ये थेरेपी, नहीं होगी इम्यून सिस्टम की जरूरत


कैंसर के इलाज की दुनिया में जापानी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो आने वाले वर्षों में मेडिकल साइंस की दिशा बदल सकती है. ‌जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक बैक्टीरिया आधारित थेरेपी विकसित की है, जो बिना इम्यून सिस्टम की मदद लिए सीधे कैंसर ट्यूमर को नष्ट कर सकती है. इसे एयूएन बैक्टीरिया कैंसर ट्रीटमेंट के नाम दिया गया है. 

150 साल पुराने प्रयोग से नई खोज तक 

कैंसर पर शोध करते हुए डॉक्टर ने सालों से इम्यून सिस्टम को हथियार बनाने की कोशिश करते आए हैं. ‌19वीं सदी के अंत में डॉक्टर विलियम कोली ने सबसे पहले यह प्रयोग किया, जिसे आधुनिक इम्यूनोथैरेपी का आधार माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज इस थेरेपी से फायदा नहीं उठा पाते. इसी कमी को दूर करते हुए जेएआईएसटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है जो इम्यून सिस्टम पर निर्भर नहीं है और अपने आप कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है. 

कैसे काम करती है एयूएन थेरेपी 

यह थेरेपी दो अलग-अलग बैक्टीरिया के मेल से तैयार की गई है. 

  • A-gyo- यह ट्यूमर तक पहुंचकर सीधा कैंसर कोशिकाओं और उनकी रक्त वाहिकाओं पर हमला करता है.
  • UN-gyo-यह बैक्टीरिया A-gyo की गतिविधियों को नियंत्रित करता है ताकि संक्रमण फैलने की बजाय केवल ट्यूमर पर असर हो. 

दिलचस्प बात यह है कि इंजेक्शन के समय दोनों बैक्टीरिया का अनुपात अलग होता है, करीब 3% A-gyo और 97% UN-gyo होता है, लेकिन जैसे ही यह ट्यूमर के अंदर पहुंचता है, अनुपात बदलकर लगभग 99% A-gyo का हो जाता है. इस बदलाव की वजह से ट्यूमर तेजी से नष्ट होता है जबकि साइंस साइड इफेक्ट्स पर भी नियंत्रण बना रहता है. 

इम्यूनोथैरेपी से बड़ा फर्क 

मौजूदा इम्यूनोथैरेपी जैसे कार्ट या चेकपॉइंट इनहिब‍िटर तभी असर करती है जब शरीर का इम्यून सिस्टम सक्रिय हो. इसके उलट एयूएन थेरेपी पूरी तरह इम्यून इंडिपेंडेंट है. प्रयोग में यह पाया गया है की कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मॉडल में भी ट्यूमर खत्म हो गया. इसके अलावा गंभीर दुष्प्रभाव जैसे साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम सामने नहीं आए. ‌वहीं बैक्टीरिया नियंत्रित तरीके से काम करते रहे. यानी यह थैरेपी उन मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है जिन्हें अब तक के इलाज से राहत नहीं मिली. रिसर्च का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर एजीरो मियाको ने बताया कि आने वाले वर्षों में इसका क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की तैयारी है. वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि अगले 6 सालों में यह तकनीक मरीजों तक पहुंच सके. इसके लिए एक स्टार्टअप बनाने की भी योजना है. 

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नाखून में नजर आ रहे हर रंग का अलग मतलब, जानें किस बीमारी का पता बताता है कौन-सा रंग?

नाखून में नजर आ रहे हर रंग का अलग मतलब, जानें किस बीमारी का पता बताता है कौन-सा रंग?


नाखून केवल खूबसूरती का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये हमारे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी संकेत जारी करता है. नाखूनों का रंग, बनावट और आकार हमारे शरीर की अंदरूनी स्थिति को दर्शाते हैं. आइए जानते हैं कि नाखूनों के विभिन्न रंगों से कौन-सी बीमारियों का संकेत मिलता है.

