पेट के बल सोने से हो सकती हैं ये 5 समस्याएं, आज ही छोड़ें ये गंदी आदतें

पेट के बल सोने से हो सकती हैं ये 5 समस्याएं, आज ही छोड़ें ये गंदी आदतें


Sleeping on Stomach Side Effects: अक्सर लोग थकान या आदत की वजह से पेट के बल सो जाते हैं, लेकिन यह पोजीशन शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है. शुरुआत में यह आरामदायक लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से कई तरह की शारीरिक समस्याएं जन्म ले सकती हैं. आइए जानते हैं कि पेट के बल सोने की आदत आपके स्वास्थ्य को किन-किन तरीकों से नुकसान पहुंचा सकती है. 

डॉ. संदीप गुप्ता का कहना है कि, सोने की मुद्रा हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है. आखिर पेट के बल सोने में क्या-क्या दिक्कत आ सकती है, विस्तार से जानिए. 

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रीढ़ की हड्डी पर दबाव

रीढ़ की हड्डी हमारे पूरे शरीर का सहारा होती है। पेट के बल सोने से स्पाइन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जिससे उसकी नैचुरल कर्व बिगड़ने लगती है. इसके कारण पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और लंबे समय में स्लिप डिस्क जैसी गंभीर समस्या हो सकती है.

गर्दन और कंधों में दर्द

जब हम पेट के बल सोते हैं तो सांस लेने में आसानी के लिए सिर को एक ओर मोड़ना पड़ता है. लगातार ऐसा करने से गर्दन की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ता है. यही कारण है कि सुबह उठते ही अकड़न, दर्द या सिरदर्द की समस्या हो जाती है। कंधों पर भी वजन का दबाव पड़ता है, जिससे उनमें जकड़न आ सकती है.

चेहरे पर झुर्रियां और पिंपल्स

पेट के बल सोने से चेहरा तकिए से चिपका रहता है, जिससे स्किन पर बार-बार रगड़ होती है. इससे चेहरे पर झुर्रियां जल्दी आ सकती हैं और पिंपल्स या स्किन एलर्जी की समस्या भी बढ़ सकती है. खासतौर पर जिनकी त्वचा ऑयली है, उन्हें यह आदत और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है.

पाचन तंत्र पर असर

यह पोजीशन पाचन तंत्र को भी प्रभावित करती है. पेट के बल सोने से पेट पर दबाव पड़ता है, जिससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से गैस्ट्रिक प्रॉब्लम और एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है.

गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक

गर्भावस्था के दौरान पेट के बल सोना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. यह न केवल मां के लिए बल्कि भ्रूण के लिए भी खतरे की स्थिति पैदा कर सकता है. इससे गर्भाशय पर दबाव बढ़ता है, जो शिशु के विकास को प्रभावित कर सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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देश में 2 करोड़ लोग हैं डायबिटीज का शिकार, लेकिन कई लोगों को पता ही नहीं, कहीं आप भी इनमें से त

देश में 2 करोड़ लोग हैं डायबिटीज का शिकार, लेकिन कई लोगों को पता ही नहीं, कहीं आप भी इनमें से त


भारत में लगातार डायबिटीज के बढ़ते मामलों के चलते अब भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाने लगा है. हाल ही में आई लैंसेट (The Lancet) की एक रिपोर्ट ने देश को लेकर बेहद गंभीर और डरावनी तस्वीर पेश की है. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग  2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें इस बीमारी की जानकारी ही नहीं होती, यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में एक साइलेंट किलर की तरह धीरे-धीरे फैलती है और अचानक ही  खतरनाक रूप ले लेती है, जैसे कि किडनी फेल हो जाना, हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाना.

एक और चौंकाने वाला मामला यह है कि डायबिटीज के जितने मरीज भारत में हैं, उनमें से लगभग 40 प्रतिशत को पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी के शिकार हैं. ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि भारत में जागरूकता की बेहद कमी है, और साथ ही समय पर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग की सुविधा भी आम लोगों को नहीं मिल पाती है. 

क्या है डायबिटीज और क्यों है यह खतरनाक?
डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर में शुगर का लेवल नॉर्मल से बहुत ज्यादा हो जाता है. इसका मुख्य कारण यह है कि शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का सही यूज नहीं कर पाता या फिर यह हार्मोन पर्याप्त मात्रा में बनता ही नहीं है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह आंखों, किडनी, हार्ट और पैरों पर बुरा असर डाल सकता है.

