एक्सरसाइज करते-करते दिखते हैं हार्ट अटैक के ये 5 लक्षण, गलती से भी मत कर देना इग्नोर

एक्सरसाइज करते-करते दिखते हैं हार्ट अटैक के ये 5 लक्षण, गलती से भी मत कर देना इग्नोर


आजकल एक्सरसाइज या खेल-कूद के दौरान हार्ट अटैक की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है. अक्सर लोग सोचते हैं कि हल्का सिरदर्द, थकान या सांस फूलना सामान्य है, लेकिन ये कुछ ऐसे संकेत हो सकते हैं जो आपके हृदय को खतरे में डाल सकते हैं. अगर किसी को पहले से कोई हृदय संबंधी बीमारी है या वह अत्यधिक शारीरिक परिश्रम कर रहा है, तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. सौभाग्य से, शरीर हमें इससे पहले ही कुछ संकेत देता है, जिन्हें पहचानकर गंभीर खतरे से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं 5 प्रमुख संकेत, जो एक्सरसाइज के दौरान हार्ट अटैक का इशारा कर सकते हैं.

 चक्कर या हल्का महसूस होना

अगर आप एक्सरसाइज करते समय अचानक चक्कर आने लगते हैं या सिर हल्का महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसा तब होता है जब हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और खून का प्रवाह मस्तिष्क तक कम हो जाता है. बार-बार यह समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

सांस लेने में कठिनाई

एक्सरसाइज के दौरान थोड़ी बहुत सांस फूलना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी कारण सांस लेने में असामान्य कठिनाई हो, तो यह हृदय समस्या का संकेत हो सकता है. जब दिल सही मात्रा में रक्त नहीं पंप कर पाता या धड़कन असामान्य होती है, तो फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले पाते, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है.

 असामान्य थकान या कमजोरी

अगर आप बिना ज्यादा मेहनत किए अचानक अत्यधिक थकान या शरीर में कमजोरी महसूस करते हैं, तो इसे हल्के में न लें. हार्ट अटैक से पहले कई लोग सामान्य से अधिक थकान महसूस करने लगते हैं. इसका मतलब हो सकता है कि दिल शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप नहीं कर पा रहा है.

अत्यधिक पसीना

एक्सरसाइज के दौरान पसीना आना सामान्य है, लेकिन अगर अचानक ठंडा पसीना आ जाए या शरीर पूरी तरह से भीग जाए, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है. यह तब होता है जब दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और शरीर तनाव में आता है.

 हाथ, गला या जबड़े में दर्द

हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण सीने में दर्द है, लेकिन कभी-कभी यह दर्द हाथों (विशेषकर बाएं हाथ), गले या जबड़े तक फैल जाता है. अगर एक्सरसाइज के दौरान इन हिस्सों में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो तुरंत गतिविधि बंद करें और डॉक्टर से संपर्क करें

एक्सरसाइज शरीर के लिए फायदेमंद है, लेकिन हार्ट अटैक के इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं, तो तुरंत रुकें और चिकित्सकीय मदद लें. शरीर के इन चेतावनी संकेतों को पहचानना ही गंभीर समस्या से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

इसे भी पढ़ें- शरीर में हो रही पानी की कमी, बॉडी करती है ये इशारे

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

मर्दों से कितने अलग होते हैं औरतों में किडनी स्टोन के लक्षण? जान लें हर बात


किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) आज के समय की सबसे आम बीमारियों में से एक है. पहले यह समस्या पुरुषों में ज्यादा दिखती थी, लेकिन अब रिसर्च बताती हैं कि महिलाएं, खासकर एडल्ट और यंग महिलाएं भी तेजी से इसकी चपेट में आ रही हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के अनुसार अब इसका असर पुरुष और महिला दोनों पर लगभग बराबर है.

पुरुष और महिलाओं में दर्द का फर्क

किडनी स्टोन का दर्द अचानक और बहुत तेज़ होता है, जिसे मेडिकल भाषा में renal colic कहते हैं. यह दर्द अक्सर कमर के पास से शुरू होकर नीचे पेट और ग्रोइन तक फैलता है.

पुरुषों में: यह दर्द ज़्यादातर कमर, पीठ और ग्रोइन में होता है. जब स्टोन यूरेटर में चला जाता है तो दर्द टेस्टिकल्स और स्क्रोटम तक भी महसूस हो सकता है.

महिलाओं में: महिलाओं को दर्द ज्यादातर निचले पेट और पेल्विस में होता है. कई बार यह दर्द स्त्री रोग से जुड़े दर्द जैसा लगता है.

महिलाओं में ज्यादा असर

स्टडीज के अनुसार 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में किडनी स्टोन का असर ज्यादा गंभीर होता है. उन्हें थकान, नींद की कमी और चिंता (एंग्जाइटी) की परेशानी ज्यादा होती है. वहीं, मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव की वजह से दर्द अलग तरह का महसूस होता है. इसके अलावा, महिलाओं को किडनी स्टोन से जुड़ी सर्जरी या शॉकवेव ट्रीटमेंट (lithotripsy) के बाद sepsis यानी इन्फेक्शन का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है.

हार्मोन और लाइफस्टाइल का असर

हार्मोन भी किडनी स्टोन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. प्री-मेनोपॉजल महिलाओं में estrogen हार्मोन पथरी बनने से बचाव करता है. लेकिन उम्र बढ़ने पर यह सुरक्षा कम हो जाती है. वहीं पुरुषों में ज्यादा पसीना निकलने और पेशाब में कैल्शियम व ऑक्सलेट ज्यादा होने की वजह से पथरी बार-बार बनने की संभावना रहती है.

लाइफ पर असर

किडनी स्टोन का दर्द हर किसी के लिए कठिन होता है. लेकिन महिलाओं में इसका असर उनकी जिंदगी पर ज्यादा पड़ता है. थकान, नींद की कमी और चिंता उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है.

किडनी स्टोन से बचाव के उपाय

किडनी स्टोन से बचने के लिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान दें. रोज़ाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे जरूरी है, क्योंकि यह यूरिन को साफ रखता है और स्टोन बनने वाले खनिजों को बाहर निकालता है. ज्यादा नमक, तली-भुनी और पैकेज्ड चीज़ें खाने से बचना चाहिए. प्रोटीन का सेवन संतुलित मात्रा में करें और हरी सब्जियां, फल तथा फाइबर युक्त आहार ज़्यादा लें. शुगर और सोडा ड्रिंक्स किडनी पर दबाव डालते हैं, इसलिए इन्हें कम करना फायदेमंद है. नियमित व्यायाम भी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है.

इसे भी पढ़ें-सोशल मीडिया पर इजहार करने से क्यों बचते हैं सच्चे आशिक? ये स्टडी पढ़कर समझ आ जाएगी बात

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

मर्दों से कितने अलग होते हैं औरतों में किडनी स्टोन के लक्षण? जान लें हर बात

मर्दों से कितने अलग होते हैं औरतों में किडनी स्टोन के लक्षण? जान लें हर बात


किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) आज के समय की सबसे आम बीमारियों में से एक है. पहले यह समस्या पुरुषों में ज्यादा दिखती थी, लेकिन अब रिसर्च बताती हैं कि महिलाएं, खासकर एडल्ट और यंग महिलाएं भी तेजी से इसकी चपेट में आ रही हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के अनुसार अब इसका असर पुरुष और महिला दोनों पर लगभग बराबर है.

पुरुष और महिलाओं में दर्द का फर्क

किडनी स्टोन का दर्द अचानक और बहुत तेज़ होता है, जिसे मेडिकल भाषा में renal colic कहते हैं. यह दर्द अक्सर कमर के पास से शुरू होकर नीचे पेट और ग्रोइन तक फैलता है.

पुरुषों में: यह दर्द ज़्यादातर कमर, पीठ और ग्रोइन में होता है. जब स्टोन यूरेटर में चला जाता है तो दर्द टेस्टिकल्स और स्क्रोटम तक भी महसूस हो सकता है.

महिलाओं में: महिलाओं को दर्द ज्यादातर निचले पेट और पेल्विस में होता है. कई बार यह दर्द स्त्री रोग से जुड़े दर्द जैसा लगता है.

महिलाओं में ज्यादा असर

स्टडीज के अनुसार 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में किडनी स्टोन का असर ज्यादा गंभीर होता है. उन्हें थकान, नींद की कमी और चिंता (एंग्जाइटी) की परेशानी ज्यादा होती है. वहीं, मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव की वजह से दर्द अलग तरह का महसूस होता है. इसके अलावा, महिलाओं को किडनी स्टोन से जुड़ी सर्जरी या शॉकवेव ट्रीटमेंट (lithotripsy) के बाद sepsis यानी इन्फेक्शन का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है.