सफेद नाखून

सफेद नाखून लिवर की समस्याओं, जैसे पीलिया, का संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा, यह आयरन की कमी (एनीमिया) का भी संकेत देता है. यदि नाखूनों का सफेद होना लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.

पीले नाखून

पीले नाखून फंगल इंफेक्शन या थायरॉइड की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा, यह विटामिन और मिनरल की कमी का भी संकेत हो सकता है. यदि नाखूनों का पीला होना बढ़े, तो विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए.

नीले नाखून

नीले नाखून शरीर में ऑक्सीजन की कमी या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देते हैं. यह गंभीर स्थिति हो सकती है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

काले या भूरे धब्बे

नाखूनों पर काले या भूरे धब्बे त्वचा कैंसर (मेलानोमा) का संकेत हो सकते हैं. यदि ये धब्बे बढ़ रहे हैं या आकार में बदल रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

लाल नाखून

नाखूनों का लाल होना शरीर में सूजन या इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. यह रक्तचाप या हृदय से जुड़ी समस्याओं का भी संकेत देता है.

सफेद धब्बे

नाखूनों पर सफेद धब्बे कैल्शियम या जिंक की कमी का संकेत हो सकते हैं. यह सामान्यतः हानिरहित होते हैं, लेकिन यदि ये धब्बे बढ़ते हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए.

नाखूनों की बनावट

नाखूनों की बनावट में बदलाव भी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकते हैं. जैसे, नाखूनों का चम्मच जैसा आकार (कोइलोनिचिया) आयरन की कमी का संकेत देता है. इसके अलावा, नाखूनों का मोटा होना या उभरा हुआ होना भी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉ. कलीम खान ने यूट्यूब पर अपने वीडियो में बताया कि नाखूनों में कोई भी असामान्य बदलाव शरीर में किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. वे सलाह देती हैं कि नाखूनों में रंग, आकार या बनावट में कोई भी बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें. समय पर पहचान और इलाज से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. नाखूनों के रंग और बनावट से हम अपनी सेहत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यदि नाखूनों में कोई भी असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें. स्वस्थ नाखून स्वस्थ शरीर का संकेत हैं, और इनकी देखभाल से हम कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं.

इसे भी पढ़ें: हल्की या भारी… किस तरह की एक्सरसाइज महिलाओं के लिए होती है बेस्ट? एक्सपर्ट से जानें

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.  

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ग्रीन टी vs ब्लैक टी… वजन घटाने से लेकर दिल की सेहत तक, कौन-सी चीज है ज्यादा फायदेमंद?

ग्रीन टी vs ब्लैक टी… वजन घटाने से लेकर दिल की सेहत तक, कौन-सी चीज है ज्यादा फायदेमंद?


ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही कैमेलिया साइनेंसिस पौधे से बनाई जाती हैं. फर्क सिर्फ इनके प्रोसेसिंग में है. ग्रीन टी कम प्रोसेस होती है जिससे इसमें मौजूद कैटेचिन्‍स और एंटीऑक्सीडेंट्स सुरक्षित रहते हैं. वहीं ब्लैक टी पूरी तरह ऑक्सिडाइज होती है, जिसकी वजह से इसका रंग गहरा और स्वाद मजबूत होता है.

इसके अलावा ग्रीन टी को वेट लॉस के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इसमें मौजूद कैटेच‍िन्‍स और खासकर ईजीसीजी फैट बर्निंग को बढ़ावा देते हैं. साथ ही ब्लड शुगर कंट्रोल करने और मेटाबॉलिज्‍म को तेज करने में मदद करती है.

इसके अलावा ग्रीन टी को वेट लॉस के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इसमें मौजूद कैटेच‍िन्‍स और खासकर ईजीसीजी फैट बर्निंग को बढ़ावा देते हैं. साथ ही ब्लड शुगर कंट्रोल करने और मेटाबॉलिज्‍म को तेज करने में मदद करती है.

ब्लैक टी का सेवन दिल की बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसमें पाए जाने वाले थीफ्लेविन्स और थीअरूब‍िज‍िन्‍स खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है. नियमित सेवन से हार्ट हेल्थ बेहतर होती है और ब्लड शुगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.

ब्लैक टी का सेवन दिल की बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसमें पाए जाने वाले थीफ्लेविन्स और थीअरूब‍िज‍िन्‍स खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है. नियमित सेवन से हार्ट हेल्थ बेहतर होती है और ब्लड शुगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.

ग्रीन टी सिर्फ वजन घटाने में नहीं बल्कि दिमागी सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और याददाश्त सुधारने में मदद करते हैं. साथ ही अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम करने में भी सहायक हो स‍कती है.

ग्रीन टी सिर्फ वजन घटाने में नहीं बल्कि दिमागी सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और याददाश्त सुधारने में मदद करते हैं. साथ ही अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम करने में भी सहायक हो स‍कती है.

ब्लैक टी में ग्रीन टी की तुलना में ज्यादा कैफीन होती है. इसी वजह से यह तुरंत एनर्जी देने और दिमाग को एक्टिव रखने में मदद करती है. ‌सुबह की शुरुआत या काम के बीच फोकस बनाए रखने के लिए ब्लैक टी अच्छा ऑप्शन मानी जाती है.

ब्लैक टी में ग्रीन टी की तुलना में ज्यादा कैफीन होती है. इसी वजह से यह तुरंत एनर्जी देने और दिमाग को एक्टिव रखने में मदद करती है. ‌सुबह की शुरुआत या काम के बीच फोकस बनाए रखने के लिए ब्लैक टी अच्छा ऑप्शन मानी जाती है.

ग्रीन टी हल्के हरे-पीले रंग की होती है और इसका स्वाद ताजगी भरा व हल्का घास जैसा होता है. वहीं ब्लैक टी गहरे लाल-भूरे रंग की होती है और इसका स्वाद स्ट्रॉन्‍ग माल्‍टी और कभी-कभी हल्का कड़वा भी हो सकता है.

ग्रीन टी हल्के हरे-पीले रंग की होती है और इसका स्वाद ताजगी भरा व हल्का घास जैसा होता है. वहीं ब्लैक टी गहरे लाल-भूरे रंग की होती है और इसका स्वाद स्ट्रॉन्‍ग माल्‍टी और कभी-कभी हल्का कड़वा भी हो सकता है.

दोनों ही चाय में कैफीन होती है जिसका ज्यादा सेवन अनिद्रा, घबराहट या दिल की धड़कन बढ़ा सकता है. वहीं ब्लैक टी दांतों पर दाग छोड़ सकती है. इसके अलावा ग्रीन और ब्लैक टी आयरन के अवशोषण को कम कर सकती है इसलिए इन्हें खाने के तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए.

दोनों ही चाय में कैफीन होती है जिसका ज्यादा सेवन अनिद्रा, घबराहट या दिल की धड़कन बढ़ा सकता है. वहीं ब्लैक टी दांतों पर दाग छोड़ सकती है. इसके अलावा ग्रीन और ब्लैक टी आयरन के अवशोषण को कम कर सकती है इसलिए इन्हें खाने के तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए.

अगर आप वजन घटाना चाहते हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो ग्रीन टी आपके लिए सही हो सकती है . अगर आपका लक्ष्य दिल की सेहत सुधारना और पाचन तंत्र मजबूत करना है तो ब्‍लैक टी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है लेकिन याद रखें दोनों ही चाय का सेवन दिन में दो से तीन कप तक ही करें.

अगर आप वजन घटाना चाहते हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो ग्रीन टी आपके लिए सही हो सकती है . अगर आपका लक्ष्य दिल की सेहत सुधारना और पाचन तंत्र मजबूत करना है तो ब्‍लैक टी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है लेकिन याद रखें दोनों ही चाय का सेवन दिन में दो से तीन कप तक ही करें.

Published at : 27 Aug 2025 03:46 PM (IST)


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