लैंसेट की रिपोर्ट में क्या बताया गया?
लैंसेट की ग्लोबल हेल्थ स्टडी के मुताबिक, भारत में लगभग 2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. इनमें से 40 प्रतिशत को अपनी बीमारी की जानकारी नहीं है. 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिनकी उम्र 40 साल या उससे ज्यादा है, लेकिन उन्हें डायबिटीज होने का अहसास तक नहीं है. शहरी इलाकों में डायबिटीज के केस ग्रामीण इलाकों से दोगुना ज्यादा हैं. इसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और तनाव है. 

बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि डायबिटीज धीरे-धीरे बढ़ती है. इसका पहला स्टेज होता  प्रीडायबिटीज है, जिसमें ब्लड शुगर नॉर्मल से थोड़ा ज्यादा होता है लेकिन इतना नहीं कि उसे डायबिटीज कहा जाए. प्रीडायबिटीज को अगर समय रहते पहचाना जाए तो इसे पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है. यानी आप सही खानपान, एक्सरसाइज और नियमित हेल्थ चेकअप से फिर से एकदम हेल्थ लाइफ जी सकते हैं. 

आप कैसे जानें कि आपको डायबिटीज है?
डायबिटीज के कुछ आम लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. जैसे बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में, ज्यादा  प्यास लगना, अचानक वजन कम हो जाना, शरीर में थकावट या कमजोरी महसूस होना, हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी,आंखों की रोशनी कमजोर होना या  जख्मों का देर से भरना. अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस हो रहा है, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच कराएं. 

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बदल रहा है पेशाब का रंग, कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं?

बदल रहा है पेशाब का रंग, कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं?


Gallbladder Stone Symptoms: पेशाब का रंग हमारे स्वास्थ्य की तरफ इशारा करता है. सामान्य स्थिति में इसका रंग हल्का पीला या पारदर्शी होता है. लेकिन अगर इसमें लगातार बदलाव दिखे, तो खतरनाक हो सकता है. कई बार पेशाब का गहरा पीला, भूरा या लाल रंग गॉल ब्लैडर में पथरी की ओर इशारा करता है. पित्त की थैली में पथरी एक गंभीर समस्या है, जो धीरे-धीरे शरीर पर असर डालती है और समय पर इलाज न मिलने पर बड़ी दिक्कतें पैदा कर सकती है.

डॉ. महेश गुप्ता का कहना है कि, पेशाब का रंग शरीर में छिपी हुई बीमारियों का सबसे पहला संकेत हो सकता है. यदि पेशाब गहरा या असामान्य रंग का हो, तो इसे अनदेखा बिल्कुल न करें और तुरंत जांच कराएं.

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पित्त की थैली में पथरी के मुख्य कारण

  • अधिक तैलीय और मसालेदार भोजन का सेवन
  • मोटापा और अनियमित जीवनशैली
  • महिलाओं में गर्भावस्था या हार्मोनल बदलाव
  • शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल

पेशाब के रंग में बदलाव और पथरी का संबंध

  • गहरा पीला या भूरा पेशाब यह लिवर या पित्त की थैली से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है
  • लाल या गुलाबी पेशाब पथरी के कारण खून आना
  • झागदार या गाढ़ा पेशाब लिवर पर दबाव या यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी परेशानी

पित्त की पथरी के अन्य लक्षण

  • पेट के दाहिनी ओर तेज या बीच-बीच में दर्द
  • अपच, गैस और सीने में जलन
  • उल्टी या मतली
  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (जॉन्डिस के संकेत)
  • बार-बार पेशाब का गाढ़ा रंग आना

पथरी से बचाव कैसे करें?

  • तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाएँ
  • अधिक पानी पिएं
  • नियमित व्यायाम कर
  • हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त भोजन लें
  • वजन को कंट्रोल में रखें

पेशाब के रंग में बदलाव को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. यह केवल डिहाइड्रेशन का संकेत नहीं, बल्कि पित्त की थैली में पथरी जैसी गंभीर बीमारी का भी लक्षण हो सकता है. समय रहते जांच और उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और बड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पैरों में बार-बार हो रहा दर्द तो हल्के में न लें, दिल के लिए खतरनाक हो सकती है लापरवाही

पैरों में बार-बार हो रहा दर्द तो हल्के में न लें, दिल के लिए खतरनाक हो सकती है लापरवाही


हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉक्टर ब्रेट कैरोल के अनुसार, अगर पैरों की नसों में ब्लॉकेज हो जाए तो यह उतना ही खतरनाक है जितना दिल की नसों में ब्लॉकेज होना. इसका मतलब है कि पैरों का दर्द दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है.

अगर आपको दिल की बीमारी का खतरा है तो पैरों में होने वाला दर्द Peripheral Artery Disease (PAD) हो सकता है. यह वही बीमारी है जिसमें धमनियों में ब्लॉकेज बन जाता है और खून का प्रवाह रुकने लगता है. PAD और दिल की बीमारी (CAD) की वजहें लगभग एक जैसी होती हैं.

अगर आपको दिल की बीमारी का खतरा है तो पैरों में होने वाला दर्द Peripheral Artery Disease (PAD) हो सकता है. यह वही बीमारी है जिसमें धमनियों में ब्लॉकेज बन जाता है और खून का प्रवाह रुकने लगता है. PAD और दिल की बीमारी (CAD) की वजहें लगभग एक जैसी होती हैं.

PAD तब होता है जब पैरों में खून ले जाने वाली धमनियों में कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल की परत जम जाती है. इस परत को प्लाक कहते हैं. धीरे-धीरे यह प्लाक नसों को ब्लॉक कर देता है और खून का सही तरीके से प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है.

PAD तब होता है जब पैरों में खून ले जाने वाली धमनियों में कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल की परत जम जाती है. इस परत को प्लाक कहते हैं. धीरे-धीरे यह प्लाक नसों को ब्लॉक कर देता है और खून का सही तरीके से प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है.

PAD ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलता है. आंकड़ों के अनुसार, 50 साल से ऊपर के करीब 20 में 1 व्यक्ति और 70 साल से ऊपर के 5 में 1 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित होता है. मतलब उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ जाता है.

PAD ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलता है. आंकड़ों के अनुसार, 50 साल से ऊपर के करीब 20 में 1 व्यक्ति और 70 साल से ऊपर के 5 में 1 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित होता है. मतलब उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ जाता है.

PAD का सबसे बड़ा लक्षण है चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होना और आराम करने पर दर्द कम हो जाना. इसे क्लॉडिकेशन कहते हैं. इसके अलावा पैरों के बाल झड़ जाना, पैरों में ऐसे जख्म होना जो जल्दी न भरें और पैरों में भारीपन महसूस होना भी इसके लक्षण हैं.

PAD का सबसे बड़ा लक्षण है चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होना और आराम करने पर दर्द कम हो जाना. इसे क्लॉडिकेशन कहते हैं. इसके अलावा पैरों के बाल झड़ जाना, पैरों में ऐसे जख्म होना जो जल्दी न भरें और पैरों में भारीपन महसूस होना भी इसके लक्षण हैं.

PAD उन्हीं कारणों से होता है जिनसे दिल की बीमारी होती है. इनमें डायबिटीज, ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और स्मोकिंग शामिल हैं. इनमें से स्मोकिंग सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है क्योंकि यह नसों को सीधा नुकसान पहुंचाता है.

PAD उन्हीं कारणों से होता है जिनसे दिल की बीमारी होती है. इनमें डायबिटीज, ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और स्मोकिंग शामिल हैं. इनमें से स्मोकिंग सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है क्योंकि यह नसों को सीधा नुकसान पहुंचाता है.

अगर पैरों में बार-बार दर्द हो रहा है तो डॉक्टर ankle-brachial index नाम का टेस्ट करके PAD की पहचान कर सकते हैं. वहीं, अगर आप खुद सावधानी रखना चाहते हैं तो पैदल चलना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद है. इससे पैरों में खून का प्रवाह बेहतर होता है और स्थिति में सुधार आता है.

अगर पैरों में बार-बार दर्द हो रहा है तो डॉक्टर ankle-brachial index नाम का टेस्ट करके PAD की पहचान कर सकते हैं. वहीं, अगर आप खुद सावधानी रखना चाहते हैं तो पैदल चलना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद है. इससे पैरों में खून का प्रवाह बेहतर होता है और स्थिति में सुधार आता है.

Published at : 22 Aug 2025 02:22 PM (IST)


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