हार्मोन और लाइफस्टाइल का असर

हार्मोन भी किडनी स्टोन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. प्री-मेनोपॉजल महिलाओं में estrogen हार्मोन पथरी बनने से बचाव करता है. लेकिन उम्र बढ़ने पर यह सुरक्षा कम हो जाती है. वहीं पुरुषों में ज्यादा पसीना निकलने और पेशाब में कैल्शियम व ऑक्सलेट ज्यादा होने की वजह से पथरी बार-बार बनने की संभावना रहती है.

लाइफ पर असर

किडनी स्टोन का दर्द हर किसी के लिए कठिन होता है. लेकिन महिलाओं में इसका असर उनकी जिंदगी पर ज्यादा पड़ता है. थकान, नींद की कमी और चिंता उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है.

किडनी स्टोन से बचाव के उपाय

किडनी स्टोन से बचने के लिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान दें. रोज़ाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे जरूरी है, क्योंकि यह यूरिन को साफ रखता है और स्टोन बनने वाले खनिजों को बाहर निकालता है. ज्यादा नमक, तली-भुनी और पैकेज्ड चीज़ें खाने से बचना चाहिए. प्रोटीन का सेवन संतुलित मात्रा में करें और हरी सब्जियां, फल तथा फाइबर युक्त आहार ज़्यादा लें. शुगर और सोडा ड्रिंक्स किडनी पर दबाव डालते हैं, इसलिए इन्हें कम करना फायदेमंद है. नियमित व्यायाम भी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है.

इसे भी पढ़ें-सोशल मीडिया पर इजहार करने से क्यों बचते हैं सच्चे आशिक? ये स्टडी पढ़कर समझ आ जाएगी बात

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

 

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या अल्कलाइन वॉटर पीने से नहीं होता है कैंसर? रिसर्च रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

क्या अल्कलाइन वॉटर पीने से नहीं होता है कैंसर? रिसर्च रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा


आजकल सुपरमार्केट हो या सोशल मीडिया, हर जगह अल्कलाइन वॉटर को जादुई ड्रिंक की तरह बताया जाता है. दावे बड़े-बड़े होते हैं, कहते हैं कि यह ऊर्जा बढ़ाता है, उम्र कम करता है और कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है. सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि हर कोई जल्दी और आसान इलाज चाहता है. लेकिन सवाल है कि क्या अल्कलाइन वॉटर सच में इतना असरदार है या यह सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

अल्कलाइन वॉटर असल में करता क्या है?

जब भी कोई नया हेल्थ ट्रेंड आता है, उसमें थोड़ा सच होता है और बाकी बातें बढ़ा-चढ़ाकर बताई जाती हैं. अल्कलाइन वॉटर भी ऐसा ही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पेट के एसिड को थोड़ी देर के लिए कम कर सकता है. इस वजह से कुछ लोगों को एसिडिटी या रिफ्लक्स में राहत मिलती है, लेकिन यह असर ज्यादा देर तक नहीं रहता.

यह पानी शरीर को हाइड्रेट करता है. लेकिन यही काम साधारण पानी भी करता है. अब तक कोई सबूत नहीं मिला कि अल्कलाइन वॉटर साधारण पानी से ज्यादा फायदा देता है.
कुछ रिसर्च में देखा गया है कि अल्कलाइन वॉटर पीने से पेशाब का pH बदल सकता है. लेकिन शरीर के खून का pH कभी नहीं बदलता. शरीर का ब्लड pH हमेशा 7.35 से 7.45 के बीच रहता है, चाहे हम कुछ भी खा-पी लें.

कैंसर से बचाव का दावा कैसे जुड़ा?

1930 के दशक में वैज्ञानिक ओटो वॉरबर्ग ने पाया था कि कैंसर सेल्स ऑक्सीजन की कमी और एसिडिक माहौल में पनपते हैं. इसके बाद यह भ्रम फैल गया कि अगर शरीर को अल्कलाइन बना दिया जाए तो कैंसर रुक जाएगा. लेकिन असली सच यह है कि कैंसर सेल्स खुद एसिडिक माहौल बनाते हैं. शरीर का पूरा pH एसिडिक नहीं होता. यहीं से गलतफहमी शुरू हुई. लोगों ने मान लिया कि अगर हम अल्कलाइन वॉटर पिएंगे तो शरीर का pH बदल जाएगा और कैंसर रुक जाएगा. लेकिन हक़ीक़त यह है कि ब्लड pH खाने-पीने से इतना नहीं बदलता.

pH स्केल को समझना ज़रूरी है

pH स्केल 0 से 14 तक होता है.
0 से 6 = एसिडिक
7 = न्यूट्रल (जैसे सामान्य पानी)
8 से 14 = अल्कलाइन

कैंसर और अल्कलाइन वॉटर का कनेक्शन इसी स्केल को आसान तरीके से समझाने की वजह से फैला. जबकि शरीर अपना pH बैलेंस खुद कंट्रोल करता है.

ज्यादा अल्कलाइन होना भी नुकसानदायक है

वैज्ञानिक कहते हैं कि अल्कलाइन वॉटर कैंसर रोक सकता है, ऐसा कोई सबूत नहीं है. उल्टा अगर शरीर में अल्कलाइन बहुत ज्यादा हो जाए तो “अल्कलोसिस” नाम की समस्या हो जाती है. इसमें शरीर का नैचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है. ज्यादा अल्कलाइन होने से एंज़ाइम्स सही काम नहीं करते, ऑक्सीजन टिश्यू तक नहीं पहुंचती और पोटैशियम-कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स गड़बड़ा जाते हैं. इसके कारण मांसपेशियों में खिंचाव, झुनझुनी, उल्टी, चक्कर और गंभीर स्थिति में हार्टबीट में दिक्कत या दौरे तक आ सकते हैं.

साधारण भाषा में कहें तो अल्कलाइन वॉटर कोई जादुई ड्रिंक नहीं है. यह न तो कैंसर रोक सकता है और न ही लंबी उम्र देने का कोई सबूत है. हां, अगर किसी को एसिडिटी है तो थोड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन इससे ज्यादा उम्मीद रखना ठीक नहीं है.

इसे भी पढ़ें- दादा-दादी से लेकर मम्मी-पापा तक को है डायबिटीज तो क्या करें, कौन-सा तरीका रखेगा आपको एकदम फिट?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

शरीर के इन 5 हिस्सों में रहता है दर्द तो हो जाएं अलर्ट, किडनी डैमेज होने पर दिखते हैं ये लक्षण

शरीर के इन 5 हिस्सों में रहता है दर्द तो हो जाएं अलर्ट, किडनी डैमेज होने पर दिखते हैं ये लक्षण


किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से हैं. यह रक्त को साफ करने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने का काम करती हैं. जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तो शरीर कुछ शुरुआती संकेत देता है. ये संकेत हमेशा किडनी के पास नहीं होते और अक्सर अन्य हिस्सों में दर्द या असुविधा के रूप में दिखाई देते हैं.

किडनी में समस्या होने पर शरीर के कई हिस्सों में दर्द महसूस हो सकता है, जैसे कमर, पेट, ग्रोइन, पैर और कभी-कभी छाती. ये दर्द किडनी स्टोन, इन्फेक्शन या क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण हो सकते हैं. शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके.

कमर (फ्लैंक एरिया)

कमर के निचले हिस्से, खासकर रिब्स और हिप्स के बीच वाले फ्लैंक एरिया में दर्द किडनी डैमेज का सबसे आम संकेत है.

लक्षण

  • एक या दोनों तरफ सुस्त या भारी दर्द
  • तेज़, चुभने वाला दर्द जो कभी-कभी लहरों में आता है
  • आराम या पोज़िशन बदलने से राहत नहीं

क्यों होता है

जब किडनी में सूजन, संक्रमण या ब्लॉकेज होता है, तो दर्द पीठ तक फैल सकता है. इसे अक्सर मसल पेन समझ लिया जाता है, लेकिन किडनी का दर्द स्ट्रेचिंग या मसाज से ठीक नहीं होता.

पेट

किडनी की समस्याओं के कारण पेट में भी दर्द हो सकता है.

लक्षण

  • निचले पेट में ऐंठन या भारीपन
  • अचानक तेज़ दर्द, कभी-कभी मतली के साथ
  • पेट में दबाव या फुलनेस का एहसास

क्यों होता है

किडनी संक्रमण, स्टोन या यूरिन रिटेंशन के कारण दबाव पेट में फैल सकता है.

ग्रोइन और पेल्विक एरिया

किडनी से जुड़ा दर्द ग्रोइन या पेल्विक एरिया तक भी फैल सकता है.

लक्षण

  • तेज़ या चुभने वाला दर्द
  • लगातार हल्का दर्द
  • पेशाब के दौरान असुविधा या अचानक पेशाब की इच्छा

क्यों होता है

जब स्टोन या ब्लॉकेज यूरिटर से गुजरता है, तो आसपास की नसें और टिश्यू इरिटेट हो जाते हैं, जिससे ग्रोइन में दर्द होता है.

पैर और पांव

किडनी की खराबी के कारण पैरों, टखनों और पाँव में दर्द या सूजन हो सकती है.

लक्षण

  • जांघ में ऐंठन
  • टखनों और पांव में सूजन
  • जलन या झुनझुनी का एहसास

क्यों होता है

  • किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और वेस्ट सही ढंग से नहीं निकाल पाती, जिससे पैरों में सूजन या न्यूरोपैथी हो सकती है.
  • छाती और रिब एरिया – कभी-कभी किडनी डैमेज छाती या रिब एरिया में भी दर्द दे सकता है.

किडनी डैमेज सिर्फ पीठ में नहीं बल्कि पेट, ग्रोइन, पैरों और छाती में भी दर्द का कारण बन सकता है. अगर दर्द लगातार हो या पेशाब में बदलाव, रक्त, सूजन जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती पहचान से किडनी की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- गलती से भी इन 5 रेड फ्लैग्स को मत कर देना नजरअंदाज, हार्ट वेन्स के ब्लॉक होने का देते हैं सिग्नल

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या पीरियड्स रोकने की दवा से हो सकती है मौत, डॉक्टर से जानें क्यों होता है ऐसा?

क्या पीरियड्स रोकने की दवा से हो सकती है मौत, डॉक्टर से जानें क्यों होता है ऐसा?


आजकल भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कई बार लड़कियां या महिलाएं पीरियड्स रोकने के लिए हार्मोनल दवा ले लेती हैं. छुट्टियां हों, एग्जाम का समय हो या कोई खास मौका, कई बार इन गोलियों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दवाओं का गलत या बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल जानलेवा भी हो सकता है. हाल ही में 18 साल की एक लड़की की मौत इसी वजह से हो गई.

कैसे हुई यह घटना?

उस लड़की ने पीरियड्स रोकने के लिए हार्मोनल गोली खाई थी. कुछ समय बाद उसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep Vein Thrombosis – DVT) नाम की बीमारी हो गई. इसमें शरीर की गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है. डॉक्टर ने जब जांच की तो पता चला कि यह थक्का उसकी पेट के पास तक पहुंच चुका है. हालात गंभीर थे, इसलिए डॉक्टर ने तुरंत अस्पताल में भर्ती करने को कहा. लेकिन लड़की के पिता ने मना कर दिया. रात में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई. यह घटना साफ बताती है कि हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है.

डॉक्टर की चेतावनी

सफदरजंग अस्पताल के डॉ. प्रमोद कुमार ने DVT के खतरों पर जानकारी दी. उन्होंने कहा, “लोग अक्सर हार्मोनल गोलियों को पीरियड्स रोकने का आसान तरीका समझ लेते हैं, लेकिन यह शरीर पर गहरा असर डालती हैं. हार्मोनल बदलाव से खून गाढ़ा हो सकता है और नसों में थक्का जम सकता है. अगर यह थक्का पेट या लिवर की ओर बढ़ता है तो मरीज की जान तुरंत खतरे में आ सकती है.”

DVT के साइलेंट खतरे

डॉक्टरों के मुताबिक DVT कई बार बिना लक्षण के भी हो जाता है. कुछ मामलों में पैरों में दर्द, सूजन या भारीपन महसूस होता है. लेकिन जब यह थक्का लिवर या हार्ट तक पहुंचता है तो कुछ ही मिनटों में जान ले सकता है.

क्यों न लें दवा बिना सलाह के?

हर महिला का शरीर अलग होता है और हार्मोनल लेवल भी. ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना बहुत खतरनाक हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर कभी किसी वजह से पीरियड्स रोकने की दवा लेनी पड़े, तो यह सिर्फ स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही लेना चाहिए. पीरियड्स रोकने के लिए दवा लेना कोई साधारण फैसला नहीं है. इसे हल्के में लेना सेहत और जान दोनों के लिए खतरा बन सकता है. इसलिए कभी भी खुद से दवा न लें और किसी भी समस्या में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

इसे भी पढ़ें- क्या है Hobosexuality? शहरों में क्यों बढ़ रहा इसका ट्रेंड

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp