किस बीमारी की चपेट में हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जानें तबीयत बिगड़ने की वजह?

किस बीमारी की चपेट में हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जानें तबीयत बिगड़ने की वजह?


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

देसी खाना तो ठीक है, लेकिन प्रोटीन का क्या, यहां जानें आपकी थाली कितनी ताकतवर?

देसी खाना तो ठीक है, लेकिन प्रोटीन का क्या, यहां जानें आपकी थाली कितनी ताकतवर?


आजकल फिटनेस का मतलब सिर्फ पतली कमर या उभरी हुई मसल्स नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी और एनर्जेटिक रहना भी उतना ही जरूरी हो गया है. इसी चाह में जिम जाने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है और उनके साथ बढ़ा है प्रोटीन पाउडर, शेक और सप्लीमेंट्स का ट्रेंड. कई लोग महीने के हजारों रुपये सिर्फ सप्लीमेंट्स पर खर्च कर देते हैं, यह सोचकर कि बिना इनके मसल्स नहीं बन सकतीं. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई अच्छी बॉडी और ताकत पाने के लिए महंगे प्रोटीन पाउडर जरूरी हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर आपकी डाइट सही और संतुलित है तो देसी खाने से ही शरीर को भरपूर प्रोटीन, एनर्जी और ताकत मिल सकती है. 

बाजार में मिलने वाले कई प्रोटीन पाउडर तुरंत एनर्जी तो देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसके ज्यादा सेवन से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है. इसके अलावा ये काफी महंगे भी होते हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई सस्ता, सुरक्षित और नेचुरल ऑप्शन मौजूद है. तो आइए जानते हैं कि आपकी थाली कितनी ताकतवर है. इसमें देसी खाने के साथ प्रोटीन है या नहीं.  

आपकी थाली कितनी ताकतवर है

क्या आपने कभी सोचा है कि रोज आपकी प्लेट में जो खाना होता है, वही आपकी असली ताकत बनता है. आज के समय में लोग फिट रहने के लिए महंगे प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं, जबकि असली सेहत और ताकत तो हमारी देसी थाली में ही छुपी हुई है. दाल, चना, राजमा, सब्जियां, अनाज और दूध से बने खाद्य पदार्थ, ये सभी मिलकर शरीर को जरूरी प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स देते हैं.  यही पोषक तत्व मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और पूरे दिन शरीर में एनर्जी बनाए रखते हैं.

अगर आपकी थाली में दाल-चावल, रोटी-सब्जी, दही या पनीर शामिल है, तो समझ लीजिए आपकी डाइट संतुलित है. खासकर बीन्स जैसे चना और राजमा प्राकृतिक प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ताकत देते हैं. इसलिए अगली बार जब आप खाना खाएं, तो सिर्फ टेस्ट ही नहीं, बल्कि पोषण पर भी ध्यान दें. 
 
प्रोटीन की कमी से क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं?

अगर शरीर को पर्याप्त प्रोटीन न मिले, तो कई समस्याएं सामने आ सकती हैं. जैसे नाखून जल्दी टूटने लगते हैं, इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, बार-बार बीमार पड़ना, मूड स्विंग्स और सोचने-समझने में दिक्कत, मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियां कमजोर होने से फ्रैक्चर का खतरा. 

इन चीजों से पूरी करें प्रोटीन की कमी

अगर आप सप्लीमेंट नहीं लेना चाहते, तो कुछ नेचुरल चीजों को डाइट में शामिल करें. जैसे दालें, बीन्स और मटर, दूध, दही, पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स, अंडे, मछली और लीन मीट, बीज और मेवे, टोफू और टेम्पेह जैसे सोया प्रोडक्ट्स. 

यह भी पढ़ें : सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है घुटनों का दर्द, क्या है इसकी वजह? जानें आयुर्वेदिक इलाज

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

वायु प्रदूषण से भारत में हर दिन 4657 मौतें, सामने आए डराने वाले आंकड़े

वायु प्रदूषण से भारत में हर दिन 4657 मौतें, सामने आए डराने वाले आंकड़े


Number Of Deaths Due To Air Pollution In India: भारत में वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं रहा, बल्कि यह देश के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है. एक्सपर्ट का कहना है कि प्रदूषित हवा हर साल लाखों लोगों की जिंदगी छीन रही है और इसका असर चुपचाप अर्थव्यवस्था को भी कमजोर कर रहा है. हाल ही में जिनेवा में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने इस मुद्दे पर गं भीर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि भारत में वायु प्रदूषण से हर साल करीब 17 लाख मौतें होती हैं. इसका मतलब यह हुआ कि देश में होने वाली हर पांच में से लगभग एक मौत प्रदूषित हवा से जुड़ी है

अगर इस आंकड़े को रोजाना के हिसाब से देखें, तो स्थिति और भी डरावनी हो जाती है, भारत में हर दिन औसतन 4,657 लोग जहरीली हवा के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं.

स्वास्थ्य के साथ अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर

एक्सपर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इसका सीधा असर देश की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, समय से पहले होने वाली मौतों और प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण भारत को हर साल अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. साल 2019 में ही प्रदूषण से जुड़ी समय से पहले मौतों के कारण देश को करीब 28 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ, जबकि बीमारियों से जुड़ा आर्थिक नुकसान 8 अरब डॉलर आंका गया. कुल मिलाकर यह नुकसान 36.8 अरब डॉलर, यानी भारत की जीडीपी का करीब 1.36 प्रतिशत था.

PM2.5 बना सबसे बड़ा खतरा

पिछले हफ्ते जारी वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की 100 प्रतिशत आबादी हानिकारक PM2.5 कणों के संपर्क में है. PM2.5 को सबसे खतरनाक वायु प्रदूषक माना जाता है, जो कई सोर्स से निकलता है और सीधे फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचाता है।

दिल, फेफड़े और दिमाग पर सीधा असर

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वायु प्रदूषण से स्ट्रोक, दिल की बीमारी, क्रॉनिक लंग डिजीज, फेफड़ों का कैंसर और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. सिर्फ लंबे समय तक ही नहीं, बल्कि थोड़े समय के लिए भी अत्यधिक प्रदूषण में सांस लेना अस्थमा के दौरे, सांस की तकलीफ और फेफड़ों की क्षमता घटने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. स्टडी के अनुसार, गर्भवती महिलाओं के लिए प्रदूषित हवा और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. इससे कम वजन वाले बच्चे का जन्म, समय से पहले डिलीवरी और शिशु के विकास में बाधा जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं.

हर साल बढ़ता जा रहा संकट

द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अगर भारत में वायु गुणवत्ता WHO के मानकों पर खरी उतरती, तो हर साल करीब 15 लाख अतिरिक्त मौतों को रोका जा सकता था. रिपोर्ट के अनुसार, केवल फॉसिल फ्यूल के जलने से हर साल लगभग 7.5 लाख मौतें होती हैं. इसमें कोयले से करीब 4 लाख और बायोमास जलने से लगभग 3.5 लाख मौतें शामिल हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में थोड़े समय के लिए आने से भी सांस से जुड़ी दिक्कतें, अस्थमा और फेफड़ों की काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. जबकि लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिल, दिमाग और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

ये भी पढ़ें: गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

इम्युनिटी से लेकर वेट लॉस तक…कच्चा टमाटर खाने के ये 10 फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

इम्युनिटी से लेकर वेट लॉस तक…कच्चा टमाटर खाने के ये 10 फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान



Raw Tomato Benefits: इम्युनिटी से लेकर वेट लॉस तक…कच्चा टमाटर खाने के ये 10 फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान



Source link

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है घुटनों का दर्द, क्या है इसकी वजह? जानें आयुर्वेदिक इलाज

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है घुटनों का दर्द, क्या है इसकी वजह? जानें आयुर्वेदिक इलाज


सर्दियों के मौसम में बहुत से लोगों को घुटनों के दर्द और जोड़ों की जकड़न की समस्या सताने लगती है, खासकर बुजुर्गों, आर्थराइटिस के मरीजों और उन लोगों को जो पहले से जोड़ों की परेशानी झेल रहे होते हैं. ठंड बढ़ते ही ऐसा लगता है जैसे घुटनों में जंग लग गई हो, उठना-बैठना और चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. आइए जानते हैं कि इसकी वजह और इलाज क्या है? 

क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों के दौरान घुटनों में दर्द होने की वजह सिर्फ ठंड नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले कई बदलाव जिम्मेदार होते हैं. दरअसल, सर्दियों में वायुमंडलीय दबाव यानी बैरोमेट्रिक प्रेशर कम हो जाता है. इससे जोड़ों के आसपास मौजूद टिश्यू में सूजन बढ़ सकती है, जिससे दर्द और अकड़न महसूस होती है. वहीं, ठंड के कारण ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. घुटनों में मौजूद सायनोवियल फ्लूइड, जो जोड़ों को चिकनाई देता है, ठंड में गाढ़ा हो जाता है. नतीजा यह होता है कि जोड़ों की मूवमेंट कम हो जाती है और दर्द बढ़ने लगता है. इसके अलावा सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन-डी की कमी भी हो जाती है, जो हड्डियों और जोड़ों को कमजोर बना देती है.

क्या कहता है आयुर्वेद? 

आयुर्वेद इसे वात दोष के बढ़ने से जोड़कर देखता है. आयुर्वेद के अनुसार, ठंड और सूखे मौसम में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों में रूखापन, दर्द और जकड़न आने लगती है. शरीर में मौजूद श्लेषक कफ, जो जोड़ों को प्राकृतिक रूप से चिकनाई देता है, वात के बढ़ने से सूखने लगता है. यही वजह है कि सर्दियों में घुटनों की समस्या ज्यादा महसूस होती है.

क्या है आयुर्वेदिक इलाज?

आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू उपाय इस दर्द में काफी राहत दे सकते हैं. सबसे आसान और असरदार उपाय है तेल मालिश. रोजाना तिल के तेल या महानारायण तेल से घुटनों की हल्की मालिश करने से जोड़ों में गर्माहट आती है और जकड़न कम होती है. सुबह खाली पेट भिगोए हुए मेथी दाने खाना भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि मेथी की तासीर गर्म होती है और सूजन घटाने में मदद करती है. हल्दी और अदरक का काढ़ा पीने से अंदरूनी सूजन कम होती है और जोड़ों को ताकत मिलती है.

ये तरीके भी आते हैं काम

इसके साथ-साथ सर्दियों में गुनगुना पानी पीना, धूप में रोज कुछ देर बैठना और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है. इसके अलावा, ठंडी फर्श पर बैठने, नंगे पैर चलने और ठंडे खाने से बचना चाहिए. अगर दर्द ज्यादा हो या लंबे समय तक बना रहे, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर रहता है.

ये भी पढ़ें: गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या LED बल्ब की रोशनी से स्किन को होता है खतरा, जानिए क्या है हकीकत?

क्या LED बल्ब की रोशनी से स्किन को होता है खतरा, जानिए क्या है हकीकत?


Do LED Bulbs Emit Harmful UV Radiation: आज के समय में LED यानी लाइट-एमिटिंग डायोड बल्ब लगभग हर घर में इस्तेमाल हो रहे हैं. कम बिजली खपत और लंबी उम्र की वजह से ये लाइटिंग की सबसे लोकप्रिय तकनीक बन चुके हैं. LED लाइट्स ने घरों और दफ्तरों की रोशनी का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. लेकिन एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या LED बल्ब से निकलने वाली रोशनी में हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं? वही यूवी किरणें, जो सूरज की रोशनी से निकलकर त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. चलिए आपको इसका जवाब देते हैं. 

क्या होती है यूवी रेडिएशन?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यूवी रेडिएशन तीन तरह का होता है. यूवीए सबसे लंबी तरंगों वाला होता है, जो त्वचा की उम्र तेजी से बढ़ाने और हल्के नुकसान से जुड़ा है.
यूवीबी मध्यम तरंगों का होता है, जो सनबर्न और गंभीर स्किन डैमेज की वजह बन सकता है. यूवीसी सबसे छोटी लेकिन सबसे शक्तिशाली किरणें होती हैं, जो बेहद खतरनाक मानी जाती हैं, हालांकि ये पृथ्वी के वातावरण में ही काफी हद तक एब्जर्व हो जाती हैंय

iere में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, अगर यूवी लाइट का संपर्क बहुत ज्यादा या लंबे समय तक हो, तो इससे त्वचा जल्दी बूढ़ी हो सकती है और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है. इसी वजह से लोगों को आर्टिफिशियल लाइट सोर्स, जैसे बल्बों से निकलने वाली यूवी किरणों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है.

 क्या एलईडी बल्ब यूवी किरणें छोड़ते हैं?

इसका सीधा जवाब है नहीं, या फिर बेहद कम मात्रा में. आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले एलईडी बल्ब कुल रोशनी का 1 प्रतिशत से भी कम यूवी उत्सर्जित करते हैं. एलईडी की डिजाइन और उसमें इस्तेमाल होने वाले फॉस्फर की वजह से चिप से निकलने वाली संभावित यूवी किरणें बाहर तक पहुंच ही नहीं पातीं. इनका स्तर प्राकृतिक धूप की तुलना में बहुत कम होता है.  रोजमर्रा के घरेलू एलईडी बल्ब इस तरह से बनाए ही नहीं जाते कि वे हानिकारक यूवी किरणें छोड़ें.

घर  वाली लाइटों का कोई संपर्क नहीं

हां, कुछ खास एलईडी ऐसे होते हैं जिन्हें जानबूझकर यूवी उत्सर्जन के लिए डिजाइन किया जाता है, जैसे स्टरलाइजेशन, नेल क्योरिंग या इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाले यूवी एलईडी. ये सामान्य घरेलू लाइटिंग के लिए नहीं होते. लेकिन सफेद एलईडी  बल्ब से निकलने वाली यूवी मात्रा इतनी कम होती है कि उसे त्वचा या आंखों के लिए नुकसानदायक नहीं माना जाता. सूरज की रोशनी की तुलना में एलईडी का यूवी आउटपुट न के बराबर है. आसान शब्दों में कहें तो घरों में इस्तेमाल होने वाली एलईडी लाइट से यूवी का कोई वास्तविक खतरा नहीं होता.

ये भी पढ़ें- गर्दन चटकाने की आदत कहीं स्ट्रोक का खतरा तो नहीं, फिजिशियन ने बताया- कब बढ़ जाती है यह परेशानी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp